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NCERT Class 11 Economics Important Chapter 6 रोजगार संवृद्धि, अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे
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रोजगार संवृद्धि, अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे
Chapter: 6
| भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास |
| IMPORTANT SOLUTIONS |
लघु उत्तरीय प्रश्न:
1. श्रमिक किसे कहते हैं?
उत्तर: वे सभी व्यक्ति जो विभिन्न आर्थिक क्रियाओं में संलग्न होते हैं और देश के सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) में योगदान देते हैं, श्रमिक कहलाते हैं।
2. आर्थिक क्रियाएँ क्या हैं?
उत्तर: देश के सकल राष्ट्रीय उत्पाद में योगदान देने वाले सभी क्रियाकलापों को आर्थिक क्रियाएँ कहा जाता है।
3. श्रमिक-जनसंख्या अनुपात क्या दर्शाता है?
उत्तर: यह अनुपात यह जानने में सहायक होता है कि देश की कुल जनसंख्या का कितना भाग वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में सक्रिय रूप से योगदान दे रहा है।
4. स्वनियोजित श्रमिक किन्हें कहा जाता है?
उत्तर: वे व्यक्ति जो अपने स्वयं के उद्यम के स्वामी और संचालक होते हैं, स्वनियोजित श्रमिक कहलाते हैं।
5. अनियत मज़दूर कौन होते हैं?
उत्तर: ऐसे मज़दूर जो दूसरों के खेतों या निर्माण कार्यों आदि में अनियत रूप से कार्य करते हैं और उसके बदले दिहाड़ी/पारिश्रमिक प्राप्त करते हैं, अनियत मज़दूर कहलाते हैं।
6. नियमित वेतनभोगी कर्मचारी किसे कहते हैं?
उत्तर: जब किसी श्रमिक को कोई व्यक्ति या उद्यम नियमित रूप से काम पर रखता है और उसे नियमित रूप से वेतन देता है, तो वह नियमित वेतनभोगी कर्मचारी कहलाता है।
7. आर्थिक गतिविधियों को किन तीन प्रमुख क्षेत्रकों में विभाजित किया गया है?
उत्तर: आर्थिक गतिविधियों को मुख्य रूप से प्राथमिक क्षेत्रक, द्वितीयक क्षेत्रक और तृतीयक/सेवा क्षेत्रक (Tertiary/Service) में विभाजित किया गया है।
8. भारत में रोजगार का सबसे बड़ा स्रोत कौन सा क्षेत्रक है?
उत्तर: भारत में अधिकांश श्रमिकों के रोजगार का प्रमुख स्रोत प्राथमिक क्षेत्रक (कृषि आदि) है।
9. ‘रोज़गारहीन संवृद्धि’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: जब भारतीय अर्थव्यवस्था में रोज़गार के पर्याप्त अवसर सृजित किए बिना ही वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में वृद्धि होती है, तो उसे रोज़गारहीन संवृद्धि कहा जाता है।
10. श्रम बल का अनियतीकरण क्या है?
उत्तर: श्रमिकों का स्वनियोजित तथा नियमित वेतनभोगी रोज़गार से हटकर धीरे-धीरे अनियत (दिहाड़ी) श्रम की ओर बढ़ने की प्रक्रिया को श्रम बल का अनियतीकरण कहा जाता है।
11. औपचारिक क्षेत्रक में कौन से प्रतिष्ठान शामिल होते हैं?
उत्तर: सभी सार्वजनिक क्षेत्रक प्रतिष्ठान तथा 10 या उससे अधिक कर्मचारियों को रोज़गार देने वाले निजी क्षेत्रक प्रतिष्ठान औपचारिक क्षेत्रक माने जाते हैं।
12. अनौपचारिक क्षेत्रक में किसे शामिल किया जाता है?
उत्तर: औपचारिक क्षेत्रक के अलावा अन्य सभी उद्यमों, उनमें कार्य करने वाले श्रमिकों, किसानों, कृषि श्रमिकों और छोटे काम-धंधे चलाने वाले स्वनियोजित व्यक्तियों को अनौपचारिक क्षेत्रक में शामिल किया जाता है।
13. प्रच्छन्न बेरोज़गारी क्या है?
उत्तर: जब किसी कार्य में आवश्यकता से अधिक लोग लगे होते हैं, और यदि उनमें से कुछ को हटा भी दिया जाए तो उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, तो ऐसी स्थिति प्रच्छन्न बेरोज़गारी कहलाती है।
14. मौसमी बेरोज़गारी से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: कृषि एक मौसमी कार्य है, इसलिए जब वर्ष के कुछ महीनों में खेतों में काम नहीं होता और लोगों को काम की तलाश में शहरों की ओर जाना पड़ता है, तो काम न होने की इस अवस्था को मौसमी बेरोज़गारी कहते हैं।
15. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी देने वाले सरकार के प्रमुख अधिनियम का नाम क्या है?
उत्तर: भारत की संसद द्वारा पारित ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), 2005’।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न:
1. रोजगार क्या है? श्रमिक किसे कहते हैं? भारत में रोजगार की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: रोजगार वह आर्थिक गतिविधि है जिसके माध्यम से व्यक्ति वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में योगदान देता है तथा बदले में आय प्राप्त करता है। रोजगार व्यक्ति की आजीविका का मुख्य साधन है।
श्रमिक वह व्यक्ति है जो किसी भी प्रकार के आर्थिक कार्य में लगा होता है, चाहे वह मजदूरी पर कार्य करे, वेतनभोगी हो या स्व-नियोजित हो।
भारत में रोजगार की प्रमुख विशेषताएँ है:
(i) भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में श्रमिकों की संख्या अधिक है।
(ii) पुरुषों की तुलना में महिलाओं की श्रम भागीदारी कम है।
(iii) बड़ी संख्या में लोग स्व-रोजगार में लगे हुए हैं।
(iv) असंगठित क्षेत्र में रोजगार का प्रभुत्व है।
(v) कई श्रमिकों को नियमित रोजगार और सामाजिक सुरक्षा प्राप्त नहीं होती।
(vi) कृषि क्षेत्र अभी भी सबसे बड़ा रोजगारदाता है।
2. ‘रोज़गारहीन संवृद्धि’ और ‘श्रम बल के अनियतीकरण’ से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: रोज़गारहीन संवृद्धि: 1990 के दशक के अंतिम वर्षों में यह देखा गया कि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर और रोजगार की वृद्धि दर के बीच काफी बड़ा अंतर आ गया। जब भारतीय अर्थव्यवस्था में रोजगार के नए और पर्याप्त अवसर सृजित किए बिना ही वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन (सकल घरेलू उत्पाद) में वृद्धि होती है, तो उस स्थिति को ‘रोज़गारहीन संवृद्धि’ कहा जाता है।
श्रम बल का अनियतीकरण: पिछले कुछ दशकों (1972 से 2024 तक) के दौरान, लोगों का स्वनियोजित (Self-employed) और नियमित वेतनभोगी (Regular salaried) रोजगार से हटकर अनियत (Casual) दिहाड़ी श्रम की ओर बढ़ने का रुझान देखा गया है। रोजगार के इस प्रकार बदलने की प्रक्रिया को श्रम बल का अनियतीकरण कहा जाता है। इससे मजदूरों की दशा बहुत नाजुक और असुरक्षित हो जाती है।
3. भारत में पाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की बेरोज़गारी का विस्तार से वर्णन करें।
उत्तर: भारत में मुख्य रूप से तीन प्रकार की बेरोज़गारी देखने को मिलती है:
(i) खुली बेरोज़गारी: यह वह अवस्था है जिसमें व्यक्ति प्रचलित मजदूरी दर पर काम करने का इच्छुक होता है, काम की तलाश करता है, लेकिन उसे काम नहीं मिल पाता।
(ii) प्रच्छन्न बेरोज़गारी: यह विशेष रूप से भारत के कृषि क्षेत्र में सबसे आम है। इसका अर्थ है कि किसी काम में आवश्यकता से अधिक लोग लगे होना। उदाहरण के लिए, यदि एक खेत में केवल 2 श्रमिकों की आवश्यकता है लेकिन परिवार के 5 सदस्य वहाँ काम कर रहे हैं, तो अतिरिक्त 3 लोग प्रच्छन्न रूप से बेरोजगार हैं।
(iii) मौसमी बेरोज़गारी: चूँकि कृषि एक मौसमी कार्य है, इसलिए वर्ष भर गाँव में रोजगार उपलब्ध नहीं होता। जब ऑफ-सीजन में काम नहीं होता है तो लोग रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन करते हैं। इसे मौसमी बेरोज़गारी कहा जाता है।
4. देश में रोजगार सृजन में सरकार किस प्रकार अपनी भूमिका निभाती है?
उत्तर: स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से ही केंद्र और राज्य सरकारें रोजगार सृजन के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह के प्रयास कर रही हैं:
(i) प्रत्यक्ष प्रयास: सरकार अपने विभिन्न प्रशासनिक विभागों, होटलों, परिवहन कंपनियों और उद्योगों में प्रत्यक्ष रूप से लोगों को रोजगार प्रदान करती है।
(ii) अप्रत्यक्ष प्रयास: जब सरकारी उद्यमों के उत्पादन में वृद्धि होती है, तो उन्हें कच्चा माल आदि की आपूर्ति करने वाले निजी उद्योगों को भी अपना उत्पादन बढ़ाना पड़ता है। इससे अर्थव्यवस्था में अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं।
(iii) रोज़गार सृजन कार्यक्रम: सरकार गरीबी निवारण के लिए कई कार्यक्रम चलाती है, जिन्हें रोज़गार सृजन कार्यक्रम भी कहा जाता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण 2005 में पारित ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा)’ है, जो ग्रामीण परिवारों को 100 दिन के दिहाड़ी रोजगार की गारंटी देता है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य, शिक्षा, जल आपूर्ति और सड़कों जैसी सामुदायिक संपत्तियों का भी विकास किया जाता है।
5. भारत में रोजगार के क्षेत्रीय वितरण का वर्णन कीजिए।
उत्तर: भारत में रोजगार को मुख्य रूप से प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों में बाँटा जाता है। प्राथमिक क्षेत्र में कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और वानिकी जैसे कार्य शामिल होते हैं। आज भी भारत की बड़ी आबादी इसी क्षेत्र में कार्य करती है।
द्वितीयक क्षेत्र में उद्योग, विनिर्माण तथा निर्माण कार्य आते हैं। औद्योगीकरण के कारण इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। तृतीयक क्षेत्र में बैंकिंग, परिवहन, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और अन्य सेवाएँ शामिल हैं। वर्तमान समय में सेवा क्षेत्र सबसे तेजी से विकसित हो रहा है और बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार प्रदान कर रहा है। आर्थिक विकास के साथ रोजगार का स्वरूप कृषि से उद्योग और सेवा क्षेत्र की ओर बढ़ता जा रहा है, जिससे देश की उत्पादन क्षमता और आय में वृद्धि होती है।
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