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NCERT Class 11 Economics Important Chapter 10 आँकड़ों का संग्रह

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NCERT Class 11 Economics Important Chapter 10 आँकड़ों का संग्रह

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Chapter: 10

अर्थशास्त्र में सांख्यिकी
IMPORTANT SOLUTIONS

लघु उत्तरीय प्रश्न और उत्तर:

1. आँकड़ों के संग्रह का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: आँकड़ों के संग्रह का उद्देश्य किसी समस्या के स्पष्ट एवं ठोस समाधान के लिए साक्ष्य (प्रमाण) को दर्शाना है।

2. ‘चर’ (Variable) किसे कहते हैं?

उत्तर: वे मूल्य जो परिवर्तनशील होते हैं (जैसे समय के साथ उत्पादन का बदलना) उन्हें चर कहा जाता है। इन्हें प्रायः X, Y, Z आदि अक्षरों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

3. प्राथमिक आँकड़े (Primary Data) क्या होते हैं?

उत्तर: गणनकार द्वारा जाँच-पड़ताल या पूछताछ करके स्वयं एकत्र किए गए प्रत्यक्ष जानकारी पर आधारित आँकड़े प्राथमिक आँकड़े कहलाते हैं।

4. द्वितीयक आँकड़े किसे कहते हैं?

उत्तर: यदि किसी दूसरी संस्था (जैसे सरकारी रिपोर्ट, समाचार पत्र आदि) द्वारा एकत्रित और संशोधित आँकड़ों का उपयोग किया जाता है, तो उन्हें द्वितीयक आँकड़े कहते हैं।

5. सर्वेक्षण क्या है?

उत्तर: सर्वेक्षण वह विधि है जिसके द्वारा किसी विषय (उत्पाद, उम्मीदवार या समस्या) के बारे में विभिन्न व्यक्तियों से सूचना या जानकारी एकत्र की जाती है।

6. द्वि-विध प्रश्न क्या होते हैं?

उत्तर: जब किसी प्रश्न के उत्तर में केवल ‘हाँ’ या ‘नहीं’ के मात्र दो ही विकल्प होते हैं, तो इसे द्वि-विध प्रश्न कहते हैं।

7. आँकड़ा-संग्रह की तीन आधारभूत विधियाँ कौन सी हैं?

उत्तर: आँकड़ा-संग्रह की तीन विधियाँ हैं:

(क) वैयक्तिक साक्षात्कार। 

(ख) डाक द्वारा सर्वेक्षण।

(ग) टेलीफोन साक्षात्कार।

8. प्रायोगिक सर्वेक्षण से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: प्रश्नावली तैयार होने के बाद, एक छोटे समूह का परीक्षण के रूप में सर्वेक्षण किया जाता है जिसे प्रायोगिक सर्वेक्षण या प्रश्नावली की पूर्व-परीक्षा कहते हैं।

9. जनगणना क्या है?

उत्तर: वह सर्वेक्षण जिसके अंतर्गत जनसंख्या (समष्टि) की सभी व्यक्तिगत इकाइयाँ शामिल होती हैं, उसे जनगणना या पूर्ण गणना कहा जाता है।

10. समष्टि का क्या अर्थ है?

उत्तर: सांख्यिकी में ‘समष्टि’ शब्द का तात्पर्य अध्ययन-क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सभी मदों/इकाइयों की समग्रता से है, जिनमें कुछ विशेषताएँ समान होती हैं।

11. प्रतिदर्श क्या होता है?

उत्तर: समष्टि (पूरी जनसंख्या) में से चुना गया एक छोटा प्रतिनिधि समूह प्रतिदर्श कहलाता है, जिसका अध्ययन कर पूरी समष्टि के बारे में सूचना प्राप्त की जाती है।

12. यादृच्छिक प्रतिचयन क्या है?

उत्तर: यह वह विधि है जिसमें समष्टि की सभी इकाइयों के चुने जाने की समान संभावना होती है (जैसे लॉटरी विधि), और इसमें सर्वेक्षक की व्यक्तिगत पसंद का कोई प्रभाव नहीं होता।

13. अयादृच्छिक प्रतिचयन किसे कहते हैं?

उत्तर: जब सर्वेक्षक अपनी सुविधा, निर्णय और उद्देश्य के आधार पर इकाइयों का चुनाव करता है और सभी इकाइयों के चुने जाने की समान संभावना नहीं होती, तो इसे अयादृच्छिक प्रतिचयन कहते हैं।

14. प्रतिचयन त्रुटि क्या है?

उत्तर: प्रतिदर्श के आकलन तथा उसी के समष्टि के वास्तविक मूल्य (प्राचल) के बीच के अंतर को प्रतिचयन त्रुटि कहते हैं।

15. अप्रतिचयन त्रुटियाँ क्या होती हैं?

उत्तर: ये त्रुटियाँ आँकड़े एकत्र करते समय गलत उत्तर रिकॉर्ड करने, उत्तर न मिलने (अनुत्तर) या प्रतिदर्श चुनने में पक्षपात (पूर्वाग्रह) के कारण उत्पन्न होती हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न और उत्तर:

1. एक अच्छी प्रश्नावली तैयार करते समय किन मुख्य बातों का ध्यान रखना चाहिए?

उत्तर: एक अच्छी प्रश्नावली तैयार करने में निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

(i) लंबाई और सरलता: प्रश्नावली बहुत लंबी नहीं होनी चाहिए और इसमें प्रश्नों की संख्या कम से कम होनी चाहिए। इसे समझना आसान होना चाहिए और कठिन शब्दों से बचना चाहिए।

(ii) प्रश्नों का क्रम: प्रश्न ऐसे क्रम में हों कि उत्तरदाता आराम से उत्तर दे सके; शुरुआत सामान्य प्रश्नों से होकर विशिष्ट प्रश्नों की ओर बढ़नी चाहिए।

(iii) स्पष्टता: प्रश्न यथातथ्य एवं स्पष्ट होने चाहिए तथा उनके कई अर्थ (अनेकार्थक) नहीं निकलने चाहिए।

(iv) नकारात्मकता से बचाव: प्रश्न दोहरी नकारात्मकता वाले नहीं होने चाहिए, जैसे “क्या आप नहीं सोचते कि…”।

(v) संकेत रहित: प्रश्न ऐसे नहीं होने चाहिए जिससे उत्तरदाता को जवाब का कोई संकेत मिले।

2. आँकड़ा संग्रह की ‘वैयक्तिक साक्षात्कार’ विधि के क्या लाभ और क्या कमियाँ हैं?

उत्तर: आँकड़ा संग्रह की ‘वैयक्तिक साक्षात्कार’ विधि के क्या लाभ और कमियाँ हैं:

लाभकमियाँ
इस विधि में सर्वेक्षक और उत्तरदाता के बीच आमने-सामने व्यक्तिगत संपर्क होता है।यह विधि काफी खर्चीली होती है और इसमें प्रशिक्षित साक्षात्कारकर्ताओं की आवश्यकता पड़ती है।
सर्वेक्षक अध्ययन के उद्देश्य को समझा सकता है और किसी भी गलतफहमी से बच सकता है।इसमें समय बहुत अधिक लगता है और कभी-कभी सर्वेक्षक की उपस्थिति के कारण लोग सही बात बताने में संकोच करते हैं।
साथ ही, उत्तरदाता की भाव-भंगिमा और प्रतिक्रिया देखकर पूरक सूचनाएँ भी मिल जाती हैं।

3. जनगणना और प्रतिदर्श सर्वेक्षण के बीच अंतर स्पष्ट करें।

उत्तर: जनगणना और प्रतिदर्श सर्वेक्षण के बीच अंतर है-

जनगणना सर्वेक्षणप्रतिदर्श सर्वेक्षण
इस विधि में समष्टि (अध्ययन क्षेत्र की पूरी जनसंख्या) के प्रत्येक सदस्य को शामिल किया जाता है।इसमें पूरी समष्टि का अध्ययन करने के बजाय केवल एक चुने हुए प्रतिनिधि समूह (प्रतिदर्श) का अध्ययन किया जाता है।
भारत की जनगणना इसका उत्तम उदाहरण है, जिसमें देश के हर परिवार की सूचना ली जाती है।यह जनगणना की तुलना में कम खर्चीला और कम समय लेने वाला होता है।
यह विधि बहुत अधिक खर्चीली, समय लेने वाली होती है और इसके लिए बहुत बड़ी संख्या में परिगणकों (गणनकारों) की आवश्यकता होती है।चूँकि यह छोटा होता है, इसलिए इसमें अधिक सघन पूछताछ और विस्तृत सूचनाएँ प्राप्त करना आसान होता है।

4. ‘डाक द्वारा सर्वेक्षण’ विधि के गुण और दोषों की विवेचना कीजिए।

उत्तर: ‘डाक द्वारा सर्वेक्षण’ विधि के गुण और दोष है-

गुण: यह विधि बहुत कम खर्चीली होती है। इसके माध्यम से शोधकर्ता सुदूर (दूर-दराज) के ऐसे क्षेत्रों तक भी पहुँच सकते हैं जहाँ व्यक्तिगत रूप से या टेलीफोन से पहुँचना संभव नहीं होता। इसमें उत्तरदाता के पास सोच-विचार कर उत्तर देने के लिए पर्याप्त समय होता है।

दोष: इसमें यदि उत्तरदाता को कोई प्रश्न समझ नहीं आता तो स्पष्टीकरण का कोई अवसर नहीं मिलता। इसमें लोगों द्वारा प्रश्नावली न लौटाने (अनुत्तर) की संभावना बहुत अधिक रहती है। इसके अलावा, डाक विभाग द्वारा प्रश्नावली के खो जाने का भी खतरा रहता है।

5. भारत में राष्ट्रीय स्तर पर आँकड़े एकत्र करने वाली प्रमुख संस्थाएँ कौन सी हैं और उनके मुख्य कार्य क्या हैं?

उत्तर: भारत में राष्ट्रीय स्तर पर आँकड़े एकत्र करने वाली कुछ प्रमुख संस्थाएँ ‘सेंसस ऑफ इंडिया’, ‘राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण (NSS)’, और ‘केंद्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (CSO)’ हैं। 

सेंसस ऑफ इंडिया (जनगणना): यह प्रत्येक 10 वर्ष में देश की जनसंख्या का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार करती है जिसमें आकार, घनत्व, साक्षरता, लिंग-अनुपात आदि शामिल होते हैं।

राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण (NSS): यह संस्था समाज-आर्थिक मुद्दों पर निरंतर सर्वेक्षण करती है। इसके आँकड़े साक्षरता, रोजगार, बेरोजगारी, स्वास्थ्य, मातृ-देखभाल, और सार्वजनिक वितरण प्रणाली से संबंधित होते हैं। यह अपनी त्रैमासिक पत्रिका ‘सर्वेक्षण’ में रिपोर्ट प्रकाशित करती है। यह उद्योगों और फसलों से जुड़े अनुमान सर्वेक्षण भी करती है।

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