NCERT Class 11 Home Science Chapter 10 हमारे परिधान Solutions Hindi Medium to each chapter is provided in the list so that you can easily browse through different chapters NCERT Class 11 Home Science Chapter 10 हमारे परिधान Notes in Hindi and select need one. NCERT Class 11 Home Science Chapter 10 हमारे परिधान Question Answers Download PDF. NCERT Class 11 Solutions for Home Science.
NCERT Class 11 Home Science Chapter 10 हमारे परिधान
Also, you can read the NCERT book online in these sections Solutions by Expert Teachers as per Central Board of Secondary Education (CBSE) Book guidelines. NCERT Class 11 Home Science Chapter 10 हमारे परिधान Solutions in Hindi are part of All Subject Solutions. Here we have given NCERT Class 11 Home Science Textbook Solutions Hindi Medium for All Chapters, You can practice these here.
हमारे परिधान
Chapter: 10
मानव पारिस्थितिकी और परिवार विज्ञान भाग – II
इकाई – (III) बाल्यावस्था
अंत में कुछ प्रश्न
1.आप कपड़े क्यों पहनते हैं? इसके कोई तीन कारण बताइए।
उत्तर: हम कपड़े निम्नलिखित कारणे से पहनते हैं:
(i) शालीनता (मर्यादा): कपड़े पहनने का एक प्रमुख कारण शालीनता है, क्योंकि समाज में इसे अनिवार्य माना जाता है। छोटे बच्चों को शरीर ढकने की जरूरत नहीं हैं, लेकिन बड़े होने पर उन्हें यह सिखाया जाता है। मर्यादा संबंधी धारणाएँ समाज पर निर्भर करती हैं। कुछ समुदायों में महिलाओं का सिर न ढकना अमर्यादा माना जाता है, जबकि अन्य में टाँगे न ढंकना अश्लीलता समझा जाता है।
(ii) सुरक्षा: हम पर्यावरण से सुरक्षा के लिए कपड़े पहनते हैं, जैसे मौसम की कठोर स्थितियों, धूल, मिट्टी और प्रदूषण से बचाव के लिए। गर्मी में हल्के सूती कपड़े और सिर ढकने के लिए कपड़े पहनते हैं, जबकि सर्दी में ऊनी कपड़े हमें ठंड से बचाते हैं। कपड़े शारीरिक सुरक्षा भी प्रदान करते हैं, जैसे अग्निशमन कर्मियों की विशेष पोशाक आग और धुएँ से बचाती है। खेलों में भी खिलाड़ी आर्म गार्ड, लेग गार्ड और रिस्ट बैंड जैसी सुरक्षा पोशाकें पहनते हैं।
(iii) श्रृंगार: हम आकर्षक दिखने के लिए भी कपड़े पहनते हैं। शरीर को सजाना-संवारना हर समाज में आम है, जैसे कान छिदवाना, नाखून पॉलिश लगाना, गोदना बनवाना, चोटी या जूड़ा बाँधना आदि। बाजार में कई तरह के कपड़े उपलब्ध हैं, जिनका चयन न केवल उनकी विशेषताओं बल्कि फैशन और सहायक सामग्रियों के आधार पर भी किया जाता है। कपड़ों की बनावट, प्रकार और देखभाल की जरूरतों को ध्यान में रखकर उन्हें पहना जाता है। अब हम कपड़े पहनने की आवश्यकताओं और अलग-अलग आयु वर्गों के लिए वेशभूषा के चयन पर विचार करेंगे।
2. बच्चों के लिए कपड़ों के चयन को प्रभावित करने वाले कारक कौन से हैं?
उत्तर: बच्चों के लिए कपड़ों के चयन को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक इस प्रकार हैं:
(i) आयु: बच्चों के वेशभूषा के चयन में आयु महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। छोटे बच्चों के कपड़े आमतौर पर माता-पिता तय करते हैं, लेकिन यह जरूरी है कि वे केवल सजावट के लिए नहीं, बल्कि सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर चुने जाएँ। बच्चे जैसे-जैसे बड़े होते हैं, वे अपने साथियों और समाज के पहनावे को लेकर जागरूक होने लगते हैं।
मध्य बाल्यावस्था में वे मित्र मंडली में समानता पसंद करने लगते हैं, जबकि किशोरावस्था में यह प्रवृत्ति और गहरी हो जाती है। इस उम्र में शारीरिक बदलाव, फ़ैशन और सामाजिक मानदंड उनके कपड़ों के चयन को प्रभावित करते हैं। किशोर अक्सर मानते हैं कि उनकी लोकप्रियता और सामाजिक स्वीकार्यता उनके पहनावे से जुड़ी होती है।
(ii) जलवायु और मौसम: पिछले भाग में आपने कि पर्यावरण और मौसम से बचने के लिए कपड़े पहने जाते हैं। इसलिए पढ़ा कि पर्यावरण बच्चों के लिए कपड़ों का चयन जलवायु के आधार पर किया जाना चाहिए। ठण्डे मौसम में या ऐसे जलवायु में पहने जाने वाले कपड़े, गर्म या शीतोष्ण मौसम में पहने जाने वाले कपड़ों से बहुत भिन्न होंगे, यहाँ तक कि भारी वर्षा वाले क्षेत्रों या अधिक आर्द्रता वाले क्षेत्रों में भी कपड़ों के प्रकार भिन्न होंगे। कुछ किस्म के कपड़े और पहनावे वर्ष में 3-4 माह के लिए ही उपयुक्त होते हैं अतः उनकी कीमत और मात्रा पर भली-भाँति विचार किया जाना चाहिए। यह बढ़ते बच्चों के मामले में और अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि अगले मौसम तक वे बड़े हो जाते हैं और ये कपड़े उन्हें छोटे हो जाएँगे।
(iii) अवसर: कपड़ों का चयन अवसर और दिन के समय पर निर्भर करता है। प्रत्येक अवसर के लिए वस्त्रों से जुड़ी परंपराएँ और नियम होते हैं। उदाहरण के लिए, अधिकांश स्कूलों में यूनिफॉर्म अनिवार्य होती है, और आभूषण आदि पहनने की अनुमति नहीं होती। जिन स्कूलों में यूनिफॉर्म नहीं होती, वहाँ बहुत दिखावटी कपड़े अनुशासन संबंधी समस्याएँ पैदा कर सकते हैं और बच्चों के लिए असहजता का कारण बन सकते हैं।
सामाजिक समारोहों और पार्टियों में बच्चे अच्छे परिधान पहनना पसंद करते हैं, जबकि शादी-ब्याह जैसे पारिवारिक आयोजनों में पारंपरिक कपड़े पहनने की परंपरा होती है। धार्मिक अनुष्ठानों में भी कपड़ों का चयन पारंपरिक मानकों के अनुसार किया जाता है। सही समय और अवसर के अनुसार उचित कपड़े पहनना न केवल मर्यादा बल्कि सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण होता है।
(iv) फ़ैशन: “फ़ैशन” शब्द से अभिप्राय एक ऐसी शैली से है जिसका जनसमूह पर प्रभाव समकालीन होता है। बच्चों के टी.वी. के निरंतर संपर्क में रहने से वे भी फ़ैशन के प्रति बहुत अधिक सचेत हो जाते हैं। फ़ैशन महत्वपूर्ण व्यक्तियों, सामाजिक या राजनीतिक नेताओं, फ़िल्मी सितारों या यहाँ तक कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय घटनाओं से प्रेरित हो सकता है। ये फ़ैशन कपड़े के प्रकार, रंग, कपड़े के डिजाइन, आकृति या परिधान की सिलाई या सामान्य रूप से कहें तो उप-साधनों/सहवस्त्रों (जैसे स्कार्ब्स, बैग, बैज, बेल्ट आदि) में परिलक्षित हो सकते हैं। कुछ फ़ैशन, जो ड्रेस की किसी विशेषता को बहुत अधिक उजागर करते हैं, या केवल समाज के केवल किसी वर्ग या किसी विशिष्ट क्षेत्र को प्रभावित करते हैं वे ज़्यादा समय तक प्रचलित नहीं रह पाते। फ़ैशन के ये रूप फैड्स कहलाते हैं। बच्चे और किशोर इनसे ज़्यादा प्रभावित हो सकते हैं।
(v) आय: आय कपड़ों के चयन को प्रभावित करती है। खरीदारी के दौरान केवल कीमत ही नहीं, बल्कि कपड़ों की टिकाऊपन, देखभाल और रख-रखाव भी महत्वपूर्ण होते हैं। परिवार में बच्चों की संख्या, उनकी आयु का अंतर और लिंग भी चयन को प्रभावित करता है।
उच्च-आय वर्ग के परिवारों में विशेष अवसरों के लिए अलग-अलग प्रकार की पोशाकें होती हैं, जबकि मध्यम और निम्न-आय वर्ग के परिवारों में बड़े बच्चों के कपड़े छोटे बच्चों को पहनाकर खर्च में बचत की जाती है। इसी तरह, स्कूलों में यूनिफॉर्म इसलिए निर्धारित की जाती है ताकि छात्रों के बीच सामाजिक-आर्थिक अंतर कम किया जा सके।
3. बच्चों के परिधान की किन्हीं चार आवश्यकताओं की चर्चा कीजिए।
उत्तर: बच्चों के परिधान की मुख्य चार आवश्यकताएँ इस प्रकार हैं:
(i) आराम और सुविधा: बच्चों के कपड़े आरामदायक होने चाहिए ताकि वे बिना किसी बाधा के खेल-कूद और गतिविधियाँ कर सकें। चुस्त कपड़े रक्त प्रवाह और गतिशीलता में रुकावट डालते हैं, जबकि बहुत भारी कपड़े संभालना मुश्किल होता है। सर्दियों में हल्के लेकिन गर्म कपड़े, जैसे एक्रिलिक और नायलॉन धागों से बने परिधान बेहतर होते हैं।
कपड़ों का सही फिट होना जरूरी है—न बहुत ढीले, न बहुत तंग। कंधों से ढीले कपड़े कमर से ढीले कपड़ों की तुलना में अधिक आरामदायक होते हैं। गला पर्याप्त चौड़ा होना चाहिए, और आस्तीन ऐसी होनी चाहिए जो शरीर की हलचल में बाधा न डाले। मुलायम, नमी सोखने वाले कपड़े बच्चे की कोमल त्वचा के लिए उपयुक्त होते हैं। सही फिटिंग वाले कपड़े चुनना चाहिए, लेकिन उनमें बच्चे की वृद्धि के लिए पर्याप्त गुंजाइश होनी चाहिए।
(ii) सुरक्षा: बच्चों के कपड़ों में आराम और सुरक्षा दोनों जरूरी हैं। बहुत ढीले कपड़े असुविधाजनक होने के साथ असुरक्षित भी हो सकते हैं, खासकर रसोई में, जहाँ वे आग पकड़ सकते हैं। लटके हुए दुपट्टे, कमरबंद या झालर साइकिल या घूमती वस्तुओं में फंसने का खतरा पैदा कर सकते हैं। बच्चों के कपड़े चटक रंगों के होने चाहिए ताकि वे वाहन चालकों को आसानी से दिख सकें। छोटे बटन और झालर शिशुओं के लिए खतरनाक हो सकते हैं, क्योंकि वे चीजों को मुँह में डालने की आदत रखते हैं।
(iii) वृद्धि के लिए गुंजाइश: बच्चों की शारीरिक वृद्धि और विकास को ध्यान में रखते हुए कपड़ों में वृद्धि के लिए गुंजाइश होनी चाहिए विशेषकर लंबाई बढ़ने के लिए। हालाँकि बहुत बड़े कपड़े खरीदने की सलाह नहीं दी जाती है क्योंकि वे न तो आरामदायक होते हैं और न ही सुरक्षित होते हैं। इतना फिट कपड़े चुनना होगा जिनमें लंबाई बढ़ने का प्रावधान हो। ऐसे कपड़े चुनें जो सिकुड़ते न हों। पैंटों के निचले किनारे पर अतिरिक्त कपड़ा लगा होना चाहिए ताकि लंबाई बढ़ने पर पैंट को लंबा किया जा सके। स्कर्टो पर छोटा या बड़ा करने वाली पट्टियाँ होनी चाहिए। रेगलिन आस्तीन सेट इन आस्तीनों की तुलना में बेहतर रहती है। कंधे पर प्लेटें और चुन्नटें होने से चौड़ाई बढ़ने पर ढीला करने की गुंजाइश रहती है।
(iv) सरल देखभाल: बच्चे उन कपड़ों से ज्यादा आराम महसूस करते हैं जिनके गंदे होने की चिंता नहीं होती। यहाँ तक कि माताएँ भी ऐसे कपड़ों को ज़्यादा पसंद करती हैं, जिनके देख-रेख की अधिक आवश्यकता नहीं पड़ती, जिन्हें आसानी से धोया जा सकता है और इस्त्री करने की जरूरत नहीं होती या बहुत कम होती है। दुहरी सिलाई अनिवार्य है क्योंकि यह सीधी सिलाई की तुलना में अधिक समय तक चलती है। घुटने, जेब के कोने और कोहनियों जैसे खिंचने वाले हिस्सों को अतिरिक्त मजबूत बनाया जा सकता है।
4. बच्च्चों के परिधान संबंधी आवश्यकताएँ उम्र के साथ क्यों बदलती हैं? शैशवावस्था, पूर्व विद्यालयी आयु और प्राथमिक विद्यालय वर्षों में बच्चों के परिधान की विशेषताओं पर चर्चा कीजिए।
उत्तर: (a) शैशवावस्था (जन्म से छह माह) में परिधान की विशेषताएँ:
(i) ऊष्णता, आराम और स्वच्छता – शिशु ज्यादातर समय सोते हैं और उनकी त्वचा नाजुक होती है, इसलिए कपड़े मुलायम, हल्के और आरामदायक होने चाहिए।
(ii) आसान पहनने और उतारने वाले कपड़े – कपड़े सामने से खुले हों या गले का हिस्सा बड़ा हो ताकि सिर के ऊपर से पहनाना न पड़े।
(iii) सुरक्षित डिजाइन – कपड़ों में तेज धागे, टाइट इलास्टिक, खुरदरे किनारे, और असुरक्षित हुक-बरत नहीं होने चाहिए ताकि शिशु को कोई चोट न पहुँचे।
(iv) सही सामग्री का चयन – ऊनी कपड़े सीधे त्वचा पर न पहनाकर फलालेन या सिल्क मिश्रण वाले कपड़े उपयोग किए जाएँ ताकि त्वचा को नुकसान न हो।
(v) डायपर्स की अनिवार्यता – मुलायम, अवशोषी, धोने में आसान और जल्दी सूखने वाले डायपर्स जरूरी होते हैं। घर में बने सूती डायपर्स का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन इन्हें अच्छी तरह विसंक्रमित करना चाहिए।
(vi) बनियान और कमीज का चयन – मौसम के अनुसार सूती या ऊनी-सूती मिश्रण वाली बनियान पहनाई जाती है। गर्मियों में सूती और सर्दियों में ऊनी बनियान उपयुक्त होती है।
(vii) ग्रामीण क्षेत्रों में परिधान – ग्रामीण इलाकों में शिशु सादे और घर पर बने कपड़े पहनते हैं, जो स्थानीय सामग्रियों से तैयार किए जाते हैं।
(b) पूर्व – विद्यालय आयु (2-6 वर्ष) में बच्चों के परिधान की विशेषताएँ:
(i) आराम और सुविधा – कपड़े हल्के, मुलायम और आरामदायक होने चाहिए ताकि बच्चे स्वतंत्र रूप से खेल और दौड़-भाग कर सकें।
(ii) मजबूती और टिकाऊपन – कपड़े मजबूत होने चाहिए ताकि वे खेल-कूद के दौरान फटें नहीं और कई बार धोने के बाद भी सही रहें।
(iii) आसान देखभाल – परिधान ऐसे होने चाहिए जिनकी सफाई और इस्त्री करना आसान हो। बहुत ज्यादा झालर, बटन या सजावटी तत्वों से बचना चाहिए।
(iv) शारीरिक वृद्धि के अनुसार चयन – इस उम्र के बच्चे तेजी से बढ़ते हैं, इसलिए ऐसे कपड़े खरीदें जो थोड़ी अतिरिक्त गुंजाइश वाले हों ताकि लंबे समय तक पहने जा सकें।
(v) रंग और फैशन की पसंद – इस उम्र में बच्चे अपने पसंदीदा रंग और डिजाइन चुनने लगते हैं। लड़कियाँ झालर वाली फ्रॉक पसंद कर सकती हैं, जबकि लड़के आमतौर पर आरामदायक कपड़े चुनते हैं।
(vi) व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति – प्रत्येक बच्चे के व्यक्तित्व का सम्मान करना चाहिए। जुड़वाँ बच्चों को भी जबरदस्ती एक जैसे कपड़े नहीं पहनाने चाहिए।
(vii) स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता – कपड़े पहनने में आसान होने चाहिए, जैसे– आगे से खुले हुए, बड़े बटन वाले, बिना कॉलर के और आरामदायक गले वाले परिधान, ताकि बच्चे खुद आसानी से पहन और उतार सकें।
(viii) सभी अवसरों के लिए उपयुक्तता – कम लेकिन बहुउपयोगी कपड़े खरीदें जो सभी मौकों और गतिविधियों के लिए उपयुक्त हों।
(xi) समाज और संस्कृति के अनुसार पहनावा – लड़कियाँ कभी-कभी लड़कों जैसे कपड़े (पैंट, जीन्स) पहन सकती हैं, लेकिन लड़कों को लड़कियों के कपड़े पहनने की अनुमति कम मिलती है।
(x) आत्मनिर्भरता को बढ़ावा – ऐसे कपड़े जो बच्चे खुद पहन सकें, उन्हें आत्मनिर्भर और अधिक स्वतंत्र बनने में मदद करते हैं।
(c) प्राथमिक विद्यालय वर्षों (5-11 वर्ष) में परिधान की विशेषताएँ:
(i) आराम और सक्रियता – बच्चों के कपड़े आरामदायक और खेल-कूद के अनुकूल होने चाहिए।
(ii) सामाजिक स्वीकृति – बच्चे अपनी मित्रमंडली के अनुसार कपड़े पहनना पसंद करते हैं।
(iii) स्वतंत्रता और पसंद – वे खुद कपड़े चुनना चाहते हैं और माता-पिता के सुझावों को कम पसंद करते हैं।
(iv) सही फ़िटिंग और फ़ैशन – बच्चे अब फ़ैशन को भी ध्यान में रखते हैं और सही फ़िटिंग पसंद करते हैं।
(v) सुरक्षा और देखभाल में सरलता – कपड़े टिकाऊ, पसीना सोखने वाले और आसानी से धोने योग्य होने चाहिए।
5. विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के कपड़ों की क्या विशेषताएँ होनी चाहिए?
उत्तर: विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के वस्त्रों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
(i) विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए कपड़े पहनने और उतारने का कार्य बहुत महत्वपूर्ण होता है। कुछ बच्चे स्वतंत्र रूप से स्वयं कपड़े पहनने में समर्थ होते हैं। यह उन्हें भावात्मक संतुष्टि देता है और सम्मान की भावना प्रदान करता है। परंतु बच्चा यदि बहुत गंभीर रूप से अक्षम हो या असंयमी हो तो देखभाल करने वाला उसकी सहायता करता है, तब इस प्रक्रिया में बहुत समय लगता है और यह थकानपूर्ण होता है।
(ii) आरामदायक कपड़ा (गर्मी में सूती, सर्दी में ऊनी-सूती मिश्रण)।
(iii) मजबूत और टिकाऊ ताकि चिकित्सा उपकरणों से न फटे।
(iv) केलिपर्स और ब्रेसेज के लिए दोहरी सिलाई।
(v) पहनने और उतारने में आसान (बड़ा गला, वेल्क्रो, ज़िपर, इलास्टिक कमरबंद)।
(vi) आसानी से धोने और संभालने योग्य।
(vii) सुंदर रंग और प्रिंट ताकि बच्चे आत्मविश्वास महसूस करें।
(viii) बच्चे और देखभाल करने वाले की सुविधा के अनुसार डिज़ाइन।

Hi! my Name is Parimal Roy. I have completed my Bachelor’s degree in Philosophy (B.A.) from Silapathar General College. Currently, I am working as an HR Manager at Dev Library. It is a website that provides study materials for students from Class 3 to 12, including SCERT and NCERT notes. It also offers resources for BA, B.Com, B.Sc, and Computer Science, along with postgraduate notes. Besides study materials, the website has novels, eBooks, health and finance articles, biographies, quotes, and more.