NIOS Class 12 Painting Chapter 10 कंपनी चित्रशैली Solutions Hindi Medium As Per New Syllabus. to each chapter is provided in the list so that you can easily browse throughout different chapters NIOS Class 12 Painting Chapter 10 कंपनी चित्रशैली Notes and select need one. NIOS Class 12 Painting Chapter 10 कंपनी चित्रशैली Question Answers Download PDF. NIOS Study Material of Class 12 Painting Paper Code: 332.
NIOS Class 12 Painting Chapter 10 कंपनी चित्रशैली
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कंपनी चित्रशैली
Chapter: 10
| Part – 1: सिद्धांत |
| पाठगत प्रश्न 10.1 |
1. सुमेलित कीजिए:
| 1. शैली | (i) भूरा |
| 2. रंग | (ii) जलरंग |
| 3. माध्यम | (iii) कंपनी |
| 4. तकनीक | (iv) मेट्रोपॉलिटन म्यूज़ियम न्यूयॉर्क |
| 5. संग्रह | (v) विशिष्ट पश्चिमी जलरंग |
उत्तर:
| 1. शैली | (iii) कंपनी |
| 2. रंग | (i) भूरा |
| 3. माध्यम | (ii) जलरंग |
| 4. तकनीक | (v) विशिष्ट पश्चिमी जलरंग |
| 5. संग्रह | (iv) मेट्रोपॉलिटन म्यूज़ियम न्यूयॉर्क |
| पाठागत प्रश्न 10.2 |
A. सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
1. ‘बाज़ार का दृश्य’ चित्र के चित्रकार का नाम है?
(i) शिवदयाल लाल।
(ii) मानकु।
(iii) नंदलाल बसु।
(iv) अमृता शेरगिल।
उत्तर: (i) शिवदयाल लाल।
2. ‘बाज़ार का दृश्य’ में औरतें बेच रही हैं?
(i) आलू, टमाटर।
(ii) कुर्ता घोती और पगड़ी।
(iii) सब्जियाँ और अनाज।
(iv) दो भिन्न प्रकार की सब्जियाँ।
उत्तर: (iii) दो औरतें सब्ज़ी, फल एवं अनाज बेच रही हैं।
3. ‘बाज़ार का दृश्य’ में किस माध्यम का प्रयोग किया गया है?
(i) कागज पर जलरंग।
(ii) कागज पर पोस्टर रंग।
(iii) विभिन्न माध्यम।
(iv) कागज पर अपारदशी जलरंग।
उत्तर: (iv) कागज़ पर अपारदर्शी जलरंग।
| पाठागत प्रश्न 10.3 |
1. ‘पालकी’ से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: ‘मियाना’ (एक संदूक जैसा आकार) का अर्थ ही पालकी होता है।
2. ‘पालकी’ चित्र-शैली का नाम लिखिए।
उत्तर: वाराणसी, कंपनी शैली।
3. ‘पालकी’ चित्र में पालकी कहारों ने किस तरह के वस्त्र पहने हैं?
उत्तर: कहारों ने सफेद कुर्ता, धोती (पीली और भूरी) एवं नीली पगड़ी पहनी है।
4. ‘पालकी’ चित्र किस काल में बना है?
उत्तर: यह चित्र 1815 से 1820 के मध्य बना है। यह भारतीय यातायात एवं व्यवसाय दर्शाने वाले 42 चित्रों के समूह से लिया गया है।
| पाठांत प्रश्न |
1. यूरोपीय लोगों ने भारतीय चित्रकारों को चित्र बनाने के लिए क्यों प्रेरित किया?
उत्तर: 18वीं सदी के उत्तरार्ध में जब ‘ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी’ का विस्तार हुआ, तो इंग्लैंड से कई कर्मचारी भारत आए। ये अंग्रेज़ भारत के जनसामान्य की विविधता, शानदार ऐतिहासिक इमारतों और सुंदर प्राकृतिक दृश्यों से बहुत अधिक आकर्षित और अचंभित थे। वे इन सुंदर छवियों को स्मृति और निशानी के तौर पर इंग्लैंड में बसे अपने रिश्तेदारों और मित्रों के लिए ले जाना चाहते थे। चूँकि अधिकांश ब्रिटिश अधिकारियों के पास इतने संसाधन नहीं थे कि वे ब्रिटिश चित्रकारों द्वारा बनाए गए महँगे चित्र खरीद सकें, इसलिए उन्होंने भारतीय चित्रकारों को अपने पसंदीदा विषयों (भारतीय जनजीवन और भूदृश्य) पर चित्र बनाने के लिए प्रेरित किया।
2. कंपनी चित्रों की विषयवस्तु क्या है?
उत्तर: कंपनी चित्रों की विषयवस्तु अत्यधिक विविध और वास्तविक जीवन से जुड़ी थी। भारतीय चित्रकारों ने पश्चिमी संरक्षकों की माँग को पूरा करने के लिए भारतीय भूदृश्य, पशु-पक्षियों, वनस्पतियों, स्थानीय शासकों की छवियों, दरबार के दृश्यों, ऐतिहासिक इमारतों, त्यौहारों एवं उत्सवों के साथ-साथ व्यापार और व्यावसायिक पेशों को अपनी चित्रकारी का मुख्य विषय बनाया।
3. कंपनी चित्रों की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: कंपनी चित्रशैली की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
कला तत्वों का सम्मिश्रण: इन चित्रों में राजपूत और मुग़ल लघुचित्रों के पारंपरिक तत्वों के साथ पश्चिमी दृष्टिकोण (Western perspective) का अनूठा सम्मिश्रण देखने को मिलता है।
माध्यम और तकनीक: इन चित्रों को मुख्य रूप से कागज़ पर, और कभी-कभी हाथीदांत पर, जलरंगों के माध्यम से बनाया गया है। इसमें इंडो-यूरोपियन जलरंग तकनीक और विशिष्ट पश्चिमी जलरंग तकनीक का प्रयोग किया गया है।
यथार्थवाद: पश्चिमी संरक्षकों के लिए काल्पनिक चित्रण के बजाय वास्तविक दस्तावेज़ीकरण (Realistic Documentation) पर बहुत अधिक ज़ोर दिया गया। हालाँकि, इनमें न तो तस्वीरों जैसी शत-प्रतिशत सटीकता थी और न ही लघुचित्रों जैसी पूरी स्वतंत्रता।
छाया-प्रकाश और रंग: गहराई का आभास लाने के लिए रंगों की छटाओं का क्रमिक आरोह-अवरोह (Gradual tones) रखा जाता था।
4. उन शहरों के नाम लिखिए जिनमें 18वीं एवं 19वीं सदी के मध्य कंपनी चित्र बनाए गए।
उत्तर: कंपनी चित्रों का सृजन सबसे पहले मद्रास प्रेसीडेंसी में हुआ था। इसके बाद यह शैली भारत के अन्य प्रमुख नगरों में तेज़ी से फैल गई, जिनमें कलकत्ता, मुर्शिदाबाद, पटना, बनारस (वाराणसी), लखनऊ, आगरा, दिल्ली, पंजाब और पश्चिमी भारत के अन्य केंद्र शामिल हैं।
5. कंपनी चित्रों के उद्भव पर विस्तार से लिखिए।
उत्तर: 18वीं सदी के उत्तरार्ध में भारत में ‘ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी’ के प्रभाव का विस्तार हो रहा था। इसी समय, जिन भारतीय कलाकारों, कवियों और संगीतकारों को अब तक राज दरबारों का संरक्षण प्राप्त था, उन्हें आजीविका के नए अवसर तलाशने के लिए दूर जाना पड़ा। दूसरी ओर, भारत आए ब्रिटिश कर्मचारी यहाँ की ऐतिहासिक और प्राकृतिक सुंदरता को निशानी के तौर पर इंग्लैंड ले जाना चाहते थे, लेकिन वे ब्रिटिश चित्रकारों का खर्च नहीं उठा सकते थे। इसलिए उन्होंने भारतीय चित्रकारों को काम दिया। भारतीय चित्रकारों ने इस नए अवसर का स्वागत किया। ब्रिटिश संरक्षकों ने भी शीघ्र ही समझ लिया कि भारतीय चित्रकार उनके विषयों पर अधिक सटीक और प्रभावशाली ढंग से चित्र बना सकते हैं क्योंकि वे स्थानीय परिवेश से पूरी तरह वाकिफ थे। इस प्रकार, भारतीय चित्रकारों द्वारा ब्रिटिश मांग पर बनाए गए इन चित्रों को सामूहिक रूप से ‘कंपनी चित्र’ कहा गया। यह शैली मद्रास प्रेसीडेंसी से शुरू होकर पूरे भारत में फैल गई और 18वीं तथा 19वीं सदी में भारतीय कला-जगत पर हावी रही।
6. पटना में बने प्रसिद्ध कंपनी चित्र ‘बाज़ार का दृश्य’ का संक्षिप्त विवरण लिखिए।
उत्तर: ‘बाज़ार का दृश्य’ 1850 में चित्रकार शिवदयाल लाल द्वारा पटना में कागज़ पर अपारदर्शी जलरंगों से बनाया गया था।
दृश्य: इस चित्र में पटना के पारंपरिक बाज़ार का स्वाभाविक दृश्य दर्शाया गया है जहाँ चार महिलाएँ (दो दुकानदार और दो ग्राहक) मौजूद हैं। ग्राहक महिलाएँ फल और अनाज खरीद रही हैं।
बारीकियाँ: चित्रकार ने बेचे जा रहे फलों, सब्ज़ियों और अनाज के दानों की पहचान दर्शाने के लिए उनके प्राकृतिक रंगों का बड़ी सूक्ष्मता से प्रयोग किया है। चारों स्त्रियों ने साड़ियाँ और आभूषण पहने हैं, और साड़ियों के मोड़ तथा तहों को बहुत सुंदरता से चित्रित किया गया है।
तकनीक: इसमें सपाट रंगों और सधी हुई रेखाओं का प्रयोग है। पृष्ठभूमि को अग्रभूमि से अलग दिखाने के लिए रंगों का क्रमिक आरोह-अवरोह और आकाश में बादल दिखाए गए हैं। अपारदर्शी जलरंग के कारण यह चित्र बहुरंगी और चमकदार बना है।
7. अपने पाठ्यक्रम से उस चित्र के बारे में विस्तार से लिखिए जिसमें विभिन्न प्रजाति के पक्षियों और जानवरों को चित्रित किया गया है और जो अंग्रेज़ों के लिए नए थे।
उत्तर: पाठ्यक्रम में दिया गया यह चित्र ‘साधारण भारतीय चकोर चिड़िया’ का है, जिसे 18वीं सदी में लखनऊ में किसी अज्ञात चित्रकार द्वारा कागज़ पर जलरंग से बनाया गया है।
विस्तृत चित्रण: इस चित्र में चकोर चिड़िया को पृष्ठभूमि के विस्तृत भूदृश्य की तुलना में प्रमुखता से और बहुत बड़े आकार में दिखाया गया है।
बारीक रेखांकन: चिड़िया के शरीर के धब्बों और चिह्नों को दर्शाने के लिए काले और भूरे रंग की अनेक छटाओं का बहुत ही सुंदरता से प्रयोग किया गया है। प्रत्येक पंख में बारीक रंग भरकर उसकी बाह्यरेखा उकेरी गई है। आँखों को घेरता हुआ चमकदार वृत्त और पैरों का खुरदरापन दर्शाने के लिए समांतर रेखाओं की पुनरावृत्ति की गई है।
उद्देश्य: इस प्रकार के चित्रों का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश दर्शकों के लिए नई प्रजाति का पूर्ण और सटीक विवरण प्रस्तुत करना था। इसे एल्बम में रखने लायक छोटे आकार में ठेठ पश्चिमी जलरंग तकनीक से बनाया गया था। यह चित्र फ्रांसीसी योद्धा क्लाउड मार्टिन के संग्रह का हिस्सा था।
8. वाराणसी में बने कंपनी चित्र ‘पालकी’ की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: 1815 से 1820 के बीच वाराणसी में अज्ञात चित्रकार द्वारा निर्मित ‘पालकी’ चित्र भारतीय यातायात एवं व्यवसायों को दर्शाने वाले 42 चित्रों के समूह का एक प्रसिद्ध चित्र है।
विषय: इसमें एक ‘मियाना’ (संदूक के आकार की पालकी) में तकिए के सहारे बैठे एक भद्र पुरुष को दिखाया गया है। इस पालकी को चार कहार उठाए हुए हैं।
वेशभूषा एवं विवरण: चारों कहारों ने सफेद कुर्ता, पीली व भूरी धोती, नीली पगड़ी पहनी है और कमर में लाल कपड़ा लपेटा है। वे पालकी का भार उठाकर लयबद्ध गति से चलते हुए प्रतीत होते हैं।
तकनीक एवं संयोजन: यह इंडो-यूरोपियन जलरंग तकनीक से कागज़ पर बना है। पालकी के ज्यामितीय आकार का रेखांकन महीन रेखाओं से अत्यंत सटीकता के साथ किया गया है। इसमें मुख्य ध्यान मानव आकृतियों और पालकी पर है, इसलिए पृष्ठभूमि को खाली छोड़ दिया गया है और केवल ज़मीन का आभास देने के लिए हल्की परछाइयाँ बनाई गई हैं।
9. कंपनी शैली के चित्रकार शिवदयाल लाल की रेखांकन पद्धति का संक्षिप्त विवरण लिखिए।
उत्तर: चित्रकार शिवदयाल लाल ने अपने चित्रों में सपाट रंगों (Flat colors) और सधी हुई रेखाओं का संतुलित प्रयोग किया है। वे वस्तुओं का अत्यंत सूक्ष्म और सटीक रेखांकन करते थे; जैसे फलों, सब्जियों, अनाज के दानों और कपड़ों की बारीकियों (मोड़ व तहों) को उन्होंने बड़ी सटीकता और सुंदरता के साथ उकेरा है। उनके द्वारा अपारदर्शी जलरंगों के प्रयोग के कारण चित्रों में बहु-रंगी और चमकदार रंग-छटाएँ उभर कर आती थीं।
10. ‘बाज़ार का दृश्य’ चित्रकला शैली का नाम लिखिए।
उत्तर: यह चित्र ‘कंपनी शैली, पटना’ से संबंधित है।
11. ‘बाज़ार का दृश्य’ चित्रकला की किस शाखा से संबद्ध है?
उत्तर: यह चित्रकला की ‘कंपनी शाखा’ (कंपनी चित्रशैली) से संबद्ध है।
12. इस चित्रकला को बनाने के लिए किस माध्यम का प्रयोग किया गया है?
उत्तर: ‘बाज़ार का दृश्य’ चित्र को बनाने के लिए कागज़ पर अपारदर्शी जलरंग माध्यम का प्रयोग किया गया है।
13. ‘पक्षी के विवरण’ में प्रयुक्त रंगों के नाम लिखिए।
उत्तर: चकोर चिड़िया के शरीर के धब्बों और चिह्नों को चित्रित करने हेतु विशेष रूप से काले एवं भूरे रंग की अनेक छटाओं का सुंदरता से प्रयोग किया गया है।
14. उस व्यक्ति का नाम लिखिए जिसके एल्बम से पक्षी संबंधी चित्र लिया गया है।
उत्तर: यह चित्र एक फ्रांसीसी सैनिक और कला-संरक्षक क्लाउड मार्टिन (Claude Martin) के चित्र संग्रह (एल्बम) से लिया गया है।
15. किस मुग़ल बादशाह ने वनस्पतियों और जीवों की एल्बम बनाने को बहुत महत्व दिया है?
उत्तर: मुग़ल सम्राट जहाँगीर के समय से ही पशु-पक्षी एवं पुष्प भारतीय कला का महत्त्वपूर्ण अंग रहे हैं, उन्होंने वनस्पतियों और जीवों के चित्रण को बहुत महत्व दिया था।
16. इस चित्रकला के काल का उल्लेख कीजिए (पक्षी वाले चित्र का काल)।
उत्तर: ‘साधारण भारतीय चकोर चिड़िया’ का यह चित्र 18वीं सदी ईसवी में बनाया गया था।

