NCERT Class 11 Economics Important Chapter 11 आँकड़ों का संगठन Solutions Hindi Medium As Per New Syllabus. to each chapter is provided in the list so that you can easily browse through different chapters NCERT Class 11 Economics Important Chapter 11 आँकड़ों का संगठन Notes and select need one. NCERT Class 11 Economics Additional Question Answers Download PDF. NCERT Class 11 Economics Important Solutions Hindi Medium.
NCERT Class 11 Economics Important Chapter 11 आँकड़ों का संगठन
Also, you can read the NCERT book online in these sections Solutions by Expert Teachers as per Central Board of Secondary Education (CBSE) Book guidelines. CBSE Class 11 Economics Additional Notes Hindi Medium are part of All Subject Solutions. Here we have given NCERT Class 11 Economics Important Notes Hindi Medium, CBSE Class 11 Economics Sankhyiki Important Solutions for All Chapters, You can practice these here.
आँकड़ों का संगठन
Chapter: 11
| अर्थशास्त्र में सांख्यिकी |
| IMPORTANT SOLUTIONS |
लघु उत्तरीय प्रश्न और उत्तर:
1. अपरिष्कृत आँकड़े किसे कहते हैं?
उत्तर: अपरिष्कृत आँकड़े वे होते हैं जो अव्यवस्थित होते हैं और चर के प्रेक्षणों से बने होते हैं, जिनसे सीधे तौर पर कोई सार्थक निष्कर्ष निकालना कठिन होता है।
2. आँकड़ों के वर्गीकरण का क्या अर्थ है?
उत्तर: वर्गीकरण का तात्पर्य वस्तुओं या आँकड़ों को किसी खास आधार पर समूहों या वर्गों में व्यवस्थित करने से है, जिससे उन्हें समझना और उनका सांख्यिकीय विश्लेषण करना आसान हो जाता है।
3. एक छात्र की ऊँचाई 149.99 सेमी है, इसे किस प्रकार के चर में रखा जाएगा और क्यों?
उत्तर: इसे ‘संतत चर’ में रखा जाएगा, क्योंकि संतत चर कोई भी संख्यात्मक मान ले सकता है, जिसमें भिन्नात्मक मान भी शामिल होते हैं, और ऊँचाई एक निरंतर बढ़ने वाली माप है।
4. स्थानिक वर्गीकरण से क्या आशय है?
उत्तर: स्थानिक वर्गीकरण के अंतर्गत आँकड़ों का वर्गीकरण भौगोलिक स्थितियों, जैसे कि देश, राज्य, शहर या कस्बा आदि के आधार पर किया जाता है।
5. गुणात्मक वर्गीकरण क्या है?
उत्तर: जब आँकड़ों का वर्गीकरण विशेषताओं (जैसे- लिंग, साक्षरता, धर्म, वैवाहिक स्थिति) की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर किया जाता है, तो उसे गुणात्मक वर्गीकरण कहा जाता है।
6. मात्रात्मक वर्गीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर: जब ऊँचाई, भार, आयु, आय या अंक जैसी मात्रात्मक विशेषताओं वाले आँकड़ों को वर्गों में समूहित किया जाता है, तो यह मात्रात्मक वर्गीकरण कहलाता है।
7. संतत चर क्या होता है?
उत्तर: संतत चर वह है जिसका कोई भी संख्यात्मक मान हो सकता है, चाहे वह पूर्णांक हो या भिन्नात्मक (जैसे ऊँचाई, भार, समय आदि)।
8. मिलान चिह्न का उपयोग करते समय 4 खड़े चिह्नों के बाद 5वें चिह्न को तिरछा क्यों लगाया जाता है?
उत्तर: पाँचवें चिह्न को तिरछा लगाने से पाँच-पाँच के समूह बन जाते हैं, जिससे बाद में बारंबारता की गणना (गिनती) करने में बहुत आसानी और सुविधा होती है।
9. बारंबारता वितरण का क्या काम है?
उत्तर: बारंबारता वितरण यह प्रदर्शित करता है कि किसी चर के विभिन्न मान, अपनी संगत वर्ग-बारंबारताओं के साथ, विभिन्न वर्गों में किस प्रकार वितरित किए गए हैं।
10. मिलान चिह्न का प्रयोग किसलिए होता है?
उत्तर: वर्गों की बारंबारता गिनने के लिए विशेष वर्ग के सामने मिलान चिह्न (/) लगाए जाते हैं, जिसमें गिनती को आसान बनाने के लिए 4 खड़े चिह्नों को 5वाँ चिह्न तिरछा काटता है।
11. ’70 तथा अधिक’ या ’10 से कम’ जैसे मुक्त-अंत वाले वर्गों का उपयोग सांख्यिकी में वांछनीय क्यों नहीं माना जाता है?
उत्तर: ’70 तथा अधिक’ या ’10 से कम’ जैसे मुक्त-अंत वाले वर्गों का उपयोग सांख्यिकी में वांछनीय इसलिए नहीं माना जाता है क्योंकि सांख्यिकी में वर्ग सीमाएँ निश्चित तथा स्पष्ट रूप से होनी चाहिए। मुक्त-अंत वाले वर्गों में मध्यबिन्दु या सटीक आकार का निर्धारण करना कठिन हो जाता है।
12. समावेशी विधि को अपवर्जी विधि में बदलते समय ‘0.5’ का नियम क्यों लगाया जाता है?
उत्तर: समावेशी विधि में एक वर्ग की उच्च सीमा और अगले वर्ग की निम्न सीमा के बीच प्रायः 1 का अंतर (gap) होता है। चर की संततता बनाए रखने के लिए इस अंतर को 2 से भाग देकर (0.5) निम्न सीमा से घटाया और उच्च सीमा में जोड़ा जाता है।
13. बारंबारता वक्र बनाते समय ग्राफ के x-अक्ष और y-अक्ष पर क्या दर्शाया जाता है?
उत्तर: बारंबारता वक्र प्राप्त करने के लिए ग्राफ के x-अक्ष पर ‘वर्ग चिह्न’ और y-अक्ष पर ‘बारंबारता’ को आलेखित किया जाता है।
14. यदि एक परीक्षण में प्राप्तांक 0 से 100 के बीच हैं और भिन्नात्मक अंकों की अनुमति नहीं है (अर्थात सभी पूर्ण संख्याएं हैं), तो यह किस प्रकार के चर की स्थिति है?
उत्तर: चूँकि भिन्नात्मक अंकों की अनुमति नहीं है और मान केवल निश्चित पूर्ण संख्याओं में बदल रहे हैं, इसलिए यह एक असंतत चर की स्थिति है।
15. बारंबारता सारणी क्या होती है?
उत्तर: जब विविक्त चर (Discrete variable) के लिए आँकड़ों का वर्गीकरण किया जाता है, जहाँ चर केवल पूर्णांकों को धारण करता है और उसी के अनुसार बारंबारता तय होती है, तो उसे बारंबारता सारणी कहा जाता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न और उत्तर:
1. “आँकड़ों के वर्गीकरण से हमें संक्षिपतता तो मिलती है, लेकिन इससे ‘सूचना की हानि’ (Loss of Information) भी होती है।” एक उपयुक्त उदाहरण देकर इस कथन की पुष्टि करें।
उत्तर: यह कथन सत्य है। जब हम अपरिष्कृत आँकड़ों (Raw data) को बारंबारता वितरण के वर्गों में समूहित करते हैं, तो वे संक्षिप्त और समझने में आसान हो जाते हैं। परंतु इस प्रक्रिया में प्रत्येक व्यक्तिगत प्रेक्षण (individual observation) का मूल मान छिप जाता है। उदाहरण के लिए: यदि 20-30 के वर्ग में 6 प्रेक्षण (25, 25, 20, 22, 25, 28) हैं, तो वर्गीकरण के बाद हमें केवल यह पता होता है कि इस वर्ग की बारंबारता 6 है। आगे की किसी भी गणना के लिए इन सभी 6 मानों को 20 और 30 का मध्यबिन्दु यानी ’25’ मान लिया जाता है। इस प्रकार, जो वास्तविक मान 20, 22 या 28 थे, उनकी सटीक पहचान (सूचना) हमेशा के लिए खो जाती है।
2. असमान वर्ग अंतराल (Unequal Class Intervals) का निर्माण किन दो विशेष परिस्थितियों में करना आवश्यक हो जाता है? तर्क सहित समझाइए।
उत्तर: मुख्य रूप से दो ऐसी स्थितियाँ होती हैं जहाँ समान वर्ग अंतराल के बजाय असमान वर्ग अंतराल का प्रयोग किया जाता है:
स्थिति 1: जब डेटा का परास (Range) बहुत बड़ा हो, जैसे लोगों की आय, जो शून्य से लेकर करोड़ों तक हो सकती है। यदि यहाँ समान आकार (मान लें 1000 रुपये) के वर्ग बनाएं, तो हजारों वर्ग बन जाएंगे जो अर्थहीन होंगे। यदि अंतराल बहुत बड़ा (1 करोड़) रखें, तो निम्न आय वर्ग की सारी जानकारी छिप जाएगी।
स्थिति 2: जब आँकड़ों की एक बहुत बड़ी संख्या परास के किसी एक छोटे से हिस्से में केंद्रित हो। यदि ऐसे में समान अंतराल रखे गए, तो उस सघन हिस्से (concentrated part) से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाएगी। अतः जहां आँकड़े ज्यादा सघन हों, वहां छोटे अंतराल और जहां विरल हों, वहां बड़े अंतराल बनाए जाते हैं।
3. एक समावेशी वर्ग अंतराल को अपवर्जी या संतत रूप में कैसे बदला जाता है? मान लीजिए किसी कंपनी के कर्मचारियों की आय के वर्ग 800-899, 900-999, 1000-1099 हैं, तो इसका समायोजन (Adjustment) कैसे होगा?
उत्तर: जब कोई संतत चर (जैसे आय या ऊंचाई) समावेशी वर्गों में दिया हो, तो पहले वर्ग की उच्च सीमा (899) और दूसरे वर्ग की निम्न सीमा (900) के बीच एक रिक्ति या असंततता (1 का अंतर) आ जाती है।
इसे दूर करने के लिए समायोजन किया जाता है:
दूसरे वर्ग की निम्न सीमा और पहले वर्ग की उच्च सीमा का अंतर निकालें: (900 – 899 = 1)।
इस अंतर को 2 से भाग दें: (1 / 2 = 0.5)।
अब सभी वर्गों की निम्न सीमाओं में से 0.5 घटाएं और उच्च सीमाओं में 0.5 जोड़ें।
समायोजन के बाद नए वर्ग:
800-899 बन जाएगा: 799.5 – 899.5
900-999 बन जाएगा: 899.5 – 999.5 इससे आँकड़ों में निरंतरता आ जाती है और कोई भी मान छूटता नहीं है।
4. विविक्त (Discrete) और संतत चर के बीच अंतर को उनके ‘मान ग्रहण करने की क्षमता’ (Ability to take values) के संदर्भ में उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें।
उत्तर: संतत चर: यह कोई भी संख्यात्मक मान ले सकता है। इसके मान पूर्णांक भी हो सकते हैं (जैसे 90, 100) और भिन्नात्मक या दशमलव वाले भी (जैसे 90.85, 149.99)। यह चर किन्हीं भी दो सीमाओं के बीच के अनन्त मानों को धारण करने में सक्षम होता है। जैसे- वजन, ऊंचाई, समय, दूरी आदि।
विविक्त चर: यह चर केवल निश्चित मान ही धारण कर सकता है और इसके मान केवल परिमित उछाल (jump) के साथ बदलते हैं। यह लगातार सभी मान नहीं ले सकता। उदाहरण के लिए: एक कक्षा में छात्रों की संख्या या तो 25 होगी या 26 होगी। यह कभी भी 25.5 नहीं हो सकती क्योंकि ‘आधा छात्र’ का कोई अर्थ नहीं होता। इसी तरह किसी परिवार में बच्चों की संख्या 1, 2 या 3 हो सकती है, लेकिन 1.5 नहीं।
5. द्विचर बारंबारता वितरण की रूपरेखा कैसी होती है? इसे एक उदाहरण की सहायता से समझाइए।
उत्तर: द्विचर बारंबारता वितरण वह है जिसमें एक ही समय पर किसी नमूने (sample) से दो अलग-अलग चरों की जानकारी एकत्रित की जाती है और उन्हें एक साथ सारणीबद्ध किया जाता है। इसकी सारणी में एक चर को ‘स्तंभों’ (Columns) में और दूसरे चर को ‘पंक्तियों’ (Rows) में दर्शाया जाता है। उदाहरण: मान लीजिए हम 20 कंपनियों का अध्ययन कर रहे हैं, जिसमें ‘बिक्री’ और ‘विज्ञापन पर व्यय’ दो चर हैं। सारणी के स्तंभों में हमने बिक्री (लाख रुपये में: 115-125, 125-135 आदि) रख दी और पंक्तियों में विज्ञापन व्यय (हजार रुपये में: 62-64, 64-66 आदि) रख दिया। यदि 3 कंपनियां ऐसी हैं जिनकी बिक्री 135-145 लाख के बीच है और उनका विज्ञापन खर्च 62-64 हजार के बीच है, तो वह संख्या (3) उस विशिष्ट सेल (कोष्ठक) में लिखी जाएगी जहां ये दोनों पंक्तियां और स्तंभ मिलते हैं।
Subject Ka Complete Video Solution Dekhein
Step-by-step easy concept explanation aur full questions Answer ke liye watch karein ya app download karein:



