🪔 Diwali Maha Offer Class 10 & 12 Bundles @ ₹299 ₹599
Ends in:
03d
14h
35m
40s

NCERT Class 11 Economics Chapter 7 पर्यावरण और धारणीय विकास

NCERT Class 11 Economics Chapter 7 पर्यावरण और धारणीय विकास Solutions Hindi Medium As Per New Syllabus. to each chapter is provided in the list so that you can easily browse through different chapters NCERT Class 11 Economics Chapter 7 पर्यावरण और धारणीय विकास Notes and select need one. NCERT Class 11 Economics Chapter 7 पर्यावरण और धारणीय विकास Question Answers Download PDF. NCERT Class 11 Economics Bharatiya Arthavyavastha ka Vikas Hindi Medium Solutions.

NCERT Class 11 Economics Chapter 7 पर्यावरण और धारणीय विकास

Also, you can read the NCERT book online in these sections Solutions by Expert Teachers as per Central Board of Secondary Education (CBSE) Book guidelines. CBSE Class 11 Economics Bharatiya Arthavyavastha ka Vikas Textual Solutions are part of All Subject Solutions. Here we have given NCERT Class 11 Economics Notes Hindi Medium, CBSE Class 11 Economics Bharatiya Arthavyavastha ka Vikas in Hindi Medium Solutions for All Chapters, You can practice these here.

Chapter: 7

भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास
अभ्यास

1. पर्यावरण से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: पर्यावरण से तात्पर्य हमारे चारों ओर स्थित सभी जैविक (पौधे, पशु, मनुष्य आदि) तथा अजैविक (जल, वायु, भूमि, सूर्य का प्रकाश आदि) तत्वों के समग्र समूह से है। ये सभी तत्व एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं और जीवन के अस्तित्व तथा विकास के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ प्रदान करते हैं।

2. जब संसाधन निस्सरण की दर उनके पुनर्जनन की दर से बढ़ जाती है, तो क्या होता है?

उत्तर: जब संसाधनों का उपयोग या निस्सरण उनकी पुनर्जनन क्षमता से अधिक होने लगता है, तब संसाधनों का भंडार धीरे-धीरे समाप्त होने लगता है। इससे पर्यावरण का संतुलन बिगड़ जाता है, प्राकृतिक संसाधनों की कमी हो जाती है और पर्यावरण संकट उत्पन्न हो जाता है। ऐसी स्थिति में भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों की उपलब्धता भी खतरे में पड़ जाती है।

3. निम्न को नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधनों में वर्गीकृत करें:

(क) वृक्ष।

(ख) मछली।

(ग) पेट्रोलियम।

(घ) कोयला।

(ङ) लौह अयस्क।

(च) जल।

उत्तर: 

नवीकरणीय संसाधनगैर-नवीकरणीय संसाधन
(क) वृक्ष(ग) पेट्रोलियम
(ख) मछली(घ) कोयला
(च) जल(ङ) लौह अयस्क

4. आजकल विश्व के सामने _____________ और ____________ की दो प्रमुख पर्यावरण समस्याएँ हैं।

उत्तर: आजकल विश्व के सामने वैश्विक उष्णता और ओज़ोन क्षय की दो प्रमुख पर्यावरण समस्याएँ हैं।

5. निम्न कारक भारत में कैसे पर्यावरण संकट में योगदान करते हैं? सरकार के समक्ष वे कौन-सी समस्याएँ पैदा करते हैं:

(i) बढ़ती जनसंख्या।

उत्तर: बढ़ती जनसंख्या के कारण भूमि, जल, वन तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। इससे संसाधनों का तेजी से दोहन होता है और सरकार के लिए सभी लोगों को आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराना कठिन हो जाता है।

(ii) वायु-प्रदूषण।

उत्तर: वाहनों और उद्योगों से निकलने वाले धुएं से वायु प्रदूषण होता है। इसके कारण सांस की बीमारियाँ बढ़ती हैं, जिससे स्वास्थ्य पर व्यय बढ़ता है।

(iii) जल-प्रदूषण।

उत्तर: नदियों और जल स्रोतों के प्रदूषित होने से स्वच्छ पानी दुर्लभ हो गया है। भारत में लगभग 70% जल प्रदूषित है जिससे जल-संक्रामक रोग बढ़ रहे हैं।

(iv) संपन्न उपभोग मानक।

उत्तर: अधिक उपभोग की प्रवृत्ति प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन और अधिक कचरे का कारण बनती है। इससे पर्यावरण पर दबाव बढ़ता है और सरकार को संसाधनों के संरक्षण की चुनौती का सामना करना पड़ता है।

(v) निरक्षरता।

उत्तर: निरक्षर लोग पर्यावरण संरक्षण के प्रति पर्याप्त जागरूक नहीं होते। इससे संसाधनों का अनुचित उपयोग होता है और पर्यावरण संबंधी योजनाओं को सफल बनाना कठिन हो जाता है।

(vi) औद्योगिकीकरण।

उत्तर: औद्योगिक क्रांति से उत्पादन के लिए संसाधनों की मांग तेजी से बढ़ी और अत्यधिक अपशिष्ट (waste) उत्पन्न होने से पर्यावरण की अवशोषी क्षमता पर बुरा असर पड़ा।

(vii) शहरीकरण।

उत्तर: अनियोजित शहरीकरण के कारण प्रदूषण और दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ा है और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एक गंभीर चुनौती बन गया है।

(viii) वन-क्षेत्र में कमी।

उत्तर: वनों की कटाई से जैव विविधता कम होती है, मिट्टी का कटाव बढ़ता है और जलवायु संतुलन प्रभावित होता है। इससे पर्यावरण संरक्षण सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।

(ix) अवैध वन कटाई।

उत्तर: अवैध कटाई से वन संसाधनों का तेजी से विनाश होता है और वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो जाता है। इसे रोकने के लिए सरकार को कड़े कानून लागू करने पड़ते हैं।

(x) वैश्विक उष्णता।

उत्तर: ग्रीनहाउस गैसों की वृद्धि से पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है। इससे जलवायु परिवर्तन, बाढ़, सूखा और समुद्र-स्तर में वृद्धि जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं, जिनसे निपटना सरकार के लिए कठिन हो गया है।

6. पर्यावरण के क्या कार्य होते हैं?

उत्तर: पर्यावरण मुख्य रूप से चार आवश्यक कार्य करता है:

(i) संसाधनों की पूर्ति करना: यह नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय दोनों प्रकार के संसाधनों की निरंतर पूर्ति करता है।

(ii) अवशेषों को समाहित करना: यह उत्पादन और उपभोग के दौरान उत्पन्न होने वाले अवशेषों (कूड़े-कचरे) को सोख लेता है।

(iii) जीवन का पोषण करना: यह जननिक और जैविक विविधता प्रदान करके पृथ्वी पर जीवन को संभव बनाता है।

(iv) सौंदर्य विषयक सेवाएँ प्रदान करना: यह प्राकृतिक और सुंदर दृश्य जैसी सौंदर्यपरक सेवाएँ भी देता है।

7. भारत में भू-क्षय के लिए उत्तरदायी छह कारकों की पहचान करें।

उत्तर: भारत में भू-क्षय के लिए उत्तरदायी छह कारक है-

(i) वन विनाश के परिणामस्वरूप वनस्पति की हानि।

(ii) अधारणीय (अत्यधिक) जलाऊ लकड़ी और चारे का निष्कर्षण।

(iii) कृषि-रसायनों (जैसे रासायनिक खाद और कीटनाशक) का अनुचित प्रयोग।

(iv) वन-भूमि का अतिक्रमण (कब्ज़ा करना)।

(v) वनों में आग लगना और अत्यधिक चराई।

(vi) भूमि जल का उसकी पुनः पूर्ति क्षमता से अधिक निष्कर्षण करना।

8. समझाएं कि नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभावों की अवसर लागत उच्च क्यों होती है?

उत्तर: नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभावों की अवसर लागत उच्च होने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

(i) संसाधनों की समाप्ति और नई खोजों पर खर्च: नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधनों के अत्यधिक दोहन से कई महत्वपूर्ण संसाधन विलुप्त हो गए हैं। इसके कारण, हमें नए संसाधनों की खोज करने के लिए प्रौद्योगिकी (technology) और अनुसंधान (research) पर विशाल धनराशि खर्च करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

(ii) बढ़ती स्वास्थ्य लागत (Health Costs): पर्यावरण के क्षय (degradation) का सीधा असर मानव स्वास्थ्य पर पड़ा है। वायु और जल की गुणवत्ता में भारी गिरावट आई है (उदाहरण के लिए, भारत में लगभग 70 प्रतिशत जल प्रदूषित है), जिससे साँस और जल-संक्रामक रोगों की घटनाओं में वृद्धि हुई है। इसके परिणामस्वरूप, लोगों और सरकार का स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यय काफी बढ़ गया है।

(iii) वैश्विक पर्यावरण संकटों पर व्यय: वैश्विक उष्णता और ओज़ोन क्षय (Ozone Depletion) जैसे गंभीर वैश्विक पर्यावरणीय मुद्दों ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है। इन समस्याओं के प्रभावों को कम करने और इनसे निपटने के लिए सरकारों को अत्यधिक धन व्यय करना पड़ रहा है।

9. भारत में धारणीय विकास की प्राप्ति के लिए उपयुक्त उपायों की रूपरेखा प्रस्तुत करें।

उत्तर: भारत में धारणीय विकास प्राप्त करने के लिए प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण एवं संतुलित उपयोग करना आवश्यक है। वनों का संरक्षण और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण को बढ़ावा देना चाहिए। जल संरक्षण के लिए वर्षा जल संचयन, जल का पुनर्चक्रण तथा जल स्रोतों की रक्षा करनी चाहिए। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और जैव ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का अधिक उपयोग किया जाना चाहिए। प्रदूषण नियंत्रण के लिए उद्योगों में स्वच्छ तकनीक अपनानी चाहिए तथा अपशिष्ट पदार्थों का उचित प्रबंधन करना चाहिए। जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण, पर्यावरण शिक्षा का प्रसार तथा लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी आवश्यक है। इन उपायों से वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी संसाधनों का संरक्षण किया जा सकता है।

10. भारत में प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता है-इस कथन के समर्थन में तर्क दें।

उत्तर: भारत में प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता है-इस कथन के समर्थन निम्नलिखित तर्क हैं:

(i) भारत के पास उच्च गुणवत्ता वाली भूमि, सैकड़ों नदियाँ और उपनदियाँ, हरे-भरे वन और समुद्र का विस्तृत क्षेत्र उपलब्ध है।

(ii) देश में खनिजों के विशाल भंडार हैं। यहाँ लौह-अयस्क, कोयला और प्राकृतिक गैस भारी मात्रा में पाए जाते हैं।

(iii) विश्व के कुल लौह-अयस्क भंडार का लगभग 8 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत में उपलब्ध है।

(iv) देश के विभिन्न हिस्सों में बॉक्साइट, तांबा, क्रोमेट, हीरा, सोना, सीसा, मैंगनीज, जिंक, यूरेनियम और भूरा कोयला जैसे महत्वपूर्ण खनिज भी प्रचुर मात्रा में मिलते हैं।

(v) कृषि की दृष्टि से, दक्षिण के पठार की काली मिट्टी कपास की खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त है। 

(vi) अरब सागर से लेकर बंगाल की खाड़ी तक फैला गंगा का मैदान विश्व के सबसे अधिक उर्वर (उपजाऊ) और सघन खेती वाले क्षेत्रों में गिना जाता है।

11. क्या पर्यावरण संकट एक नवीन परिघटना है? यदि हाँ, तो क्यों?

उत्तर: हाँ, पर्यावरण संकट मुख्य रूप से एक नवीन (नई) परिघटना है।

इसके कारण इस प्रकार हैं:

(i) प्रारंभिक सभ्यता के दिनों में, जनसंख्या कम थी और औद्योगीकरण नहीं हुआ था। उस समय पर्यावरण संसाधनों की माँग, उनकी प्राकृतिक रूप से पूर्ति होने की क्षमता से बहुत कम थी।

(ii) चूंकि संसाधनों को निकालने की दर उनके दोबारा बनने (पुनः सृजन) की दर से कम थी, इसलिए अवशिष्ट (प्रदूषण) पर्यावरण की सोखने की क्षमता के भीतर ही रहता था और पर्यावरण समस्याएँ उत्पन्न नहीं होती थीं।

यह स्थिति जनसंख्या विस्फोट और औद्योगिक क्रांति के आने के बाद बदल गई। उत्पादन और उपभोग की बढ़ती जरूरतों के कारण संसाधनों की माँग उनके पुनः सृजन की दर से बहुत अधिक हो गई, जिससे पर्यावरण की अवशोषी क्षमता पर भारी दबाव पड़ा।

आज माँग और पूर्ति का यह संबंध पूरी तरह से पलट गया है; हमारे सामने पर्यावरण संसाधनों की माँग अधिक है, लेकिन उनकी पूर्ति सीमित है। अत्यधिक उपयोग और दुरुपयोग के कारण ही आज प्रदूषण और पर्यावरण अवक्षय का संकट इतना गंभीर हो गया है।

12. इनके दो उदाहरण दें-

(क) पर्यावरणीय संसाधनों का अति प्रयोग।

उत्तर: पर्यावरणीय संसाधनों का अति प्रयोग के दो उदाहरण है-

(i) भूमि जल का अत्यधिक निष्कर्षण: भूमि जल (groundwater) का उसकी पुनः पूर्ति क्षमता से अधिक मात्रा में निकालना।

(ii) वनों की अंधाधुंध कटाई: ईंधन की लकड़ी, चारे और औद्योगिक उपयोग (जैसे कागज मिलों) के लिए पेड़ों को उनकी वृद्धि दर से अधिक तेज़ी से काटना, जिससे वन विनाश होता है।

(ख) पर्यावरणीय संसाधनों का दुरुपयोग।

उत्तर: पर्यावरणीय संसाधनों का दुरुपयोग के दो उदाहरण है-

(i) कृषि-रसायनों का अनुचित प्रयोग: रासायनिक खाद और कीटनाशकों का अनुचित और अत्यधिक प्रयोग करना, जिससे भूमि और जल दूषित होते हैं।

(ii) जल संसाधनों का प्रदूषण: नदियों और अन्य जल स्रोतों में उद्योगों का कचरा और अपशिष्ट डालना, जिससे वे प्रदूषित हो गए हैं और नदियाँ सूखने लगी हैं।

13. पर्यावरण की चार प्रमुख क्रियाओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर: पर्यावरण की चार प्रमुख क्रिया है:

(i) संसाधनों की पूर्ति करना: पर्यावरण हमें नवीकरणीय (जैसे पेड़, मछली, पानी) और गैर-नवीकरणीय (जैसे जीवाश्म ईंधन, खनिज) दोनों प्रकार के संसाधनों की निरंतर पूर्ति करता है।

(ii) अवशेषों को समाहित करना: यह उत्पादन और उपभोग की प्रक्रियाओं के दौरान उत्पन्न होने वाले अवशेषों (कूड़े-कचरे और अपशिष्ट) को अपने भीतर सोख लेता है।

(iii) जीवन का पोषण करना: यह जननिक और जैविक विविधता प्रदान करके पृथ्वी पर जीवन को संभव बनाता है और उसका पोषण करता है।

(iv) सौंदर्य विषयक सेवाएँ प्रदान करना: यह प्राकृतिक और सुंदर दृश्य जैसी सौंदर्यपरक सेवाएँ (aesthetic services) भी प्रदान करता है।

14. महत्वपूर्ण मुद्दों की व्याख्या कीजिए। पर्यावरणीय हानि की भरपाई की अवसर लागतें भी होती हैं? व्याख्या कीजिए।

उत्तर: हाँ, पर्यावरणीय हानि की भरपाई की अवसर लागत बहुत अधिक होती है। जब पर्यावरण प्रदूषित होता है या प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन किया जाता है, तब समाज को अनेक प्रकार की आर्थिक एवं सामाजिक हानियाँ उठानी पड़ती हैं। प्रदूषित जल और वायु के कारण लोगों में बीमारियाँ बढ़ती हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर अधिक खर्च करना पड़ता है। प्राकृतिक संसाधनों के समाप्त होने पर नए संसाधनों की खोज और विकास में भारी धन व्यय करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त वनों की कटाई, भूमि क्षरण, जैव विविधता की हानि तथा जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि, उद्योग और समग्र आर्थिक विकास प्रभावित होता है। इसलिए पर्यावरण को होने वाली क्षति की भरपाई में समय, धन और संसाधनों की बड़ी मात्रा खर्च होती है। यही पर्यावरणीय हानि की अवसर लागत कहलाती है।

15. पर्यावरणीय संसाधनों की पूर्ति-मांग के उत्क्रमण कैसे वर्तमान पर्यावरण संकट के उत्तरदायी हैं? समझाएं।

उत्तर: प्रारंभिक सभ्यता के दिनों में, जब जनसंख्या कम थी और औद्योगीकरण नहीं हुआ था, तब पर्यावरण संसाधनों की माँग, उनकी प्राकृतिक रूप से पूर्ति होने की क्षमता से बहुत कम थी। उस समय संसाधनों के निकालने की दर उनके दोबारा बनने की दर से कम थी, इसलिए अवशिष्ट (प्रदूषण) पर्यावरण की सोखने की क्षमता के भीतर ही रहता था और कोई पर्यावरण समस्या नहीं थी।

परंतु, जनसंख्या विस्फोट और औद्योगिक क्रांति के कारण स्थिति पूरी तरह बदल गई। उत्पादन और उपभोग की बढ़ती जरूरतों के कारण संसाधनों की माँग उनके पुनः सृजन (दोबारा बनने) की दर से बहुत अधिक हो गई। इस वजह से आज माँग और पूर्ति का यह संबंध पूरी तरह से पलट (उत्क्रमण) गया है। अब हमारे सामने पर्यावरण संसाधनों की माँग अधिक है, लेकिन उनकी पूर्ति सीमित है। अत्यधिक उपयोग और दुरुपयोग के कारण पर्यावरण की अवशोषी क्षमता पर भारी दबाव पड़ा है, और इसी कारण वर्तमान समय में कचरा सृजन और प्रदूषण के गंभीर पर्यावरण संकट पैदा हो गए हैं।

16. भारत में विकास के दो गंभीर नकारात्मक पर्यावरण प्रभावों को उजागर करें। भारत की पर्यावरण समस्याओं में एक विरोधाभास है – एक तो यह निर्धनताजनित है और दूसरे जीवन-स्तर में संपन्नता का कारण भी है। क्या यह सत्य है?

उत्तर: भारत में विकास के दो प्रमुख नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभाव वायु प्रदूषण और भूमि क्षरण (भू-क्षय) हैं। इसके अतिरिक्त जल प्रदूषण, वनों की कटाई तथा जैव विविधता की हानि भी गंभीर समस्याएँ हैं।

यह कथन सत्य है कि भारत की पर्यावरण समस्याओं में एक विरोधाभास है। एक ओर निर्धनता के कारण लोग अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वनों की कटाई, ईंधन हेतु लकड़ी का अत्यधिक उपयोग तथा प्राकृतिक संसाधनों का अनियंत्रित दोहन करते हैं, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है। दूसरी ओर, बढ़ती आय, औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और उच्च उपभोग स्तर के कारण उद्योगों, वाहनों और ऊर्जा के उपयोग में वृद्धि होती है, जिससे वायु, जल और भूमि प्रदूषण बढ़ता है। इस प्रकार भारत में पर्यावरण संकट का एक कारण गरीबी है, जबकि दूसरा कारण बढ़ती समृद्धि और उपभोग की प्रवृत्ति है।

17. धारणीय विकास क्या है?

उत्तर: धारणीय विकास (Sustainable Development) का अर्थ ऐसे विकास से है जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं की पूर्ति क्षमता से समझौता किए बिना पूरा करता है। इसका मुख्य लक्ष्य केवल आर्थिक वृद्धि नहीं है, बल्कि सभी की (विशेषकर गरीबों की) बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करना और उन्हें चिरस्थायी आजीविका प्रदान करना है। यह सुनिश्चित करता है कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग इस प्रकार हो कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों की कोई कमी न हो और पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुँचे।

18. अपने आस-पास के क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए धारणीय विकास की चार रणनीतियाँ सुझाइए।

उत्तर: (i) स्वच्छ ईंधन (LPG और CNG) का प्रयोग: शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण कम करने के लिए सार्वजनिक और निजी वाहनों में उच्चदाब प्राकृतिक गैस (CNG) का उपयोग करना चाहिए। इसी तरह, ग्रामीण क्षेत्रों में लकड़ी और उपलों की जगह खाना पकाने के लिए एल.पी.जी. (LPG) तथा गोबर गैस का उपयोग करना चाहिए।

(ii) ऊर्जा के गैर-पारंपरिक और नवीकरणीय स्रोतों का उपयोग: कोयले (थर्मल पावर) से बनने वाली बिजली पर निर्भरता कम करके, प्रदूषण-मुक्त विकल्पों जैसे— सौर ऊर्जा (फोटोवोल्टीय सेलों के माध्यम से) और तेज़ हवा वाले क्षेत्रों में पवन चक्कियों (वायु शक्ति) का प्रयोग बढ़ाना चाहिए।

(iii) जैविक कम्पोस्ट खाद का उपयोग: रासायनिक उर्वरकों से मिट्टी और भूजल प्रदूषित होता है। इसके स्थान पर जैविक अपशिष्टों (कचरे) और केंचुओं का उपयोग करके बनाई गई जैविक कम्पोस्ट खाद का उपयोग करना चाहिए, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहे।

(iv) जैविक-कीट नियंत्रण और पारंपरिक ज्ञान: रासायनिक कीटनाशकों के स्थान पर नीम आधारित कीटनाशकों का प्रयोग और फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले कीटों को खाने वाले प्राकृतिक पक्षियों/जानवरों (जैसे उल्लू, मोर, सांप आदि) का संरक्षण करना चाहिए। साथ ही, स्वास्थ्य के लिए रसायनों की जगह पारंपरिक ज्ञान (जैसे आयुर्वेदिक व हर्बल औषधियों) का उपयोग करना चाहिए।

19. धारणीय विकास की परिभाषा में वर्तमान और भावी पीढ़ियों के बीच समता के विचार की व्याख्या करें।

उत्तर: धारणीय विकास की परिभाषा में वर्तमान और भावी पीढ़ियों के बीच समता का अर्थ है कि वर्तमान पीढ़ी प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग इस प्रकार करे कि भविष्य की पीढ़ियों के अधिकारों और आवश्यकताओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। यदि आज के लोग संसाधनों का अंधाधुंध दोहन करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं रहेंगे। इसलिए संसाधनों का संरक्षण, पर्यावरण की रक्षा और उनका संतुलित उपयोग आवश्यक है। इस प्रकार धारणीय विकास वर्तमान और भविष्य दोनों पीढ़ियों के हितों की समान रूप से रक्षा करने पर बल देता है तथा प्राकृतिक संसाधनों के न्यायसंगत और जिम्मेदार उपयोग का समर्थन करता है।

NEW VIDEO CLASS

Subject Ka Complete Video Solution Dekhein

Step-by-step easy concept explanation aur full questions Answer ke liye watch karein ya app download karein:

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Scroll to Top