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NCERT Class 12 Home Science Chapter 9 फ़ैशन डिज़ाइन और व्यापार
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फ़ैशन डिज़ाइन और व्यापार
Chapter: 9
| Part – 2: मानव पारिस्थितिकी एवं परिवार विज्ञान |
| TEXTUAL SOLUTIONS |
पुनरवलोकन प्रश्न:
1. फैशन के प्रमुख विकास की रूपरेखा दीजिए।
उत्तर: फैशन के प्रमुख विकास की रूपरेखा फैशन के विकास के प्रमुख चरण इस प्रकार हैं:
(i) फ्रांस का प्रभाव: 18वीं शताब्दी की शुरुआत में अंतर्राष्ट्रीय फैशन में फ्रांस का प्रभुत्व शुरू हुआ और सम्राट लुईस चौदहवें के कोर्ट के कारण पेरिस यूरोप की फैशन राजधानी बन गया। उस समय कपड़े हाथ से बनाए जाते थे और इस कला को ‘कूअटुर’ (Couture) कहा जाता था।
(ii) औद्योगिक क्रांति: वस्त्र निर्माण में औद्योगिक क्रांति से काफी बदलाव आए। सूत कातने वाले यंत्र और मशीन करघों के आविष्कार से अमेरिका के वस्त्र निर्माण उद्योग का विकास हुआ, जिससे मध्यम वर्ग को अच्छे कपड़े खरीदने का अवसर मिला।
(iii) सिलाई मशीन का आविष्कार: 1859 में इसाक सिंगर द्वारा पैरों से चलने वाली सिलाई मशीन के आविष्कार ने फैशन का लोकतंत्रीकरण कर दिया और इसे सभी के लिए सुलभ बना दिया।
(iv) रेडी-टू-वियर की शुरुआत: 1849 में लेवी स्ट्रॉस ने मज़दूरों के लिए टेंट के कपड़ों से टिकाऊ पैंटें बनाईं (जिसे डेनिम कहा गया)। 1880 के दशक में महिलाओं के लिए स्कर्ट और ब्लाउज़ का चलन शुरू हुआ, जो रेडी-टू-वियर (पहनने को तैयार कपड़े) की दिशा में एक बड़ा कदम था।
2. फैशन चक्र के विभिन्न स्तरों की पहचान कीजिए और उनको समझाइए।
उत्तर: फैशन चक्र के विभिन्न स्तर फैशन चक्र वह समय या जीवनकाल है जिसमें कोई फैशन अस्तित्व में रहता है।
इसके पाँच स्तर होते हैं:
(i) शैली की प्रस्तुति: डिज़ाइनर अपने शोध और रचनात्मक विचारों से परिधान का नया रूप (रंग, आकार, वस्त्र) जनता के सामने प्रस्तुत करते हैं।
(ii) लोकप्रियता में वृद्धि: जब नया फैशन कई लोगों द्वारा खरीदा और पहना जाता है, तो इसकी लोकप्रियता बढ़ने लगती है।
(iii) लोकप्रियता की पराकाष्ठा: जब कोई फैशन लोकप्रियता के चरम पर होता है, तो उसकी माँग इतनी बढ़ जाती है कि निर्माता उसकी नकल करने लगते हैं या विभिन्न मूल्य स्तरों पर उसका उत्पादन करते हैं।
(iv) लोकप्रियता में कमी होना: भारी संख्या में उत्पादन के कारण फैशन-प्रिय लोग उस शैली से ऊबने लगते हैं और कुछ नया ढूँढने लगते हैं। तब दुकानों पर इसे कम कीमत पर बेचा जाता है।
(v) शैली का परित्याग अथवा अप्रचलन: इस अंतिम चरण में उपभोक्ता पूरी तरह से नए फैशन की ओर मुड़ जाते हैं, और एक नया फैशन चक्र शुरू हो जाता है।
3. फैशन व्यापार से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: फैशन व्यापार से आशय फैशन व्यापार का अर्थ है बिक्री को बढ़ावा देने के लिए सही समय पर, सही स्थान पर और सही मूल्य पर आवश्यक योजना बनाना। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें उपभोक्ता की ज़रूरतों और माँगों को ध्यान में रखकर उत्पाद की योजना, उत्पादन, संवर्धन (promotion) और वितरण किया जाता है। इसमें खुदरा दुकानों के लिए कपड़े खरीदना, स्टोर में उन्हें सजाना, और डिज़ाइनर के उत्पाद को लक्षित बाज़ार तक पहुँचाना शामिल है।
4. व्यापार के विभिन्न स्तरों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: फैशन उद्योग में व्यापार मुख्य रूप से तीन स्तरों पर होता है:
(i) खुदरा संगठन में व्यापारिक गतिविधियाँ: यह वह स्तर है जो डिज़ाइनर के कपड़ों को खुदरा दुकानों तक और फिर ग्राहकों के हाथों तक पहुँचाता है। इसमें योजना बनाई जाती है ताकि ग्राहकों को सही मूल्य पर कपड़े मिलें और व्यापार में लाभ सुनिश्चित हो सके।
(ii) क्रय एजेंसी व्यापार में सामान: ये एजेंसियां ग्राहकों के लिए सामान खरीदने में परामर्श और मदद देती हैं। इनका काम विक्रेताओं की पहचान करना, मूल्य का मोलभाव करना और माल के लदान (shipment) से पहले उसकी गुणवत्ता की जाँच करना होता है।
(iii) निर्यात उद्यम में व्यापारिक गतिविधियाँ: इसमें क्रय एजेंट और उत्पादक व्यापारी आते हैं। क्रय एजेंट खरीदार और उत्पादक के बीच मध्यस्थ का काम करते हैं, जबकि उत्पादक व्यापारी यह सुनिश्चित करते हैं कि उत्पादन समय पर और खरीदार की माँगों के अनुसार हो।
5. ‘उपभोक्ता की माँग की व्याख्या करने के लिए लक्ष्य बाज़ार और ग्राहक प्रोत्साहन को समझना चाहिए’ विस्तार से बताइए।
उत्तर: (i) लक्ष्य बाज़ार: यह उपभोक्ताओं की वह श्रेणी है जिसे व्यापारी अपने उत्पाद बेचने के लिए लक्षित करता है। लक्ष्य बाज़ार को समझने से मार्केटिंग टीम को उन ग्राहकों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है, जिनके उत्पाद खरीदने की संभावना सबसे अधिक होती है। बाज़ार का विभाजन जनसांख्यिकीय (उम्र, आय, जेंडर), भौगोलिक, मनोवृत्तिपरक (जीवन शैली) और व्यवहारगत आधार पर किया जा सकता है।
(ii) ग्राहक प्रोत्साहन: एक व्यापारी को यह समझना होता है कि ग्राहक की ज़रूरतें क्या हैं और उन्हें खरीदारी के लिए क्या प्रेरित करता है। इस समझ से ही व्यापारी ‘सही व्यापार, सही स्थान, सही समय, सही मात्रा, सही मूल्य और सही संवर्धन’ का संतुलन बना पाता है।
6. उन ज्ञान और कौशलों के नाम बताइए जो एक फैशन डिज़ाइनर और व्यापारी के पास अवश्य होने चाहिए।
उत्तर: इस क्षेत्र में सफलता के लिए मुख्य रूप से तीन कौशल आवश्यक हैं:
(i) पूर्वानुमान योग्यता: फैशन की पिछली और वर्तमान प्रवृत्तियों (trends) को समझना और भविष्य के फैशन के बारे में पूर्वानुमान लगाने की क्षमता होना।
(ii) विश्लेषणात्मक योग्यता: पूरी अर्थव्यवस्था, उपभोक्ता के बजट और अपनी कंपनी की स्थिति का विश्लेषण कर पाने की क्षमता ताकि लाभ सुनिश्चित किया जा सके।
(iii) संप्रेषण (Communication) योग्यता: निर्माताओं से मूल्य तय करने, विज्ञापन बनाने, और जनता को फैशन बेचने के लिए उत्कृष्ट बातचीत कौशल का होना।
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