NIOS Class 10 Folk Art Chapter 4 पारंपरिक और समकालीन विधि और सामग्री

NIOS Class 10 Folk Art Chapter 4 पारंपरिक और समकालीन विधि और सामग्री Solutions Hindi Medium As Per New Syllabus to each chapter is provided in the list so that you can easily browse throughout different chapters NIOS Class 10 Folk Art Chapter 4 पारंपरिक और समकालीन विधि और सामग्री Notes in Hindi and select need one. NIOS Class 10 Folk Art Question Answers Download PDF. NIOS Study Material of Class 10 Folk Art Notes Paper Code: 244.

NIOS Class 10 Folk Art Chapter 4 पारंपरिक और समकालीन विधि और सामग्री

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Also, you can read the NIOS book online in these sections Solutions by Expert Teachers as per National Institute of Open Schooling (NIOS) Book guidelines. These solutions are part of NIOS All Subject Solutions. Here we have given NIOS Class 10 Folk Art Notes, NIOS Secondary Course Folk Art Solutions in Hindi for All Chapter, You can practice these here.

Chapter: 4

पाठगत प्रश्न 4.1

1. मानव ने चित्रण पद्धतियों के विकास हेतु कहाँ से प्रेरणा ली?

उत्तर: मानव ने चित्रण पद्धतियों के विकास हेतु प्रकृति के अध्ययन एवं उसकी घटनाओं से प्रेरणा ली।

2. आदिवासी लोक चित्रकारों ने चित्रण सामग्री का चुनाव किस प्रकार सीखा?

उत्तर: उन्होंने प्रकृतिक उपादनों एवं वस्तुओं के निरीक्षण एवं परिक्षण से आस-पास सहज उपलब्ध सामग्री का चित्रण हेतु समुचित उपयोग करना सीखा।

3. आदिमानव द्वारा बनाए गए अधिकांश गुफा चित्र किन रंगो से बनाए गए?

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उत्तर: आदिमानव द्वारा बनाए गए अधिकांश गुफा चित्र सफेद मिटटी या चुने तथा गेरू से बनाए गए हैं।

4. सिन्धु घाटी की सभ्यता से प्राप्त अवशेषों में चित्रण हेतु किस सामग्री का प्रयोग हुआ है?

उत्तर: सिन्धु घाटी की सभ्यता से प्राप्त अवशेषों में चित्रण हेतु बर्तनों एवं खिलौने पर सफेद मिटटी या चुना, काली मिटटी एवं गेरू का प्रयोग हुआ है।

पाठगत प्रश्न 4.2

रिक्त स्थान भरिए:

1. व्यावसायिक लोक चित्रकार __________ प्रकार के बुश बनाते हैं।

उत्तर: व्यावसायिक लोक चित्रकार बाँस तथा बालों प्रकार के बुश बनाते हैं।

2. बुश बनाने के लिए कलाकारों ___________  प्रक्रिया का प्रयोग करते हैं।

उत्तर: बुश बनाने के लिए कलाकारों बाँस प्रक्रिया का प्रयोग करते हैं।

पाठगत प्रश्न 4.3

बहु विकल्पीय प्रश्न:

1. चित्रकला की किसी एक अपरंपरागत सामग्री का नाम है-

(i) स्याही।

(ii) पत्ता।

(iii) फूल।

(iv) बाँस।

उत्तर: स्याही।

2. चित्र बनाने के लिए किसी एक प्रकार के रेखाचित्रों का नाम है-

(i) सामग्री।

(ii) सार।

(iii) ग्राफ़।

(iv) इनमें से कोई नहीं।

उत्तर: ग्राफ।

पाठात प्रश्न

1. मानव ने चित्रण पद्धतियों एवं सामग्री का विकास किस प्रकार किया?

उत्तर: मानव ने चित्रण पद्धतियों एवं सामग्री का विकास अपने जीवन अनुभवों, पर्यावरण और आवश्यकताओं के अनुसार क्रमशः किया। प्रारंभिक काल में मानव ने गुफाओं की दीवारों पर प्राकृतिक साधनों जैसे मिट्टी, गेरू, पत्थरों के चूर्ण और कोयले से चित्र बनाए। ये चित्र शिकार, पशु-पक्षियों और दैनिक जीवन से जुड़े होते थे। समय के साथ मानव ने रंगों को तैयार करने की विधि सीखी और पेड़ों की टहनियों, जानवरों के बालों तथा उँगलियों से चित्रण करना शुरू किया। आगे चलकर उसने दीवारों के साथ-साथ कागज़, कपड़े और अन्य सतहों पर भी चित्र बनाना आरंभ किया। खनिज और वनस्पति रंगों के प्रयोग से चित्रण अधिक टिकाऊ और आकर्षक हुआ। आधुनिक काल में रासायनिक रंगों, नई तकनीकों और समकालीन माध्यमों के प्रयोग से चित्रण कला में व्यापक विकास हुआ। इस प्रकार मानव ने परंपरागत तरीकों से आधुनिक तकनीकों तक चित्रण पद्धतियों एवं सामग्री का निरंतर विकास किया।

2. लोकचित्रकारों की व्यवसायिक जातियों ने चित्रण सामग्री एवं पद्धतियों के विकास में क्या योगदान दिया?

उत्तर: लोकचित्रकारों की व्यवसायिक जातियों ने अपने अनुभव और परंपरागत ज्ञान से चित्रण सामग्री एवं पद्धतियों का विकास किया। उन्होंने खनिज, वनस्पति और मिट्टी से प्राकृतिक रंग बनाए तथा दीवार, कपड़ा और कागज पर चित्रण की विशेष तकनीकें विकसित कीं। ये विधियाँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रहीं, जिससे लोककलाओं की विशिष्ट शैलियाँ बनीं और आगे चलकर समकालीन चित्रण पद्धतियों को भी प्रेरणा मिली।

3. आदिवासी लोक चित्रण में प्रयुक्त होने वाली पारंपरिक सामग्री की सूची बनाओ।

उत्तर: आदिवासी लोक चित्रण में परंपरागत रूप से प्राकृतिक और स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्री का प्रयोग किया जाता था। इसमें मिट्टी, खनिज और वनस्पति से बने प्राकृतिक रंग, गेरू, खड़िया, कोयला तथा चावल का घोल शामिल हैं। चित्रण के लिए दीवार, कपड़ा और कागज का उपयोग किया जाता था तथा ब्रश के रूप में तिनके, घास, कपास या पशुओं के बाल काम में लिए जाते थे। यही पारंपरिक सामग्री आदिवासी लोक चित्रण की पहचान रही है।

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