UP Board Class 12 Pedagogy Chapter 17 जनसंख्या शिक्षा

UP Board Class 12 Pedagogy Chapter 17 जनसंख्या शिक्षा Solutions Hindi Medium As Per New Syllabus to each chapter is provided in the list so that you can easily browse throughout different chapters UP Board Class 12 Pedagogy Chapter 17 जनसंख्या शिक्षा Notes and select need one. UP Board Class 12 Pedagogy Chapter 17 जनसंख्या शिक्षा Question Answers Download PDF. UP Board Study Material of Class 12 Pedagogy.

UP Board Class 12 Pedagogy Chapter 17 जनसंख्या शिक्षा

Join Telegram channel
Follow us:
facebook sharing button
whatsappp sharing button
instagram sharing button

Also, you can read the UPMSP book online in these sections Solutions by Expert Teachers as per Uttar Pradesh Madhyamik Shiksha Parishad (UPMSP) Book guidelines. These solutions are part of UP Board All Subject Solutions. Here we have given UP Board Class 12 Pedagogy Hindi Medium Solutions, UP Board of Secondary Education Course Pedagogy Notes in Hindi for All Chapter, You can practice these here.

Chapter: 17

खण्ड ‘क’ आधुनिक शैक्षिक विचारधारा का विकास

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न:

1. जनसंख्या शिक्षा से आप क्या समझते हैं? भारत में जनसंख्या शिक्षा की आवश्यकता एवं महत्त्व का भी उल्लेख कीजिए।

उतर: जनसंख्या शिक्षा का अर्थ:

जनसंख्या शिक्षा से तात्पर्य ऐसी शिक्षा से है, जिसके माध्यम से व्यक्ति को जनसंख्या की संरचना, वृद्धि-दर, वितरण, जनसंख्या नियंत्रण, परिवार नियोजन तथा जनसंख्या से संबंधित सामाजिक, आर्थिक व पर्यावरणीय प्रभावों के बारे में जानकारी दी जाती है।

अर्थात्— जनसंख्या शिक्षा वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा विद्यार्थियों एवं सामान्य नागरिकों में यह चेतना उत्पन्न की जाती है कि सीमित संसाधनों में संतुलित जनसंख्या ही राष्ट्र के विकास के लिए आवश्यक है।

भारत में जनसंख्या शिक्षा की आवश्यकता:

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Join Now

भारत में जनसंख्या शिक्षा की आवश्यकता निम्न कारणों से है—

(i) जनसंख्या-वृद्धि की समस्या: भारत में जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे बेरोजगारी, गरीबी और संसाधनों की कमी की समस्या उत्पन्न हो रही है।

(ii) संसाधनों का सीमित होना: भूमि, जल, ऊर्जा आदि संसाधन सीमित हैं, इसलिए उनका संतुलित उपयोग आवश्यक है।

(iii) परिवार नियोजन की जानकारी: जनसंख्या शिक्षा लोगों को छोटे एवं सुखी परिवार के महत्त्व को समझाती है।

(iv) स्वास्थ्य एवं पोषण सुधार: यह शिक्षा स्वस्थ जीवन, उचित आहार, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करती है।

(v) आर्थिक विकास में सहयोग: नियंत्रित जनसंख्या के माध्यम से मानव संसाधन का सही उपयोग कर आर्थिक प्रगति संभव होती है।

(vi) पर्यावरण संरक्षण: अधिक जनसंख्या पर्यावरणीय असंतुलन का कारण बनती है, अतः जनसंख्या शिक्षा पर्यावरण-संतुलन की चेतना भी देती है।

जनसंख्या शिक्षा का महत्त्व:

(i) व्यक्तिगत जीवन में सुधार लाना।

(ii) छोटे परिवार के लाभ समझाना।

(iii) महिलाओं की स्थिति सुदृढ़ करना।

(iv) सामाजिक व आर्थिक विकास को गति देना।

(v) संसाधनों के उचित उपयोग की समझ विकसित करना।

2. भारत में जनसंख्या शिक्षा के कार्यक्रमों का उल्लेख कीजिए।

उतर: भारत में जनसंख्या शिक्षा के कार्यक्रम: भारत में जनसंख्या समस्या के समाधान हेतु विभिन्न स्तरों पर जनसंख्या शिक्षा के अनेक कार्यक्रम चलाए गए हैं। इनका मुख्य उद्देश्य नागरिकों में जनसंख्या नियंत्रण, परिवार नियोजन तथा संतुलित जनसंख्या की आवश्यकता के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना है। 

प्रमुख कार्यक्रम इस प्रकार हैं—

(i) राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम (1952): भारत ने 1952 में विश्व का पहला राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम आरम्भ किया। इसका उद्देश्य था — जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित कर जीवन-स्तर में सुधार लाना।

(ii) राष्ट्रीय जनसंख्या नीति (1976 एवं 2000): 1976 की नीति में परिवार नियोजन के प्रसार और जनसंख्या नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए गए।

2000 की नीति में “स्थिर जनसंख्या प्राप्त करना” मुख्य लक्ष्य रखा गया, साथ ही मातृ-शिशु स्वास्थ्य, शिक्षा और महिलाओं को सशक्त बनाने पर बल दिया गया।

(iii) स्कूल जनसंख्या शिक्षा कार्यक्रम: 1980 के दशक में यह कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। इसके अंतर्गत विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों को जनसंख्या वृद्धि, परिवार नियोजन, लैंगिक समानता और पर्यावरण संतुलन से संबंधित विषयों की शिक्षा दी जाती है।

(iv) विश्वविद्यालय जनसंख्या शिक्षा कार्यक्रम: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के माध्यम से कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में जनसंख्या शिक्षा केन्द्र स्थापित किए गए, जहाँ विद्यार्थियों को इस विषय पर प्रशिक्षण एवं जागरूकता दी जाती है।

(v) राष्ट्रीय साक्षरता मिशन (1988): इस कार्यक्रम में साक्षरता के साथ-साथ परिवार नियोजन, स्वास्थ्य, स्वच्छता तथा जनसंख्या नियंत्रण पर भी जोर दिया गया।

(vi) मीडिया एवं प्रचार कार्यक्रम: रेडियो, टेलीविज़न, समाचार पत्रों, फिल्मों तथा सोशल मीडिया के माध्यम से छोटे परिवार, परिवार नियोजन और स्वास्थ्य संबंधी संदेश प्रसारित किए जाते हैं।

(vii) महिला एवं बाल विकास कार्यक्रम: महिलाओं को शिक्षित व सशक्त बनाकर उन्हें जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन के लिए प्रेरित किया जाता है।

3. जनसंख्या शिक्षा की समस्याओं का उल्लेख कीजिए तथा उनके समाधान के उपायों का भी वर्णन कीजिए।

था

जनसंख्या शिक्षा की क्या समस्याएँ हैं? जनसंख्या शिक्षा के शिक्षण के लिए सुझाव दीजिए। 

उतर: जनसंख्या शिक्षा की समस्याएँ तथा उनके समाधान के उपाय-

जनसंख्या शिक्षा की समस्याएँ: 

भारत जैसे विकासशील देश में जनसंख्या शिक्षा के प्रसार में अनेक कठिनाइयाँ सामने आती हैं। मुख्य समस्याएँ निम्नलिखित हैं—

(i) अशिक्षा और अज्ञानता: ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर लोग निरक्षर हैं, इसलिए वे जनसंख्या शिक्षा और परिवार नियोजन के महत्व को नहीं समझ पाते।

(ii) सामाजिक व धार्मिक परम्पराएँ: अनेक लोग पारंपरिक मान्यताओं के कारण परिवार नियोजन को अस्वीकार करते हैं। इसे धार्मिक दृष्टि से गलत मानते हैं।

(iii) महिलाओं की निम्न स्थिति: अनेक क्षेत्रों में महिलाओं को शिक्षा और निर्णय लेने का अधिकार नहीं होता, जिससे वे परिवार नियोजन के निर्णय में भाग नहीं ले पातीं।

(iv) पर्याप्त प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी: जनसंख्या शिक्षा सिखाने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी है, जिसके कारण यह शिक्षा प्रभावी रूप से नहीं दी जा पाती।

(v) पाठ्यक्रम में उपेक्षा: विद्यालयों और महाविद्यालयों में जनसंख्या शिक्षा को एक गौण विषय के रूप में लिया जाता है, जिससे विद्यार्थियों में रुचि कम रहती है।

(vi) संसाधनों की कमी: जनसंख्या शिक्षा के प्रचार-प्रसार हेतु आवश्यक साधन, सामग्री और आर्थिक संसाधनों की कमी भी एक प्रमुख बाधा है।

(vii) प्रचार-प्रसार की अपर्याप्तता: ग्रामीण व पिछड़े क्षेत्रों में इस शिक्षा के प्रचार के लिए पर्याप्त माध्यम नहीं हैं।

जनसंख्या शिक्षा की समस्याओं के समाधान/शिक्षण के सुझाव:

(i) जन-जागरण अभियान: जनसंख्या शिक्षा के महत्व को समझाने के लिए ग्रामीण व शहरी स्तर पर प्रचार अभियान, नाटक, प्रदर्शनियाँ और कार्यशालाएँ आयोजित की जानी चाहिए।

(ii) विद्यालयों में अनिवार्य विषय: जनसंख्या शिक्षा को विद्यालयों और महाविद्यालयों में एक अनिवार्य विषय के रूप में सम्मिलित किया जाना चाहिए।

(iii) शिक्षकों का विशेष प्रशिक्षण: शिक्षकों को जनसंख्या शिक्षा से संबंधित वैज्ञानिक जानकारी और शिक्षण विधियों का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

(iv) महिलाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण: महिलाओं को शिक्षित, आत्मनिर्भर और निर्णय लेने योग्य बनाना आवश्यक है ताकि वे छोटे परिवार की नीति अपनाएँ।

(v) मीडिया का उपयोग: रेडियो, टेलीविज़न, सोशल मीडिया, पोस्टर, और फिल्में जनसंख्या नियंत्रण के प्रचार के लिए प्रभावी माध्यम हैं।

(vi) सामाजिक और धार्मिक नेताओं का सहयोग: समाज के प्रभावशाली व्यक्तियों और धार्मिक नेताओं को जनसंख्या शिक्षा के प्रसार में सम्मिलित करना चाहिए।

(vii) स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार: परिवार नियोजन साधनों की आसान उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

This will close in 0 seconds

Scroll to Top