NIOS Class 10 Social Science Chapter 9 भारत का राष्ट्रीय आन्दोलन Solutions Hindi Medium As Per New Syllabus to each chapter is provided in the list so that you can easily browse throughout different chapters NIOS Class 10 Social Science Chapter 9 भारत का राष्ट्रीय आन्दोलन Notes in Hindi and select need one. NIOS Class 10 Social Science Question Answers Download PDF. NIOS Study Material of Class 10 Social Science Notes Paper Code: 213.
NIOS Class 10 Social Science Chapter 9 भारत का राष्ट्रीय आन्दोलन
Also, you can read the NIOS book online in these sections Solutions by Expert Teachers as per National Institute of Open Schooling (NIOS) Book guidelines. These solutions are part of NIOS All Subject Solutions. Here we have given NIOS Class 10 Social Science Notes, NIOS Secondary Course Social Science Solutions in Hindi Medium for All Chapter, You can practice these here.
भारत का राष्ट्रीय आन्दोलन
Chapter: 9
| मॉड्यूल – 1 भारत तथा विश्व विभिन्न युगों में |
पाठगत प्रश्न 9.1
1. ब्रिटिश शासन काल में भारतीयों में राष्ट्रीय चेतना आने के तीन कारणों की व्याख्या करें।
उत्तर: ब्रिटिश शासन काल में भारतीयों में राष्ट्रीय चेतना (राष्ट्रवाद) के उदय के निम्नलिखित तीन प्रमुख कारण थे:
(i) उत्पीड़न के कारण सामूहिक बंधन: औपनिवेशिक शासन के अधीन सताए जाने का भाव ने एक सामूहिक बंधन प्रदान किया, जिससे विभिन्न समूह के लोग एक साथ आए।
(ii) राजनीतिक और प्रशासनिक एकता: ब्रिटिश सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में लागू किया गया एक समान कानून, राजनीतिक और प्रशासनिक एकता की ओर ले गया। इसने नागरिकता और भारतीयों के लिए एक राष्ट्र की अवधारणा को बल प्रदान किया।
(iii) आर्थिक शोषण के विरुद्ध प्रतिक्रिया: अंग्रेज़ों द्वारा किए गए आर्थिक शोषण ने अन्य लोगों को एक होने और उनके जीवन तथा संसाधनों पर ब्रिटिश सरकार के नियंत्रण के विरुद्ध प्रतिक्रिया करने के लिए उकसाया। (इसके अतिरिक्त, 19वीं सदी के सामाजिक व धार्मिक सुधार आंदोलनों ने भी प्राचीन भारत के गौरव को फिर से जगाकर राष्ट्रवाद की भावना उत्पन्न करने में भूमिका निभाई)।
2. 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गठन करने को ब्रिटिश सरकार क्यों उत्सुक थी?
उत्तर: ब्रिटिश सरकार 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के गठन को लेकर उत्सुक थी क्योंकि इसके संस्थापक एलेन ऑक्टेवियन ह्यूम (A.O. Hume), जो एक सेवानिवृत्त सिविल सेवा अधिकारी थे, ने भारतीयों में राजनीतिक सतर्कता को बढ़ते देखा। वह इस बढ़ते असंतोष को एक सुरक्षित संवैधानिक स्वरूप देना चाहते थे, ताकि यह असंतोष भारत में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध सार्वजनिक क्रोध के रूप में विकसित न हो सके। इस योजना में उन्हें वायसराय लॉर्ड डफरिन और प्रसिद्ध भारतीयों के एक समूह से मदद मिली थी।
3. नरमपंथी और गरमपंथियों में क्या अंन्तर थे?
उत्तर: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नरमपंथी (1885-1905) और गरमपंथी (1905-1918) समूहों के बीच मुख्य अंतर उनके लक्ष्यों, तरीकों और ब्रिटिश शासन के प्रति उनके विश्वास में थे:
| विशेषता | नरमपंथी | गरमपंथी |
| ब्रिटिश शासन में विश्वास | उन्हें ब्रिटिश सरकार और उसके न्याय में पूरा विश्वास था। वे मानते थे कि तर्कपूर्ण ढंग से शिकायत रखने पर अंग्रेज़ निश्चित रूप से सुधार करेंगे। | वे मानते थे कि अंग्रेज़ भारतीयों का शोषण करते हैं, उनकी आत्मनिर्भरता को नष्ट करते हैं और भारत का धन ले जाते हैं। वे महसूस करते थे कि भारतीयों को खुद सरकार चलानी चाहिए। |
| कार्य करने का तरीका | वे सरकार के सामने अपनी मांग हमेशा आवेदन (petition) के रूप में रखते थे और कानूनी नियमों में रहकर काम करते थे। | वे सरकार को दरख्वास्त (petition) करने के बजाय बड़े पैमाने पर विरोध करने, सरकारी नीतियों की आलोचना करने, विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करने और स्वदेशी (गृह-निर्मित) वस्तुओं का उपयोग करने में विश्वास करते थे। |
| स्वतंत्रता पर दृष्टिकोण | वे विधायी सभा में प्रतिनिधित्व और सेवाओं के भारतीयकरण जैसे सुधारों पर केंद्रित थे। | वे स्वतंत्रता के लिए सरकार की दया पर निर्भर नहीं थे, बल्कि मानते थे कि यह उनका अधिकार है। बाल गंगाधर तिलक का नारा था: “आजादी मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है और हम इसे लेकर रहेंगे”। |
4. भारतीय नेताओं ने प्रथम विश्व युद्ध में अंग्रेजों की मदद क्यों की?
उत्तर: प्रथम विश्व युद्ध (1914) के दौरान जब ब्रिटिश सरकार ने भारतीय नेताओं से उनके संकट की घड़ी में साथ देने की अपील की, तो भारतीय नेता एक विशिष्ट शर्त पर सहमत हो गए। शर्त यह थी कि जब युद्ध समाप्त हो जाए, तब ब्रिटिश सरकार भारतीय लोगों को संवैधानिक (विधायी और प्रशासनिक) शक्ति दे दे।
5. खिलाफत आंदोलन ब्रिटिश शासन के विरुद्ध क्यों था?
उत्तर: खिलाफत आंदोलन ब्रिटिश शासन के विरुद्ध था क्योंकि मुसलमानों ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिशों की मदद इस समझ के साथ की थी कि ऑटोमन साम्राज्य का पवित्र स्थान खलीफा के हाथों में होगा। लेकिन युद्ध के बाद, तुर्की के सुल्तान पर एक नया समझौता थोप दिया गया और ऑटोमन साम्राज्य विभाजित हो गया। भारतीय मुसलमानों ने इस कार्रवाई को खलीफा के अपमान के रूप में लिया। इस घटना के विरोध में शौकत अली और मोहम्मद अली ने ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध खिलाफत आंदोलन की शुरुआत की।
पाठगत प्रश्न 9.2
1. सत्याग्रह अन्य विरोधों से किस प्रकार भिन्न था?
उत्तर: सत्याग्रह अन्य विरोधों से इसलिए भिन्न था क्योंकि यह एक ऐसी तकनीक थी जो सत्य और न्याय के लिए अहिंसक विरोध (non-violent resistance) पर आधारित थी। यह अहिंसा पर पूर्ण ज़ोर देता था, जबकि पहले के आंदोलन (जैसे क्रांतिकारी गतिविधि या कुछ किसान विद्रोह) अक्सर हिंसा का प्रयोग करते थे।

Hi! my Name is Parimal Roy. I have completed my Bachelor’s degree in Philosophy (B.A.) from Silapathar General College. Currently, I am working as an HR Manager at Dev Library. It is a website that provides study materials for students from Class 3 to 12, including SCERT and NCERT notes. It also offers resources for BA, B.Com, B.Sc, and Computer Science, along with postgraduate notes. Besides study materials, the website has novels, eBooks, health and finance articles, biographies, quotes, and more.


