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NCERT Class 12 Home Science Chapter 4 खाद्य प्रसंस्करण और प्रौद्योगिकी
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खाद्य प्रसंस्करण और प्रौद्योगिकी
Chapter: 4
| Part – 1: मानव परिस्थितिकी एवं परिवार विज्ञान |
| TEXTUAL SOLUTIONS |
पुनरावलोकन प्रश्न
1. निम्नलिखित पदों को समझाइए —
(a) खाद्य विज्ञान
उत्तर: खाद्य विज्ञान: यह एक विशिष्ट क्षेत्र है जिसमें आधारभूत विज्ञान विषयों जैसे रसायन और भौतिकी, पाककलाओं, कृषि विज्ञान और सूक्ष्मजीव विज्ञान के अनुप्रयोग शामिल होते हैं।
(b) खाद्य संसाधन
उत्तर: खाद्य संसाधन: यह ऐसी विधियों और तकनीकों का समूह है, जो कच्ची सामग्रियों को तैयार या आधे तैयार उत्पादों में बदल देता है ताकि उनका सुरक्षा काल बढ़ सके।
(c) खाद्य प्रौद्योगिकी
उत्तर: खाद्य प्रौद्योगिकी: यह एक ऐसा विज्ञान है जिसमें खाद्य पदार्थों के उत्पादन के लिए वैज्ञानिक अनुप्रयोगों के ज्ञान और कानूनी नियमों का व्यावहारिक उपयोग किया जाता है।
(d) खाद्य विनिर्माण
उत्तर: खाद्य विनिर्माण: इसमें बढ़ती जनसंख्या की विविध मांगों को पूरा करने के लिए खाद्य प्रौद्योगिकी के सिद्धांतों का उपयोग करते हुए बड़े पैमाने पर खाद्य उत्पादों (जैसे बिस्कुट, ब्रेड आदि) को तैयार किया जाता है।
(e) खाद्य का खराब होना
उत्तर: खाद्य का खराब होना: खाद्य पदार्थों का भौतिक, रासायनिक और जैविक रूपों से खराब होना, जिसमें उसका नष्ट होना, दुर्गंध आना, बनावट नष्ट होना, रंग बिगड़ना, पोषण मान में कमी आना और उपभोग के लिए अनुपयुक्त/असुरक्षित होना सम्मिलित है।
2. खाद्य प्रौद्योगिकी के महत्व को संक्षेप में समझाइए। इसने आधुनिक महिलाओं विशेषकर कार्यरत महिलाओं के जीवन पर किस प्रकार प्रभाव डाला है?
उत्तर: खाद्य प्रौद्योगिकी सुरक्षित, पोषक और सुविधाजनक खाद्य पदार्थों के चयन, भंडारण, संरक्षण, संसाधन और पैक करने के कौशल को विकसित करती है। बीसवीं सदी में कामकाजी महिलाओं की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए खाद्य प्रौद्योगिकी ने तत्काल मिलाकर बनने वाले (इन्सटेंट) सूप मिश्रण, पकाने के लिए तैयार पदार्थ और तैयार भोजन जैसी प्रौद्योगिकियां विकसित कीं, जिससे उनके लिए खाना पकाना और उसका प्रबंधन करना बेहद आसान और सुविधाजनक हो गया।
3. खाद्य परिरक्षण की उन पुरानी विधियों की उदाहरण सहित सूची बनाइए जो घरों में उपयोग में लाई जाती हैं और वर्तमान में उनकी क्या व्यवहार्यता है।
उत्तर: खाद्य परिरक्षण की पुरानी विधियाँ:
(i) धूप में सुखाना – जैसे पापड़, सूखी मिर्च।
(ii) किण्वन – जैसे दही।
(iii) नमक लगाना/अचार बनाना – जैसे आम का अचार।
(iv) सेंकना/भूनना – जैसे बिस्कुट, चना।
(v) धूमन – जैसे सूखी मछली।
(vi) मसालों का उपयोग – जैसे हल्दी, सरसों।
वर्तमान में व्यवहार्यता:
(i) ये विधियाँ आज भी घरों में व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं।
(ii) ये सरल, सस्ती और प्रभावी होने के कारण आज भी प्रचलित हैं।
4. खाद्य परिरक्षण की वर्तमान स्थिति तक इसके विकास का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर: 1810 में निकोलस ऐप्पर्ट द्वारा खाद्य पदार्थों को डिब्बों में बंद करने की प्रक्रिया का विकास एक निर्णायक घटना थी। इसके बाद 1864 में लुई पाश्चर ने अंगूरी शराब और दूध को खराब होने से बचाने के लिए रोग उत्पन्न करने वाले जीवों को नष्ट करने की ‘पाश्चुरीकरण’ प्रक्रिया विकसित की। प्रारंभ में खाद्य प्रौद्योगिकी का उपयोग सेना की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किया गया, फिर 20वीं सदी में विश्व युद्धों, अंतरिक्ष खोजों और कामकाजी महिलाओं की बढ़ती मांग ने इसके विकास में अहम योगदान दिया। इक्कीसवीं सदी में अब खाद्य प्रौद्योगिकीविद उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप सुरक्षित और ताज़े खाद्य पदार्थों का उत्पादन कर रहे हैं।
5. एक भावी खाद्य प्रौद्योगिकीविद के रूप में, उद्योग द्वारा आपसे किस ज्ञान और कौशलों की अपेक्षा की जाती है?
उत्तर: उद्योग द्वारा आपसे खाद्य विज्ञान, खाद्य रसायन, सूक्ष्मजीव विज्ञान, खाद्य संसाधन, सुरक्षा व गुणवत्ता आश्वासन, और बेहतर निर्माण पद्धतियों के ज्ञान की अपेक्षा की जाती है। इसके साथ ही, कच्चे व पके हुए खाद्य पदार्थों के संगठन का विश्लेषण करना, संवेदी मूल्यांकन, खाद्य पदार्थों को पैक करना, उत्पादन रूपरेखा डिज़ाइन करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की योग्यता और रेसिपी डिज़ाइन व उसका अनुकूलन करने का कौशल होना भी आवश्यक है।
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