NIOS Class 10 Social Science Chapter 28 शांति और सुरक्षा

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NIOS Class 10 Social Science Chapter 28 शांति और सुरक्षा

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Chapter: 28

मॉड्यूल – 4 समसामयिक भारत : मुद्दे एवं चुनौतियाँ

पाठगत प्रश्न 28.1

1. रिक्त स्थानों को भरें:

(क) शांति का अर्थ वह मानसिक स्थिति नहीं है जहाँ _______________ का निरा अभाव हो।

उत्तर: शांति का अर्थ वह मानसिक स्थिति नहीं है जहाँ उपद्रव और टकराव का निरा अभाव हो।

(ख) शांति सामंजस्य की स्थिति है जिसकी विशेषता है _______________ का अस्तित्व।

उत्तर: शांति सामंजस्य की स्थिति है जिसकी विशेषता है स्वस्थ संबंधों का अस्तित्व।

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(ग) सुरक्षा का अर्थ है _______________ इसका यह भी अर्थ है _______________ ।

उत्तर: सुरक्षा का अर्थ है सुरक्षित अवस्था या भयमुक्त भावना इसका यह भी अर्थ है संस्था, क्षेत्र, राष्ट्र व विश्व की कुशलता।

(घ) मौलिक तौर पर सुरक्षा का अर्थ है _______________ ।

उत्तर: मौलिक तौर पर सुरक्षा का अर्थ है बेहद खतरनाक संकटो से बचाव।

2. शांति व सुरक्षा को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है।

उत्तर: क्योंकि यह यह अवस्था है जहाँ व्यक्ति, संस्थाएँ, क्षेत्र, राष्ट्र और विश्व विना किसी खतरे के आगे बढ़ते है। इस अवस्था में क्षेत्र या राष्ट्र आमतौर पर आंतरिक रूप से ज्यादा स्थिर होते हैं, सम्भवतः लोतांत्रिक तरीके से शासित होते है। और मानवाधिकार के प्रति अनादर होता है। संघर्ष न सिर्फ खतरा और भय को जन्म देते है बल्कि आर्थिक, सामाजिक या राजनीतिक जीवन को भी नुकासन पहुँचाते हैं।

3. शांति और सुरक्षा के पारम्परिक तवा नई या गैर पारम्परिक अवधारणाओं के बीच तीन आयारमत अंतर क्या है?

उत्तर: (i) शांति और सुरक्षा की नई व गैर पारम्परिक धारणा काफी व्यापक है तथा सैन्य धमकी के अतिरिक्त खतरों का प्यापक क्षेत्र तथा मानव अस्तित्त्व को खतरों को भी समाविष्ट करती है। 

(ii) इसमें न केवल क्षेत्र और राष्ट्र शामिल है बल्कि व्यक्ति या समुदाय और मानवता भी की सुरक्षा भी इसके दायरे में आती है 

(iii) नईघ्समझ के अनुसार शांति और सुरक्षा को सामाजिक आर्थिक विकास तथा मानव गरिमा के रख रखाव के पूर्व शर्त के रूप में देखा जाता है। 

पाठगत प्रश्न 28.2

1. भारत को अन्तर्राष्ट्रीय और आंतरिक शांति और सुरक्षा के लिए विशेष उपागम विकसित करने और अपनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

उत्तर: लोकतंत्र और विकास तथा शाति व सुरक्षा में पारस्परिक संबंध है। शांति और सुरक्षा के अभाव में लोकतंत्र काम नहीं कर सकता और विकास नहीं हो सकता। जब शांति स्थापित होती है तभी नागरिक विभिन्न स्तरों पर निर्णय लेने के प्रक्रिया में भाग ले सकते है। शाति विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए अति आवश्यक है। दूसरी और, लोकतंत्र और विकास के आभाव में शांति स्थापित नहीं की जा सकती। जन आक्रोश की स्थिति को समाप्त करने के लिए लोकतंत्र बेहतर स्थिति में होता है। विकास शांति को बढ़ावा देता है। विकास के माध्यम से ही राष्ट्र लोगों की सामाजिक और आर्थिक प्रगति तथा उनके जीवन स्तर में सुधार सुनिश्चित कर सकते हैं।

2. शांति और सुरक्षा के उपागम के विकास में राष्ट्रीय आन्दोलन का क्या योगदान रहा?

उत्तर: विश्व शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के सम्बन्ध में विचार और दृष्टिकोण स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान शुरू हुए। भारत के राजनीतिक नेतृत्व ने भली भांति समझा कि स्वतंत्रता के पश्चात् लोकतांत्रिक व्यवस्था तभी कारगर हो सकती है जब विश्व में शांति और सुरक्षा बहाल हो जाती है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान सामाजिक आर्थिक विकास के लिए समाजवादी उपागम अपनाने के लिए आम सहमति का लक्ष्य उस स्थिति प्राप्त करना था जो शांति के लिए आंतरिक खतरे के विरूद्ध सुरक्षा को बढ़ावा दे सके।

3. भारत के संविधान में वर्णित शांति और सुरक्षा का उपागम क्या है।

उत्तर: संविधान राज्य के नीति निदेशक तत्त्वों में विश्व शाति और सुरक्षा की चर्चा करता है। संघीय व्यवस्था तथा ग्रामीण और शहरी स्थानीय सरकारों की स्थापना का लक्ष्य आंतरिक सुरक्षा के खतरे को मिटाना है। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर संविधान ने अन्तर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लक्ष्य की नीति की अपनाया। संविधान में विश्व या क्षेत्रीय स्तर पर शांति, न्यायोचित आर्थिक विकास, मानवाधिकार को बढ़ावा तथा आंतकवाद के उन्मूलन के लिए हर सम्भव समर्थन देने का प्रावधान है।

4. आपके अनुसार शान्ति और सुरक्षा करने का सबसे प्रभावशाली तरीका क्या है?

उत्तर: लोकतंत्रिक संस्थाएँ तथा प्रक्रिया को सशक्त करने की आवश्यकता है। देश के सभी भागों में सामाजिक आर्थिक विकास की गति को तेज किए जाने के लिए प्रयास जारी रखने होंगे। लोगों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया तथा विकास सम्बन्धी गतिविधियों में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करना होगा। भारत को शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए सभी अन्तर्राष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन करना चाहिए।

पाठगत प्रश्न 28.3

1. रिक्त स्थानों को भरें:

(क) भारत में इन रूपों में हिंसक गतिविधियों का अनुभव किया गया: (i) _______ (ii) _______ (iii) _______   

उत्तर: (i) आंतकवाद। 

(ii) विद्रोह। 

(iii) नक्सलवादी आंदोलन।

(ख) आंतकवाद एक आपराधिक गतिविधि है जिसके द्वारा (i) _______  तथा समान्य रूप से राजनीतिक तथा वैचारिक उद्देश्य की प्राप्ति के लिए ग्राम नागरिकों पर (ii) _______  किया जाता है।

उत्तर: (i) भय का माहौल बनाने के लिए। 

(i) घातक हमला।

(ग) भारत में विद्रोह दो तरह के है: (i) _______ चलाए गए आंदोलन (ii) _______ आंदोलन।

उत्तर: (i) राजनीतिक उद्देश्य से।

(ii) सामाजिक आर्थिक न्याय के लिए।

2. विद्रोह से निपटने के लिए सरकार द्वारा कीन सी मुख्य राणनीतियों अपनाई गई है?

उत्तर: भारत सरकार आंतकवाद से लडने के लिए सभी देशों के प्रयासों का समर्थन करती रही है तथा किसी आंतकवादी हमले की स्थिति में उनका समर्थन लेती रही है। जहाँ तक राजनीतिक उद्देश्यों की प्रप्ति के लिए विद्रोही गतिविधियों का प्रश्न है, भारत सरकार कूटनीतिक तरीके से इसका सामना करने का प्रयास करती है। भारत ने म्यांमार तथा हाल ही में बांग्लादेश के साथ संधि की है जिससे इन देशों से विद्रोही आंदोलनों को मिलने वाले समर्थन और सहायता को रोका जा सके। ऐसा करने के लिए यह पाकिस्तान पर भी अन्तर्राष्ट्रीय दबाव बना रहा है। नक्सलवादी आंदोलन के संबंध में यह महसूस किया गया कि गहरे सामाजिक, आर्थिक विभाजन होने के कारण यह एक गम्भीर मामला है। उन क्षेत्रों में विकास की गति तेज करने तया युवकों को मुख्य धारा से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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