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NCERT Class 11 Economics Important Chapter 14 सहसंबंध
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सहसंबंध
Chapter: 14
| अर्थशास्त्र में सांख्यिकी |
| IMPORTANT SOLUTIONS |
लघु उत्तरीय प्रश्न और उत्तर:
1. सहसंबंध से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: सहसंबंध दो चरों के बीच संबंध की गहनता और दिशा का अध्ययन एवं मापन करता है।
2. धनात्मक सहसंबंध किसे कहते हैं?
उत्तर: जब दो चरों की गति एक ही दिशा में एक साथ होती है, तो सहसंबंध को धनात्मक कहा जाता है।
3. ऋणात्मक सहसंबंध क्या है?
उत्तर: जब दो चर विपरीत दिशा में गतिमान हों (अर्थात् एक के बढ़ने पर दूसरा घटे), तो इसे ऋणात्मक सहसंबंध कहते हैं (जैसे कीमत और माँग)।
4. सहसंबंध मापने की तीन प्रमुख विधियाँ कौन-सी हैं?
उत्तर: सहसंबंध मापने की मुख्य विधियाँ हैं: प्रकीर्ण आरेख, कार्ल पियर्सन का सहसंबंध गुणांक, और स्पीयरमैन का कोटि सहसंबंध।
5. प्रकीर्ण आरेख क्या है?
उत्तर: यह बिना किसी संख्यात्मक मान के, ग्राफ़ पेपर पर बिंदुओं के रूप में चरों के बीच संबंधों के स्वरूप की जाँच करने की एक दृश्य विधि है।
6. कार्ल पियर्सन के सहसंबंध गुणांक को अन्य किन नामों से जाना जाता है?
उत्तर: इसे गुणन आघूर्ण सहसंबंध तथा सरल सहसंबंध गुणांक भी कहा जाता है।
7. सहसंबंध गुणांक (r) का अधिकतम और न्यूनतम मान क्या हो सकता है?
उत्तर: सहसंबंध गुणांक (r) का मान हमेशा -1 और +1 के बीच (-1 ≤ r ≤ +1) स्थित होता है।
8. यदि r = 0 हो, तो इसका क्या अर्थ है?
उत्तर: r = 0 का अर्थ है कि दोनों चरों के बीच कोई रेखीय सहसंबंध नहीं है।
9. क्या सहसंबंध गुणांक की कोई इकाई होती है?
उत्तर: नहीं, r की कोई इकाई नहीं होती है; यह केवल एक शुद्ध संख्या है।
10. क्या सहसंबंध कार्य-कारण संबंध को मापता है?
उत्तर: नहीं, सहसंबंध केवल सह-प्रसरण का मापन करता है, कार्य-कारण संबंध का नहीं।
11. पूर्ण धनात्मक सहसंबंध प्रकीर्ण आरेख में कैसा दिखता है?
उत्तर: इसमें प्रकीर्ण बिंदु नीचे से ऊपर की ओर उठती हुई एक ही सीधी रेखा पर स्थित होते हैं।
12. स्पीयरमैन के कोटि सहसंबंध का विकास किसने किया था?
उत्तर: इसका विकास ब्रिटिश मनोवैज्ञानिक सी.ई. स्पीयरमैन द्वारा किया गया था।
13. गुणात्मक आँकड़ों (जैसे- ईमानदारी, सौंदर्य) के लिए कौन-सा सहसंबंध गुणांक उपयुक्त है?
उत्तर: गुणात्मक आँकड़ों के लिए स्पीयरमैन का कोटि सहसंबंध गुणांक उपयुक्त होता है क्योंकि ऐसे आँकड़ों का संख्यात्मक मापन संभव नहीं है, केवल कोटि दी जा सकती है।
14. क्या सहसंबंध गुणांक पैमाने और मूल बिंदु में परिवर्तन से प्रभावित होता है?
उत्तर: नहीं, ‘r’ का परिमाण, उद्गम और पैमाने के परिवर्तन से अप्रभावित रहता है।
15. यदि प्रकीर्ण आरेख में बिंदु पूरी तरह से बिखरे हों (कोई रेखा न बने), तो यह क्या दर्शाता है?
उत्तर: यह स्थिति चरों के बीच “कोई सहसंबंध नहीं” होने का संकेत देती है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न और उत्तर:
1. सहसंबंध के विभिन्न प्रकारों की उदाहरण सहित व्याख्या करें।
उत्तर: सहसंबंध को मुख्य रूप से धनात्मक और ऋणात्मक सहसंबंध में बाँटा जा सकता है:
(i) धनात्मक सहसंबंध: जब चरों की गति एक ही दिशा में होती है, तो यह धनात्मक सहसंबंध कहलाता है। यदि एक चर बढ़ता है, तो दूसरा भी बढ़ता है।
उदाहरण: आय और उपभोग का संबंध। जब आय बढ़ती है, तो उपभोग भी बढ़ता है। इसी तरह गर्मी में तापमान और आइसक्रीम की बिक्री दोनों एक साथ बढ़ते हैं।
(ii) ऋणात्मक सहसंबंध: जब चर विपरीत दिशा में गतिमान होते हैं, तो इसे ऋणात्मक सहसंबंध कहा जाता है। एक चर बढ़ता है तो दूसरा घटता है।
उदाहरण: जब सेब (या सब्जियों) की कीमत घटती है, तो उनकी माँग बढ़ जाती है और कीमत बढ़ने पर माँग कम हो जाती है। पढ़ाई में कम समय लगाने से अनुत्तीर्ण होने की संभावना का बढ़ना भी इसका उदाहरण है।
2. प्रकीर्ण आरेख विधि क्या है? यह सहसंबंध की पहचान कैसे करती है?
उत्तर: प्रकीर्ण आरेख दो चरों के बीच संबंधों की जाँच करने की एक दृश्य विधि है जिसमें दोनों चरों के मानों को ग्राफ़ पेपर पर बिंदुओं के रूप में आलेखित किया जाता है।
(i) यदि प्रकीर्ण बिंदु ऊपर की ओर बढ़ती हुई रेखा के आस-पास हों, तो यह धनात्मक सहसंबंध को दर्शाता है।
(ii) यदि बिंदु नीचे की ओर ढलती हुई रेखा के आस-पास फैले हों, तो यह ऋणात्मक सहसंबंध है।
(iii) यदि सभी बिंदु बिल्कुल एक ही सीधी रेखा पर हों, तो यह पूर्ण सहसंबंध होता है।
(iv) यदि बिंदु ग्राफ़ पर अनियमित रूप से बिखरे हों, तो यह दर्शाता है कि चरों में कोई संबंध नहीं है।
3. कार्ल पियर्सन के सहसंबंध गुणांक (r) के प्रमुख गुण क्या हैं?
उत्तर: कार्ल पियर्सन के सहसंबंध गुणांक की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
(i) कोई इकाई नहीं: r की कोई इकाई नहीं होती है। यह एक शुद्ध संख्या मात्र है, जिसका अर्थ है कि माप की इकाइयाँ (जैसे किलो, मीटर) r का हिस्सा नहीं हैं।
(ii) परास (Range): r का मान हमेशा -1 और +1 के बीच होता है (-1 ≤ r ≤ +1)
(iii) दिशा का ज्ञान: r का धनात्मक मान एक ही दिशा में गति (धनात्मक सहसंबंध) को दर्शाता है, जबकि ऋणात्मक मान विपरीत दिशा (प्रतिलोम संबंध) को दर्शाता है।
(iv) उद्गम और पैमाने से अप्रभावित: r का मान उद्गमऔर पैमाने के परिवर्तन से अप्रभावित रहता है। अर्थात् चरों में किसी स्थिर मान को जोड़ने, घटाने, गुणा या भाग करने से r नहीं बदलता।
(v) रेखीय संबंध: r = 0 होने का अर्थ केवल यह है कि चरों के बीच कोई ‘रेखीय’ संबंध नहीं है।
4. स्पीयरमैन के कोटि सहसंबंध का उपयोग किन परिस्थितियों में अधिक उपयुक्त होता है?
उत्तर: स्पीयरमैन का कोटि सहसंबंध गुणांक निम्नलिखित स्थितियों में उपयोग किया जाता है:
गुणात्मक चरों के लिए: जब चरों का सटीक संख्यात्मक मापन संभव नहीं होता (जैसे – लोगों का बौद्धिक स्तर, सुंदरता, ईमानदारी या निष्पक्षता)। ऐसी स्थितियों में इन्हें केवल सापेक्ष रूप से कोटि (Rank) प्रदान की जा सकती है।
चरम मूल्यों की उपस्थिति: स्पीयरमैन का गुणांक चरम मूल्यों से प्रभावित नहीं होता है। अतः यदि आँकड़ों में कुछ चरम मूल्य मौजूद हैं, तो कार्ल पियर्सन गुणांक की तुलना में कोटि सहसंबंध का उपयोग अधिक उत्तम और लाभप्रद होता है।
गैर-रेखीय संबंध: जब दो चरों के बीच संबंध की दिशा तो स्पष्ट हो, लेकिन उनका स्वरूप गैर-रेखीय हो।
5. “सहसंबंध सह-प्रसरण का मापन करता है, कार्य-कारण संबंध का नहीं।” इस कथन को एक उदाहरण की सहायता से स्पष्ट करें।
उत्तर: यह समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि दो चरों के बीच सहसंबंध होने का अर्थ यह नहीं है कि उनमें से एक ‘कारण’ है और दूसरा ‘परिणाम’। सहसंबंध केवल यह बताता है कि दोनों चर एक साथ किस दिशा में बदल रहे हैं।
उदाहरण: यदि हम देखें कि ‘आइसक्रीम की बढ़ती बिक्री’ और ‘तरणताल (Swimming pool) में डूबकर मरने वालों की संख्या’ में उच्च धनात्मक सहसंबंध है, तो इसका यह अर्थ नहीं है कि आइसक्रीम खाने की वजह से लोग डूब रहे हैं। बल्कि इन दोनों घटनाओं के पीछे एक तीसरा कारण है – ‘तापमान का बढ़ना’ (गर्मी)। गर्मी की वजह से आइसक्रीम की बिक्री भी बढ़ती है और गर्मी से राहत पाने के लिए लोग अधिक संख्या में तैरने जाते हैं जिससे डूबने की घटनाएँ भी बढ़ जाती हैं। अतः सहसंबंध होने के बावजूद दोनों के बीच कार्य-कारण संबंध नहीं है।
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