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NIOS Class 12 History Chapter 1 भारत के इतिहास को समझना

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NIOS Class 12 History Chapter 1 भारत के इतिहास को समझना

Also, you can read the NIOS book online in these sections Solutions by Expert Teachers as per National Institute of Open Schooling (NIOS) Book guidelines. These solutions are part of NIOS All Subject Solutions. Here we have given NIOS Class 12 History Hindi Medium Solutions, NIOS Senior Secondary Course History Notes in Hindi for All Chapter, You can practice these here.

Chapter: 1

मॉड्यूल – 1 प्राचीन भारत

पाठगत प्रश्न 1.1

1. चारों वेदों के नाम बताइए।

उत्तर: चारों वेदों के नाम हैं – ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, और अथर्ववेद।

2. संस्कृत व्याकरण का सर्वप्रथम ग्रंथ कौन सा है? 

उत्तर: संस्कृत व्याकरण का सर्वप्रथम ग्रंथ “अष्टाध्यायी” है, जिसे महर्षि पाणिनि ने रचा था। इसकी रचना काल विद्वानों ने 700 ई़पू़. के लगभग माना है ।

3. जातक से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: जातक बौद्ध ग्रंथों का एक भाग है, जिसमें भगवान बुद्ध के पूर्व जन्मों की कथाएँ वर्णित हैं। माना जाता है कि गौतम बुद्ध के रूप में जन्म लेने से पहले उनके 550 जन्म और हुए थे।

4. दक्षिण भारत के संगम साहित्य की भाषा क्या है?

उत्तर: दक्षिण भारत के संगम साहित्य की भाषा तमिल है।

5. ‘उपनिषद्’ से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: ‘उपनिषद्’ हिंदू दर्शन से संबंधित ग्रंथ हैं, जो वेदों के अंतिम भाग के रूप में माने जाते हैं। इनमें आत्मा, ब्रह्म, मोक्ष और अद्वैत जैसी गूढ़ दार्शनिक अवधारणाओं की चर्चा की गई है।

पाठगत प्रश्न 1.2

1. उत्कीर्ण लेखों का अध्ययन क्या कहलाता है?

उत्तर: उत्कीर्ण लेखों का अध्ययन एपिग्राफी (Epigraphy) कहलाता है।

2. प्रशस्ति किसे कहते हैं?

उत्तर: प्रशस्ति उस लेख या अभिलेख को कहते हैं जिसमें किसी राजा, शासक, या किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति की प्रशंसा की जाती है। ये आमतौर पर शासकों की महानता, वीरता, दानशीलता, और उपलब्धियों का वर्णन करने के लिए लिखे जाते थे। प्रशस्तियाँ मंदिरों, स्तंभों, ताम्रपत्रों या शिलालेखों पर उत्कीर्ण मिलती हैं।

3. पुरालिपृिशास्त्र (Palaeology) की परिभाषा दीजिए?

उत्तर: पुरालिपिशास्त्र (Palaeology) प्राचीन लिपियों के अध्ययन की वह शाखा है, जिसके अंतर्गत लिपियों के विकास, उनके अर्थ, तथा उनके ऐतिहासिक उपयोग का विश्लेषण किया जाता है। यह ग्राफीम की पहचान करने, उनके अर्थों को स्पष्ट करने, तिथियों और सांस्कृतिक संदर्भों के अनुसार उनके उपयोग को वर्गीकृत करने और लेखन और लेखकों के बारे में निष्कर्ष निकालने का विज्ञान है

4. अशोक के अधिकतर शिलालेख किस लिपि में लिखे गए हैं?

उत्तर: अशोक के अधिकतर शिलालेख ब्राह्मी लिपि में लिखे गए हैं। 

पाठगत प्रश्न 1.3

1. सिक्कों के अध्ययन को क्या कहा जाता है?

 उत्तर: सिक्कों के अध्ययन को मुद्रा शास्त्र कहा जाता है।

2. आहत (पंच मार्कड) सिक्कों में किन धातुओं का प्रयोग होता था?

उत्तर: आहत (पंच मार्कड) सिक्कों में तांबा, चांदी और सोना जैसी धातुओं का प्रयोग होता था।

3. भारत में पहले-पहल किस राजवंश ने सोने के सिक्कों को जारी किया था?

उत्तर: भारत में पहले-पहल कुषाण राजवंश ने सोने के सिक्कों को जारी किया था।

पाठगत प्रश्न 1.4

1. पुरातत्त्वशास्त्र की परिभाषा दीजिए।

उत्तर: पुरातत्त्वशास्त्र (Archaeology) वह विज्ञान है, जिसके द्वारा अतीत के भौतिक अवशेषों का अध्ययन किया जाता है। यह प्राचीन सभ्यताओं के अवशेषों, भवनों, औज़ारों, मिट्टी के बर्तनों, सिक्कों आदि की खुदाई करके उस समय के जीवन, समाज, और संस्कृति के बारे में जानकारी प्राप्त करने में सहायक होता है।

2. सी-14 काल-निर्धारण की उपयोगिता समझाइए।

उत्तर: कार्बन-14 (सी-14) काल-निर्धारण पद्धति पुरातत्त्व में अत्यंत उपयोगी है। यह पद्धति जैविक अवशेषों (जैसे लकड़ी, हड्डी, कपड़ा) की उम्र का अनुमान लगाने के लिए उपयोग की जाती है। जब कोई जीवधारी मर जाता है, तो उसके शरीर में मौजूद कार्बन-14 एक निश्चित दर से क्षीण होने लगता है। वैज्ञानिक इस क्षीणता का अध्ययन करके उस अवशेष की आयु निर्धारित करते हैं। इससे पुरातत्त्वविदों को प्राचीन सभ्यताओं के समय-निर्धारण में सहायता मिलती है।

पाठगत प्रश्न 1.5

1. ‘इंडिका’ किसने लिखी?

उत्तर: चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में मेगास्थनीज़ नामक ग्रीक राजदूत आया था जिसने ‘इंडिका’ नामक ग्रंथ लिखा।

2. भारत आने वाले चीनी यात्रियों के नाम बताइए।

उत्तर: भारत आने वाले चीनी यात्रियों के नाम हैं फ़ाहियान और हवेनत्सांग।

3. नालंदा विश्वविद्यालय के उत्कर्ष का उल्लेख किस चीनी यात्री ने किया?

उत्तर: ह्वेनत्सांग नालंदा विश्वविद्यालय के उत्कर्ष का उल्लेख  किया है।

पाठगत प्रश्न 1.6

1. स्वतंत्रता के बाद इतिहास लेखन में उभरी प्रवत्ति पर प्रकाश डालें ?

उत्तर: स्वतंत्रता के बाद इतिहास लेखन में एक नई प्रवृत्ति छाने लगी। अब राजनीतिक इतिहास से हटकर समाज और अर्थव्यवस्था के इतिहास पर अधिक बल दिया जाने लगा। इस प्रकार की पहली रचनाओं में से एक थी ए.एल. बाशम (1914-1986) लिखित ‘द वॉण्डर दैट वॉज इंडिया। डी.डी. कोसांबी (1907-1966) के ग्रंथ एन इंट्रोडक्शन टु द स्टडी ऑफ इंडियन हिस्ट्री में यह परिवर्तन और भी स्पष्ट हुआ है। उनका लेखन प्राचीन भारतीय इतिहास के सामाजिक-आर्थिक पक्ष को लेकर चला है। उनके पश्चात बहुत सारे इतिहासकारों ने इस प्रवत्ति का अनुसरण किया और अपने लेखन को सामाजिक, आर्थिक और सांस्कतिक इतिहास पर केंद्रित किया। उनका प्रमुख बल उत्पादन के साधनों और विभिन्न समूहों के व्यक्तियों के बीच के सामाजिक तथा आर्थिक संबंधों पर रहा।

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