UP Board Class 12 Pedagogy Chapter 7 भारतीय शिक्षाशास्त्री-श्रीमती एनी बेसेण्ट

UP Board Class 12 Pedagogy Chapter 7 भारतीय शिक्षाशास्त्री-श्रीमती एनी बेसेण्ट Solutions Hindi Medium As Per New Syllabus to each chapter is provided in the list so that you can easily browse throughout different chapters UP Board Class 12 Pedagogy Chapter 7 भारतीय शिक्षाशास्त्री-श्रीमती एनी बेसेण्ट Notes and select need one. UP Board Class 12 Pedagogy Chapter 7 भारतीय शिक्षाशास्त्री-श्रीमती एनी बेसेण्ट Question Answers Download PDF. UP Board Study Material of Class 12 Pedagogy.

UP Board Class 12 Pedagogy Chapter 7 भारतीय शिक्षाशास्त्री-श्रीमती एनी बेसेण्ट

Also, you can read the UPMSP book online in these sections Solutions by Expert Teachers as per Uttar Pradesh Madhyamik Shiksha Parishad (UPMSP) Book guidelines. These solutions are part of UP Board All Subject Solutions. Here we have given UP Board Class 12 Pedagogy Hindi Medium Solutions, UP Board of Secondary Education Course Pedagogy Notes in Hindi for All Chapter, You can practice these here.

Chapter: 7

खण्ड ‘क’ आधुनिक शैक्षिक विचारधारा का विकास

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

1. श्रीमती एनी बेसेण्ट के अनुसार शिक्षा के अर्थ, उद्देश्यों तथा पाठ्यक्रम का उल्लेख कीजिए।

या एनी बेसेण्ट के शैक्षिक विचारों का उल्लेख कीजिए।

या डॉ० एनी बेसेण्ट के अनुसार शिक्षा के उद्देश्यों को स्पष्ट कीजिए।

या अधोलिखित प्रसंगों के ऊपर एनी बेसेण्ट के शैक्षिक विचारों को लिखिए।

(i) शिक्षा का पाठ्यक्रम।

(ii) शिक्षण पद्धति।

(iii) शिक्षा के उद्देश्य या एनी बेसेण्ट के अनुसार शिक्षण विधियाँ क्या हैं?

उत्तर: एनी बेसेण्ट एक महान शिक्षाशास्त्री तथा समाज सुधारक थीं। उन्होंने शिक्षा को मानव जीवन के सर्वांगीण विकास का साधन माना। उनके शैक्षिक विचार इस प्रकार हैं–

(i) शिक्षा का अर्थ:

एनी बेसेण्ट के अनुसार शिक्षा केवल पुस्तक-ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, नैतिक और आध्यात्मिक विकास का साधन है। शिक्षा से मनुष्य में आत्मविश्वास, चारित्रिक बल और समाज के प्रति कर्तव्यभाव जाग्रत होता है।

(ii) शिक्षा के उद्देश्य:

एनी बेसेण्ट ने शिक्षा के निम्नलिखित उद्देश्यों पर बल दिया—

चरित्र निर्माण: शिक्षा का प्रधान उद्देश्य अच्छा नागरिक और आदर्श मानव बनाना है।

नैतिक एवं आध्यात्मिक विकास: शिक्षा के माध्यम से मानव में धार्मिकता, सहिष्णुता और आध्यात्मिक चेतना का विकास होना चाहिए।

व्यक्तित्व का विकास: शिक्षा से व्यक्ति की अन्तर्निहित शक्तियाँ विकसित होनी चाहिए।

सामाजिक उत्थान: शिक्षा समाज में समानता, सहयोग और सेवा-भावना को बढ़ाए।

राष्ट्रीय भावना: शिक्षा से राष्ट्रप्रेम और संस्कृति के संरक्षण की भावना उत्पन्न हो।

(iii) शिक्षा का पाठ्यक्रम:

एनी बेसेण्ट पाठ्यक्रम को संतुलित और बहुआयामी मानती थीं। उनके अनुसार पाठ्यक्रम में—

धार्मिक एवं नैतिक शिक्षा,

मातृभाषा एवं संस्कृत,

गणित, इतिहास, भूगोल,

विज्ञान एवं कला,

व्यावसायिक शिक्षा,

शारीरिक व्यायाम और खेलकूद

का समुचित समावेश होना चाहिए।

(iv) शिक्षण पद्धति:

एनी बेसेण्ट की शिक्षण पद्धति निम्न थी—

व्यावहारिक शिक्षा पर बल: केवल रटने की अपेक्षा अनुभव व प्रयोग द्वारा सीखने पर जोर।

अनुभव और निरीक्षण विधि: बालक अपने चारों ओर की वस्तुओं और घटनाओं को देखकर सीखें।

मातृभाषा में शिक्षा: उन्होंने मातृभाषा को शिक्षा का सर्वोत्तम माध्यम माना।

धार्मिक एवं नैतिक शिक्षण: शिक्षण में नैतिक उपदेश, कहानियों और उदाहरणों का उपयोग।

सहजता का सिद्धान्त: शिक्षा बालक की रुचि और योग्यता के अनुसार सरल और स्वाभाविक ढंग से दी जाए।

निष्कर्ष: एनी बेसेण्ट के शैक्षिक विचारों का मुख्य आधार था – “शिक्षा से मनुष्य के जीवन का सर्वांगीण विकास तथा समाज और राष्ट्र की उन्नति।” उन्होंने शिक्षा को चरित्र निर्माण, आध्यात्मिक उन्नति और राष्ट्रीय जागरण का प्रभावी साधन माना।

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. एक महान शिक्षाशास्त्री के रूप में एनी बेसेण्ट के जीवन का सामान्य परिचय दीजिए।

उत्तर: एनी बेसेण्ट (1847–1933) एक महान शिक्षाशास्त्री, समाज सुधारक, राजनीतिज्ञ तथा थियोसोफिस्ट थीं। उनका जन्म 1 अक्टूबर 1847 को लन्दन (इंग्लैण्ड) में हुआ। प्रारम्भिक जीवन में वे अध्यापन कार्य तथा लेखन से जुड़ी रहीं। एनी बेसेण्ट ने सामाजिक कुरीतियों, धार्मिक कट्टरता और महिलाओं की असमान स्थिति के विरुद्ध आवाज़ उठाई।

वे थियोसोफिकल सोसायटी से जुड़ीं और 1893 ई. में भारत आईं। भारत आकर उन्होंने भारतीय संस्कृति, धर्म तथा शिक्षा को पुनर्जीवित करने का कार्य किया। उन्होंने वाराणसी में सेंट्रल हिन्दू कॉलेज की स्थापना की, जो आगे चलकर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) का आधार बना। एनी बेसेण्ट ने शिक्षा को केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और आत्मिक उन्नति का साधन माना।

शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान इतना महत्वपूर्ण था कि उन्हें एक महान शिक्षाशास्त्री की श्रेणी में रखा जाता है। साथ ही, वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भी सक्रिय रहीं और कांग्रेस की अध्यक्ष भी बनीं। 20 सितम्बर 1933 को उनका निधन हो गया।

2. एनी बेसेण्ट के शैक्षिक योगदान पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: एनी बेसेण्ट एक महान समाजसेविका, धर्म सुधारक और शिक्षाविद् थीं। उन्होंने भारतीय शिक्षा को राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक पुनरुत्थान से जोड़ने का कार्य किया। 

उनके प्रमुख शैक्षिक योगदान निम्नलिखित हैं—

(i) राष्ट्रीय शिक्षा की प्रवर्तक: उन्होंने शिक्षा को केवल रोजगार का साधन न मानकर राष्ट्रीय जागरण का उपकरण बनाया। शिक्षा के माध्यम से भारतीयों में स्वतंत्रता और आत्मगौरव की भावना जगाई।

(ii) सेंट्रल हिन्दू कॉलेज की स्थापना (1898): वाराणसी में सेंट्रल हिन्दू कॉलेज की स्थापना की, जो आगे चलकर बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में विलय हो गया। यह संस्था राष्ट्रीय शिक्षा और भारतीय संस्कृति के प्रचार का प्रमुख केन्द्र बनी।

(iii) भारतीय संस्कृति और धर्म पर बल: वे चाहती थीं कि शिक्षा भारतीय संस्कृति और अध्यात्म से जुड़ी हो। उन्होंने वेद, उपनिषद और गीता जैसे ग्रंथों को शिक्षण में महत्त्वपूर्ण स्थान दिलाने का प्रयास किया।

(iv) आधुनिक और प्राचीन शिक्षा का समन्वय: एनी बेसेण्ट का मत था कि शिक्षा में आधुनिक विज्ञान और तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ प्राचीन भारतीय परंपराओं को भी स्थान दिया जाए।

(v) स्त्री-शिक्षा की समर्थक: उन्होंने स्त्रियों को शिक्षा दिलाने पर विशेष बल दिया। उनके अनुसार स्त्री-शिक्षा के बिना समाज का उन्नयन संभव नहीं है।

(vi) थियोसोफिकल सोसाइटी के माध्यम से शिक्षा का प्रचार: वे थियोसोफिकल सोसाइटी की प्रमुख थीं और इस संस्था के द्वारा शिक्षा, नैतिकता और आध्यात्मिकता को बढ़ावा दिया।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Scroll to Top