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NCERT Class 8 Social Science Important Chapter 1 प्राकृतिक संसाधन एवं उनका उपयोग
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प्राकृतिक संसाधन एवं उनका उपयोग
Chapter: 1
| Part – 1: Samaj Ka Aadhyan: Bharat or Uske Aage |
| IMPORTANT QUESTION ANSWER |
लघु उत्तरीय प्रश्न:
1. किसी वस्तु को ‘संसाधन’ (Resource) कब माना जाता है?
उत्तर: जब मानव प्रकृति के सजीव या निर्जीव तत्वों का उपयोग अपने जीवन-यापन के लिए करता है या उनसे नई वस्तुएँ बनाता है, तब वे संसाधन कहलाते हैं। इसके लिए तत्व का तकनीकी रूप से सुलभ, आर्थिक रूप से व्यवहार्य और सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य होना आवश्यक है।
2. प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्राकृतिक संसाधनों में क्या अंतर है?
उत्तर: प्रत्यक्ष संसाधन वे हैं जिन्हें हम सीधे ग्रहण करते हैं, जैसे जल, वायु और मृदा। अप्रत्यक्ष संसाधन वे हैं जिन्हें निकाला या संसाधित किया जाता है, जैसे कोयला, खनिज तेल, और धातु अयस्क।
3. प्रकृति का ‘पुनर्स्थापन’ (Restoration) क्या है?
उत्तर: पुनर्स्थापन किसी क्षीण या क्षतिग्रस्त वस्तु को उसकी मूल स्वस्थ अवस्था में पुनः लाने की प्राकृतिक प्रक्रिया है, जैसे दावानल (जंगल की आग) के बाद वनों का पुनः स्वस्थ होना।
4. प्रकृति का ‘पुनर्जनन’ (Regeneration) क्या है?
उत्तर: पुनर्जनन प्रकृति की नवजीवन और फलने-फूलने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ निर्मित करने की क्षमता को दर्शाता है, यह पुनर्स्थापन से अधिक व्यापक है।
5. पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ (Ecosystem Services) किसे कहते हैं?
उत्तर: जब प्रकृति की स्वाभाविक प्रक्रियाएँ (जैसे पेड़ों द्वारा ऑक्सीजन बनाना, जल शुद्ध करना, मृदा-अपरदन रोकना) मनुष्यों के लिए लाभदायक होती हैं, तो उन्हें पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ कहा जाता है।
6. ‘प्रचुरता का विरोधाभास’ (Paradox of Plenty) का क्या अर्थ है?
उत्तर: यह वह स्थिति है जहाँ प्रचुर प्राकृतिक संसाधन होने के बावजूद किसी क्षेत्र में आर्थिक वृद्धि और विकास मंद होता है, क्योंकि वहाँ की अर्थव्यवस्था उन संसाधनों को उच्च मूल्य वाले उत्पादों में बदलने में असमर्थ होती है।
7. भारत में कोयले के भंडार की क्या स्थिति है?
उत्तर: यद्यपि भारत में प्रचुर मात्रा में कोयले के भंडार हैं, लेकिन वर्तमान दोहन की दर को देखते हुए यह अनुमान है कि भारत में कोयले का भंडार केवल अगले 50 वर्षों तक ही चल सकता है।
8. अनवीकरणीय संसाधन (Non-renewable resources) क्या होते हैं?
उत्तर: ये वे संसाधन हैं जो लंबी अवधि में निर्मित होते हैं और जिस अनुपात में हम उनका उपयोग करते हैं, उस अनुपात में उनकी पुनःपूर्ति नहीं की जा सकती (जैसे- कोयला, पेट्रोलियम, लोहा)।
9. कावेरी नदी के जल को लेकर किन राज्यों के मध्य विवाद है?
उत्तर: कावेरी नदी के जल का वितरण कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के मध्य संघर्ष और तनाव का कारण है।
10. पंजाब में 1960 के दशक में भूजल का दोहन क्यों बढ़ गया?
उत्तर: 1960 के दशक में कृषकों ने गेहूँ और धान की उच्च उपज वाली किस्मों की खेती शुरू की, जिन्हें पारंपरिक बीजों की तुलना में अधिक जल की आवश्यकता थी। साथ ही निःशुल्क बिजली की आपूर्ति ने भी भूजल के अत्यधिक दोहन को बढ़ावा दिया।
11. रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अनुचित उपयोग का मृदा पर क्या प्रभाव पड़ा है?
उत्तर: रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अनुचित उपयोग से मृदा-क्षरण में वृद्धि हुई है और इसने समग्र मृदा प्रबंधन को बाधित कर दिया है।
12. ‘वृक्षायुर्वेद’ क्या है और यह क्या सुझाव देता है?
उत्तर: वृक्षायुर्वेद एक प्राचीन भारतीय वनस्पति-विज्ञान ग्रंथ है (लगभग 10वीं शताब्दी), जो पौधों/वृक्षों के अध्ययन, बीज संरक्षण, सिंचाई तकनीक, और प्राकृतिक कीट-नियंत्रण के माध्यम से संधारणीय कृषि को प्रोत्साहित करता है।
13. सिक्किम के 100% जैविक राज्य बनने के क्या सकारात्मक परिणाम हुए?
उत्तर: सिक्किम में स्थानीय जैव-विविधता फली-फूली, लाभदायक कीड़े और पक्षी वापस लौटे, पर्यटकों की संख्या बढ़ी और कृषकों की आय में औसतन 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
14. अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) क्या है?
उत्तर: यह 2015 में भारत और फ्रांस द्वारा आरंभ किया गया सौर ऊर्जा के उपयोग के लिए प्रतिबद्ध सूर्य की रोशनी से समृद्ध देशों का एक गठबंधन है।
15. ‘लोकसंग्रह’ का क्या अर्थ है?
उत्तर: भगवद्गीता में वर्णित ‘लोकसंग्रह’ का अर्थ है अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं से ऊपर उठकर सभी की भलाई के लिए कार्य करना।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न:
1. प्राकृतिक संसाधनों को किन आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है? विस्तार से समझाइए।
उत्तर: प्राकृतिक संसाधनों को मुख्य रूप से उनके उपयोग और उनके नवीकरण की क्षमता के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है:
उपयोग के आधार पर: इन्हें जीवन के लिए आवश्यक संसाधन (जल, वायु, भोजन), सामग्री के लिए संसाधन (लकड़ी, संगमरमर, धातु) और ऊर्जा के लिए संसाधन (कोयला, सूर्य का प्रकाश, पवन) में बाँटा जाता है।
नवीकरणीय (Renewable): ये वे संसाधन हैं जो समय के साथ प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा स्वयं को नवीनीकृत कर लेते हैं, जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और वन (यदि उनका विवेकपूर्ण प्रबंधन हो)।
अनवीकरणीय (Non-renewable): ये संसाधन प्रकृति में बहुत लंबी अवधि में बनते हैं और इनका क्षय बहुत तेज़ी से होता है। जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोलियम) और खनिज इसके उदाहरण हैं। कोयला जैसे संसाधन भारत में केवल 50 वर्षों तक ही चलने का अनुमान है।
2. मानव की गतिविधियाँ प्रकृति के पुनर्स्थापन (Restoration) और पुनर्जनन (Regeneration) चक्र को कैसे बाधित कर रही हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट करें।
उत्तर: प्रकृति चक्रों (Cycles) में कार्य करती है, जहाँ कोई भी चीज़ अपशिष्ट नहीं होती (जैसे गिरा हुआ पेड़ खाद बन जाता है)। लेकिन मानवीय गतिविधियाँ इस चक्र को तोड़ रही हैं:
(i) उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट और रसायनों को बिना उपचार के नदियों में बहा दिया जाता है। यह कचरा प्रकृति में सड़कर किसी जीव का भोजन नहीं बन पाता, जिससे नदियाँ विषाक्त हो जाती हैं।
(ii) अत्यधिक वनों की कटाई और जीवाश्म ईंधनों के जलने से तापमान बढ़ रहा है, जिसके कारण हिमालय के हिमनद (ग्लेशियर) इतनी तेज़ी से पिघल रहे हैं कि वर्षा उनकी पूर्ति नहीं कर पा रही है।
(iii) सीमेंट उद्योग जैसे कारखाने महीन धूल छोड़ते हैं जो हवा, पानी और मृदा को प्रदूषित करती है और जीवों के फेफड़ों को नुकसान पहुँचाती है।
3. पंजाब में भूजल के अत्यधिक दोहन का एक प्रकरण अध्ययन (Case Study) प्रस्तुत करें। इसके क्या कारण और परिणाम हुए?
उत्तर: पंजाब में भूजल संसाधनों का तेज़ी से क्षरण हुआ है:
कारण: 1960 के दशक में हरित क्रांति के तहत गेहूँ और धान की उच्च उपज वाली किस्मों का प्रयोग शुरू हुआ, जिन्हें बहुत अधिक पानी चाहिए था। किसानों को मुफ्त बिजली मिली, जिससे भूजल का अंधाधुंध निष्कर्षण (निकालना) शुरू हो गया। आधुनिक कृषि के लिए भारी मात्रा में कीटनाशकों और उर्वरकों का भी प्रयोग हुआ।
परिणाम: आज पंजाब के लगभग 80% क्षेत्र को भूजल के ‘अति-दोहित’ क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत किया गया है। भूजल स्तर 30 मीटर की गहराई तक गिर गया है जो किसानों की पहुँच से बाहर है। कीटनाशकों के रसायन भूजल में घुल गए हैं, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं।
4. सिक्किम द्वारा 100% जैविक कृषि (Organic Farming) अपनाने की यात्रा और उसके लाभों का वर्णन करें।
उत्तर: सिक्किम में महँगे रसायनों के प्रयोग से मृदा की उत्पादकता घट रही थी। जब सरकार ने जैविक खेती की नीति लागू की, तो पेमा जैसे किसानों के लिए शुरुआत मुश्किल थी क्योंकि रसायनों के कारण मृदा अपनी क्षमता खो चुकी थी। किसानों ने कम्पोस्ट खाद, नीम और लहसुन से बने प्राकृतिक कीट-निरोधक का प्रयोग किया। लगभग पाँच वर्ष बाद, यह मॉडल सफल हुआ। लाभ: 2016 में सिक्किम 100% जैविक राज्य बन गया। इससे स्थानीय जैव-विविधता वापस लौटी, लाभदायक कीड़े और पक्षी वापस आ गए। शुद्ध पर्यावरण के कारण पर्यटन में वृद्धि हुई और किसानों की आय में औसतन 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई। आज सिक्किम दुनिया के लिए एक वैश्विक संधारणीय मॉडल है।
5. प्राकृतिक संसाधनों के असमान वितरण के कारण समाज और राष्ट्रों के बीच किस प्रकार के प्रभाव या संघर्ष उत्पन्न होते हैं?
उत्तर: पृथ्वी पर प्राकृतिक संसाधन समान रूप से वितरित नहीं हैं। यह असमानता मानव बस्तियों, व्यापार प्रतिरूपों, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और संघर्षों को आकार देती है।
आर्थिक और व्यापारिक प्रभाव: प्राकृतिक संसाधनों (जैसे खनिज, तेल) तक पहुँच ने भारत में बड़े साम्राज्यों और व्यापार को गति दी (जैसे ‘वूट्ज़ स्टील’ का व्यापार)।
संघर्ष और युद्ध: प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण पाने के लिए इतिहास में कई युद्ध लड़े गए हैं और आज भी लड़े जा रहे हैं।
जल विवाद: प्राकृतिक संसाधन राजनीतिक सीमाओं को नहीं मानते। इसका सबसे बड़ा उदाहरण कावेरी नदी का जल विवाद है, जो कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के बीच जल वितरण को लेकर है।
विस्थापन: संसाधन-संपन्न क्षेत्रों में औद्योगीकरण से स्थानीय लोगों को लाभ होता है, लेकिन कई बार खदानों या उद्योगों के लिए उन्हें अपने ही घरों से विस्थापित होना पड़ता है।
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