UP Board Class 12 Pedagogy Chapter 3 मध्यकालीन भारतीय शिक्षा

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UP Board Class 12 Pedagogy Chapter 3 मध्यकालीन भारतीय शिक्षा

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Chapter: 3

खण्ड ‘क’ आधुनिक शैक्षिक विचारधारा का विकास

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

1. मध्यकालीन शिक्षा से आप क्या समझते हैं? इस काल की शिक्षा की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

या मध्यकालीन मुस्लिम शिक्षा की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: मध्यकालीन शिक्षा (संक्षेप में):

अर्थ: 8वीं–18वीं शताब्दी तक प्रचलित शिक्षा प्रणाली, जिसमें धार्मिक, भाषाई और प्रशासनिक ज्ञान पर जोर था।

मुख्य विशेषताएँ:

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(i) धार्मिक आधार: हिन्दू गुरुकुल, मुस्लिम मदरसा।

(ii) पाठ्यक्रम: धर्मग्रंथ, संस्कृत/अरबी/फारसी, गणित, विज्ञान, दर्शन।

(iii) उद्देश्य: धार्मिक, नैतिक, प्रशासनिक और सामाजिक शिक्षा।

(iv) पद्धति: गुरु-शिष्य परंपरा, मौखिक शिक्षा, पाठ्य-पुस्तक।

(v) सामाजिक भेद: पुरुषों तक सीमित, महिलाओं को कम शिक्षा।

यदि चाहो तो मैं मुस्लिम शिक्षा की विशेषताएँ और भी संक्षेप में 4–5 बिन्दुओं में बता दूँ।

2. मध्यकालीन शिक्षा के मुख्य गुणों का सामान्य विवरण प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर: मध्यकालीन शिक्षा के मुख्य गुण (सामान्य विवरण):

(i) धार्मिक एवं नैतिक प्रशिक्षण: शिक्षा का मुख्य उद्देश्य धार्मिक और नैतिक मूल्यों का विकास करना था।

(ii) गुरु-शिष्य परंपरा: शिक्षा अधिकांशतः गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से दी जाती थी।

(iii) भाषा और साहित्य: संस्कृत, फारसी और अरबी जैसी भाषाओं का अध्ययन आवश्यक था।

(iv) व्यावहारिक ज्ञान: गणित, विज्ञान, खगोलशास्त्र, प्रशासन और युद्धकला जैसी जीवनोपयोगी शिक्षा भी दी जाती थी।

(v) सामाजिक सीमाएँ: शिक्षा अधिकतर पुरुषों तक सीमित थी; महिलाओं की शिक्षा असामान्य थी।

(vi) संस्थान: हिन्दू समाज में गुरुकुल, मुस्लिम समाज में मदरसा प्रमुख शिक्षा केन्द्र थे।

यह सामान्य विवरण मध्यकालीन शिक्षा के गुणों को संक्षेप में प्रस्तुत करता है।

3. मध्यकालीन भारतीय शिक्षा के मुख्य दोष बताइए।

उत्तर: मध्यकालीन भारतीय शिक्षा के मुख्य दोष:

(i) धार्मिक सीमितता: शिक्षा का मुख्य ध्यान धर्म और ग्रंथों तक सीमित था; आधुनिक विज्ञान और व्यावहारिक ज्ञान का अभाव।

(ii) लिंग भेद: अधिकांश शिक्षा पुरुषों तक सीमित थी; महिलाओं को शिक्षा का अवसर बहुत कम मिलता था।

(iii) सामाजिक भेद: जाति और वर्ग के आधार पर शिक्षा की पहुँच असमान थी।

(iv) आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक का अभाव: विज्ञान, तकनीक और व्यावहारिक शिक्षा में पिछड़ापन।

(v) अल्प पाठ्यक्रम: शिक्षा का दायरा सीमित और रूढ़िवादी था; रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच को प्रोत्साहन नहीं मिला।

यह दोष मध्यकालीन शिक्षा की सीमाओं को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

4. प्राचीन व मध्यकालीन शैक्षिक विशेषताओं की तुलना निम्न बिन्दुओं के आधार पर कीजिए-

(i) शिक्षा का उद्देश्य।

(ii) पाठ्यक्रम।

(iii) शिक्षा के केन्द्र।

उत्तर: प्राचीन और मध्यकालीन भारतीय शिक्षा की विशेषताओं की तुलना निम्न बिंदुओं के आधार पर इस प्रकार की जा सकती है:

क्र.सं.विशेषताप्राचीन शिक्षामध्यकालीन शिक्षा
1शिक्षा का उद्देश्यव्यक्ति का सर्वांगीण विकास, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति; नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक मूल्य सिखानाधार्मिक और सांसारिक शिक्षा दोनों; अधिकतर धर्म और शास्त्रों का अध्ययन; नौकरी या प्रशासनिक कार्यों के लिए तैयारी; नैतिक शिक्षा पर कम ध्यान
2पाठ्यक्रमवेद, उपनिषद, धर्मशास्त्र, साहित्य, गणित, ज्योतिष, योग, कला और शिल्पकुरान, हदीस, फिक़ह, तफ़सीर, अरबी और फारसी भाषा, गणित, विज्ञान, तर्कशास्त्र; कुछ स्थानों पर साहित्य और कला शिक्षा भी
3शिक्षा के केन्द्रगुरुकुल: घर या आश्रम में गुरु के निर्देशन मेंमदरसा, मकतब: शहरों या गाँवों में, मस्जिदों से जुड़ी शिक्षा संस्थाएँ, कुछ उच्च शिक्षा के लिए दरबारी या विशेष मदरसाएँ

सारांश:

प्राचीन शिक्षा अधिकतर व्यक्तिगत और नैतिक विकास पर केन्द्रित थी, जबकि मध्यकालीन शिक्षा में धर्म और प्रशासनिक दक्षता का अधिक महत्व था। प्राचीन शिक्षा ग्रामीण और प्राकृतिक परिवेश में होती थी, जबकि मध्यकालीन शिक्षा संस्थागत और शहर-केंद्रित थी।

यदि आप चाहें, तो मैं इस तुलना को संक्षिप्त चार-पंक्ति वाले चार्ट में भी बदल सकता हूँ जिसे याद करना आसान हो। क्या मैं ऐसा कर दूँ?

लघु उत्तेरीय प्रश्न

1. मध्यकालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्यों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: मध्यकालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य-

(i) धार्मिक शिक्षा: इस्लाम धर्म, कुरआन और धार्मिक नियमों का अध्ययन।

(ii) भाषा एवं साहित्य: अरबी और फारसी भाषा का ज्ञान, साहित्यिक कौशल का विकास।

(iii) व्यावसायिक और तकनीकी शिक्षा: कला, शिल्प, तकनीकी और व्यवसायिक कौशल में दक्षता।

(iv) लौकिक उन्नति: प्रशासन, गणित, खगोलशास्त्र, इतिहास आदि में ज्ञान।

(iv) अनुशासन और नैतिकता: शिष्य में अनुशासन, संयम और नैतिक मूल्यों का विकास।

संक्षेप में, मध्यकालीन शिक्षा का उद्देश्य धार्मिक, भाषाई, व्यावहारिक और नैतिक विकास सुनिश्चित करना था।

2. मध्यकालीन शिक्षा के सन्दर्भ में प्राथमिक शिक्षा तथा मकतब का सामान्य परिचय प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर: मध्यकालीन शिक्षा में प्राथमिक शिक्षा और मकतब-

प्राथमिक शिक्षा:

(i) यह शिक्षा बच्चों के प्रारंभिक ज्ञान और कौशल के विकास के लिए थी।

(ii) इसमें कुरआन पढ़ना, अरबी और फारसी भाषा सीखना, लिखना और गणित का प्रारंभिक ज्ञान शामिल था।

(iii) शिक्षा घर या स्थानीय समुदाय में प्रारंभ होती थी और सरल, जीवनोपयोगी थी।

मकतब:

(i) मकतब प्राथमिक शिक्षा का प्रमुख केन्द्र था।

(ii) यह बच्चों को धार्मिक और लौकिक ज्ञान देने के लिए स्थापित किया गया था।

(iii) मकतब में कुरआन का पाठ, अरबी और फारसी भाषा, लेखन और गणित पढ़ाया जाता था।

(iv) शिष्य यहां गुरु के निर्देशन में अनुशासन और नैतिक शिक्षा भी प्राप्त करते थे।

संक्षेप में, प्राथमिक शिक्षा और मकतब मध्यकालीन मुस्लिम समाज में बच्चों के धार्मिक, भाषाई और बुनियादी ज्ञान के विकास का मुख्य माध्यम थे।

3. मध्यकालीन शिक्षा के सन्दर्भ में मदरसा तथा उच्च शिक्षा का सामान्य परिचय प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर: मध्यकालीन शिक्षा में मदरसा और उच्च शिक्षा-

मदरसा:

(i) मदरसा मुस्लिम शिक्षा का प्रमुख माध्यम था।

(ii) यह बच्चों और युवाओं को धार्मिक और लौकिक ज्ञान देने के लिए स्थापित किया गया था।

(iii) मदरसा में कुरआन, इस्लामी नियम, अरबी और फारसी भाषा, साहित्य, गणित, खगोलशास्त्र और तर्कशास्त्र पढ़ाया जाता था।

(iv) यहां छात्रों को अनुशासन, नैतिक शिक्षा और सामाजिक व्यवहार का प्रशिक्षण भी दिया जाता था।

उच्च शिक्षा:

(i) उच्च शिक्षा में विशेष विषयों का अध्ययन होता था, जैसे विधि, तर्कशास्त्र, दर्शन, चिकित्सा, खगोलशास्त्र और प्रशासन।

(ii) उच्च शिक्षा के लिए विशेष विश्वविद्यालय या खागाह स्थापित थे।

(iii) यह शिक्षा गहन ज्ञान, शोध और विशेषज्ञता पर आधारित होती थी।

(iv) संक्षेप में, मदरसा प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा का केन्द्र था, जबकि उच्च शिक्षा में विशिष्ट विषयों और विशेषज्ञता का अध्ययन कराया जाता था।

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