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NCERT Class 12 Home Science Chapter 2 नैदानिक पोषण और आहारिकी

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NCERT Class 12 Home Science Chapter 2 नैदानिक पोषण और आहारिकी

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Chapter: 2

Part – 1: मानव परिस्थितिकी एवं परिवार विज्ञान
TEXTUAL SOLUTIONS

पुनरावलोकन प्रश्न:

1. नैदानिक पोषण और आहारिकी के अध्ययन का क्या महत्व है?

उत्तर: बीमारी या अस्वस्थता व्यक्ति के भोजन खाने, पचाने और अवशोषित करने की क्षमता को कम करके उसकी पोषण स्थिति को बिगाड़ सकती है। नैदानिक पोषण का अध्ययन प्रमाणित बीमारी वाले मरीजों के पोषण प्रबंधन पर केंद्रित है। इसके अध्ययन से पेशेवर विशेषज्ञ यह सुनिश्चित कर पाते हैं कि रोगी को बीमारी से लड़ने और ठीक होने के लिए पर्याप्त पोषण मिले। इसके अलावा, मोटापा, हृदय रोग, और एच.आई.वी./एड्स जैसी नई और पुरानी बीमारियों के प्रबंधन और रोकथाम में भी इसका बहुत महत्व है।

2. आहारीय संशोधन क्या है, जो एक चिकित्सीय पोषण विशेषज्ञ कर सकता है?

उत्तर: आहारीय संशोधन का अर्थ है रोगी की चिकित्सीय आवश्यकताओं और बीमारी की स्थिति के अनुसार उसके नियमित आहार में बदलाव करना। एक चिकित्सीय पोषण विशेषज्ञ निम्नलिखित संशोधन कर सकता है:

(i) तरलता और बनावट में बदलाव: रोगी की चबाने या निगलने की क्षमता के आधार पर तरल (liquid) या नरम (soft) आहार देना।

(ii) ऊर्जा (कैलोरी) में बदलाव: ऊर्जा अंतर्ग्रहण में वृद्धि या कमी करना।

(iii) पोषक तत्वों की मात्रा में बदलाव: किसी बीमारी के अनुसार पोषक तत्वों को कम या ज्यादा करना। उदाहरण के लिए- सर्जरी के बाद अधिक प्रोटीन देना, गुर्दे की बीमारी में कम प्रोटीन देना, या सोडियम (नमक) व वसा कम करना।

(iv) भोजन के समय के अंतराल या भोजन देने के मार्ग (जैसे नली द्वारा) में बदलाव करना।

3. विभिन्न प्रकार के चिरकालिक रोगों से बचने के लिए हमें आहारी परिवर्तनों की आवश्यकता क्यों होती है? ये जीवन शैली से किस प्रकार संबंधित हैं?

उत्तर: वर्तमान समय में हम ऐसे खाद्य पदार्थों का उपयोग कर रहे हैं जिनमें अधिक वसा, शर्करा और उच्च सोडियम (नमक) होता है, जबकि उनमें रेशे (फाइबर) कम होते हैं। जब इस खराब आहार के साथ शारीरिक गतिविधियों में कमी (गतिहीन जीवन शैली) और मानसिक तनाव जुड़ जाता है, तो मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी चिरकालिक (chronic) बीमारियाँ पनपती हैं। अतः इन रोगों को रोकने या उनके प्रभाव को टालने के लिए हमें अपनी जीवन शैली में सुधार (व्यायाम) के साथ-साथ स्वस्थ आहारीय परिवर्तनों की अत्यंत आवश्यकता होती है।

4. एक आहार विशेषज्ञ की भूमिकाएँ क्या होती हैं? एक आहार विशेषज्ञ रोगी की देखभाल के लिए, अन्य स्वास्थ्य देखभाल करने वाले कर्मचारियों के साथ टीम कैसे बनाता है?

उत्तर: आहार विशेषज्ञ की प्राथमिक भूमिका रोगी की पोषण स्थिति का मूल्यांकन करना, उसकी पोषण संबंधी आवश्यकताओं का विश्लेषण करना और उसे सही आहार व परामर्श देना है। टीम कैसे बनाता है: किसी भी मरीज के उपचार के लिए मुख्य उत्तरदायित्व डॉक्टर का होता है और डॉक्टर ही मरीज के आहार के बारे में दिशा-निर्देश देता है। डॉक्टर के इन निर्देशों को व्यावहारिक आहार योजना में बदलने और लागू करने के लिए डॉक्टर पूरी तरह आहार विशेषज्ञ पर निर्भर रहता है। इस तरह, आहार विशेषज्ञ मेडिकल टीम का एक अभिन्न अंग बन जाता है और रोगी की भलाई के लिए अन्य चिकित्सकों के साथ मिलकर काम करता है।

5. डॉक्टरी पोषण और आहार विशेषज्ञों की जीविका के लिए हम कैसे तैयारी कर सकते हैं?

उत्तर: इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए आपको कम-से-कम आहारिकी (Dietetics) में स्नातकोत्तर (Post Graduate) डिप्लोमा पास करना होगा और एक इंटर्नशिप पूरी करनी होगी, जिससे आप एक ‘पंजीकृत आहार विशेषज्ञ’ (Registered Dietician) बन सकें। इस डिप्लोमा में प्रवेश के लिए आपके पास जीवन विज्ञान, जैव रसायन, सूक्ष्मजैविकी या खाद्य प्रौद्योगिकी में B.Sc. की डिग्री होनी चाहिए। इसके अलावा, आप खाद्य विज्ञान और पोषण में M.Sc. भी कर सकते हैं। यदि आप शिक्षण और शोध (Research) में जाना चाहते हैं, तो आपको UGC NET पास करना चाहिए और Ph.D. की डिग्री प्राप्त करनी चाहिए।

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