NIOS Class 12 Sociology Chapter 27 भारत में जाति व्यवस्था Solutions Hindi Medium As Per New Syllabus to each chapter is provided in the list so that you can easily browse throughout different chapters NIOS Class 12 Sociology Chapter 27 भारत में जाति व्यवस्था Notes in Hindi and select need one. NIOS Class 12 Sociology Solutions Hindi Medium Download PDF. NIOS Study Material of Class 12 Sociology Notes Paper Code: 331.
NIOS Class 12 Sociology Chapter 27 भारत में जाति व्यवस्था
Also, you can read the NIOS book online in these sections Solutions by Expert Teachers as per National Institute of Open Schooling (NIOS) Book guidelines. These solutions are part of NIOS All Subject Solutions. Here we have given NIOS Class 12 Sociology Notes, NIOS Senior Secondary Course Sociology Solutions in Hindi for All Chapter, You can practice these here.
भारत में जाति व्यवस्था
Chapter: 27
| मॉड्यूल -।V: भारतीय समाज |
पाठगत प्रश्न 27.1
कोष्ठक में दिये गये उपयुक्त शब्दों द्वारा रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए:
1. पक्का खाना ____________ द्वारा बनाया जाता है। (पत्तियाँ, पानी, घी)
उत्तर: पक्का खाना घी द्वारा बनाया जाता है।
2. ब्राह्मणों का व्यवसाय ____________ है। (खाल पर काम करना, पुरोहिती, व्यवसाय)
उत्तर: ब्राह्मणों का व्यवसाय पुरोहिती है।
3. अछूतों की पहचान आजकल ___________ होती है। (अन्य पिछड़े वर्ग, सवर्ण, दलित)
उत्तर: अछूतों की पहचान आजकल दलित होती है।
4. जाति की सदस्यता ___________ होती है। (वंशानुगत, अर्जित)
उत्तर: जाति की सदस्यता वंशानुगत होती है।
पाठगत प्रश्न 27.2
निम्नलिखित के जोड़े बनाइएः
| (1) अखिल भारतीय | जाति |
| (2) अर्जित प्रस्थिति | वर्ग |
| (3) अछूत | वर्ण |
| (4) चार हजार समूह | दलित |
उत्तर:
| (1) अखिल भारतीय | वर्ण |
| (2) अर्जित प्रस्थिति | वर्ग |
| (3) अछूत | दलित |
| (4) चार हजार समूह | जाति |
पाठगत प्रश्न 27.3
कोष्ठक में दिये गये उपयुक्त शब्द से रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए:
1. संस्कृतिकरण से अभिप्राय है कि ____________ जाति उच्च जाति हो जाती है। (निम्न, मध्यम, उच्च)
उत्तर: संस्कृतिकरण से अभिप्राय है कि निम्न जाति उच्च जाति हो जाती है।
2. पश्चिमीकरण से तात्पर्य है कि ___________ मूल्यों को अपनाना। (जापानी, पाश्चात्य, भारतीय)
उत्तर: पश्चिमीकरण से तात्पर्य है कि पाश्चात्य मूल्यों को अपनाना।
3. आधुनिकीकरण से अभिप्राय यह है कि हमें ___________ दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। (परम्परागत, अनुदारवादी, तार्किक)
उत्तर: आधुनिकीकरण से अभिप्राय यह है कि हमें तार्किक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
4. प्रभव जाति की _____________ जनसंख्या होती है। (अधिक, कम, बहुत कम)
उत्तर: प्रभव जाति की अधिक जनसंख्या होती है।
पाठान्त प्रश्न
1. वर्ण और जाति में क्या अन्तर है?
उत्तर: वर्ण और जाति में निम्नलिखित अंतर है—
| वर्ण | जाति |
| वर्ण केवल चार होते हैं: ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र। | भारत में जातियों की संख्या लगभग 4000 से अधिक है। |
| इसका पहला उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है; यह एक वैदिक, धार्मिक और विचारात्मक (पुस्तकीय) व्यवस्था है। | जातियाँ समय के साथ पेशों, औद्योगिक समूहों और क्षेत्रीय परिस्थितियों के कारण बनीं। |
| वर्ण का आशय रंग या गुण-कर्म से माना जाता था। | जाति का आधार जन्म होता है; जन्म से जाति तय होती है। |
| प्रारम्भिक वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था कठोर नहीं थी; वर्ण परिवर्तन संभव था। | जाति व्यवस्था व्यावहारिक, कठोर और रूढ़िबद्ध रही है। |
| प्रारंभ में अछूत प्रथा या अस्पृश्यता नहीं थी। | जातियों का स्थान (सोपान) प्रदेश के अनुसार बदल जाता है; हर क्षेत्र में अलग जाति श्रेष्ठ मानी जा सकती है। |
| वर्णों का ऊँच-नीच धर्मग्रंथों के आधार पर निर्धारित था। | आज समाज में वर्ण नहीं, बल्कि जातियाँ ही व्यावहारिक रूप से दिखाई देती हैं—जैसे ब्राह्मण, राजपूत, यादव, जाट, मदारी, तेली आदि। |
2. जाति और वर्ग के अन्तर की संक्षेप में विवेचना कीजिए।
उत्तर: जाति एक वंशागत समूह है, और वर्ग की प्रकृति निरपेक्षता की है। वर्ग व्यवस्था में बहिर्विवाह और अन्तर्विवाह होते हैं। इसमें गतिशीलता ऊपर की ओर होती है या नीचे की ओर। इसमें व्यक्ति जिसमें पैदा हुआ है उसमें रह सकता है तथा यह अनिवार्य रूप से एक सामाजिक और आर्थिक समूह है। भारत में सामान्यतया तीन वर्ग पाये जाते हैं: उच्च, मध्यम एवं निम्न। प्रत्येक वर्ग दो भागों में बंटा होता है। एक भाग उच्च होता है तो दूसरा निम्न। इसी प्रकार उच्च मध्यम वर्ग और निम्न मध्यम वर्ग। इसी तरह उच्च निम्न वर्ग और निम्न, निम्न वर्ग। वर्ग और जाति में बहुत बड़ा अन्तर यह है कि जाति कर्मकाण्ड पर निर्भर होती है जबकि वर्ग धर्मनिरपेक्ष होता है। कर्मकाण्ड में उच्चता का कारण धार्मिक मिथक है और धर्मनिरपेक्ष वर्षों का आशय आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक है। वर्ग चेतना पाई जाती है लेकिन जाति चेतना नहीं। अस्तु, शहरी क्षेत्रों में जातियों को भी आर्थिक दृष्टि से देखा जाता है।

Hi! my Name is Parimal Roy. I have completed my Bachelor’s degree in Philosophy (B.A.) from Silapathar General College. Currently, I am working as an HR Manager at Dev Library. It is a website that provides study materials for students from Class 3 to 12, including SCERT and NCERT notes. It also offers resources for BA, B.Com, B.Sc, and Computer Science, along with postgraduate notes. Besides study materials, the website has novels, eBooks, health and finance articles, biographies, quotes, and more.


