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NCERT Class 12 Home Science Chapter 6 प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा

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NCERT Class 12 Home Science Chapter 6 प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा

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Chapter: 6

Part – 1: मानव परिस्थितिकी एवं परिवार विज्ञान
TEXTUAL SOLUTIONS

पुनरवलोकन प्रश्न

1. प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) जन्म से लेकर आठ वर्ष तक की आयु के बच्चों की देखभाल और उनके समग्र विकास की एक व्यवस्था है। इसके मूल उद्देश्यों में बच्चे की क्षमता को पहचानकर उसका समग्र विकास करना, उसे विद्यालय के लिए तैयार करना, तथा महिलाओं और बच्चों के लिए सहायक सेवाएँ प्रदान करना शामिल है। यह एक ऐसी गतिविधि है जो बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता और समाज की सहायता करके पूरे परिवार को लाभान्वित करती है।

2. देखभाल की वे कौन-सी विभिन्न व्यवस्थाएँ हैं जिनकी आवश्यकता छोटे बच्चों को हो सकती है?

उत्तर: छोटे बच्चों की देखभाल के लिए कई प्रकार की व्यवस्थाओं की आवश्यकता हो सकती है:

(i) पारिवारिक देखभाल: पारंपरिक रूप से परिवार की अन्य महिलाओं (जैसे दादी, नानी या संयुक्त परिवार की महिलाएं) द्वारा घर पर की जाने वाली देखभाल।

(ii) अनौपचारिक शिशु केंद्र: आस-पड़ोस की किसी महिला द्वारा अपने घर में व्यवसाय के रूप में चलाया जाने वाला शिशु केंद्र या क्रेच।

(iii) संस्थागत व्यवस्था (क्रेच या डे केयर): माता-पिता या मुख्य देखभालकर्ता की अनुपस्थिति में बच्चों की देखभाल के लिए विशेष रूप से बनाए गए संस्थागत शिशु केंद्र या दिवस देखभाल केंद्र (डे केयर सेंटर)।

3. किन कारणों से छोटे बच्चों को औपचारिक स्कूली शिक्षा से पहले विशेष अनौपचारिक कार्यक्रम की आवश्यकता होती है?

उत्तर: लगभग 3 वर्ष की आयु में बच्चों की जिज्ञासा बहुत प्रबल हो जाती है और वे खेल-कूद, चीजों  उलटने-पलटने तथा परिवेश के साथ सक्रिय भागीदारी से सीखते हैं। यदि इतने छोटे बच्चों को एक जगह बैठाकर बड़े बच्चों की तरह औपचारिक शिक्षा के लिए बाध्य किया जाए, तो उनकी जिज्ञासा खत्म हो जाती है और वे बेचैन व असुरक्षित महसूस करते हैं। इसलिए उन्हें एक ऐसे विशेष अनौपचारिक और बाल-केंद्रित कार्यक्रम (विद्यालय पूर्व शिक्षा) की आवश्यकता होती है, जो उन्हें खेल-खेल में सीखने का आनंददायक और सुरक्षित परिवेश दे सके और आगे की औपचारिक शिक्षा के लिए तैयार कर सके।

4. बाल-केंद्रित उपागम से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: बाल-केंद्रित उपागम से अभिप्राय एक ऐसी प्रणाली से है जिसमें सीखने की प्रक्रिया का केंद्र बच्चा और उसकी आवश्यकताएं होती हैं। इस उपागम में खेल-खेल में सीखने के तरीके को अपनाया जाता है, जो पढ़ाई को रुचिकर बनाता है। इसके अंतर्गत बच्चों पर उनकी क्षमता से अधिक बोझ नहीं डाला जाता, बल्कि उनके विकास और विशिष्ट सोच-विशेषताओं को ध्यान में रखकर उपयुक्त और लचीले तरीके अपनाए जाते हैं।

5. शिशु देखभाल केंद्र क्या होता है और यह केंद्र कौन-सी सेवाएँ प्रदान करता है?

उत्तर: शिशु केंद्र (क्रेच) एक संस्थागत व्यवस्था है जिसे विशेष रूप से उन शिशुओं और छोटे बच्चों की देखभाल के लिए बनाया गया है जिनके माता-पिता या घर में देखभाल करने वाले काम पर गए होते हैं। यह केंद्र बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है और उनके खाने-पीने व शौचालय की आदतों का ध्यान रखता है। इसके अलावा, यह प्रशिक्षित शिक्षकों की मदद से बच्चों के भाषा विकास, और उनकी सामाजिक तथा भावनात्मक ज़रूरतों को समझने और उन्हें पूरा करने से संबंधित सेवाएँ प्रदान करता है।

6. उन कौशलों को सूचीबद्ध कीजिए जो ई. सी. सी. ई. (E.C.C.E.) कार्यकर्ता में होने चाहिए।

उत्तर: एक ई.सी.सी.ई. कार्यकर्ता में निम्नलिखित कौशल होने चाहिए:

(i) बच्चों और उनके विकास में रुचि तथा उनकी आवश्यकताओं/क्षमताओं की समझ।

(ii) बच्चों के साथ बातचीत (अंत:क्रिया) करने की क्षमता और प्रेरणा।

(iii) बच्चों की शंकाओं और प्रश्नों के उत्तर देने की इच्छा।

(iv) कहानी सुनाने, नृत्य, संगीत, और आवाज़ बदलने जैसे विविध कला कौशल।

(v) खोज-बीन करने, प्रकृति संबंधी और रचनात्मक गतिविधियों के लिए उत्साह।

(vi) लंबे समय तक शारीरिक गतिविधियों में सक्रिय रहने की क्षमता।

(vii) समुदाय और संस्कृति की जानकारी।

(viii) केंद्र चलाने के लिए रिकॉर्ड रखने और लेखाकरण जैसे प्रशासनिक तथा प्रबंधकीय कौशल।

7. हम ई. सी. सी. ई. में जीविका के लिए किस प्रकार तैयारी कर सकते हैं? वर्णन कीजिए।

उत्तर: ई.सी.सी.ई. के क्षेत्र में जीविका (करियर) बनाने के लिए निम्नलिखित तरीके से तैयारी की जा सकती है:

(i) शैक्षिक योग्यता प्राप्त करना: इसके लिए बाल विकास, मानव विकास, या बाल मनोविज्ञान जैसे विषयों में स्नातक (ग्रेजुएशन) की डिग्री ली जा सकती है। इसके अलावा, शिक्षा पूरी करने के बाद 1 वर्ष का डिप्लोमा या नर्सरी अध्यापक प्रशिक्षण (नर्सरी टीचर ट्रेनिंग) का कोर्स भी किया जा सकता है।

(ii) उच्च शिक्षा: यदि आप इस क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं, तो आप प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा में स्नातकोत्तर (मास्टर्स) या शोध (पीएच.डी.) भी कर सकते हैं।

(iii) व्यावहारिक कौशल विकसित करना: बच्चों के प्रति उदारता, उनसे बातचीत करने का रुझान और विभिन्न कलाओं (जैसे कहानी सुनाना, खेल खिलाना) का अभ्यास करना बहुत आवश्यक है।

(iv) उद्यमिता (Entrepreneurship): उचित प्रशिक्षण, प्रशासनिक कौशल और प्रबंधकीय ज्ञान प्राप्त करने के बाद, एक उद्यमी के रूप में आप अपना खुद का बाल-देखभाल केंद्र (डे-केयर या क्रेच) भी शुरू कर सकते हैं।

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