UP Board Class 12 Pedagogy Chapter 13 शिक्षा के प्रसार की समस्या

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UP Board Class 12 Pedagogy Chapter 13 शिक्षा के प्रसार की समस्या

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Also, you can read the UPMSP book online in these sections Solutions by Expert Teachers as per Uttar Pradesh Madhyamik Shiksha Parishad (UPMSP) Book guidelines. These solutions are part of UP Board All Subject Solutions. Here we have given UP Board Class 12 Pedagogy Hindi Medium Solutions, UP Board of Secondary Education Course Pedagogy Notes in Hindi for All Chapter, You can practice these here.

Chapter: 13

खण्ड ‘क’ आधुनिक शैक्षिक विचारधारा का विकास

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

1. शिक्षा के प्रसार के एक महत्त्वपूर्ण उपाय के रूप में दूरगामी शिक्षा का विस्तृत विवरण प्रस्तुत कीजिए। साथ ही दूरगामी शिक्षा-व्यवस्था के उद्देश्य व विशेषताओं का भी वर्णन कीजिए।

उत्तर: दूरगामी शिक्षा (Distance Education):

परिचय: दूरगामी शिक्षा शिक्षा के प्रसार का एक प्रभावकारी उपाय है, जिसके माध्यम से देश के किसी भी भाग में रहने वाले व्यक्ति आमने-सामने कक्षा में न जाकर भी शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं। इसमें शिक्षक का व्याख्यान दूरदर्शन, रेडियो, पत्राचार या अन्य जन-संचार माध्यमों द्वारा शिक्षार्थियों तक पहुँचाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य खुले अधिगम की सुविधाएँ उपलब्ध कराना और शिक्षा के प्रसार में सहायक होना है।

उद्देश्य:

(i) उन व्यक्तियों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना जो नियमित शिक्षा से वंचित रहे हों।

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(ii) उच्च शिक्षा प्राप्त करने की सुविधा प्रदान करना।

(iii) व्यवसाय में लगे लोगों को उनकी आवश्यकता और रुचि के अनुसार सीखने का अवसर देना।

(iv) ज्ञान और कौशल के विस्तार हेतु शिक्षार्थियों को सुविधा देना।

(v) समाज के पिछड़े वर्ग को उपयोगी और योग्य नागरिक बनने में सहायता करना।

(vi) भाषाओं और विषयों में दक्षता प्राप्त करने का अवसर प्रदान करना।

विशेषताएँ:

(i) दूरदर्शन, आकाशवाणी और अन्य जन-संचार माध्यमों का अधिकतम उपयोग।

(ii) खुले अधिगम की परिस्थितियाँ, स्वतन्त्र अध्ययन की सुविधा।

(iii) शिक्षक और शिक्षार्थी के बीच सम्प्रेषण आधारित संपर्क।

(iv) शैक्षिक नियोजन, मूल्यांकन और अधिगम प्रक्रिया व्यवस्थित।

(v) खुले विद्यालय, पत्राचार प्रणाली और खुले विश्वविद्यालय जैसी व्यवस्थाओं का उपयोग।

लघु उत्तरीय प्रश्न-

1. दूरगामी शिक्षा के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: दूरगामी शिक्षा के महत्त्व:

(i) सर्वसुलभ शिक्षा: दूरगामी शिक्षा देश के किसी भी भाग में रहने वाले व्यक्तियों को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर देती है।

(ii) समय और स्थान की स्वतंत्रता: शिक्षार्थी अपनी सुविधा अनुसार समय और स्थान पर अध्ययन कर सकते हैं।

(iii) व्यवसाय और शिक्षा का संतुलन: कामकाजी व्यक्तियों को उनकी रुचि और आवश्यकता अनुसार उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलता है।

(iv) शिक्षा का व्यापक प्रसार: ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में भी शिक्षा पहुँचाने में सहायक।

(v) खुले अधिगम की सुविधा: शिक्षार्थी स्वतंत्र रूप से अध्ययन और ज्ञानार्जन कर सकते हैं।

(vi) विशेष कौशल और दक्षता: भाषाओं, व्यवसाय या विषयों में विशेष दक्षता प्राप्त करने का अवसर।

2. शिक्षा के प्रसार के लिए राज्य द्वारा क्या-क्या प्रयास किये जा रहे हैं?

उत्तर: देश की बहुपक्षीय प्रगति के लिए शिक्षा का अधिक-से-अधिक प्रसार होना अति आवश्यक है। इस तथ्य को ध्यान में रख़ते हुए राज्य द्वारा अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। सर्वप्रथम हम कह सकते हैं। कि राज्य द्वारा शिक्षा के महत्त्व एवं आवश्यकता से सम्बन्धित व्यापक प्रचार किया जा रहा है। जन-संचार के सभी माध्यमों द्वारा साक्षरता एवं शिक्षा के महत्त्व का व्यापक प्रचार किया जा रहा है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए अलग से ‘राष्ट्रीय साक्षरता मिशन’ की स्थापना की गयी है। शिक्षा के व्यापक प्रसार के लिए भारतीय संविधान में 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए नि:शुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान किया गया।

शिक्षा के प्रसार के लिए राज्य द्वारा ग्रामीण एवं दूर-दराज के क्षेत्रों में शिक्षण-संस्थाएँ स्थापित की जा रही हैं। शिक्षा के प्रति बच्चों को आकृष्ट करने के लिए उन्हें विभिन्न प्रकार के प्रलोभन एवं सुविधाएँ भी प्रदान की जा रही हैं; जैसे कि दिन का भोजन देना, मुफ्त पुस्तकें एवं वर्दी देना तथा विभिन्न छात्रवृत्तियाँ प्रदान करना। राज्य द्वारा अनुसूचित एवं पिछ्ड़ी जातियों के बालक-बालिकाओं को शिक्षित करने के लिए अतिरिक्त प्रयास किये जा रहे हैं। तकनीकी शिक्षा के प्रसार के क्षेत्र में भी राज्य द्वारा अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। समय – समय पर राज्य सरकारों एवं केन्द्र सरकार द्वारा शिक्षा के प्रसार के लिए व्यापक अभियान चलाये जा रहे है; जैसे कि ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड तथा ‘चलो स्कूल चलें’ आदि।

3. शैक्षिक स्तर के उन्नयन व सुधार के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए? 

उत्तर: शैक्षिक स्तर के उन्नयन व सुधार के उपाय:

(i) गुणवत्तापूर्ण शिक्षण: शिक्षकों का प्रशिक्षण, समुचित पाठ्यक्रम और प्रभावी शिक्षण विधियाँ अपनाना।

(ii) आधुनिक शैक्षिक साधनों का प्रयोग: लैब, कंप्यूटर, स्मार्ट क्लास और डिजिटल सामग्री का उपयोग।

(iii) अवधि व मूल्यांकन में सुधार: परीक्षा प्रणाली को वैज्ञानिक, व्यावहारिक और रचनात्मक बनाना।

(iv) शिक्षा की पहुँच बढ़ाना: दूरगामी शिक्षा, खुले विद्यालय और शिक्षा संस्थाओं का प्रसार।

(v) शिक्षक व छात्र प्रोत्साहन: पुरस्कार, छात्रवृत्ति और शोध व नवाचार के लिए प्रोत्साहन।

(vi) सामाजिक व आर्थिक असमानता दूर करना: पिछड़े वर्ग, ग्रामीण और वंचित छात्रों को शिक्षा में समान अवसर देना।

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