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NCERT Class 11 Economics Important Chapter 7 पर्यावरण और धारणीय विकास
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पर्यावरण और धारणीय विकास
Chapter: 7
| भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास |
| IMPORTANT SOLUTIONS |
लघु उत्तरीय प्रश्न:
1. पर्यावरण किसे कहते हैं?
उत्तर: पर्यावरण को समस्त भूमंडलीय विरासत और सभी संसाधनों की समग्रता के रूप में परिभाषित किया जाता है, जिसमें वे सभी जैविक और अजैविक तत्व आते हैं जो एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।
2. पर्यावरण के जैविक (Biotic) और अजैविक तत्व क्या हैं?
उत्तर: पक्षी, पशु, पौधे, वन और मछलियाँ आदि जैविक तत्व हैं, जबकि हवा, पानी, भूमि, चट्टान और सूर्य की किरणें अजैविक तत्व हैं।
3. पर्यावरण के मुख्य कार्य क्या हैं?
उत्तर: पर्यावरण के चार मुख्य कार्य हैं: संसाधनों की आपूर्ति करना, कचरे (अवशेष) को समाहित करना, जैविक विविधता प्रदान करके जीवन का पोषण करना, और सौंदर्य विषयक सेवाएं प्रदान करना।
4. नवीकरणीय संसाधन किसे कहते हैं?
उत्तर: ये वे संसाधन हैं जिनका उपयोग उनके क्षय या समाप्त होने की आशंका के बिना किया जा सकता है।
5. अवशोषी क्षमता का क्या अर्थ है?
उत्तर: अवशोषी क्षमता का अर्थ पर्यावरण की उस योग्यता से है जिसके द्वारा वह अपक्षय को सोख लेता है।
6. वैश्विक उष्णता क्या है?
उत्तर: वैश्विक उष्णता पृथ्वी और समुद्र के वातावरण के औसत तापमान में होने वाली क्रमिक वृद्धि को कहते हैं, जो ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ने के कारण होती है।
7. ओजोन अपक्षय का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: समतापमंडल में क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) जैसे यौगिकों के माध्यम से क्लोरीन और ब्रोमीन के उच्च स्तर का पहुँचना ओजोन अपक्षय का मुख्य कारण है।
8. भारत के पर्यावरण को मुख्य रूप से कौन से दो खतरे हैं?
उत्तर: पहला खतरा गरीबी के कारण होने वाला पर्यावरण का अपक्षय है, और दूसरा खतरा साधन-संपन्नता तथा तेजी से बढ़ते औद्योगिक क्षेत्र के प्रदूषण से है।
9. अप्पिको आंदोलन किससे संबंधित है?
उत्तर: यह आंदोलन वनों के संरक्षण से संबंधित है। यह 1983 में कर्नाटक के सिरसी जिले में पेड़ों की कटाई रोकने के लिए शुरू किया गया था जिसमें लोगों ने पेड़ों को बाहों में भर लिया था।
10. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की स्थापना क्यों की गई थी?
उत्तर: भारत में वायु तथा जल प्रदूषण की गंभीर चिंताओं से निपटने के लिए सरकार ने 1974 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्थापना की थी।
11. धारणीय विकास की क्या परिभाषा है?
उत्तर: ब्रंटलैंड कमीशन के अनुसार, “यह ऐसा विकास है जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं की पूर्ति क्षमता से समझौता किए बिना पूरा करे”।
12. ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण सुधारने के लिए किन ईंधनों को बढ़ावा दिया जा रहा है?
उत्तर: लकड़ी और उपले के बजाय, सब्सिडी प्रदान करके तरल पेट्रोलियम गैस (LPG) और गोबर गैस को स्वच्छ ईंधन के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है।
13. शहरी परिवहन में प्रदूषण कम करने के लिए किस गैस का उपयोग किया जा रहा है?
उत्तर: दिल्ली और अन्य शहरों में सार्वजनिक परिवहन में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए उच्चदाब प्राकृतिक गैस (CNG) का प्रयोग किया जा रहा है।
14. फोटोवोल्टिक सेल का क्या काम है?
उत्तर: फोटोवोल्टिक सेल की मदद से सौर ऊर्जा को ग्रहण करके उसे सीधे विद्युत (बिजली) में परिवर्तित किया जाता है।
15. जैविक-कीट नियंत्रण में कौन सा पेड़ बहुत उपयोगी साबित हो रहा है?
उत्तर: नीम का पेड़ जैविक-कीट नियंत्रण में काफी उपयोगी साबित हो रहा है, जिससे कई प्रकार के प्राकृतिक कीट नियंत्रक रसायन बनाए जा रहे हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न:
1. पर्यावरण की ‘धारण क्षमता’ का क्या अर्थ है और इस क्षमता के पार होने पर क्या परिणाम होते हैं?
उत्तर: पर्यावरण अपने सभी महत्वपूर्ण कार्यों को बिना किसी रुकावट के तब तक कर सकता है जब तक कि ये कार्य उसकी ‘धारण क्षमता’ के भीतर हों। इसका सीधा अर्थ है कि संसाधनों का दोहन (निकालना) उनके प्राकृतिक पुनर्जनन की दर से अधिक नहीं होना चाहिए और पैदा होने वाला कचरा पर्यावरण की अवशोषी क्षमता के अंदर होना चाहिए। जब दोहन और प्रदूषण इस सीमा को पार कर जाते हैं, तो पर्यावरण जीवन को सहारा देने का अपना कार्य करने में विफल हो जाता है। इसी से पर्यावरणीय संकट पैदा होता है। आज दुनिया भर में बढ़ती जनसंख्या और विकसित देशों के अत्यधिक उपभोग के कारण कई संसाधन विलुप्त हो गए हैं और कचरा पर्यावरण की सोखने की क्षमता से बाहर हो गया है।
2. भारत में भूमि अपक्षय के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारण कौन-से हैं?
उत्तर: भारत में भूमि का बड़े पैमाने पर अपक्षय हुआ है, जिसके लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण उत्तरदायी हैं:
(i) वन विनाश के कारण वनस्पतियों की हानि और वन-भूमि का अतिक्रमण।
(ii) जलाऊ लकड़ी और चारे का उनकी क्षमता से अधिक दोहन।
(iii) वनों में आग लगना और अत्यधिक चराई की समस्या।
(iv) गलत फसल चक्र और भू-संरक्षण के लिए उचित उपायों का अभाव।
(v) रासायनिक खादों और कीटनाशकों (कृषि-रसायनों) का अनुचित और अंधाधुंध प्रयोग।
(vi) सिंचाई व्यवस्था का अविवेकपूर्ण प्रबंधन तथा भूमिगत जल का क्षमता से अधिक निष्कर्षण।
(vii) कृषि पर निर्भर लोगों की अत्यधिक गरीबी।
3. अर्थशास्त्री हरमन डेली के अनुसार धारणीय विकास प्राप्त करने के लिए किन शर्तों या आवश्यकताओं का पूरा होना अनिवार्य है?
उत्तर: प्रख्यात पर्यावरणवादी अर्थशास्त्री हरमन डेली ने धारणीय विकास की प्राप्ति के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण शर्तें बताई हैं:
(i) जनसंख्या नियंत्रण: मानव जनसंख्या को पर्यावरण की ‘धारण क्षमता’ के स्तर तक ही सीमित रखना होगा, क्योंकि पृथ्वी की क्षमता से अधिक जनसंख्या धारणीय विकास को असंभव बना देती है।
(ii) तकनीकी प्रगति का स्वरूप: प्रौद्योगिक प्रगति ऐसी होनी चाहिए जो संसाधनों का कम इस्तेमाल करे (आगत-निपुण) न कि जो संसाधनों को ज्यादा नष्ट करे।
(iii) संसाधन दोहन की सीमा: नवीकरणीय संसाधनों के इस्तेमाल की दर किसी भी स्थिति में उनके पुनर्जनन (Regeneration) की दर से अधिक नहीं होनी चाहिए।
(iv) गैर-नवीकरणीय संसाधनों का उपयोग: गैर-नवीकरणीय (समाप्त होने वाले) संसाधनों के खत्म होने की दर नवीनीकृत विकल्पों की खोज से अधिक नहीं होनी चाहिए।
(v) प्रदूषण नियंत्रण: प्रदूषण के कारण उत्पन्न होने वाली अक्षमताओं को तुरंत सुधारा जाना चाहिए।
4. भारत में ‘धारणीय विकास’ को बढ़ावा देने के लिए अपनाई जा सकने वाली किन्हीं तीन प्रमुख रणनीतियों का वर्णन करें।
उत्तर: भारत में ‘धारणीय विकास’ को बढ़ावा देने के लिए अपनाई जा सकने वाली किन्हीं तीन प्रमुख रणनीतियों हैं:
(i) ऊर्जा के गैर-पारंपरिक स्रोतों का उपयोग: भारत विद्युत के लिए थर्मल पावर प्लांट पर बहुत निर्भर है जो भारी प्रदूषण फैलाते हैं। इसके विकल्प के रूप में पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। ये ऊर्जा के बिलकुल स्वच्छ स्रोत हैं जिनका पर्यावरण पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता।
(ii) जैविक कम्पोस्ट और खाद का प्रयोग: पिछले कई दशकों से रासायनिक खादों के इस्तेमाल से मिट्टी और जल-प्रणाली बुरी तरह प्रदूषित हुई है। इसे सुधारने के लिए अब किसानों द्वारा फिर से जैविक कचरे और केंचुए से बनी जैविक कम्पोस्ट खाद का प्रयोग बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
(iii) पारंपरिक ज्ञान और जैविक-कीट नियंत्रण: रासायनिक कीटनाशकों के हानिकारक प्रभावों से बचने के लिए पारंपरिक ज्ञान का सहारा लिया जा रहा है। नीम के पेड़ से बने प्राकृतिक कीटनाशकों का प्रयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही उल्लू, मोर और छिपकली जैसे जीवों का संरक्षण किया जा रहा है जो हानिकारक कीड़ों को स्वाभाविक रूप से खा जाते हैं।
5. भारत में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए ‘केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड’ की स्थापना क्यों की गई थी और इसके प्रमुख कार्य क्या हैं? विस्तार से समझाइए।
उत्तर: भारत में वायु तथा जल प्रदूषण की दो प्रमुख पर्यावरणीय चिंताओं से निपटने के लिए सरकार ने वर्ष 1974 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की स्थापना की थी। इसके बाद, राज्य स्तर पर पर्यावरण की चिंताओं से निपटने के लिए राज्यों ने भी अपने-अपने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बनाए।
केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
(i) मानकों का निर्धारण: ये बोर्ड कचरे, व्यापार निकास और हानिकारक गैसों के उत्सर्जन के मानक निर्धारित करते हैं।सूचनाओं का संकलन और वितरण: ये जल, वायु और भूमि प्रदूषण से संबंधित सूचनाओं को इकट्ठा करते हैं और उनका वितरण करते हैं। जल प्रदूषण से संबंधित तकनीकी और सांख्यिकीय आँकड़ों का संकलन और संपादन भी इन्ही के द्वारा किया जाता है।
(ii) तकनीकी सहायता: ये बोर्ड जल प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण और कमी के लिए, तथा नदियों और कुओं की स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए सरकारों को तकनीकी सहायता प्रदान करते हैं। इसके साथ ही, वायु की गुणवत्ता में सुधार और वायु प्रदूषण के नियंत्रण के लिए भी तकनीकी मदद दी जाती है।
(iii) अनुसंधान और जाँच: ये जल व वायु प्रदूषण से संबंधित समस्याओं की जाँच और अनुसंधान करते हैं, और ऐसे अनुसंधानों को प्रायोजित भी करते हैं।
(iv) निगरानी: ये 125 नदियों (उप-नदियों सहित), कुओं, झीलों, खाड़ी, तालाबों, टैंकों, नालों और नहरों में जल की गुणवत्ता की निरंतर देखरेख करते हैं।
(v) उद्योगों का निरीक्षण: राज्य बोर्ड अपने जिला स्तरीय अधिकारियों के माध्यम से अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले उद्योगों का समय-समय पर निरीक्षण करते हैं ताकि यह जांचा जा सके कि गैसों और कचरे के निकास के उपाय पर्याप्त हैं या नहीं।
(vi) नगर नियोजन में सहायता: ये उद्योग-स्थान के निर्धारण और नगर नियोजन के लिए आवश्यक पृष्ठभूमि तथा वायु गुणवत्ता के आँकड़े प्रदान करते हैं।
(vii) जन-जागरूकता: ये बोर्ड प्रदूषण की रोकथाम के लिए जन संचार के माध्यम से जन-जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करते हैं।
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