NCERT Class 8 Hindi Chapter 10 तरुण के स्वप्न

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NCERT Class 8 Hindi Chapter 10 तरुण के स्वप्न

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Chapter: 10

पाठ से

आइए, अब हम इस पाठ पर विस्तार से चर्चा करें। आगे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

1. “उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।” इस कथन में रेखांकित शब्द ‘हम’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?

(i) सुभाषचंद्र बोस के लिए।

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(ii) देश के तरुण वर्ग के लिए।

(iii) चित्तरंजन दास के लिए।

(iv) भारतवासियों के लिए।

उत्तर: (ii) देश के तरुण वर्ग के लिए।

(iv) भारतवासियों के लिए।

2. स्वाधीन राष्ट्र का स्वप्न साकार होगा?

(i) आर्थिक असमानता से।

(ii) स्त्री-पुरुष के भिन्न अधिकारों से।

(iii) श्रम और कर्म की मर्यादा से।

(iv) जातिभेद से।

उत्तर: (iii) श्रम और कर्म की मर्यादा से।

3. “उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।” ‘उत्तराधिकारी’ होने से क्या अभिप्राय है?

(i) हमें उनके स्वप्नों को संजोकर रखना है।

(ii) हमें भी उनकी तरह स्वप्न देखने का अधिकार है।

(iii) उनके स्वप्नों को पूरा करने के लिए हमें ही कर्म करना है।

(iv) उनके स्वप्नों पर चर्चा करने का दायित्व हमारा ही है।

उत्तर: (i) हमें उनके स्वप्नों को संजोकर रखना है।

(iii) उनके स्वप्नों को पूरा करने के लिए हमें ही कर्म करना है।

4. जब प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा और उन्नति का समान अवसर प्राप्त होगा तब-

(i) राष्ट्र की श्रम-शक्ति बढ़ेगी।

(ii) तरुणों का साहस बढ़ेगा।

(iii) राष्ट्र स्वाधीन बनेगा।

(iv) राष्ट्र स्वप्नदर्शी होगा।

उत्तर: (i) राष्ट्र की श्रम-शक्ति बढ़ेगी।

(iii) राष्ट्र स्वाधीन बनेगा।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर: 1. नेताजी ने अपने उद्बोधन में युवाओं को ही देश का भविष्य और अपने स्वप्न का उत्तराधिकारी कहा है। साथ ही यह स्वप्न पूरे भारतवर्ष के लिए है, इसलिए ‘हम’ शब्द देश के तरुण वर्ग और समस्त भारतवासियों—दोनों के लिए प्रयुक्त हुआ है।

2. सुभाषचंद्र बोस ने कहा कि आदर्श समाज में श्रम और कर्म की पूरी मर्यादा होनी चाहिए और आलसी के लिए कोई स्थान नहीं। इसलिए स्वाधीन राष्ट्र का स्वप्न केवल श्रम और कर्म की मर्यादा से ही साकार हो सकता है, न कि आर्थिक असमानता, स्त्री-पुरुष के भिन्न अधिकार या जातिभेद से।

3. ‘उत्तराधिकारी’ शब्द का तात्पर्य केवल चर्चा से नहीं बल्कि जिम्मेदारी से है। इसका अर्थ है कि हमें नेताजी के स्वप्न को संजोकर रखना और उसे पूरा करने के लिए कर्म करना है, तभी हम सच्चे उत्तराधिकारी कहलाएँगे।

4. जब प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा और उन्नति का समान अवसर मिलेगा तो राष्ट्र की श्रम-शक्ति बढ़ेगी और लोग आत्मनिर्भर बनेंगे। यही स्थिति एक सशक्त और वास्तविक स्वाधीन राष्ट्र के निर्माण में सहायक होगी।

मिलकर करें मिलान

नीचे स्तंभ 1 में पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं और स्तंभ 2 में उन पंक्तियों से संबंधित भाव-विचार दिए गए हैं। स्तंभ 1 में दी गई पंक्तियों का स्तंभ 2 में दिए गए भाव-विचार से सही मिलान कीजिए।

क्रम स्तंभ 1स्तंभ 2
1.‘इसी स्वप्न की प्रेरणा से हम उठते हैं, बैठते हैं, चलते हैं, फिरते हैं और लिखते हैं, भाषण देते हैं, काम-काज करते हैं।”1. समाज में सभी व्यक्तियों को सभी तरह की स्वतंत्रता हो और उस पर किसी तरह का बंधन या सामाजिक दबाव न हो।
2.“जो राष्ट्र हमारे स्वदेशी समाज के यंत्र के रूप में काम करेगा, सर्वोपरि वह समाज और राष्ट्र भारतवासियों का अभाव मिटाएगा।”2. हमारी समूची दिनचर्या और आचार-विचार इसी लक्ष्य (स्वप्न) की प्राप्ति पर केंद्रित हैं।
3.“उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो तथा समाज के दबाव से वह मेरे नहीं।”3. जिस देश की योजनाएँ हमारे अपने समाज को ध्यान में रखकर बनाई जाएँगी, उस देश में किसी भी प्रकार का अभाव नहीं होगा।

उत्तर:

क्रम स्तंभ 1स्तंभ 2
1.‘इसी स्वप्न की प्रेरणा से हम उठते हैं, बैठते हैं, चलते हैं, फिरते हैं और लिखते हैं, भाषण देते हैं, काम-काज करते हैं।”2. हमारी समूची दिनचर्या और आचार-विचार इसी लक्ष्य (स्वप्न) की प्राप्ति पर केंद्रित हैं।
2.“जो राष्ट्र हमारे स्वदेशी समाज के यंत्र के रूप में काम करेगा, सर्वोपरि वह समाज और राष्ट्र भारतवासियों का अभाव मिटाएगा।”3. जिस देश की योजनाएँ हमारे अपने समाज को ध्यान में रखकर बनाई जाएँगी, उस देश में किसी भी प्रकार का अभाव नहीं होगा।
3.“उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो तथा समाज के दबाव से वह मेरे नहीं।”1. समाज में सभी व्यक्तियों को सभी तरह की स्वतंत्रता हो और उस पर किसी तरह का बंधन या सामाजिक दबाव न हो।

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपनी कक्षा में साझा कीजिए।

(क) “उस समाज में अर्थ की विषमता न हो।”

उत्तर: इस पंक्ति का अर्थ है कि आदर्श समाज में धन-दौलत और साधनों का अत्यधिक अंतर न हो। अमीर और गरीब के बीच ऐसी खाई न हो कि कोई अत्यधिक समृद्ध हो और कोई जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित रहे। सभी को मेहनत के अनुसार पर्याप्त संसाधन और अवसर मिलें, ताकि हर व्यक्ति सम्मानपूर्वक जीवन जी सके।

(ख) “वही स्वप्न उनकी शक्ति का उत्स बना और उनके आनंद का निर्झर रहा।”

उत्तर: यह पंक्ति बताती है कि देशबंधु चित्तरंजन दास का स्वप्न ही उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा और शक्ति का स्रोत था। उसी स्वप्न ने उन्हें कठिनाइयों से लड़ने की हिम्मत दी और उनके जीवन को आनंद और संतोष से भर दिया। अर्थात स्वप्न व्यक्ति को संघर्ष करने और आगे बढ़ने की निरंतर ऊर्जा देता है।

(ग) “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो।”

उत्तर: इस पंक्ति का आशय है कि आदर्श समाज में हर व्यक्ति को विचार, अभिव्यक्ति, काम, धर्म, शिक्षा और जीवन के हर क्षेत्र में पूरी स्वतंत्रता मिले। वह जाति, लिंग, धर्म, आर्थिक स्थिति, या सामाजिक दबाव जैसी किसी भी बंधन से मुक्त होकर अपनी इच्छानुसार जीवन जी सके और समाज व राष्ट्र की सेवा में भाग ले सके।

सोच-विचार के लिए

अब आप इस पाठ को पुनः पढ़िए और निम्नलिखित के विषय में पता लगाकर लिखिए-

(क) नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किस प्रकार के राष्ट्र निर्माण का स्वप्न देखा था?

उत्तर: नेताजी ने एक ऐसे स्वाधीन राष्ट्र का स्वप्न देखा था जिसमें –

स्वतंत्रता और समानता – ऐसे राष्ट्र का निर्माण जहाँ प्रत्येक व्यक्ति सभी दृष्टियों से मुक्त हो।

जातिभेद और आर्थिक विषमता का न होना – समाज में जातिभेद और आर्थिक विषमताएँ समाप्त हों।

समान अवसर – समाज में प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर मिलें।

नारी स्वतंत्रता – नारी स्वतंत्र हो और पुरुषों की तरह समान अधिकारों का उपयोग करे।

श्रम और कर्म की मर्यादा – ऐसे समाज और राष्ट्र में श्रम और कर्म की पूरी मर्यादा हो।

आलसी और अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं – आलसी और अकर्मण्य लोग समाज में जगह न पाएँ।

(ख) नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किस लक्ष्य की प्राप्ति को अपने जीवन की सार्थकता के रूप में देखा?

उत्तर: नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने अपने जीवन की सार्थकता को भारत के स्वाधीनता संग्राम की सफलता में देखी। उनका उद्देश्य था भारत को अंग्रेजी शासन से मुक्त कराना और एक स्वतंत्र, आत्मनिर्भर और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण करना। उन्होंने अपने जीवन को इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए समर्पित किया, और इसके लिए उन्हें कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ा।

(ग) “आलसी तथा अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा।” सुभाषचंद्र बोस ने ऐसा क्यों कहा होगा?

उत्तर: नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने यह वाक्य इसलिए कहा होगा क्योंकि वह चाहते थे कि उनका आदर्श राष्ट्र सक्रियता, समर्पण और मेहनत पर आधारित हो। आलसी और अकर्मण्य लोग समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान नहीं दे सकते। उनका दृष्टिकोण था कि एक समृद्ध और स्वतंत्र राष्ट्र तभी बन सकता है जब सभी लोग मेहनत करें और अपने कर्तव्यों को पूरी ईमानदारी से निभाएँ। ऐसे राष्ट्र में केवल कर्मठ और समर्पित लोग ही योगदान देंगे।

(घ) नेताजी सुभाषचंद्र बोस के लक्ष्यों या ध्येय को पूरा करने के लिए आज की युवा पीढ़ी क्या-क्या कर सकती है?

उत्तर: आज की युवा पीढ़ी नेताजी सुभाषचंद्र बोस के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए निम्नलिखित कार्य कर सकती है:

शिक्षा और आत्मनिर्भरता – शिक्षा प्राप्त कर समाज और राष्ट्र की प्रगति में योगदान देना।

समान अवसर और समान अधिकार का समर्थन – जातिभेद, लिंग भेद, और आर्थिक विषमताओं के खिलाफ जागरूकता फैलाना और समान अवसर की दिशा में कदम उठाना।

मेहनत और समर्पण – आलस्य और अकर्मण्यता को त्याग कर अपनी पूरी शक्ति से समाज की सेवा में कार्य करना।

स्वावलंबन और राष्ट्रीयता – आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रयास करना और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझना।

समाज में सकारात्मक बदलाव लाना – समाज की समस्याओं को पहचान कर समाधान की दिशा में कार्य करना और आदर्श नागरिक के रूप में अपनी भूमिका निभाना।

अनुमान और कल्पना से

(क) “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो”, सुभाषचंद्र बोस ने किन-किन दृष्टियों से मुक्ति की बात की होगी?

उत्तर: सुभाषचंद्र बोस ने “व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो” कहते हुए संभवतः निम्नलिखित दृष्टियों से मुक्ति की बात की होगी:

जातिवाद – समाज में जातिवाद का खात्मा हो, जिससे सभी को समान अधिकार और सम्मान मिले।

लिंग भेद – पुरुष और महिला के बीच भेदभाव खत्म हो और महिलाओं को समान अधिकार प्राप्त हों।

आर्थिक विषमता – अमीर और गरीब के बीच की खाई को समाप्त किया जाए और सभी को समान अवसर मिले।

सामाजिक भेदभाव – समाज में किसी भी प्रकार के भेदभाव, जैसे आर्थिक, मानसिक, शारीरिक या मानसिक असमानता, को समाप्त किया जाए।

शारीरिक और मानसिक स्वतंत्रता – व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वतंत्र रहकर अपने जीवन के निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिले।

(ख) “उस समाज में नारी मुक्त होकर समाज एवं राष्ट्र के पुरुषों की तरह समान अधिकार का उपभोग करे”, सुभाषचंद्र बोस को अपने भाषण में नारी के लिए समान अधिकारों की बात क्यों कहनी पड़ी?

उत्तर: सुभाषचंद्र बोस को अपने भाषण में नारी के लिए समान अधिकारों की बात इसलिए करनी पड़ी क्योंकि उस समय भारतीय समाज में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार और सम्मान नहीं मिलते थे। उन्हें शिक्षा, कामकाजी स्वतंत्रता, और सामाजिक अधिकारों में कई प्रकार की असमानता का सामना करना पड़ता था। नेताजी यह चाहते थे कि महिलाओं को भी पुरुषों के समान अवसर मिले और वे राष्ट्र निर्माण में बराबरी से भागीदार बन सकें। उनका उद्देश्य था कि एक समृद्ध और स्वतंत्र राष्ट्र में महिलाओं का भी उतना ही योगदान हो, जितना पुरुषों का।

(ग) आपके विचार से हमारे समाज में और कौन-कौन से लोग हैं जिन्हें विशेष अधिकार दिए जाने की आवश्यकता है?

उत्तर: मेरे विचार से हमारे समाज में निम्नलिखित समूहों को विशेष अधिकार दिए जाने की आवश्यकता है:

दिव्यांगजन – शारीरिक रूप से असमर्थ लोगों को समाज में बराबरी का स्थान और अवसर मिलना चाहिए, जैसे शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक स्थानों पर समान पहुँच।

अल्पसंख्यक समुदाय – धार्मिक या जातीय अल्पसंख्यकों को अपनी पहचान बनाए रखने के लिए विशेष अधिकार और सुरक्षा मिलनी चाहिए।

महिलाएँ – नारी को बराबरी का स्थान देने के लिए विशेष अधिकारों की आवश्यकता है, जैसे समान वेतन, स्वास्थ्य सेवा, और सामाजिक सम्मान।

गरीब और वंचित वर्ग – समाज के गरीब और वंचित वर्ग को शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार के समान अवसर मिलने चाहिए।

बालक-बालिकाएँ – बच्चों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा और विकास के अवसर मिलने चाहिए, ताकि वे समाज में योगदान देने के योग्य बन सकें।

(घ) सुभाषचंद्र बोस देश के समस्त युवा वर्ग को संबोधित करते हुए कहते हैं – “हे मेरे तरुण भाइयो!” उनका संबोधन केवल ‘भाइयो’ शब्द तक ही क्यों सीमित रहा होगा?

उत्तर: सुभाषचंद्र बोस ने अपने भाषण में “हे मेरे तरुण भाइयो!” शब्दों का प्रयोग शायद इसलिए किया क्योंकि वह युवा वर्ग को समान और साझी जिम्मेदारी के रूप में देख रहे थे। ‘भाई’ शब्द का प्रयोग उन्हें समानता, भाईचारे और एकजुटता की भावना से जोड़ने के लिए था। नेताजी चाहते थे कि सभी युवा वर्ग—चाहे वे किसी भी धर्म, जाति, या लिंग के हों—अपने राष्ट्र के लिए एकजुट हो और समान उद्देश्य की प्राप्ति के लिए मिलकर काम करें। इस संबोधन से वह युवाओं के बीच समानता का संदेश दे रहे थे।

(ङ) “यह स्वप्न मैं तुम्हें उपहारस्वरूप देता हूँ – स्वीकार करो।” सुभाषचंद्र बोस के इस आ‌ह्वान पर श्रोताओं (युवा वर्ग) की क्या प्रतिक्रिया रही होगी?

उत्तर: सुभाषचंद्र बोस का यह आह्वान श्रोताओं के लिए एक प्रेरणा और साहस का स्रोत रहा होगा। उनके शब्दों ने युवाओं को एक उच्च उद्देश्य और महान लक्ष्य की ओर प्रेरित किया होगा। यह आह्वान श्रोताओं को न केवल अपने स्वप्न को पूरा करने के लिए प्रेरित करता, बल्कि उन्हें यह एहसास भी दिलाता कि यह स्वप्न केवल नेताजी का नहीं, बल्कि पूरा राष्ट्र उनका उत्तराधिकारी है। श्रोताओं ने इस आह्वान को स्वीकार करके अपने दिल में राष्ट्रीयता, संघर्ष और स्वतंत्रता की आग को और मजबूत किया होगा, और यह आह्वान उनके लिए एक आंदोलन का रूप ले चुका होगा।

शीर्षक

(क) आपने नेताजी सुभाषचंद्र बोस के भाषण का एक अंश पढ़ा है, इसे ‘तरुण के स्वप्न’ शीर्षक दिया गया है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि यह शीर्षक क्यों दिया गया होगा?

उत्तर: ‘तरुण के स्वप्न’ शीर्षक इसलिए दिया गया होगा क्योंकि नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने अपने भाषण में विशेष रूप से युवा पीढ़ी (तरुणों) को संबोधित किया है। उन्होंने युवाओं को अपने स्वप्न का उत्तराधिकारी बताया और उन्हें अपने स्वप्नों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया। नेताजी ने यह विश्वास व्यक्त किया कि युवा वर्ग ही राष्ट्र की दिशा को बदल सकता है और वह इस स्वप्न को साकार कर सकता है। इसलिए, इस भाषण का शीर्षक ‘तरुण के स्वप्न’ दिया गया है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नेताजी का यह स्वप्न युवा पीढ़ी के लिए था और उनका नेतृत्व युवा वर्ग से ही आना था।

(ख) यदि आपको भाषण के इस अंश को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा? यह भी लिखिए।

उत्तर: यदि मुझे इस भाषण के अंश का कोई अन्य नाम देना हो, तो मैं इसे ‘नेतृत्व और स्वतंत्रता का स्वप्न’ रखूँगा।

इस नाम का चयन मैंने इस कारण किया क्योंकि भाषण में नेताजी ने न केवल युवाओं से उम्मीदें जताई हैं, बल्कि एक स्वतंत्र, समृद्ध और आदर्श राष्ट्र का स्वप्न भी प्रस्तुत किया है। यह भाषण युवाओं को प्रेरित करने के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम की दिशा और उद्देश्य को स्पष्ट करता है, जहाँ हर नागरिक को समान अवसर, अधिकार और जिम्मेदारी मिले।

(ग) सुभाषचंद्र बोस ने अपने समय की स्थितियों या समस्याओं को अपने संबोधन में स्थान दिया है। यदि आपको अपनी कक्षा को संबोधित करने का अवसर मिले तो आप किन-किन विषयों को अपने उद्बोधन में सम्मिलित करेंगे और उसका क्या शीर्षक रखेंगे?

उत्तर: यदि मुझे अपनी कक्षा को संबोधित करने का अवसर मिले, तो मैं निम्नलिखित विषयों पर बात करूँगा—

शिक्षा का महत्व – आज के समय में शिक्षा ही वास्तविक स्वतंत्रता का मार्ग है।

समाज में समानता – जातिवाद, लिंगभेद और सामाजिक असमानताओं को समाप्त करने का प्रयास।

आत्मनिर्भरता – हमें अपने राष्ट्र की प्रगति के लिए आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता है।

समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण – एकता और सहयोग से हम समाज और राष्ट्र के उत्थान में योगदान कर सकते हैं।

तकनीकी शिक्षा और रोजगार – नई तकनीकों और कौशल के माध्यम से रोजगार के अवसर बढ़ाना।

इस उद्बोधन का शीर्षक मैं ‘हमारा कर्तव्य, हमारा राष्ट्र’ रखूँगा।

यह शीर्षक इसलिए चुना क्योंकि हम युवा पीढ़ी को अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए समाज और राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं।

भाषा की बात

(क) सुभाषचंद्र बोस ने अपने भाषण में संख्या, संगठन या भाव आदि का बोध कराने वाले शब्दों के साथ उनकी विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्दों का प्रयोग किया है। उनके भाषण से विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्द ढूँढ़कर दिए गए शब्द समूह को पूरा कीजिए-

अखंड सत्य जीवन 
समाज शक्ति 
राष्ट्रआनंद 

उत्तर: 

अखंड सत्य सार्थक जीवन 
उदार समाज असीम शक्ति 
स्वाधीन राष्ट्रअपरिमितआनंद 

(ख) सुभाषचंद्र बोस ने तो उपर्युक्त विशेषताओं के साथ इन शब्दों को रखा है। आप किन विशेषताओं के साथ इन उपर्युक्त शब्दों को रखना चाहेंगे और क्यों? लिखिए।

उत्तर: अखंड – न्याय:

(अखंड सत्य के साथ “न्याय” शब्द रखना चाहूंगा क्योंकि न्याय ही समाज में स्थिरता और समरसता लाता है, और यह सच्चे राष्ट्र निर्माण का आधार है।)

जीवन – स्वतंत्र:

(जीवन को “स्वतंत्र” शब्द के साथ रखना चाहूंगा क्योंकि स्वतंत्रता ही जीवन के वास्तविक उद्देश्य को पूरा करती है, और नेताजी ने भी स्वतंत्रता को जीवन के सर्वोत्तम लक्ष्य के रूप में देखा।)

समाज – समान:

(“समान समाज” शब्द के साथ रखना चाहूंगा क्योंकि समाज में समानता और भेदभाव का न होना आवश्यक है। समान अधिकार और अवसर सभी को मिलना चाहिए।)

शक्ति – प्रेरक:

(“प्रेरक शक्ति” शब्द के साथ रखना चाहूंगा क्योंकि शक्ति केवल बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक प्रेरणा से आती है। युवा वर्ग को प्रेरित करने के लिए यह शब्द उपयुक्त है।)

राष्ट्र – संकीर्ण:

(“संकीर्ण राष्ट्र” शब्द के साथ रखना चाहूंगा क्योंकि नेताजी के आदर्श राष्ट्र में किसी भी प्रकार की संकीर्णता नहीं होनी चाहिए—न राष्ट्रीयता में, न जाति, धर्म और वर्ग में।)

आनंद – समान:

(“समान आनंद” शब्द रखना चाहूंगा क्योंकि सच्चा आनंद तब होता है जब हर व्यक्ति को समान अवसर, समान अधिकार और समान सम्मान मिलता है। यह उस समाज की पहचान है जहाँ सभी को समान आनंद और खुशी मिलती है।)

विपरीतार्थक शब्द और उनके प्रयोग

(क) “और उस पर एक स्वाधीन राष्ट्र” इस वाक्यांश में रेखांकित शब्द ‘स्वाधीन’ का विपरीत अर्थ देने वाला शब्द है ‘पराधीन’। इसी प्रकार के कुछ विपरीतार्थक शब्द आगे दिए गए हैं, लेकिन वे आमने-सामने नहीं हैं। रेखाएँ खींचकर विपरीतार्थक शब्दों के सही जोड़े बनाइए-

क्रम स्तंभ 1स्तंभ 2
1.स्वीकारकर्मण्य/कर्मठ
2.सार्थक विपन्न
3.विषमता अस्वीकार
4.क्षुद्रजीवन
5.संपन्ननिरर्थक
6.अकर्मण्यसमानता
7.मरणविशाल/वृहत/विराट/महान

उत्तर:

क्रम स्तंभ 1स्तंभ 2
1.स्वीकारअस्वीकार
2.सार्थक निरर्थक
3.विषमता समानता
4.क्षुद्रविशाल/वृहत/विराट/महान
5.संपन्नविपन्न
6.अकर्मण्यकर्मण्य/कर्मठ
7.मरणजीवन

(ख) अब स्तंभ 1 और स्तंभ 2 के सभी शब्दों से दिए गए उदाहरण के अनुसार वाक्य बनाकर लिखिए, जैसे -“समाज की उन्नति अकर्मण्य नहीं अपितु कर्मण्य व्यक्तियों पर निर्भर है।”

उत्तर: अब स्तंभ 1 और स्तंभ 2 के सभी शब्दों से दिए गए उदाहरण के अनुसार वाक्य बनाकर “समाज की उन्नति अकर्मण्य नहीं अपितु कर्मण्य व्यक्तियों पर निर्भर है-

स्वीकार – अस्वीकार।

“हर व्यक्ति का सम्मान करना स्वीकार है, लेकिन किसी को अस्वीकार करना समाज में असमानता को बढ़ावा देता है।”

सार्थक – निरर्थक।

“शिक्षा का उद्देश्य सार्थक होना चाहिए, न कि निरर्थक प्रयासों में समय बर्बाद करना।”

विषमता – समानता।

“समाज में विषमता को समाप्त कर समानता स्थापित करना आवश्यक है।”

क्षुद्र – विशाल/वृहत/विराट/महान।

“यह व्यक्ति के दृष्टिकोण पर निर्भर करता है कि वह किसी समस्या को क्षुद्र तरीके से देखता है या विशाल दृष्टिकोण से।”

संपन्न – विपन्न।

“समाज में संपन्न और विपन्न दोनों वर्गों के बीच भेदभाव नहीं होना चाहिए।”

अकर्मण्य – कर्मण्य/कर्मठ।

“समाज की उन्नति अकर्मण्य नहीं, अपितु कर्मण्य व्यक्तियों पर निर्भर है।”

मरण – जीवन।

“मरण से डरने के बजाय हमें जीवन के हर पल का सही उपयोग करना चाहिए।”

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) आपने सुभाषचंद्र बोस के स्वप्न के बारे में जाना। आप अपने विद्यालय, राज्य और देश के बारे में कैसे स्वान देखते हैं? लिखिए।

उत्तर: मैं अपने विद्यालय, राज्य और देश के बारे में एक समृद्ध, स्वावलंबी और समानता से भरे हुए स्वप्न देखता हूँ। मेरे विद्यालय में प्रत्येक छात्र को समान अवसर मिलें, चाहे वह किसी भी पृष्ठभूमि से हो। यहाँ शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए सभी को प्रेरित किया जाए।

मेरे राज्य में विकास के सभी पहलू—शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पर्यावरण—समझदारी से संतुलित हों। यहाँ हर नागरिक को समान अधिकार और अवसर मिलें, और जाति, धर्म या सामाजिक स्थिति के आधार पर कोई भेदभाव न हो।

मेरे देश में आदर्श समाज की स्थापना हो, जहाँ हर व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार उन्नति के अवसर मिलें। राष्ट्र में सभी को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ, रोजगार, और सम्मान मिले, और हम मिलकर एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में काम करें। यह स्वप्न सुभाषचंद्र बोस के विचारों और उनके संघर्ष से प्रेरित है, जो हमें आदर्श राष्ट्र की दिशा में मार्गदर्शन करते हैं।

(ख) हमें बड़े संघर्षों के बाद स्वतंत्रता मिली है। अपनी इस स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए हम अपने स्तर पर क्या-क्या कर सकते हैं? लिखिए।

उत्तर: हमारी स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए हमें अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का पूरी तरह पालन करना चाहिए। इसके लिए हम निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं:

संविधान का सम्मान करें – हमारे संविधान में निर्धारित अधिकारों और कर्तव्यों का पालन करना चाहिए, ताकि समाज में कोई असमानता या भेदभाव न हो।

शिक्षा में सुधार करें – शिक्षा के माध्यम से हम समाज को जागरूक कर सकते हैं और भविष्य के लिए सही दिशा तय कर सकते हैं।

समाज सेवा में भाग लें – समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए हमें सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए, चाहे वह पर्यावरण की रक्षा हो या गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करना।

धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करें – हमारे देश में विविधता है, हमें हर धर्म, संस्कृति और भाषा का सम्मान करना चाहिए।

लोकतंत्र में भागीदारी – लोकतंत्र की सफलता के लिए हमें चुनावों में मतदान करना चाहिए और नागरिक कर्तव्यों को समझना चाहिए।

आत्मनिर्भरता और रोजगार सृजन – अपने देश को और अधिक स्वावलंबी बनाने के लिए हमें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम करना चाहिए, जैसे स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना और रोजगार सृजन करना।

इन उपायों से हम अपनी स्वतंत्रता को सशक्त बना सकते हैं और इसे स्थिर बनाए रख सकते हैं।

मिलान कीजिए

(क) नीचे स्तंभ 1 में स्वतंत्रता सेनानियों से संबंधित कुछ तथ्य दिए गए हैं और स्तंभ 2 में स्वतंत्रता सेनानियों के नाम दिए गए हैं। तथ्यों का स्वतंत्रता सेनानियों के नाम से रेखा खींचकर सही मिलान कीजिए। इसके लिए आप अपने शिक्षकों, अभिभावकों और पुस्तकालय तथा इंटरनेट की सहायता ले सकते हैं।

क्रम स्तंभ 1स्तंभ 2
1.8 अप्रैल, 1929 को ‘सेंट्रल असेंबली में बम फेंकने वाले क्रांतिकारी, ‘शहीद-ए-आज़म’ के नाम से जाने जाते हैं।1. सरदार वल्लभभाई पटेल
2.‘स्वराज पार्टी’ के संस्थापकों में से एक, सुभाषचंद्र बोस के राजनीतिक गुरु कहे जाते हैं।2. महात्मा गाँधी
3.जेल में क्रांतिकारियों के साथ राजबंदियों के समान व्यवहार न होने के कारण क्रांतिकारियों ने 13 जुलाई 1929 से भूख हड़ताल शुरू कर दी। अनशन के तिरसठवे दिन जेल में इनका देहांत हो गया।3. चंद्रशेखर आजाद
4.इनके जन्मदिवस पर अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ मनाया जाता है।4. चित्तरंजन दास
5.नर्मदा नदी के तट पर इनकी एक विशाल प्रतिमा स्थापित है। जिसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ कहा जाता है।5. जतिन दास
6.1921 में असहयोग आंदोलन में गिरफ्तार होने पर न्यायाधीश ने इनसे पिता का नाम पूछा तो इन्होंने कहा “मेरा नाम आजाद है, पिता का नाम स्वतंत्रता और पता कारावास है।”6. भगत सिंह

उत्तर:

क्रम स्तंभ 1स्तंभ 2
1.8 अप्रैल, 1929 को ‘सेंट्रल असेंबली में बम फेंकने वाले क्रांतिकारी, ‘शहीद-ए-आज़म’ के नाम से जाने जाते हैं।6. भगत सिंह
2.‘स्वराज पार्टी’ के संस्थापकों में से एक, सुभाषचंद्र बोस के राजनीतिक गुरु कहे जाते हैं।4. चित्तरंजन दास
3.जेल में क्रांतिकारियों के साथ राजबंदियों के समान व्यवहार न होने के कारण क्रांतिकारियों ने 13 जुलाई 1929 से भूख हड़ताल शुरू कर दी। अनशन के तिरसठवे दिन जेल में इनका देहांत हो गया।5. जतिन दास
4.इनके जन्मदिवस पर अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ मनाया जाता है।2. महात्मा गाँधी
5.नर्मदा नदी के तट पर इनकी एक विशाल प्रतिमा स्थापित है। जिसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ कहा जाता है।1. सरदार वल्लभभाई पटेल
6.1921 में असहयोग आंदोलन में गिरफ्तार होने पर न्यायाधीश ने इनसे पिता का नाम पूछा तो इन्होंने कहा “मेरा नाम आजाद है, पिता का नाम स्वतंत्रता और पता कारावास है।”3. चंद्रशेखर आजाद

(ख) इनमें से एक स्वतंत्रता सेनानी का नाम ‘तरुण के स्वप्न’ पाठ में भी आया है। उसे पहचान कर लिखिए।

उत्तर: चित्तरंजन दास।

सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज के लिए प्रयास

नेताजी सुभाषचंद्र बोस और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वाधीन संपन्न समाज की स्थापना के लिए अपने समय में अनेक प्रयास किए। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात इस दिशा में क्या-क्या उल्लेखनीय प्रयत्न किए गए हैं? अपनी सामाजिक अध्ययन की पाठ्यपुस्तक, अपने अनुभवों एवं पुस्तकालय की सहायता से लिखिए।

उत्तर: संविधान निर्माण: 1950 में भारत का संविधान लागू हुआ, जो समानता और स्वतंत्रता की गारंटी देता है।

शिक्षा नीतियाँ: सर्व शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय शिक्षा नीति से शिक्षा को बढ़ावा दिया गया।

महिला सशक्तीकरण: बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और महिलाओं के लिए आरक्षण जैसे कदम उठाए गए।

आर्थिक सुधार: स्वदेशी उद्योगों और आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा दिया गया।

सामाजिक सुधार: जातिभेद और छुआछूत के खिलाफ कानून बनाए गए।

स्त्री सशक्तीकरण

(क) सुभाषचंद्र बोस ने स्त्रियों के लिए समान अधिकार की बात की है। अपने अनुभवों के आधार पर बताइए कि उन्हें कौन-कौन से विशेषाधिकार राज्य की ओर से दिए गए हैं?

उत्तर: सुभाषचंद्र बोस ने स्त्रियों के लिए समान अधिकार की बात करते हुए उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार के समान अवसर प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया। उनके दृष्टिकोण के अनुसार, महिलाओं को पुरुषों के समान समाज में अपनी जगह बनानी चाहिए और उनका योगदान राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण होना चाहिए। 

स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, भारत सरकार और समाज ने महिलाओं को कुछ विशेषाधिकार और अधिकार दिए:

शिक्षा का समान अधिकार – महिलाओं को शिक्षा में समान अवसर मिलने लगे, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और राष्ट्र की प्रगति में योगदान दे सकें।

स्वास्थ्य सुविधाओं की बढ़ोत्तरी – महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए विशेष योजनाएं बनाई गईं और उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुँच सुनिश्चित की गई।

स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी – महिलाओं को स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने का अधिकार मिला और उन्होंने विभिन्न आंदोलनों में सक्रिय रूप से भाग लिया।

राजनीतिक भागीदारी – महिलाओं को वोट देने का अधिकार मिला, और वे राजनीति में हिस्सा लेने लगीं।

आर्थिक अधिकार – महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता देने के लिए नारी-शक्ति की बढ़ती भूमिका और रोजगार के अवसर दिए गए।

सुभाषचंद्र बोस ने इन विशेषाधिकारों के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाने के लिए प्रेरित किया।

(ख) सुभाषचंद्र बोस ने ‘आजाद हिंद फौज’ का नेतृत्व किया था। उसमें एक टुकड़ी स्त्रियों की भी थी। उस टुकड़ी का नाम पता लगाकर लिखिए। उस टुकड़ी की भूमिका क्या थी? यह भी बताइए।

उत्तर: सुभाषचंद्र बोस ने ‘आजाद हिंद फौज’ (Indian National Army) में एक महिला टुकड़ी का गठन किया था, जिसका नाम ‘रानी झाँसी रेजिमेंट’ था। इस रेजिमेंट का नाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की महान वीरता और साहस की प्रतीक रानी झाँसी के नाम पर रखा गया था।

‘रानी झाँसी रेजिमेंट’ की भूमिका:

स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी – इस रेजिमेंट की महिलाएँ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए सशस्त्र संघर्ष करती थीं।

मूल्य और योगदान – रानी झाँसी रेजिमेंट की महिला सैनिकों ने देश के लिए अपनी जान की बाजी लगाकर स्वतंत्रता संग्राम में योगदान दिया और उन्होंने पुरुषों के समान साहस और वीरता का प्रदर्शन किया।

सैनिक प्रशिक्षण और युद्ध में भागीदारी – इन महिलाओं को सैनिक प्रशिक्षण दिया गया था, और वे युद्ध की लड़ाई में पुरुषों के समान सक्रिय रूप से भाग लेती थीं।

स्त्री सशक्तीकरण का प्रतीक – यह रेजिमेंट महिलाओं की शक्ति और सशक्तिकरण का प्रतीक बन गई, जो पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश की स्वतंत्रता की लड़ाई में शामिल हुईं।

आपके प्रिय स्वतंत्रता सेनानी

आप किस स्वतंत्रता सेनानी के कार्यों व विचारों से प्रभावित हैं? कारण सहित लिखिए और अभिनय (रोल प्ले) करते हुए उनके विचारों को कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर: आपके प्रिय स्वतंत्रता सेनानी : मैं सुभाषचंद्र बोस के कार्यों और विचारों से प्रभावित हूँ। उनकी निष्ठा, साहस और देशभक्ति ने मुझे हमेशा प्रेरित किया।

प्रभावित होने के कारण: स्वतंत्रता के लिए संघर्ष – सुभाषचंद्र बोस ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ा और “आजाद हिंद फौज” बनाई। उनका मानना था कि स्वतंत्रता के लिए शारीरिक और मानसिक शक्ति की आवश्यकता है।

युवाओं को प्रेरणा – उनका प्रसिद्ध नारा, “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा”, आज भी युवाओं को प्रेरित करता है।

नारी सशक्तिकरण – उन्होंने महिलाओं को स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लेने का मौका दिया और “रानी झाँसी रेजिमेंट” बनाई।

आत्मनिर्भरता – बोस का मानना था कि आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास से ही राष्ट्र मजबूत बन सकता है।

रोल प्ले (अभिनय):

कक्षा में प्रस्तुति करते हुए:

“हमारे राष्ट्र की स्वतंत्रता का संघर्ष कभी समाप्त नहीं होगा, हमें हर एक कदम पर आगे बढ़ना है। जैसे मैंने कहा था, ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा’, यही आत्मविश्वास हमें अपने राष्ट्र के लिए दिखाना होगा। महिलाओं और युवाओं को समान अधिकार मिलें, और हम एक सशक्त राष्ट्र बनाएं।”

“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा।”

ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष में 1944 में सुभाषचंद्र बोस ने ‘तुम मुझे खून दो, में तुम्हें आजादी दूंगा” नारे  के माध्यम से आह्वान किया था। स्वाधीनता संग्राम के दौरान और सेनानियों के अदम्य साहस, निर्भीकता और देश-प्रेम को दशत्ति हैं। मुझे खून दो, में तुम्हें आजादी दूंगा” नारे भी बहुत बहुत से नारे दिए गए। ये नारे स्वतंत्रता

नीचे स्तंभ । में कुछ नारे दिए गए हैं। नारों के सामने लिखिए कि यह किसके द्वारा दिया गया? आप पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।

नारा स्वतंत्रता सेनानी
स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।
करो या मरो
में आजाद हूँ, आजाद रहूँगा और आजाद ही मरूंगा
इंकलाब जिंदाबाद, साम्राज्यवाद मुर्दाबाद
पूर्ण स्वराज

उत्तर:

नारा स्वतंत्रता सेनानी
स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।बाल गंगाधर तिलक
करो या मरोमहात्मा गाँधी
में आजाद हूँ, आजाद रहूँगा और आजाद ही मरूंगाचंद्रशेखर आज़ाद
इंकलाब जिंदाबाद, साम्राज्यवाद मुर्दाबादभगत सिंह
पूर्ण स्वराजजवाहरलाल नेहरू

परियोजना कार्य

आप सभी राज्यों के स्वतंत्रता सेनानियों के विषय में पढ़कर उनमें से 10 महिला एवं 10 पुरुष स्वतंत्रता सेनानियों के चित्रों का संग्रह करके एक संग्रहिका तैयार कीजिए। चित्रों के नीचे उनके विशेष योगदान के बारे में एक-दो वाक्य भी लिखिए। अपनी संग्रहिका तैयार करते समय ध्यान रखिए कि आप किसी भी राज्य से एक से अधिक व्यक्ति न चुने।

उत्तर:

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