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NCERT Class 12 Home Science Chapter 8 वस्त्र एवं परिधान के लिए डिज़ाइन

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NCERT Class 12 Home Science Chapter 8 वस्त्र एवं परिधान के लिए डिज़ाइन

Also, you can read the NCERT book online in these sections Solutions by Expert Teachers as per Central Board of Secondary Education (CBSE) Book guidelines. CBSE Class 12 Home Science Textbook Solutions in Hindi Medium are part of All Subject Solutions. Here we have given NCERT Solutions For Class 12 Home Science in Hindi, CBSE Solutions For Class 12 Home Science Hindi Medium for All Chapters, You can practice these here.

Chapter: 8

Part – 2: मानव पारिस्थितिकी एवं परिवार विज्ञान
TEXTUAL SOLUTIONS

पुनरवलोकन प्रश्न:

1. आप ‘डिजाइन’ शब्द से क्या समझते हैं?

उत्तर: डिजाइन उत्पादों की कल्पना करने, योजना बनाने और कार्यान्वित करने की मानवीय सामर्थ्य है, जो मानव जाति को किसी वैयक्तिक अथवा सामूहिक उद्देश्य के निष्पादन में सहायता करती है। व्यापक अर्थ में, इसे रूप में सामंजस्य के लिए बताया जा सकता है। किसी चाही गई वस्तु की रचना के लिए डिजाइन एक योजना के अनुसार व्यवस्था होती है। एक अच्छा डिजाइन केवल सजावट नहीं है; कलात्मक रूप से मोहक होने के साथ-साथ यह उपयोग के लिए कार्यात्मक और उपयुक्त भी होना चाहिए।

2. वे कौन से कारक हैं जो वस्त्र के ताने-बाने को उसके निर्माण के समय प्रभावित करते हैं?

उत्तर: वस्त्र निर्माण के समय उसकी बुनावट को निम्नलिखित कारक प्रभावित करते हैं:

(i) रेशा: रेशे का प्रकार (प्राकृतिक या मानव-निर्मित), इसकी लंबाई, उत्कृष्टता और इसके पृष्ठीय गुण।

(ii) धागे का संसाधन और प्रकार: धागे के संसाधन की विधि, उस समय समावेशित घुमाव, धागे की उत्कृष्टता और धागे का प्रकार (जैसे- सरल, जटिल, नवीनता अथवा स्पर्श के विशिष्ट अनुभव युक्त)।

(iii) वस्त्र निर्माण तकनीक: बुनावट का प्रकार और उसकी सघनता, नमदा बनाना, गूँथना, लेस या जाली बनाना आदि।

(iv) वस्त्र सज्जा: वस्त्र को कड़ा करना (माँड़ लगाना, आकार मापन या गोंद लगाना), इस्तरी करना, कैलेंडरिंग, टेंटरिंग, नैपिंग और परिष्करण करना।

(v) पृष्ठीय सजावट: गुच्छे से सजाना, मखमली मुद्रण, कसीदाकारी और सिलाई डिजाइन के प्रभाव।

3. वस्त्र निर्माण के विभिन्न चरणों में रंग का अनुप्रयोग किस प्रकार से वस्त्र में डिजाइन को प्रभावित करता है?

उत्तर: (i) रेशे के स्तर पर: यह बहुत महँगी प्रक्रिया है और आमतौर पर कुछ मानव-निर्मित रेशों या उन धागों के लिए उपयोग की जाती है जहाँ बहुरंगी रेशों की आवश्यकता होती है।

(ii) धागे के स्तर पर: रंगे हुए धागों से बुनी हुई धारीदार पट्टियाँ, चौकदार कपड़ा और पट्टू जैसे सामान्य डिजाइन बनाए जाते हैं। जरी और जैकार्ड पैटर्न भी रंगे हुए धागों को बुनकर तैयार किए जाते हैं, तथा धागों की बँधाई-रँगाई से सुंदर इकत पैटर्न प्राप्त होते हैं।

(iii) वस्त्र के स्तर पर: यह सबसे अधिक प्रचलित विधि है। इसके द्वारा एक समान एकल रंग वाले वस्त्र प्राप्त किए जाते हैं या बँधाई तथा बाटिक प्रक्रिया द्वारा डिजाइन वाली सामग्री तैयार की जाती है। इसके अलावा वस्त्र पर चित्रकारी, छपाई, कसीदाकारी, और पैच अथवा गोटा-पट्टा द्वारा भी किसी भी आकार या रूप में रंगों का अनुप्रयोग किया जा सकता है।

4. विभिन्न प्रकार की रेखाएँ तथा आकृतियाँ कौन-सी होती हैं? वे किस प्रकार विभिन्न प्रभावों तथा मनोदशाओं का सृजन करती हैं?

उत्तर: रेखाओं के प्रकार और उनके प्रभाव:

(i) ऊर्ध्वाधर रेखाएँ (सीधी खड़ी रेखाएँ): ये ऊपर और नीचे गति पर बल देती हैं, ऊँचाई का महत्व बताती हैं तथा तीव्र, सम्मानजनक और सुरक्षित प्रभाव देती हैं।

(ii) क्षैतिज रेखाएँ (पड़ी रेखाएँ): ये एक ओर से दूसरी ओर गति पर बल देती हैं, चौड़ाई का भ्रम पैदा करती हैं तथा स्थायी एवं सौम्य प्रभाव देती हैं।

(iii) तिरछी अथवा विकर्ण रेखाएँ: ये कोण के अनुसार चौड़ाई और ऊँचाई को बढ़ाती या घटाती हैं तथा सक्रिय, आश्चर्यजनक या नाटकीय प्रभाव सृजित करती हैं।

(iv) वक्र रेखाएँ (घुमावदार): लंबी और लहराती हुई वक्र रेखाएँ अत्यंत मनोहर और लयबद्ध दिखाई देती हैं। बड़े गोल वक्र एक नाटकीय स्पर्श प्रदान करते हैं और आमाप को बढ़ाकर प्रस्तुत करते हैं, जबकि छोटे और हल्के वक्र युवा एवं प्रफुल्ल होते हैं।

आकृतियों के प्रकार:

(i) प्राकृतिक आकृतियाँ: प्रकृति या मानव-निर्मित वस्तुओं की सामान्य आकृतियों की नकल होती हैं।

(ii) फैशनेबल शैली की आकृतियाँ: ये सरलीकृत या संशोधित प्राकृतिक आकृतियाँ होती हैं, जिनका कुछ भाग विकृत या अतिशयोक्तिपूर्ण हो सकता है।

(iii) ज्यामितीय आकृतियाँ: ये गणितीय रूप से (पैमाना, कंपास आदि उपकरणों का उपयोग कर) बनाई जाती हैं।

(iv) अमूर्त आकृतियाँ: ये मुक्त-रूप होती हैं, किसी विशिष्ट वस्तु जैसी नहीं दिखतीं, बल्कि वैयक्तिक संबंधों के कारण विभिन्न लोगों के लिए इनके अर्थ अलग-अलग हो सकते हैं।

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