NIOS Class 12 Painting Chapter 8 पहाड़ी चित्रकला Solutions Hindi Medium As Per New Syllabus. to each chapter is provided in the list so that you can easily browse throughout different chapters NIOS Class 12 Painting Chapter 8 पहाड़ी चित्रकला Notes and select need one. NIOS Class 12 Painting Chapter 8 पहाड़ी चित्रकला Question Answers Download PDF. NIOS Study Material of Class 12 Painting Paper Code: 332.
NIOS Class 12 Painting Chapter 8 पहाड़ी चित्रकला
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पहाड़ी चित्रकला
Chapter: 8
| Part – 1: सिद्धांत |
| पाठगत प्रश्न 8.1 |
A. सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
1. कांगड़ा कला की केन्द्रीय विषयवस्तु है:
(i) प्रेम।
(ii) क्रोध।
(iii) भय।
(iv) आनंद।
उत्तर: (i) प्रेम।
2. वैष्णव धर्म के पुनरुत्थान में किनका योगदान था?
(i) तुलसीदास।
(ii) रामानुज और जयदेव।
(iii) तुलसीदास और जयदेव।
(iv) कृष्णराजा और तुलसीदास।
उत्तर: (ii) रामानुज और जयदेव।
3. कांगड़ा चित्रों में प्रेम को किस रूप में दर्शाया गया है?
(i) राम और सीता।
(ii) लक्ष्मी और नारायण।
(iii) राधा और कृष्ण।
(iv) हीर और रांझा।
उत्तर: (iii) राधा और कृष्ण।
| पाठगत प्रश्न 8.2 |
1. किन महान साहित्यिक कृतियों ने कांगड़ा के चित्रकारों को प्रेरित किया?
उत्तर: जयदेव द्वारा रचित महान कृति ‘गीतगोविन्द’ तथा गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित ‘रामचरितमानस’ जैसी महान साहित्यिक रचनाओं ने कांगड़ा शैली के चित्रकारों को बहुत अधिक प्रेरित किया।
2. कांगड़ा शैली के चित्रों के विकास में मुख्य कारक कौन-कौन से थे?
उत्तर: ग्यारहवीं एवं बारहवीं सदी में वैष्णव पंथ का पुनरुत्थान, रामानुज द्वारा विष्णु पूजा को लोकप्रिय बनाना और गुरु नानक द्वारा आरंभ किया गया महान सिख आन्दोलन कांगड़ा शैली के मुख्य कारक थे। इसके अलावा, पंजाब की स्थानीय संस्कृति तथा भक्ति आन्दोलन ने भी इन चित्रों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
3. कांगड़ा शैली के चित्रों की मुख्य विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: कांगड़ा शैली के चित्रों की सबसे बड़ी विशेषता उनका कोमल रेखांकन है, जिसके द्वारा विभिन्न आकारों और आकृतियों को उकेरा गया है। इन चित्रों में चमकदार, कोमल व मिश्रित रंगों का प्रयोग किया गया है। सूक्ष्म विवरण और आलंकारिक गुणों पर विशेष ध्यान दिया गया है। आकृतियों में स्त्रियों की हिरण जैसी आँखें, सीधी नाक और खूबसूरती से तराशे हुए चेहरे कांगड़ा चित्रों की प्रमुख पहचान हैं।
4. चित्रांकन हेतु रंग किन स्रोतों से प्राप्त किए जाते थे?
उत्तर: चित्रांकन के लिए रंग प्राकृतिक स्रोतों और खनिजों से प्राप्त किए जाते थे। उदाहरण के लिए, लाल रंग लाही नामक कीड़े या चुकन्दर से, नीला रंग जामुन या नील से, पीला रंग हल्दी व रामरज (एक पत्थर) से, हरा रंग पत्तियों को उबालकर, काला रंग काजल से तथा सुनहरा रंग अनार के छिलके से तैयार किया जाता था।
| पाठगत प्रश्न 8.3 |
A. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:
1. इन चित्रों में ___________ माध्यम प्रयोग किया गया है।
उत्तर: इन चित्रों में कागज पर अपारदर्शी जलरंग माध्यम प्रयोग किया गया है।
2. भागवत पुराण, ___________ और ___________ पांडुलिपियाँ हैं और इनमें कृष्ण की मुख्य उपस्थिति है।
उत्तर: भागवत पुराण, रसमंजरी और गीत गोविन्द पांडुलिपियाँ हैं और इनमें कृष्ण की मुख्य उपस्थिति है।
| पाठगत प्रश्न 8.4 |
A. पूछे गए प्रश्नों के उत्तर कीजिए:
1. ‘दरबारी को संबोधित करते कृष्ण’ चित्र किस अवधि में बना?
(i) 1665-70 ईसवी।
(ii) 1660-70 ईसवी।
(iii) 1560-70 ईसवी।
(iv) 1760-70 ईसवी।
उत्तर: (ii) 1660-70 ईसवी।
2. बसोहली चित्र शैली की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
(i) चमकीले रंग।
(ii) रंग हल्के।
(iii) बड़ी आँखें।
(iv) लंबे बालों का स्टाइल।
उत्तर: (i) चमकीले रंग।
| पाठगत प्रश्न 8.5 |
1. पहाड़ी चित्र किस कालखण्ड में बनाए गए हैं?
उत्तर: पहाड़ी चित्रकला मुख्य रूप से 18वीं सदी के कालखण्ड में विकसित हुई (इनका संरक्षण लगभग 1675 से 1823 ईस्वी के बीच किया गया)।
2. चंबा शैली के चित्रों की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर: चंबा शैली के चित्र पूर्णतः भारतीय हैं और अपनी मिट्टी से जुड़े हुए हैं। कृष्ण उपासना से प्रेरित इन चित्रों में सपाट तथा चमकदार रंगों का अधिक प्रयोग किया गया है। साथ ही, इन चित्रों में मुगल शैली एवं उसकी रंग-योजनाओं का प्रभाव भी स्पष्ट झलकता है, विशेषकर पुरुष आकृतियों की वेशभूषा में।
3. चंबा शैली के चित्रों के मुख्य विषय क्या हैं?
उत्तर: चंबा शैली के चित्रों के मुख्य विषय निम्नलिखित हैं: ‘दशावतार-श्रृंखला’ (1725-1750 ईस्वी), ‘विश्वरूप-श्रृंखला’ (18वीं सदी), ‘भागवत पुराण-श्रृंखला’ (1757 ईस्वी) और ‘रामायण’ (1750-1775 ईस्वी)।
| पाठांत प्रश्न |
1. ‘कांगड़ा चित्रकला’ की केंद्रीय विषयवस्तु क्या है?
उत्तर: कांगड़ा चित्रकला की केंद्रीय विषयवस्तु ‘प्रेम’ है। इन चित्रों में मानवीय भावनाओं और विशेषकर राधा-कृष्ण की प्रेमलीला को अत्यंत गरिमापूर्ण, लयपूर्ण और सौंदर्यपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया गया है।
2. कांगड़ा चित्रों में प्रेम को किस प्रकार दर्शाया गया है?
उत्तर: कांगड़ा चित्रों में प्रेम को विशुद्ध रूप से राधा और कृष्ण की दैवीय प्रेमलीला के रूप में दर्शाया गया है। उदाहरण के लिए ‘कदंब वृक्ष के नीचे’ चित्र में कृष्ण और राधा को यमुना के किनारे घने उपवन में दर्शाया गया है, जो दो आत्माओं के एकरूप हो जाने और गहरे आध्यात्मिक अनुभव का प्रतीक है।
3. पहाड़ी चित्रकला में 16वीं तथा 17वीं सदी के धार्मिक नायकों, कवियों और विचारकों का क्या योगदान है?
उत्तर: 16वीं और 17वीं सदी में अनेक महान लेखकों, कवियों और दार्शनिकों ने जन्म लिया जिन्होंने वैष्णववाद का प्रसार किया। उन्होंने प्रेमी और प्रेमिका (विशेषकर राधा-कृष्ण) के संबंधों को एक गहरे आध्यात्मिक अनुभव के रूप में वर्णित किया, जिसने पहाड़ी चित्रकारों को नए विषय दिए और कला के विकास में बहुत बड़ा योगदान दिया।
4. ‘बसोहली शैली’ की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर: बसोहली शैली के चित्र सरल होते हुए भी शक्ति और आदिम जीवंतता से भरे होते हैं। इनमें कांगड़ा शैली के विपरीत चमकीले और शुद्ध रंगों का इस्तेमाल होता है। बड़ी-बड़ी चमकती आँखें, सुडौल आकृतियाँ, हरे भूदृश्यों का चित्रण और चित्रों का ऊर्जावान प्रारूप इस शैली को अद्वितीय बनाते हैं।
5. कांगड़ा और बसोहली चित्रों में कृष्ण तथा राधा की आकृतियों में क्या अन्तर है?
उत्तर: कांगड़ा शैली में कृष्ण को एक साधारण पशुपालक, ग्रामीण और शरारती ग्वाले के रूप में प्राकृतिक परिवेश में दर्शाया गया है तथा राधा को लजीली और शर्मीली दिखाया गया है। इसके विपरीत, बसोहली शैली में कृष्ण का शहरी और अभिजात्य (राजपुरुष) रूप प्रस्तुत किया गया है और राधा को महल में राजसी अंदाज में आत्मविश्वास से भरा हुआ चित्रित किया गया है।
6. चंबा चित्रों की मुख्य विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: चंबा शैली के चित्र कृष्ण उपासना से गहरे रूप में प्रेरित हैं। यह शैली पूरी तरह भारतीय है। इसमें जटिल और प्रतीकात्मक प्रस्तुति की जाती है और सपाट व चमकदार रंगों का प्रयोग होता है। चंबा के चित्रकारों पर मुगल चित्रकला और वेशभूषा का भी उल्लेखनीय प्रभाव देखा जा सकता है।
7. लघुचित्रों को चित्रित करने में किस माध्यम का प्रयोग किया गया है?
उत्तर: लघुचित्रों को बनाने में प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त ‘कागज पर अपारदर्शी जलरंगों’ का प्रयोग किया गया है। इसके लिए ‘वसली’ नामक विशेष हस्तनिर्मित कागज तैयार किया जाता था जिस पर सफेदी (खड़िया मिट्टी) का लेप लगाकर उसे चिकना किया जाता था।
8. जयदेव कृत ‘गीत गोविन्द’ ने पहाड़ी चित्रकारों को किस प्रकार प्रेरित किया?
उत्तर: जयदेव द्वारा रचित ‘गीत गोविन्द’ राधा और कृष्ण के दैवीय और आध्यात्मिक प्रेम पर आधारित है। 11वीं-12वीं शताब्दी में वैष्णव पंथ के पुनरुत्थान के बाद इस काव्य के पदों ने पहाड़ी चित्रकारों के हृदयों को गहराई से छुआ। परिणामस्वरूप, चित्रकारों ने इस महान काव्य के प्रेम प्रसंगों को अपने चित्रों का मुख्य आधार बनाया।
9. रंगों के सांकेतिक प्रयोग का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: पहाड़ी चित्रकला में विभिन्न भावनाओं और देवी-देवताओं को दर्शाने के लिए रंगों का सांकेतिक प्रयोग किया जाता था। जैसे ‘विश्वरूप 1’ चित्र में शिव, ब्रह्मा, विष्णु आदि देवों और उनकी विभिन्न भुजाओं को दर्शाने के लिए लाल, हरे, सलेटी, नीले, पीले और गुलाबी रंगों का प्रतीकात्मक प्रयोग हुआ है।
10. वैष्णव पंथ किसका प्रतीक है?
उत्तर: वैष्णव पंथ भगवान विष्णु और उनके अवतारों (मुख्य रूप से राम और कृष्ण) के प्रति प्रेम, भक्ति और उपासना का प्रतीक है, जिसे रामानुज तथा अन्य धार्मिक विचारकों ने लोकप्रिय बनाया।
11. ‘बसोहली’ चित्रों के विषय क्या हैं?
उत्तर: ‘बसोहली’ चित्रों के मुख्य विषय ‘रसमंजरी’, ‘भागवत पुराण’ और ‘गीत गोविन्द’ जैसी रचनाओं पर आधारित हैं, जिनमें भगवान कृष्ण के राजसी और शहरी रूप का प्रमुखता से चित्रण किया गया है।
12. बसोहली शैली की विशिष्टता क्या है?
उत्तर: बसोहली शैली अपनी स्थानीय बेजोड़ रंग-योजनाओं, काष्ठ वास्तुशिल्पीय अभिप्रायों, बड़ी चमकती आँखों और सुडौल आकृतियों के कारण 17वीं और 18वीं सदी में प्रचलित अन्य सभी लघुचित्र शैलियों से एकदम अलग और विशिष्ट स्थान रखती है।
13. ‘बसोहली’ और ‘कांगड़ा’ शैलियों के कृष्ण और राधा में क्या अंतर है?
उत्तर: कांगड़ा चित्रों में कृष्ण और राधा को वृंदावन के प्राकृतिक और देहाती परिवेश में एक ग्वाले और शर्मीली नायिका के रूप में दर्शाया गया है। जबकि, बसोहली चित्रों में उन्हें एक राजसी महल के भीतर, शहरी, अभिजात्य और पूर्ण आत्मविश्वास से भरे हुए दरबारियों और राजपुरुष/महारानी के रूप में चित्रित किया गया है।

