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UP Board Class 12 Pedagogy Chapter 12 पर्यावरण को प्रभावित करने वाली आपदाएँ
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पर्यावरण को प्रभावित करने वाली आपदाएँ
Chapter: 12
| खण्ड ‘क’ आधुनिक शैक्षिक विचारधारा का विकास |
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
1. आपदाओं से आप क्या समझते हैं? आपदाओं के विभिन्न प्रकारों का सामान्य परिचय दीजिए।
या
मानव-जनित आपदा का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: जीवन की सामान्य गति को बाधित करने वाली घटनाएँ जब व्यापक व विनाशकारी रूप ले लेती हैं, तो उन्हें आपदा (Disaster) कहा जाता है। ये ऐसी परिस्थितियाँ हैं, जिनमें मनुष्य और जीव-जगत को भारी जान-माल की हानि उठानी पड़ती है।
आपदाओं के प्रकार:
(i) प्राकृतिक आपदाएँ: जैसे भूकम्प, बाढ़, सूखा, भूस्खलन, ज्वालामुखी, तूफान, सूनामी, महामारी आदि।
(ii) आकस्मिक आपदाएँ: अचानक घटित होने वाली आपदाएँ, जिनकी पूर्वसूचना नहीं होती। जैसे– भूकम्प, बादल फटना, चक्रवात, हिम-आँधी।
(iii) धीरे-धीरे आने वाली आपदाएँ: जो क्रमशः बढ़ती हैं और पूर्वानुमानित होती हैं। जैसे– सूखा, अकाल, मरुस्थलीकरण, प्रदूषण।
(iv) मानव-जनित आपदाएँ: जिनका कारण प्राकृतिक न होकर मानवीय कुप्रबन्धन या अपराध होते हैं। जैसे– युद्ध, दंगे, आतंकवाद, अग्निकाण्ड, सड़क दुर्घटनाएँ, जनसंख्या विस्फोट।
(v) जैविक आपदाएँ: संक्रामक रोगों से उत्पन्न संकट। जैसे– प्लेग, हैजा, एड्स, तपेदिक, कोविड-19 आदि।
2. आग लगना या अग्निकाण्ड किस प्रकार की आपदा है? इसके कारणों, बचाव तथा सम्बन्धित प्रबन्धन के उपायों का विवरण प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर: अग्निकाण्ड (आग लगना) एक मानव-जनित आपदा है। यह तब घटित होती है जब आग मानव नियंत्रण से बाहर हो जाती है और जान-माल की भारी क्षति करती है।
आग लगने के मुख्य कारण:
(i) मानव लापरवाही: रसोई में ढीले कपड़े पहनना, जलती बीड़ी/सिगरेट फेंकना, इस्तरी या आतिशबाजी की असावधानी।
बिजली से सम्बन्धित दोष: शॉर्ट सर्किट, ओवरलोड, खराब वायरिंग, नकली उपकरण।
(ii) ज्वलनशील पदार्थों की लापरवाही: पेट्रोल, गैस, रसायनों का असुरक्षित भंडारण।
(iii) अन्य कारण: आतंकवादी गतिविधियाँ, झुग्गी-झोंपड़ी या बाजारों में आगजनी, वनों की दावानल (प्राकृतिक या मानवजन्य)।
बचाव के उपाय:
(i) घर, कार्यालय व फैक्ट्रियों में अग्निशमन उपकरण लगाना।
(ii) रसोई व बिजली के उपकरणों में सावधानी।
(iii) ज्वलनशील वस्तुओं का सुरक्षित भंडारण।
(iv) आतिशबाजी खुले स्थान पर करना।
(v) घर से निकलते समय बिजली-गैस बन्द करना।
आग लगने पर प्रबन्धन:
(i) सबसे पहले लोगों को सुरक्षित निकालें और 101 पर फोन करें।
(ii) छोटी आग पर अग्निशामक यंत्र, रेत या मिट्टी का प्रयोग करें, पर बिजली की आग पर पानी न डालें।
(iii) धुएँ से बचें और बिजली सप्लाई बन्द करें।
(iv) आग बुझने के बाद घायलों का इलाज कराएँ, कारण खोजें और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएँ।
3. सूखा नामक आपदा से आप क्या समझते हैं। इसके मुख्य कारणों तथा सूखा शमन की युक्तियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: सूखा एक मौसम सम्बन्धी आपदा है, जब किसी क्षेत्र में सामान्य से बहुत कम वर्षा होती है और यह स्थिति लम्बे समय तक बनी रहती है। इसका प्रभाव कृषि, पशुपालन, जल स्रोतों और मानव जीवन पर गंभीर रूप से पड़ता है।
सूखे के मुख्य कारण:
(i) जंगलों की कटाई व अत्यधिक चराई: हरियाली घटने से वर्षा कम होती है और भूजल स्तर गिरता है।
(ii) ग्लोबल वार्मिंग: जलवायु परिवर्तन से वर्षा का असमान वितरण।
(iii) भूमि का अति-उपयोग: लगातार खेती से मिट्टी की उर्वरता घटकर मरुस्थलीकरण।
(iv) वर्षा का असमान वितरण: कुछ वर्षों तक कम वर्षा होने पर सूखा गहराता है।
सूखा शमन की युक्तियाँ:
(i) हरित पट्टियाँ व वृक्षारोपण: वर्षा जल संरक्षण और भूजल स्तर बढ़ाने हेतु।
(ii) जल संचय: बाँध, तालाब व टैंक बनाकर।
(iii) प्राकृतिक तालाब व जल स्रोतों का संरक्षण।
(iv) नदियों का परस्पर जोड़ना: पानी की कमी वाले क्षेत्रों को जल उपलब्ध कराना।
(v) संतुलित भूमि उपयोग: सूखा सम्भावित क्षेत्रों में कम-से-कम 35% भूमि वृक्षारोपण हेतु सुरक्षित रखना।
4. बाढ़ से आप क्या समझते हैं? बाढ़ के मुख्य कारणों का उल्लेख कीजिए तथा बाढ़ शमन की प्रमुख युक्तियों का भी वर्णन कीजिए।
उत्तर: बाढ़ एक प्राकृतिक आपदा है, जब किसी क्षेत्र में लगातार भारी वर्षा या नदियों का जलस्तर बढ़ने से भूमि जलमग्न हो जाती है। यह मानव-जीवन, कृषि, पशुधन और सम्पत्ति को भारी क्षति पहुँचाती है।
बाढ़ के मुख्य कारण:
(i) निरन्तर भारी वर्षा: मानसूनी और चक्रवातीय वर्षा।
(ii) भूस्खलन: नदियों का मार्ग अवरुद्ध होकर जल का फैलाव।
(iii) वन-विनाश: जल रोकने वाली प्राकृतिक ढाल नष्ट होना।
(iv) दोषपूर्ण जल निकासी: शहरी क्षेत्रों में पक्की सतह और खराब निकास प्रणाली।
(v) अत्यधिक बर्फ पिघलना: नदियों में जल प्रवाह बढ़ना।
बाढ़ शमन की प्रमुख युक्तियाँ:
(i) सीधा जलमार्ग व जल मार्ग परिवर्तन: ताकि जल तेजी से बह सके।
(ii) कृत्रिम जलाशय व कच्चे तालाब: वर्षा जल को संचित कर उपयोग।
(iii) बाँध निर्माण: आबादी वाले क्षेत्रों को बचाने हेतु।
(iv) नदियों का परस्पर जोड़ना: अधिक जल को कम जल वाली नदियों की ओर मोड़ना।
(v) सुरक्षित बस्तियाँ: नदी मार्ग से दूर, ऊँचे चबूतरों पर मकान बनाना।
5. भूकम्प से आप क्या समझते हैं? भूकम्प के मुख्य कारणों का उल्लेख कीजिए। भूकम्प से होने वाली क्षति से बचाव के उपायों का भी उल्लेख कीजिए।
उत्तर: भूकम्प: एक प्राकृतिक आपदा:
भूकम्प पृथ्वी की सतह पर अचानक होने वाला कम्पन है, जो भू-पटल की आन्तरिक हलचलों के कारण होता है। इसके मूल स्थान को भूकम्प मूल तथा सतह पर प्रथम अनुभव किए जाने वाले स्थान को अभिकेन्द्र कहते हैं।
भूकम्प के मुख्य कारण:
(i) ज्वालामुखी उद्गार: लावा के दबाव से धरातल की चट्टानें हिलने पर भूकम्प।
(ii) भू-असंतुलन: भू-पटल की परतों में असामान्य परिवर्तन।
(iii) जलीय भार: बड़े बाँधों व जलाशयों के दबाव से उत्पन्न कम्पन (जैसे – कोयना भूकम्प)।
(iv) भू-पटल में सिकुड़न: भू-तापीय ऊर्जा के कम होने से।
(v) प्लेट विवर्तनिकी: प्लेटों का खिसकना या टकराना (जैसे – 2001 भुज भूकम्प)।
भूकम्प से बचाव के उपाय:
(i) भवन का नक्शा साधारण व आयताकार होना चाहिए।
(ii) नींव मजबूत व उपयुक्त गहराई तक हो।
(iii) दीवारों में दरवाजे-खिड़कियाँ सीमित हों।
(iv) भवनों में कंक्रीट के क्षैतिज बैंड (प्लिन्थ, लिंटल, रूफ) लगाए जाएँ।
(v) कोनों, दीवारों और चौखटों में वर्टिकल स्टील रीइन्फोर्समेंट किया जाए।

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