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NCERT Class 9 Hindi Chapter 11 झाँसी की रानी
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झाँसी की रानी
Chapter: 11
| काव्य खंड |
| अभ्यास |
रचना से संवाद
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
1. ‘झाँसी की रानी’ कविता की पंक्ति “बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी” में ‘नई जवानी’ शब्द किस भाव को व्यक्त करता है?
(क) देश का स्वाभिमान।
(ख) विद्रोह की चिंगारी।
(ग) स्वाधीनता का भय।
(घ) भारत की युवावस्था।
उत्तर: (ख) विद्रोह की चिंगारी।
कारण: लंबे समय तक अंग्रेजों की गुलामी और शोषण सहने के कारण भारत का उत्साह और स्वाभिमान कमजोर पड़ गया था, जिसे कविता में ‘बूढ़ा भारत’ कहा गया है। परंतु 1857 की क्रांति ने देशवासियों के भीतर अपनी आज़ादी को वापस पाने के लिए एक नया जोश, ऊर्जा और विद्रोह की भावना भर दी। यह नया जोश ही ‘नई जवानी’ या विद्रोह की चिंगारी का प्रतीक है।
2. लक्ष्मीबाई को ‘छबीली’ कहना उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता को दर्शाता है?
(क) विनम्रता।
(ख) शोभायुक्त।
(ग) सहिष्णुता।
(घ) कठोरता।
उत्तर: (ख) शोभायुक्त।
कारण: पुस्तक के अंत में दी गई ‘शब्द-संपदा’ (शब्दावली) के अनुसार ‘छबीली’ का अर्थ ‘तेजस्वी, सुंदर, छबिवाली या सजीली’ होता है। अतः यह शब्द रानी लक्ष्मीबाई के आकर्षक और शोभायुक्त व्यक्तित्व की विशेषता को दर्शाता है।
3. “बुझा दीप झाँसी का” पंक्ति का भावार्थ है—
(क) अंग्रेज़ों का झाँसी पर अधिकार हो जाना।
(ख) झाँसी राज्य की उम्मीदों का नष्ट हो जाना।
(ग) राजा की आकस्मिक मृत्यु होना।
(घ) रानी के जीवन में उदासी होना।
उत्तर: (ग) राजा की आकस्मिक मृत्यु होना।
कारण: ‘दीप बुझना’ एक मुहावरा है जिसका अर्थ है प्राण निकलना या मृत्यु होना। कविता में “बुझा दीप झाँसी का तब डलहौजी मन में हरषाया” पंक्ति झाँसी के राजा गंगाधर राव की निःसंतान मृत्यु की ओर संकेत करती है। उनके निधन के बाद ही डलहौजी को ‘लावारिस का वारिस’ बनकर झाँसी हड़पने का बहाना मिल गया था।
4. “इस स्वतंत्रता-महायज्ञ में कई वीरवर आए काम” पंक्ति में स्वतंत्रता आंदोलन की किस ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत किया गया है?
(क) असहयोग आंदोलन।
(ख) भारत छोड़ो आंदोलन।
(ग) 1857 की क्रांति।
(घ) सविनय अवज्ञा आंदोलन।
उत्तर: (ग) 1857 की क्रांति।
कारण: सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा रचित यह पूरी कविता 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि पर लिखी गई है। इस महायज्ञ में नाना धुंधूपंत, ताँतिया टोपे, अहमद शाह मौलवी जैसे जिन महान वीरों के काम आने (शहीद होने) का उल्लेख है, वे सभी 1857 की क्रांति के ही प्रमुख योद्धा थे।
5. “व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया” पंक्ति में ‘यह’ शब्द किसके लिए कहा गया है?
(क) नवाबों के लिए।
(ख) जनरल डलहौजी के लिए।
(ग) लेफ्टिनेंट वॉकर के लिए।
(घ) ब्रिटिश राज के लिए।
उत्तर: (घ) ब्रिटिश राज के लिए।
कारण: यह ऐतिहासिक सत्य है कि अंग्रेज (ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी) प्रारंभ में भारत में शासक बनकर नहीं, बल्कि व्यापारी बनकर आए थे। शुरुआत में उन्होंने भारतीय राजाओं से केवल व्यापार करने के लिए रियायतें और आज्ञा (दया) माँगी थी, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी कूटनीति से पूरे भारत पर अधिकार कर लिया।
मेरी समझ मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए—
1. ‘झाँसी की रानी’ कविता के आधार पर बताइए कि लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल कौन-कौन से थे? उनका बचपन दूसरों से किस प्रकार भिन्न था?
उत्तर: कविता के अनुसार, लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल नकली युद्ध करना, सेना की व्यूह रचना करना, शिकार खेलना, दुश्मन की सेना को घेरना और उनके किले (दुर्ग) तोड़ना थे। इसके अलावा, बरछी, ढाल, कृपाण और कटारी जैसे अस्त्र-शस्त्र ही उनकी सहेलियाँ हुआ करती थीं। उनका बचपन आम बच्चों या लड़कियों से बिल्कुल अलग था। जहाँ साधारण लड़कियाँ गुड़ियों और घरेलू खेलों में अपना समय बिताती थीं, वहीं लक्ष्मीबाई बचपन से ही शूरवीरों की तरह युद्ध-कौशल सीखने और साहस भरे खेल खेलने में मग्न रहती थीं।
2. “किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई” पंक्ति के माध्यम से किस घटना की ओर संकेत किया गया है?
उत्तर: इस पंक्ति के माध्यम से झाँसी के राजा गंगाधर राव की आकस्मिक और निःसंतान मृत्यु तथा रानी लक्ष्मीबाई के बहुत कम उम्र में विधवा हो जाने की दुखद घटना की ओर संकेत किया गया है। राजा के निधन से झाँसी के महलों में छाई खुशियाँ अचानक मातम में बदल गईं और उनके जीवन व राज्य पर संकटों के काले बादल (काली घटा) छा गए।
3. “महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी” पंक्ति समाज के विभिन्न वर्गों की एकता को दर्शाती है, इस एकता का स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में क्या महत्व है?
उत्तर: यह पंक्ति 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अमीर (महल) और गरीब (झोंपड़ी) दोनों वर्गों के साझा योगदान को दर्शाती है। स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में इस एकता का बहुत बड़ा महत्व है, क्योंकि अंग्रेज़ों की दमनकारी नीतियों और शोषण से समाज का हर वर्ग त्रस्त था। जब राजाओं, नवाबों और ज़मींदारों (महलों) के साथ-साथ आम जनता, किसानों और मज़दूरों (झोंपड़ियों) ने अपने मतभेद भुलाकर एक साथ अंग्रेज़ों के खिलाफ आवाज़ उठाई, तभी यह विद्रोह पूरे देश में एक शक्तिशाली क्रांति के रूप में फैल सका।
4. “सरे-आम नीलाम छापते थे अंग्रेज़ों के अखबार” पंक्ति में ‘नीलाम छापते’ शब्द किसकी ओर संकेत करता है? यह भी बताइए कि किसकी नीलामी की जाती थी और क्यों?
उत्तर: ‘नीलाम छापते’ शब्द का अर्थ है कि अंग्रेज़ अपने अखबारों में विज्ञापन देकर भारतीय राजघरानों की संपत्तियों को सरेआम बेच रहे थे। इस नीलामी में कलकत्ते के बाज़ारों में नागपुर और लखनऊ (अवध) जैसे राज्यों की रानियों और बेगमों के कीमती गहने, नौलखा हार और राजसी कपड़ों की बोलियाँ लगाई जाती थीं। अंग्रेज़ ऐसा इसलिए करते थे ताकि वे भारतीय राजाओं और नवाबों को अपमानित कर सकें, उनका मनोबल तोड़ सकें और उनकी संपत्ति को लूटकर अपने राज्य (ब्रिटिश साम्राज्य) को और अधिक समृद्ध बना सकें।
5. “अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी” पंक्ति में ‘अवतारी’ शब्द व्यक्ति के विशेष गुणों की ओर इंगित कर रहा है। कविता के आधार पर बताइए कि लक्ष्मीबाई के किन गुणों के कारण उनको ‘अवतारी’ कहा गया है?
उत्तर: लक्ष्मीबाई को ‘अवतारी’ इसलिए कहा गया है क्योंकि मात्र 23 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने जो अदम्य साहस और शौर्य दिखाया, वह किसी साधारण मनुष्य के लिए संभव नहीं था। उनमें देवी दुर्गा जैसी अपार शक्ति, वीरता और निडरता थी। अंग्रेज़ों की विशाल सेना से वे अकेले और बेखौफ होकर लड़ीं। उनका देशप्रेम, अद्वितीय युद्ध कौशल और मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देने का जज़्बा ही उन्हें एक सामान्य स्त्री से अलग खड़ा करता है। इन्हीं असाधारण और दिव्य गुणों के कारण उन्हें ‘अवतारी’ (स्वतंत्रता की रक्षा के लिए देवी का अवतार) माना गया है।
विद्या से संवाद
कविता में कहानी
1. यह कविता लक्ष्मीबाई के जीवन की घटनाओं पर आधारित है और अपनी संरचना में एक कथात्मक कविता है। कथात्मक कविता ऐसी कविता को कहते हैं जिसमें कविता और कहानी के तत्व परस्पर जुड़े होते हैं तथा घटनाओं का एक क्रम होता है। इस कविता में भी लक्ष्मीबाई के बचपन से लेकर वीरगति प्राप्त होने तक की कथा क्रम से देखने को मिलती है। पाठ की संरचना को समझते हुए इसमें वर्णित प्रमुख घटनाओं को समय-रेखा (टाइमलाइन) पर दर्शाइए। (संकेत– लक्ष्मीबाई का बचपन, विवाह, अन्य घटनाएँ आदि।)
उत्तर: कविता के आधार पर रानी लक्ष्मीबाई के जीवन की प्रमुख घटनाओं की समय-रेखा इस प्रकार है:
(i) बचपन: उनका नाम लक्ष्मीबाई था और प्यार से उन्हें ‘छबीली’ कहा जाता था। वे नाना धुंधूपंत के साथ पढ़ती और खेलती थीं। उनके बचपन के खेल आम लड़कियों जैसे नहीं थे; वे नकली युद्ध करना, व्यूह रचना, शिकार खेलना और दुर्ग तोड़ना पसंद करती थीं। बरछी, ढाल, कृपाण और कटारी ही उनकी सहेलियाँ थीं।
(ii) विवाह: उनका विवाह झाँसी के राजा गंगाधर राव के साथ हुआ और वे रानी बनकर झाँसी के महलों में आईं, जिससे चारों ओर खुशियाँ छा गईं।
(iii) वैधव्य और संकट: दुर्भाग्य से कुछ ही समय बाद राजा का निःसंतान ही निधन हो गया। रानी बहुत कम उम्र में विधवा हो गईं और झाँसी पर संकट के बादल छा गए।
(iv) अंग्रेज़ों का झाँसी पर कब्ज़ा: राजा के निःसंतान मरने का फायदा उठाकर लॉर्ड डलहौज़ी ने झाँसी को लावारिस बताकर उस पर कब्ज़ा कर लिया और अपना झंडा फहरा दिया।
(v) 1857 की क्रांति और युद्ध: देश में आज़ादी की लहर दौड़ी। रानी ने हार नहीं मानी और तलवार उठा ली। उन्होंने लेफ्टिनेंट वॉकर को घायल कर भगाया और फिर जनरल स्मिथ को भी मात दी। उन्होंने निरंतर 100 मील घोड़ा दौड़ाकर कालपी और फिर ग्वालियर पर अधिकार कर लिया।
(vi) वीरगति: अंत में जनरल ह्यू रोज़ की सेना ने उन्हें घेर लिया। उनका पुराना घोड़ा मर चुका था और अड़ जाने वाले नए घोड़े के कारण वे नाला पार नहीं कर सकीं। मात्र 23 वर्ष की आयु में, अंग्रेज़ों से अकेले और वीरतापूर्वक लड़ते हुए वे शहीद (वीरगति को प्राप्त) हो गईं।
विषयों से संवाद
साझा साथ/साझा संघर्ष
1. “लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया”, ब्रिटिश राज किस नीति के कारण ‘लावारिस का वारिस’ बन जाता था? अपने इतिहास के शिक्षक से पता लगाकर उस नीति के विषय में लिखिए।
उत्तर: ब्रिटिश राज जिस नीति के कारण ‘लावारिस का वारिस’ बन जाता था, उसे इतिहास में “हड़प नीति” (Doctrine of Lapse) या ‘व्यपगत का सिद्धांत’ कहा जाता है। इसे भारत के ब्रिटिश गवर्नर-जनरल लॉर्ड डलहौज़ी ने लागू किया था। इस क्रूर नीति के अनुसार, यदि किसी भारतीय राजा की मृत्यु बिना किसी सगे पुत्र (उत्तराधिकारी) के हो जाती थी, तो उस राजा को दत्तक पुत्र (गोद लिया हुआ बेटा) अपना उत्तराधिकारी बनाने का अधिकार नहीं था। इसके बजाय, अंग्रेज़ उस राज्य को ‘लावारिस’ घोषित कर जबरन ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लेते थे। कविता में भी बताया गया है कि राजा गंगाधर राव की निःसंतान मृत्यु होने पर डलहौज़ी ने इसी नीति का फायदा उठाकर झाँसी पर कब्ज़ा कर लिया था।
2. इस कविता में लक्ष्मीबाई की जीवन-गाथा के साथ-साथ अनेक वीरों के त्याग और बलिदान का भी उल्लेख है। उनकी सूची बनाइए तथा शिक्षक की सहायता से 1857 की क्रांति में उनके योगदान के विषय में लिखिए।
उत्तर: कविताओं की पंक्तियों के अनुसार 1857 के महायज्ञ में निम्नलिखित वीरों ने अपना बलिदान दिया:
(i) नाना धुंधूपंत: इन्होंने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व किया और अंग्रेज़ों को कड़ी चुनौती दी।
(ii) तांत्या टोपे: ये नाना साहेब के बेहद कुशल सेनापति थे। इन्होंने रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर ग्वालियर पर अधिकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और अंग्रेज़ों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध लड़े।
(iii) चतुर अज़ीमुल्ला: ये नाना साहेब के सलाहकार थे और 1857 की क्रांति की योजना बनाने तथा लोगों को जागरूक करने में इनका बड़ा हाथ था।
(iv) अहमद शाह मौलवी: इन्होंने अवध और रुहेलखंड के क्षेत्रों में क्रांति का नेतृत्व किया था और अंग्रेज़ भी इनकी बहादुरी और रणनीति से खौफ खाते थे।
(v) ठाकुर कुँवर सिंह: बिहार के जगदीशपुर में 80 वर्ष की उम्र में भी इन्होंने युवाओं जैसे जोश के साथ अंग्रेज़ों से युद्ध किया और उन्हें कई बार धूल चटाई।

