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NCERT Class 12 Home Science Chapter 3 जनपोषण तथा स्वास्थ्य

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NCERT Class 12 Home Science Chapter 3 जनपोषण तथा स्वास्थ्य

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Chapter: 3

Part – 1: मानव परिस्थितिकी एवं परिवार विज्ञान
TEXTUAL SOLUTIONS

1. निम्नलिखित शब्दों को समझाइए — 

(i) बौनापन

उत्तर: (i) बौनापन: जब शरीर की ऊँचाई आयु के अनुरूप उपयुक्त ऊँचाई से कम होती है, तो उसे बौनापन (छोटा कद) कहा जाता है।

(ii) जन्म के समय कम भार वाला शिशु,

उत्तर: जन्म के समय कम भार वाला शिशु: ऐसे शिशु जिनका जन्म के समय भार 2500 ग्राम या 2.5 किलोग्राम से कम होता है, उन्हें कम जन्म-भार वाले बच्चे कहा जाता है।

(iii) आई.डी.डी. (IDD)

उत्तर: आई.डी.डी. (IDD): इसका पूर्ण रूप ‘आयोडीन हीनता विकार’ है, जो आहार में आयोडीन की अपर्याप्त मात्रा ग्रहण करने के कारण होता है। यह विकार भ्रूण से लेकर प्रौढ़ावस्था तक मानव स्वास्थ्य, मानसिक और शारीरिक वृद्धि को बुरी तरह प्रभावित करता है।

(iv) क्षयकारी

उत्तर: क्षयकारी: जब किसी व्यक्ति का भार उसकी ऊँचाई की तुलना में पर्याप्त नहीं होता है, तो उस स्थिति को ‘क्षयकारी’ कहते हैं।

(v) कुपोषण का दोहरा भार

उत्तर: कुपोषण का दोहरा भार: यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ समाज में अल्पपोषण (कमियों से होने वाले रोग) और अतिपोषण (मोटापा आदि) दोनों की समस्याएँ एक साथ पाई जाती हैं, जैसा कि वर्तमान में भारत अनुभव कर रहा है।

(vi) मरास्मस

उत्तर: मरास्मस और क्वाशियोरकोर: मरास्मस एक गंभीर रोग है जो मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करता है। 

(vii) क्वाशिओरकोर

उत्तर: क्वाशियोरकोर प्रोटीन की कमी से होने वाला एक कुपोषण रोग है। इस रोग में शरीर में सूजन, पेट का फूलना, मांसपेशियों का कमजोर होना तथा बच्चों की शारीरिक वृद्धि रुक जाती है। यह रोग मुख्यतः छोटे बच्चों में पाया जाता है।

(viii) समुदाय

उत्तर: समुदाय लोगों का एक ऐसा विशिष्ट समूह होता है, जिसमें कुछ सामान्य विशेषताएँ पाई जाती हैं, जैसे – एक जैसी भाषा, एक ही सरकार (एक राष्ट्र, राज्य या शहर) अथवा एक जैसी स्वास्थ्य समस्याएँ।

2. जन पोषण समस्याओं से जूझने के लिए उपयोग में लाई जा सकने वाली विभिन्न कार्य नीतियों की विवेचना कीजिए।

उत्तर: जन पोषण समस्याओं से निपटने के लिए मोटे तौर पर दो प्रकार की कार्य नीतियों का उपयोग किया जाता है:

(i) आहार अथवा भोजन-आधारित कार्यनीतियाँ: ये व्यापक और निवारक योजनाएँ हैं जो पोषण हीनताओं पर काबू पाने के लिए खाद्य पदार्थों का प्रयोग करती हैं, जैसे सूक्ष्मपोषक-समृद्ध खाद्य पदार्थों का उपभोग बढ़ाना। ये नीतियां लागत-प्रभावी होती हैं, लंबे समय तक लाभ देती हैं (दीर्घोपयोगी), और इनमें अतिमात्रा या विषाक्तता का खतरा नहीं होता है।

(ii) पोषण-आधारित अथवा औषधीय दृष्टिकोण: इस अल्पावधि नीति में विशेष रूप से संवेदनशील समूहों (जिनमें किसी पोषक तत्व की कमी का खतरा हो) को पोषक पूरक (supplements) दिए जाते हैं, जैसे कि विटामिन A और लौह तत्त्व की खुराक। हालांकि, ये पूरक कार्यक्रम भोजन-आधारित दृष्टिकोण की तुलना में अधिक महँगे हो सकते हैं।

3. जन स्वास्थ्य पोषण क्या है?

उत्तर: जन स्वास्थ्य पोषण, अध्ययन का वह क्षेत्र है जो अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा देने से संबंधित है। समाज के संगठित प्रयासों और कार्यवाहियों द्वारा स्वास्थ्य को उन्नत करना तथा बीमारियों की रोकथाम करते हुए जीवन-अवधि को दीर्घ (लंबा) बनाने की कला और विज्ञान ही जन पोषण है। इसके अंतर्गत सरकारी नीतियों और कार्यक्रमों के जरिए जनसंख्या (बड़ी संख्या में लोगों) को प्रभावित करने वाली पोषण संबंधी समस्याओं का समाधान किया जाता है।

4. भारत किन सामान्य पोषण समस्याओं का सामना कर रहा है?

उत्तर: भारत वर्तमान में मुख्य रूप से निम्नलिखित गंभीर पोषण समस्याओं का सामना कर रहा है:

(i) कुपोषण का दोहरा भार: देश में एक ओर अल्पपोषण (कुपोषण) है, तो दूसरी ओर जीवनशैली में बदलाव के कारण अतिपोषण (मोटापा) की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है।

(ii) प्रोटीन-ऊर्जा कुपोषण (पी.ई.एम.): आहार में ऊर्जा और प्रोटीन की कमी के कारण यह समस्या पाई जाती है, जिसका खतरा बच्चों के अलावा बड़े लोगों को भी होता है।

(iii) सूक्ष्मपोषकों की कमी: आबादी का एक बड़ा हिस्सा लौह तत्त्व (आयरन), जिंक, विटामिन A, विटामिन C, विटामिन D, आयोडीन, फॉलिक अम्ल आदि की कमी (जिसे ‘छिपी भूख’ भी कहते हैं) से पीड़ित है। इसके कारण अरक्तता (आई.डी.ए.), रतौंधी (विटामिन ए की कमी) और आयोडीन हीनता विकार (आई.डी.डी.) जैसी व्यापक बीमारियाँ फैल रही हैं।

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