UP Board Class 12 Pedagogy Chapter 24 उपलब्धि तथा उपलब्धि परीक्षण

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UP Board Class 12 Pedagogy Chapter 24 उपलब्धि तथा उपलब्धि परीक्षण

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Also, you can read the UPMSP book online in these sections Solutions by Expert Teachers as per Uttar Pradesh Madhyamik Shiksha Parishad (UPMSP) Book guidelines. These solutions are part of UP Board All Subject Solutions. Here we have given UP Board Class 12 Pedagogy Hindi Medium Solutions, UP Board of Secondary Education Course Pedagogy Notes in Hindi for All Chapter, You can practice these here.

Chapter: 24

खण्ड ‘ख’ शिक्षा मनोविज्ञान

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

1. उपलब्धि परीक्षण से आप क्या समझते हैं ? निबन्धात्मक परीक्षण के गुण-दोषों का उल्लेख कीजिए। 

या

निबन्धात्मक परीक्षण के गुण और दोषों की विवेचना कीजिए।

या

निबन्धात्मक परीक्षणों की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं? इनके गुण-दोषों पर प्रकाश डालिए।

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या

निबन्धात्मक परीक्षण के दोषों को बताइए। 

उत्तर: उपलब्धि परीक्षण का अर्थ: प्रत्येक विद्यालय में विद्यार्थी ज्ञान प्राप्त करने के लिए जाते हैं। एक निश्चित समय में विद्यार्थियों ने कितना ज्ञान अर्जित किया तथा जीवन की परिस्थितियों में उसे कहाँ तक हस्तान्तरित किया आदि की जाँच उपलब्धि परीक्षण द्वारा की जाती है। अध्यापक उपलब्धि परीक्षाओं द्वारा समय-समय पर यह जानने का प्रयास करता है कि कक्षा में प्रदान किया जाने वाला ज्ञान विद्यार्थियों ने किस सीमा तक ग्रहण कर लिया है।

निबन्धात्मक परीक्षण के गुण (Merits):

(i) व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति: छात्र अपने विचारों को स्वतंत्र रूप से प्रकट कर सकता है।

(ii) सृजनात्मकता का मूल्यांकन: इससे छात्र की कल्पनाशक्ति, तर्कशक्ति और सृजनशीलता का पता चलता है।

(iii) भाषा एवं लेखन-कौशल का परीक्षण: छात्र की भाषा-शैली, वाक्य-विन्यास और अभिव्यक्ति की क्षमता जाँची जा सकती है।

(iv) गहन ज्ञान का मूल्यांकन: इससे विषय की गहराई और समझ का आकलन संभव होता है।

निबन्धात्मक परीक्षण के दोष (Demerits):

(i) मूल्यांकन में व्यक्तिपरकता: परीक्षक के अनुसार अंक भिन्न हो सकते हैं।

(ii) कम विश्वसनीयता: अलग-अलग समय या परीक्षक पर परिणाम समान नहीं रहते।

(iii) समय की अधिकता: उत्तर लिखने और जाँचने में बहुत समय लगता है।

(iv) प्रश्नों की सीमित संख्या: कुछ ही प्रश्न पूछे जा सकते हैं, जिससे सम्पूर्ण पाठ्यक्रम का मूल्यांकन नहीं हो पाता।

2. वस्तुनिष्ठ परीक्षण से आप क्या समझते हैं? वस्तुनिष्ठ परीक्षणों के प्रकारों एवं गुण-दोषों का उल्लेख कीजिए।

या

वस्तुनिष्ठ परीक्षण से आप क्या समझते हैं ? इस परीक्षण के गुणों का उल्लेख कीजिए। 

या

वस्तुनिष्ठ परीक्षा-प्रणाली के दोषों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: वस्तुनिष्ठ परीक्षण का अर्थ (Meaning):

वस्तुनिष्ठ परीक्षण (Objective Test) वे परीक्षण हैं जिनमें प्रत्येक प्रश्न का उत्तर स्पष्ट, निश्चित और एक मात्र सही होता है। इन परीक्षणों में परीक्षक की व्यक्तिगत धारणा का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

वस्तुनिष्ठ परीक्षण के प्रकार (Types):

(i) बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Type): एक प्रश्न और उसके कई विकल्प दिए जाते हैं, जिनमें से एक सही होता है।

(ii) सही–गलत प्रश्न (True–False Type): कथन दिया जाता है, छात्र को बताना होता है कि वह सही है या गलत।

(iii) मिलान प्रकार प्रश्न (Matching Type): दो सूचियाँ दी जाती हैं, जिनके सही युग्म मिलाने होते हैं।

(iv) रिक्त स्थान भरना (Fill in the Blanks): वाक्य में छूटी हुई जगह को उपयुक्त शब्द से भरना होता है।

वस्तुनिष्ठ परीक्षण के गुण (Merits):

(i) मूल्यांकन में निष्पक्षता: अंकन में परीक्षक की व्यक्तिगत राय का प्रभाव नहीं होता।

(ii) विश्वसनीयता अधिक: एक ही उत्तर को सभी परीक्षक समान अंक देते हैं।

(iii) अल्प समय में परीक्षण: अधिक विद्यार्थियों की परीक्षा जल्दी ली जा सकती है।

(iv) पाठ्यक्रम का व्यापक मूल्यांकन: अधिक प्रश्न पूछे जा सकते हैं, जिससे सम्पूर्ण विषय का आकलन होता है।

वस्तुनिष्ठ परीक्षण के दोष (Demerits):

(i) रटने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन: छात्र केवल सही उत्तर याद करने का प्रयास करते हैं।

(ii) सृजनात्मकता का मूल्यांकन नहीं: विचार, कल्पना या अभिव्यक्ति क्षमता की जाँच नहीं हो पाती।

(iii) प्रश्न निर्माण में कठिनाई: अच्छे वस्तुनिष्ठ प्रश्न तैयार करना कठिन और समयसाध्य होता है।

(iv) अनुमान से उत्तर देना: छात्र बिना ज्ञान के भी अनुमान से सही उत्तर दे सकते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. उपलब्धि परीक्षणों के मुख्य उद्देश्यों का उल्लेख कीजिए। 

उत्तर: उपलब्धि परीक्षण के निम्नलिखित उद्देश्य हैं:

(i) यह पता लगाना कि बालकों ने अर्जित ज्ञान को किस सीमा तक आत्मसात् किया है।

(ii) बालकों को अर्जित ज्ञान को उचित ढंग से अभिव्यक्त करने के लिए प्रेरित करना।

(iii) बालकों की उपलब्धि के सामान्य स्तर का निर्धारण करना।

(iv) ज्ञानार्जन के क्षेत्र में बालकों की वास्तविक स्थिति का पता लगाना।

(v) बालकों के ज्ञान की सीमा का मापन करना।

(vi) यह ज्ञात करना कि बालक पाठ्यक्रम के लक्ष्यों या उद्देश्यों की ओर अग्रसर हो रहे हैं या नहीं।

(vii) यह पता लगाना कि अध्यापक का शिक्षण किस सीमा तक सफल रहा है।

(viii) प्रशिक्षण के परिणामों का मूल्यांकन करना।

(ix) छात्रों की क्षमताओं तथा योग्यताओं का ज्ञान कराना।

2. बुद्धि परीक्षण तथा उपलब्धि परीक्षण में अन्तर स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर: बुद्धि परीक्षण और उपलब्धि परीक्षण में अन्तर:

क्रमांकआधारबुद्धि परीक्षण (Intelligence Test)उपलब्धि परीक्षण (Achievement Test)
1. उद्देश्यव्यक्ति की मानसिक क्षमता, तर्क और सोचने-समझने की शक्ति मापता है।व्यक्ति ने किसी विषय या पाठ्यक्रम में क्या सीखा है, यह मापता है।
2. अवधिजन्मजात या विकसित क्षमता को मापता है, पूर्व अध्ययन से कम प्रभावित होता है।पूर्व अध्ययन और अधिगम (Learning) पर आधारित होता है।
3. प्रश्नों का प्रकारसामान्य तर्क, समस्या-समाधान, स्मृति आदि से संबंधित।विषय विशेष के तथ्य, सूत्र, प्रश्न और अभ्यास से संबंधित।
4. प्रयुक्तताछात्र की सीखने की क्षमता और भविष्य की शिक्षा हेतु मार्गदर्शन।छात्र की अधिगम उपलब्धि और पाठ्यक्रम सफलता का मूल्यांकन।
5. उदाहरणबिनेट-साइमन बुद्धि परीक्षण, स्टेनफोर्ड-बिनेट टेस्ट।गणित, विज्ञान, भाषा आदि में पाठ्यक्रम आधारित परीक्षा।

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