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NCERT Class 11 Economics Important Chapter 15 सूचकांक

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NCERT Class 11 Economics Important Chapter 15 सूचकांक

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Chapter: 15

अर्थशास्त्र में सांख्यिकी
IMPORTANT SOLUTIONS

लघु उत्तरीय प्रश्न और उत्तर:

1. सूचकांक क्या है?

उत्तर: सूचकांक संबंधित चरों के समूह के परिमाण में परिवर्तनों को मापने का एक सांख्यिकीय साधन है, जो दो भिन्न स्थितियों में चरों के समूह में औसत परिवर्तन को मापता है।

2. सूचकांकों को पारंपरिक रूप से किस रूप में व्यक्त किया जाता है?

उत्तर: सूचकांकों को पारंपरिक रूप से प्रतिशत (%) के रूप में व्यक्त किया जाता है।

3. आधार अवधि में सूचकांक का मान कितना होता है?

उत्तर: आधार अवधि में सूचकांक का मान हमेशा 100 होता है।

4. कीमत सूचकांक (Price Index) क्या मापता है?

उत्तर: कीमत सूचकांक कुछ वस्तुओं की कीमतों को मापता है जिससे विभिन्न अवधियों में उनकी तुलना संभव हो पाती है।

5. परिमाणात्मक सूचकांक (Quantity Index) किन चीजों में परिवर्तन को मापता है?

उत्तर: परिमाणात्मक सूचकांक उत्पादन की भौतिक मात्रा, निर्माण तथा रोजगार में होने वाले परिवर्तन को मापता है।

6. सूचकांक की रचना करने की दो मुख्य विधियां कौन सी हैं?

उत्तर: सूचकांक की रचना करने की दो मुख्य विधियां हैं – समूहित विधि और मूल्यानुपातों की माध्य परिकलन विधि।

7. लेस्पेयर कीमत सूचकांक में भार के रूप में किसका प्रयोग किया जाता है?

उत्तर: लेस्पेयर कीमत सूचकांक में आधार अवधि की मात्राओं (Base period quantities) को भार के रूप में प्रयुक्त किया जाता है।

8. पाशे कीमत सूचकांक में भार के रूप में किसे प्रयुक्त किया जाता है?

उत्तर: पाशे कीमत सूचकांक में वर्तमान अवधि की मात्राओं को भार के रूप में प्रयुक्त किया जाता है।

9. उपभोक्ता कीमत सूचकांक (CPI) को अन्य किस नाम से जाना जाता है?

उत्तर: उपभोक्ता कीमत सूचकांक (CPI) को निर्वाह सूचकांक के नाम से भी जाना जाता है।

10. थोक कीमत सूचकांक (WPI) किस स्तर में परिवर्तन का संकेत देता है?

उत्तर: थोक कीमत सूचकांक (WPI) सामान्य कीमत-स्तर में होने वाले परिवर्तन का संकेत देता है।

11. संवेदी सूचकांक का आधार वर्ष क्या है?

उत्तर: मुंबई स्टॉक एक्सचेंज के संवेदी सूचकांक (Sensex) का आधार वर्ष 1978-79 है।

12. औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 8 प्रमुख ‘कोर’ उद्योग कौन-कौन से हैं?

उत्तर: औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में शामिल 8 कोर उद्योग हैं- कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, खाद, इस्पात, सीमेंट तथा विद्युत।

13. हेडलाइन मुद्रास्फीति किसे कहते हैं?

उत्तर: समग्र वस्तु मुद्रास्फीति दर को सामान्यतः हेडलाइन मुद्रास्फीति कहा जाता है।

14. देश में मुद्रास्फीति दर को मापने के लिए सामान्य रूप से किस सूचकांक का प्रयोग किया जाता है?

उत्तर: मुद्रास्फीति दर को मापने के लिए सामान्य रूप से थोक कीमत सूचकांक (WPI) का प्रयोग किया जाता है।

15. उपभोक्ता कीमत सूचकांक (CPI) का मुख्य रूप से किसलिए उपयोग किया जाता है?

उत्तर: उपभोक्ता कीमत सूचकांक (CPI) का उपयोग मजदूरी समझौते, कीमत-नीति, मुद्रा की क्रय शक्ति तथा वास्तविक मजदूरी के परिकलन के लिए किया जाता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न और उत्तर:

1. सूचकांक क्या है और इसकी रचना करते समय किन महत्वपूर्ण बातों/मुद्दों का ध्यान रखना चाहिए?

उत्तर: सूचकांक संबंधित चरों के समूह के परिमाण में परिवर्तनों को मापने का एक सांख्यिकीय साधन है, जो दो भिन्न स्थितियों में चरों के समूह में औसत परिवर्तन को मापता है।

एक सटीक सूचकांक की रचना करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:

(i) सूचकांक का उद्देश्य: सबसे पहले सूचकांक बनाने का उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए; जैसे, यदि मूल्य सूचकांक की आवश्यकता है, तो परिमाण सूचकांक की गणना करना अनुपयुक्त होगा।

(ii) मदों का चयन: मदों (items) का चुनाव सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए ताकि वे उस समूह का सही प्रतिनिधित्व कर सकें और परिवर्तन की सही जानकारी मिल सके।

(iii) आधार वर्ष का चुनाव (Base Year): प्रत्येक सूचकांक का एक आधार होना चाहिए। आधार वर्ष को सामान्य होना चाहिए, किसी चरम सीमा (Extreme values) वाला वर्ष नहीं चुनना चाहिए, और यह वर्ष अतीत में बहुत अधिक पुराना भी नहीं होना चाहिए।

(iv) सूत्र का चुनाव: अध्ययन किए जाने वाले प्रश्न की प्रकृति के आधार पर सही सूत्र (जैसे लेस्पेयर या पाशे) का चुनाव किया जाना चाहिए।

(v) आंकड़ों की विश्वसनीयता: आंकड़े विश्वसनीय स्रोतों से एकत्र किए जाने चाहिए, क्योंकि कम विश्वसनीयता वाले आंकड़े भ्रामक परिणाम देंगे। यदि प्राथमिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, तो सर्वाधिक विश्वसनीय द्वितीयक आंकड़ों का प्रयोग करना चाहिए।

2. सूचकांक की रचना करने की ‘समूहित विधि’ क्या है? इसके विभिन्न प्रकारों को स्पष्ट करें।

उत्तर: सूचकांक की रचना की एक प्रमुख विधि समूहित विधि है, जिसे मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जा सकता है:

सरल समूहित कीमत सूचकांक: इसमें सभी मदों को बराबर महत्व या भार वाला माना जाता है। इसका सूत्र P01 = (∑P1 /∑P0) × 100 है, जहाँ P1 वर्तमान अवधि की कीमत और P0 आधार अवधि की कीमत है। हालाँकि, इसका उपयोग सीमित है क्योंकि विभिन्न वस्तुओं की माप इकाइयाँ समान नहीं होती हैं और यह मदों के वास्तविक महत्व को नहीं दर्शाता।

भारित समूहित कीमत सूचकांक: जब मदों के सापेक्ष महत्व (परिमाणात्मक भार) को ध्यान में रखा जाता है, तो यह भारित सूचकांक बन जाता है।

इसकी दो प्रमुख विधियाँ हैं:

(i) लेस्पेयर कीमत सूचकांक: यह विधि आधार अवधि की मात्राओं को भार के रूप में प्रयुक्त करती है।

(ii) पाशे कीमत सूचकांक: यह विधि वर्तमान अवधि की मात्राओं को भार के रूप में प्रयुक्त करती है।

3. उपभोक्ता कीमत सूचकांक (CPI) क्या है? भारत में इसके प्रमुख प्रकार कौन से हैं?

उत्तर: उपभोक्ता कीमत सूचकांक (CPI) को निर्वाह सूचकांक भी कहा जाता है, जो खुदरा कीमतों (Retail prices) में औसत परिवर्तन को मापता है। यह दर्शाता है कि किसी विशिष्ट उपभोक्ता द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं की टोकरी के मूल्य में आधार वर्ष की तुलना में वर्तमान में कितना परिवर्तन आया है। 

भारत में राजकीय संस्थाओं द्वारा कई प्रकार के उपभोक्ता कीमत सूचकांक तैयार किए जाते हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

(i) औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक (आधार वर्ष 2001 = 100)।

(ii) कृषि श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता कीमत सूचकांक (आधार वर्ष 1986 – 87 = 100)।

(iii) ग्रामीण श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता कीमत सूचकांक (आधार वर्ष 1986 – 87 = 100)।

(iv) अखिल भारतीय संयुक्त उपभोक्ता कीमत सूचकांक (आधार वर्ष 2012 = 100), जिसका प्रयोग भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा कीमतों में परिवर्तन के मुख्य मापक के रूप में किया जाता है।

4. अर्थशास्त्र और सरकारी नीति-निर्माण में सूचकांकों के प्रमुख उपयोग क्या हैं?

उत्तर: अर्थशास्त्र और नीति-निर्माण में विभिन्न सूचकांकों का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है:

(i) उपभोक्ता कीमत सूचकांक (CPI) का उपयोग: यह मजदूरी समझौते, आय-नीति, कीमत-नीति, किराया-नियंत्रण, कराधान तथा सामान्य आर्थिक नीतियों के निर्माण में सहायक होता है। इसके अलावा, इसका उपयोग मुद्रा की क्रय शक्ति और वास्तविक मजदूरी की गणना के लिए किया जाता है।

(ii) थोक कीमत सूचकांक (WPI) का उपयोग: इसका मुख्य उपयोग सामान्य मुद्रास्फीति दर को मापने में किया जाता है। यह राष्ट्रीय आय और पूंजी-निर्माण जैसे समुच्चयों की कीमतों में परिवर्तन के प्रभाव को समझने में भी मदद करता है।

(iii) औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP): यह औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन में परिवर्तन के बारे में परिमाणात्मक जानकारी प्रदान करता है।

(iv) संवेदी सूचकांक: यह शेयर बाजार में निवेशकों के लिए मार्गदर्शक का काम करता है और भविष्य की अर्थव्यवस्था की दिशा में निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है।

5. थोक कीमत सूचकांक (WPI) और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के बीच क्या अंतर है?

उत्तर: थोक कीमत सूचकांक (WPI): यह सूचकांक सामान्य कीमत-स्तर में होने वाले परिवर्तन का संकेत देता है। इसमें थोक स्तर पर प्रचलित मूल्यों का प्रयोग किया जाता है और इसमें केवल वस्तुओं की कीमतों को सम्मिलित किया जाता है, सेवाओं (जैसे नाई के प्रभार, मरम्मत आदि) को नहीं। इसका अद्यतन आधार वर्ष 2011-12=100 माना गया है। इसमें विनिर्मित वस्तुओं का भार सबसे अधिक (64.23%) होता है।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP): कीमत सूचकांकों के विपरीत, यह सूचकांक भौतिक मात्राओं को मापने का प्रयास करता है। यह औद्योगिक क्षेत्रों (जैसे खनन, विनिर्माण और विद्युत) में उत्पादन के स्तर में बदलाव को मापता है। इसमें 8 ‘कोर’ (Core) उद्योगों (कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, खाद, इस्पात, सीमेंट तथा विद्युत) का सामूहिक भार 40.27% होता है। इसका भी आधार वर्ष 2011-12=100 निश्चित किया गया है।

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