UP Board Class 12 Pedagogy Chapter 16 सामाजिक (प्रौढ़) शिक्षा की समस्या

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UP Board Class 12 Pedagogy Chapter 16 सामाजिक (प्रौढ़) शिक्षा की समस्या

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Chapter: 16

खण्ड ‘क’ आधुनिक शैक्षिक विचारधारा का विकास

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

1. सामाजिक शिक्षा (प्रौढ शिक्षा) से आप क्या समझते हैं? सामाजिक शिक्षा के मुख्य उद्देश्यों का उल्लेख कीजिए।

या

सामाजिक शिक्षा का प्रमुख कार्यक्रम क्या है? 

उत्तर: सामाजिक शिक्षा या (प्रौढ़ शिक्षा) का अर्थ: सामाजिक शिक्षा या प्रौढ़ शिक्षा का आशय उन अशिक्षित वयस्क पुरुषों और महिलाओं को शिक्षित करना है, जिन्हें बचपन में शिक्षा का अवसर नहीं मिल सका। यह शिक्षा व्यक्ति को साक्षर ही नहीं बनाती, बल्कि उसे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जीवन में सक्षम भागीदारी हेतु तैयार करती है।

मुख्य उद्देश्य:

(i) निरक्षरों को पढ़ना-लिखना और गणना करना सिखाना।

(ii) सामाजिक कुरीतियों (अंधविश्वास, बाल विवाह, दहेज प्रथा आदि) को दूर करना।

(iii) वयस्कों में नागरिकता की भावना, राष्ट्रीय एकता और लोकतांत्रिक दृष्टिकोण विकसित करना।

(iv) स्वास्थ्य, स्वच्छता और परिवार-कल्याण के प्रति जागरूकता फैलाना।

(v) व्यावसायिक और तकनीकी ज्ञान प्रदान कर आत्मनिर्भर बनाना।

(vi) स्त्रियों और पिछड़े वर्गों को शिक्षित कर समाज में समानता और सशक्तिकरण लाना।

2. सामाजिक शिक्षा के मुख्य साधनों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: सामाजिक शिक्षा के मुख्य साधन:

विद्यालय एवं प्रौढ़ शिक्षा केन्द्र: गाँव-गाँव और शहरों में प्रौढ़ शिक्षा केन्द्र खोलकर अशिक्षितों को शिक्षित किया जाता है।

दूरदर्शन व रेडियो: शैक्षिक कार्यक्रमों द्वारा ज्ञान का प्रसार।

फिल्में, नाटक एवं प्रदर्शनियाँ: सामाजिक बुराइयों पर आधारित नाटकों, चित्रपटों से जागरूकता।

समाचार-पत्र, पत्रिकाएँ एवं पुस्तकालय: सरल भाषा की सामग्री से वयस्कों को जागरूक करना।

लोक शिक्षा माध्यम: कीर्तन, भजन, लोकगीत, मेले और पंचायतों के माध्यम से शिक्षा।

स्वयंसेवी संस्थाएँ व अभियान: एन.एस.एस., साक्षरता अभियान जैसी गतिविधियाँ।

3. सामाजिक (प्रौढ) शिक्षा की समस्याएँ क्या हैं? इन समस्याओं के समाधान के उपाय बताइए। 

या

भारतवर्ष में प्रौदों के लिए शिक्षा-प्रसार में क्या-क्या बाधाएँ हैं? 

या

प्रौढ शिक्षा के प्रसार की बाधाओं को दूर करने के लिए सुझाव दीजिए। 

उत्तर: सामाजिक शिक्षा (प्रौढ़ शिक्षा) की मुख्य समस्याएँ:

सामाजिक शिक्षा या प्रौढ़ शिक्षा के प्रचार के लिए यद्यपि व्यापक प्रयास किये जा रहे हैं, इस पर भी इसके प्रसार में अनेक बाधाएँ हैं।

सामाजिक शिक्षा के प्रसार एवं सफलता के मार्ग में उत्पन्न होने वाली मुख्य समस्याओं का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है:

(i) निरक्षरों की अधिक संख्या – बहुत बड़ी जनसंख्या अभी भी अशिक्षित है।

(ii) रुचि और प्रेरणा का अभाव – प्रौढ़ लोग पढ़ाई को आवश्यक नहीं मानते।

(iii) आर्थिक कठिनाइयाँ – मजदूरी व रोज़गार के कारण वयस्क लोग पढ़ाई के लिए समय नहीं दे पाते।

(iv) सुविधाओं की कमी – पर्याप्त प्रौढ़ शिक्षा केन्द्र, शिक्षक और सामग्री का अभाव।

(v) सामाजिक बंधन – अंधविश्वास, परंपरागत सोच और महिलाओं की शिक्षा की अनदेखी।

(vi) प्रशिक्षित शिक्षक का अभाव – वयस्कों के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित शिक्षक कम हैं।

समाधान के उपाय:

(i) व्यापक साक्षरता अभियान चलाना और जनजागरण करना।

(ii) प्रौढ़ शिक्षा के लिए रात्रि विद्यालय और लचीला समय रखना।

(iii) शिक्षा को रोज़गार और जीवनोपयोगी बनाना।

(iv) सरकारी सहायता – मुफ्त किताबें, पठन-सामग्री व वित्तीय सहयोग।

(v) महिला शिक्षा पर विशेष ध्यान देकर लैंगिक असमानता कम करना।

(vi) स्वयंसेवी संस्थाओं व युवाओं को इसमें सक्रिय करना।

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