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NCERT Class 11 Economics Important Chapter 9 परिचय

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NCERT Class 11 Economics Important Chapter 9 परिचय

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Chapter: 9

अर्थशास्त्र में सांख्यिकी
IMPORTANT SOLUTIONS

लघु उत्तरीय प्रश्न और उत्तर:

1. आर्थिक क्रियाओं का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?

उत्तर: आर्थिक क्रियाएँ वे होती हैं जो धन प्राप्त करने के उद्देश्य से की जाती हैं।

2. यदि संसार में ‘अभाव’ न होता तो क्या प्रभाव पड़ता?

उत्तर: यदि अभाव न होता, तो कोई आर्थिक समस्या ही उत्पन्न नहीं होती और हमें अर्थशास्त्र पढ़ने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती।

3. ‘नियोक्ता’ (Employer) शब्द का क्या अर्थ है?

उत्तर: जब कोई व्यक्ति भुगतान लेकर अन्य व्यक्तियों को सेवाएँ प्रदान करता है (जैसे डॉक्टर, वकील या बैंकर), तो स्रोत के अनुसार उसे नियोक्ता कहा जाता है।

4. अर्थशास्त्र के तीन पारंपरिक विभाजन कौन-कौन से हैं?

उत्तर: अर्थशास्त्र के अध्ययन के तीन पारंपरिक विभाजन हैं: उपभोग, उत्पादन और वितरण।

5. ‘उपभोग’ (Consumption) के अंतर्गत उपभोक्ता मुख्य रूप से क्या निर्णय लेता है?

उत्तर: उपभोक्ता यह निर्णय करता है कि वह अपनी निश्चित आय और वस्तुओं की ज्ञात कीमतों को देखते हुए अनेक वैकल्पिक वस्तुओं में से किन वस्तुओं को खरीदे।

6. उत्पादन (Production) के अंतर्गत उत्पादक का मुख्य निर्णय क्या होता है?

उत्तर: एक उत्पादक, जिसे अपनी लागत और कीमतें ज्ञात हैं, यह निर्णय करता है कि बाज़ार में बेचने के लिए उसे क्या उत्पादन करना चाहिए।

7. अर्थशास्त्र में ‘आँकड़े’ (Data) किसे कहा जाता है?

उत्तर: जब आर्थिक समस्याओं के अध्ययन के लिए आर्थिक तथ्यों को संख्याओं के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, तो उन्हें आँकड़े कहा जाता है।

8. सांख्यिकी (Statistics) का मुख्य संबंध किन कार्यों से है?

उत्तर: सांख्यिकी का मुख्य संबंध आँकड़ों के एकत्रीकरण, प्रस्तुतीकरण तथा उनके विश्लेषण से है।

9. गुणात्मक आँकड़े (Qualitative data) क्या होते हैं?

उत्तर: गुणात्मक आँकड़ों में व्यक्ति या समूह के ऐसे महत्वपूर्ण गुणों (जैसे- लिंग, स्वस्थ/अस्वस्थ होना) की व्याख्या होती है, जिन्हें मात्रा या संख्या के रूप में नहीं मापा जा सकता।

10. आधुनिक अर्थशास्त्र की परिभाषा के अनुसार इसका मुख्य अध्ययन विषय क्या है?

उत्तर: यह इस बात का अध्ययन करता है कि व्यक्ति और समाज वैकल्पिक प्रयोग वाले सीमित संसाधनों का उपयोग वस्तुओं के उत्पादन और वितरण के लिए कैसे चुनें।

11. अर्थशास्त्र में नीतियाँ (Policies) क्या होती हैं?

उत्तर: अर्थशास्त्र में उन उपायों को नीतियों के रूप में जाना जाता है जो किसी आर्थिक समस्या को सुलझाने या दूर करने में सहायक होते हैं।

12. क्या सांख्यिकीय आँकड़े हमेशा मात्रात्मक ही होते हैं?

उत्तर: नहीं, अर्थशास्त्र में मात्रात्मक आँकड़ों के साथ-साथ गुणात्मक आँकड़ों का भी प्रयोग किया जाता है।

13. आँकड़ों को संक्षिप्त करने के लिए सांख्यिकी में मुख्य रूप से किन मापों का प्रयोग किया जाता है?

उत्तर: आँकड़ों को संक्षिप्त करने के लिए माध्य, प्रसरण और मानक विचलन जैसे संख्यात्मक मापों का प्रयोग किया जाता है।

14. संसाधनों के ‘वैकल्पिक प्रयोग’ का कोई एक उदाहरण दीजिए।

उत्तर: कृषि भूमि का उपयोग खाद्य फसलें उगाने के लिए भी किया जा सकता है और इसका उपयोग रबर या कपास जैसी गैर-खाद्य फसलें उगाने के लिए भी हो सकता है।

15. जब आप स्वयं या अपने परिवार के उपयोग के लिए कोई वस्तु खरीदते हैं, तो आप अर्थशास्त्र की भाषा में क्या कहलाते हैं?

उत्तर: जब आप स्वयं या अपने परिवार के उपयोग के लिए कोई वस्तु खरीदते हैं, तो आप अर्थशास्त्र की भाषा  उपभोक्ता कहलाते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न और उत्तर:

1. किसी देश की आर्थिक समस्याओं (जैसे गरीबी या बेरोजगारी) के समाधान में सांख्यिकी के विभिन्न चरणों की क्या भूमिका है?

उत्तर: किसी भी गंभीर आर्थिक समस्या का समाधान निकालने के लिए सबसे पहले उसके कारणों का पता लगाना आवश्यक होता है। सांख्यिकी के माध्यम से अर्थशास्त्री समस्या से जुड़े आर्थिक तथ्यों को आँकड़ों के रूप में एकत्रित करते हैं। फिर इन आँकड़ों का विश्लेषण करके समस्या के मूल कारणों (जैसे- लोगों की निम्न उत्पादकता, बेरोजगारी या पिछड़ी तकनीक) की व्याख्या की जाती है। एक बार जब समस्या के कारण स्पष्ट हो जाते हैं, तब सांख्यिकीय विधियों के आधार पर उन उचित नीतियों (Policies) का निर्माण किया जाता है जो समस्या को सुलझाने में सहायक होती हैं।

2. “आधुनिक अर्थशास्त्र केवल उपभोग, उत्पादन और वितरण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश की मूलभूत समस्याओं का भी अध्ययन करता है।” इस कथन को स्पष्ट करें।

उत्तर: पारंपरिक अर्थशास्त्र मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि उपभोक्ता क्या खरीदे (उपभोग), उत्पादक क्या बनाए (उत्पादन) और आय कैसे बँटे (वितरण)। परंतु आधुनिक अर्थशास्त्र का दायरा इससे बहुत बड़ा है। यह समाज की बुनियादी समस्याओं को भी अपने अध्ययन में शामिल करता है। उदाहरण के लिए, यह अध्ययन करता है कि समाज में कुछ परिवारों की आय दूसरों से अधिक क्यों है, देश में कितने लोग गरीब या अमीर हैं, और शिक्षा का रोजगार के अवसरों पर क्या प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा, आधुनिक अर्थशास्त्र सुनामी या भूकंप जैसी पर्यावरणीय आपदाओं के आर्थिक प्रभावों और उनसे निपटने के खर्चों का भी सांख्यिकीय विश्लेषण करता है।

3. “आर्थिक तथ्य जब सांख्यिकीय रूप में व्यक्त किए जाते हैं, तो वे यथार्थ और अधिक विश्वसनीय बन जाते हैं।” उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तर: सांख्यिकी अर्थशास्त्रियों को इस बात में सक्षम बनाती है कि वे आर्थिक तथ्यों को बिल्कुल सटीक और निश्चित रूप में प्रस्तुत कर सकें। जब हम किसी बात को केवल साधारण शब्दों में कहते हैं, तो वह अस्पष्ट कथन होता है; लेकिन संख्यात्मक आँकड़े उसे यथार्थ और ठोस बना देते हैं। उदाहरण के लिए, यदि यह कहा जाए कि “भूकंप में सैकड़ों लोगों की मौत हुई”, तो यह केवल एक अनुमानित और अस्पष्ट कथन है, इसलिए इसे सांख्यिकीय आँकड़ा नहीं माना जा सकता। इसके विपरीत, यदि कहा जाए कि “हाल ही में कश्मीर में आए भूकंप में 310 लोगों की मौत हुई”, तो यह एक सटीक, तथ्यात्मक और विश्वसनीय सांख्यिकीय आँकड़ा है।

4. अर्थशास्त्र में विभिन्न आर्थिक कारकों के बीच परस्पर संबंध (Correlation) ज्ञात करने में सांख्यिकी किस प्रकार सहायक होती है?

उत्तर: सांख्यिकी का प्रयोग विभिन्न आर्थिक घटकों के बीच संबंधों को जाँचने और उनके प्रभावों का पता लगाने के लिए व्यापक रूप से किया जाता है। अर्थशास्त्री सांख्यिकीय तकनीकों का उपयोग करके यह जान सकते हैं कि यदि किसी वस्तु की कीमत घटती है, तो उसकी माँग पर क्या प्रभाव पड़ेगा, या लोगों की औसत आय बढ़ने से उनके उपभोग-व्यय में कितनी वृद्धि होगी। कई बार अर्थशास्त्री किसी कारक में बदलाव के परिणामस्वरूप दूसरे कारक (जैसे वर्तमान निवेश का भविष्य की राष्ट्रीय आय पर प्रभाव) का पूर्वानुमान भी लगाते हैं। सांख्यिकी के ज्ञान और इसकी विधियों के बिना इस प्रकार के परस्पर संबंधों का विश्लेषण या परीक्षण करना संभव नहीं है।

5. नीतियाँ बनाने के लिए भविष्य की प्रवृत्तियों के पूर्वानुमान में सांख्यिकी योजनाकारों की कैसे मदद करती है? एक उदाहरण दीजिए।

उत्तर: सरकारी और आर्थिक योजनाकारों को नीतियाँ बनाते समय भविष्य की स्थितियों का अंदाजा लगाना होता है। सांख्यिकीय विधियों की मदद से पिछले वर्षों या वर्तमान के आँकड़ों का सर्वेक्षण करके भविष्य की प्रवृत्तियों का सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि योजनाकारों को यह तय करना है कि वर्ष 2010 में देश को कितना तेल आयात करना चाहिए, तो वे बिना सांख्यिकी के यह निर्णय नहीं ले सकते। उन्हें सांख्यिकी का उपयोग करके यह अनुमान लगाना होगा कि 2010 में तेल की संभावित माँग क्या होगी और प्रत्याशित घरेलू तेल उत्पादन कितना रहेगा। इसी पूर्वानुमानित आवश्यकता के आधार पर ही तेल के आयात की सही नीतियां बनाई जा सकती हैं।

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