NIOS Class 10 Indian Culture and Heritage Chapter 15 प्राचीन भारत के वैज्ञानिक

NIOS Class 10 Indian Culture and Heritage Chapter 15 प्राचीन भारत के वैज्ञानिक Solutions Hindi Medium As Per New Syllabus to each chapter is provided in the list so that you can easily browse throughout different chapters NIOS Class 10 Indian Culture and Heritage Chapter 15 प्राचीन भारत के वैज्ञानिक Notes in Hindi and select need one. NIOS Class 10 Indian Culture and Heritage Question Answers Download PDF. NIOS Study Material of Class 10 Indian Culture and Heritage Notes Paper Code: 223.

NIOS Class 10 Indian Culture and Heritage Chapter 15 प्राचीन भारत के वैज्ञानिक

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Also, you can read the NIOS book online in these sections Solutions by Expert Teachers as per National Institute of Open Schooling (NIOS) Book guidelines. These solutions are part of NIOS All Subject Solutions. Here we have given NIOS Class 10 Business Studies Notes, NIOS Secondary Course Indian Culture and Heritage Solutions in Hindi for All Chapter, You can practice these here.

Chapter: 15

पाठगत प्रश्न 15.1

1. गणित के क्षेत्र में बौधायन के दो प्रमुख योगदानों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: बौधायन के दो प्रमुख योगदान निम्नलिखित हैं:

1. वह ‘पाई’ का मूल्य ज्ञात करने वाले पहले गणितज्ञ थे।

2. उन्होंने उस प्रमेय का आविष्कार किया जिसे आज ‘पाइथागोरस प्रमेय’ के नाम से जाना जाता है।

2. शून्य का आविष्कार किसने किया?

उत्तर: दिए गए स्रोतों के अनुसार, शून्य का आविष्कार आर्यभट्ट ने किया।

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3. ब्रह्मस्फुट सिद्धान्तिका का क्या महत्त्व है?

उत्तर: इस ग्रन्थ का महत्त्व यह है कि इसके माध्यम से अरब जगत भारतीय गणितीय व्यवस्थाओं और पद्धतियों से परिचित हो सका।

4. निम्नलिखित कृतियों का उनके लेखकों के नाम से मिलान कीजिए:

कृतियों के नामलेखकों के नाम
1. शुल्व सूत्र1. आर्यभट्ट
2. आर्यभटीय2. महावीराचार्य
3. ब्रह्मस्फुट सिद्धान्तिका3. बौधायन
4. सिद्धान्त शिरोमणि4. ब्रह्मगुप्त
5. गणितसार संग्रह5. भास्कराचार्य

उत्तर:

कृतियों के नामलेखकों के नाम
1. शुल्व सूत्र3. बौधायन
2. आर्यभटीय1. आर्यभट्ट
3. ब्रह्मस्फुट सिद्धान्तिका4. ब्रह्मगुप्त
4. सिद्धान्त शिरोमणि5. भास्कराचार्य
5. गणितसार संग्रह2. महावीराचार्य

पाठगत प्रश्न 15.2

1. कणाद कौन था? उसे यह नाम कैसे मिला?

उत्तर: कणाद छठी शताब्दी के एक वैज्ञानिक थे जो भारतीय दर्शनों में से एक ‘वैशेषिक दर्शन’ से सम्बंधित थे। बचपन से ही उनकी रुचि अत्यंत सूक्ष्म ‘कणों’ (particles) में थी, इसलिए उनका नाम ‘कणाद’ पड़ा।

2. बृहत्संहिता के लेखक कौन थे?

उत्तर: बृहत्संहिता के लेखक वराहमिहिर थे।

3. नागार्जुन अपने जीवन में क्या प्राप्त करना चाहते थे?

उत्तर: नागार्जुन अपने प्रयोगों के माध्यम से मूल धातुओं को सोने में बदलना चाहते थे।

4. नागार्जुन के ग्रंथ रसरत्नाकर की विषय वस्तु क्या है?

उत्तर: उनके ग्रंथ रसरत्नाकर में सोना, चांदी, टिन और तांबा जैसी धातुओं को निकालने की विधियों का विस्तार से वर्णन किया गया है।

पाठगत प्रश्न 15.3

1. आयुर्वेद क्या है?

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उत्तर: आयुर्वेद प्राचीन भारत में विकसित चिकित्सा विज्ञान की एक स्वदेशी व्यवस्था है। इसका शाब्दिक अर्थ है ‘अच्छा स्वास्थ्य और लंबी आयु’। यह पद्धति केवल बीमारियों का इलाज ही नहीं करती, बल्कि उनके कारणों और लक्षणों को समझकर स्वास्थ्य और दीर्घजीवन प्रदान करने का उद्देश्य रखती है।

2. औषध विज्ञान पर सबसे प्राचीन पुस्तक ……………… है।

………………………………………………………

उत्तर: औषध विज्ञान पर सबसे प्राचीन पुस्तक आत्रेय संहिता है।

3. सुश्रुत संहिता ……………… विषयक ग्रंथ है।

उत्तर: सुश्रुत संहिता शल्य चिकित्सा विषयक ग्रंथ है।

4. प्राचीन भारतीय औषध विज्ञान के जनक……………… हैं। उन्होंने ……………… नामक ग्रन्थ की रचना की।

उत्तर: प्राचीन भारतीय औषध विज्ञान के जनक चरक हैं। उन्होंने चरक संहिता नामक ग्रन्थ की रचना की।

5. योग का क्या अर्थ होता है?

………………………………………………………

उत्तर: ‘योग’ शब्द संस्कृत के ‘योक्त’ शब्द से बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है मन को आत्मा के साथ जोड़ना और बाहरी इन्द्रियों के विषयों से विरक्त करना। यह चेतना को पवित्र करके संतुलन की स्थिति पैदा करता है।

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