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UP Board Class 12 Pedagogy Chapter 11 पर्यावरण प्रदूषण-समस्याएँ एवं निदान
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पर्यावरण प्रदूषण-समस्याएँ एवं निदान
Chapter: 11
| खण्ड ‘क’ आधुनिक शैक्षिक विचारधारा का विकास |
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
1. पर्यावरण-प्रदूषण से क्या आशय है? पर्यावरण-प्रदूषण के मुख्य कारणों तथा नियंत्रण के उपायों का उल्लेख कीजिए।
या
पर्यावरण प्रदूषण की क्या अवधारणा है? प्रदूषण को रोकने के लिए उपचारात्मक उपायों का वर्णन कीजिए।
या
प्रदूषण रोकने के विभिन्न उपायों की विवेचना कीजिए।
उत्तर: पर्यावरण-प्रदूषण की अवधारणा:
पर्यावरण-प्रदूषण (Environmental Pollution) से आशय है ऐसे कारकों या तत्वों से प्राकृतिक वातावरण में होने वाले हानिकारक परिवर्तन जिससे मानव, पशु-पक्षी, वनस्पति और समग्र पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है। प्रदूषण वातावरण की प्राकृतिक स्थिति को बिगाड़ देता है और जीवन के लिए हानिकारक साबित होता है।
पर्यावरण-प्रदूषण के मुख्य प्रकार और कारण:
(i) वायु प्रदूषण (Air Pollution):
कारण: कारखानों और वाहनों से निकलने वाला धुआँ और गैसें, धूल, रसायनिक धुएँ।
प्रभाव: श्वसन रोग, वैश्विक तापमान वृद्धि, अम्लीय वर्षा।
(ii) जल प्रदूषण (Water Pollution):
कारण: औद्योगिक अपशिष्ट, घरेलू नालों का पानी, कृषि में रसायन और कीटनाशक।
प्रभाव: जल जीवों की मृत्यु, मानव स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव, पेयजल संकट।
(iii) मृदा प्रदूषण (Soil Pollution):
कारण: रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक, औद्योगिक कचरा, प्लास्टिक कचरा।
प्रभाव: कृषि उत्पादकता में कमी, मिट्टी की उर्वरता घटना।
(iv) ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution):
कारण: यातायात, निर्माण कार्य, औद्योगिक मशीनरी।
प्रभाव: सुनने की समस्या, मानसिक तनाव, स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव।
(v) तापीय प्रदूषण (Thermal Pollution):
कारण: औद्योगिक प्रक्रियाओं से गर्म पानी का नदियों में छोड़ा जाना।
प्रभाव: जल जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव, पारिस्थितिकी असंतुलन।
पर्यावरण-प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपाय:
(i) वायु प्रदूषण नियंत्रण:
वाहनों और उद्योगों से निकलने वाले धुएँ को फ़िल्टर करना।
सार्वजनिक परिवहन और हरित ऊर्जा का उपयोग बढ़ाना।
पेड़ लगाना और हरित क्षेत्र विकसित करना।
(ii) जल प्रदूषण नियंत्रण:
औद्योगिक और घरेलू अपशिष्ट का शोधन करना।
नदियों और तालाबों में रसायनों और प्लास्टिक का निस्तारण रोकना।
वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण को बढ़ावा देना।
(iii) मृदा प्रदूषण नियंत्रण:
रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का सीमित उपयोग।
कचरे का पुनः उपयोग और कम्पोस्टिंग करना।
प्लास्टिक उपयोग कम करना।
(iv) ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण:
वाहनों और औद्योगिक मशीनों के शोर को नियंत्रित करना।
शोर नियंत्रण वाले नियमों का पालन।
पेड़ और हरित पट्टी ध्वनि कम करने में सहायक।
(v) जन-जागरूकता और नियम:
पर्यावरण संरक्षण के लिए शिक्षा और जागरूकता बढ़ाना।
कड़े पर्यावरणीय कानून और प्रदूषण मानक लागू करना।
2. जल प्रदूषण से आप क्या समझते हैं? इसके मुख्य कारणों, हानियों तथा नियन्त्रित करने के उपायों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: जल प्रदूषण की अवधारणा:
जल प्रदूषण (Water Pollution) से आशय है जल में हानिकारक पदार्थों का मिश्रण या ऐसे तत्वों का प्रवाह जिससे जल का प्राकृतिक गुण और शुद्धता बिगड़ जाती है। यह नदियों, झीलों, तालाबों, समुद्र और भूमिगत जल स्रोतों को प्रभावित करता है और मानव, पशु-पक्षी तथा जल जीवों के लिए हानिकारक होता है।
जल प्रदूषण के मुख्य कारण:
(i) औद्योगिक अपशिष्ट: कारखानों से निकलने वाले रसायन, तेल, धातु और अन्य हानिकारक तत्व।
(ii) घरेलू अपशिष्ट: नालों, रसोई और बाथरूम का गंदा पानी।
(iii) कृषि रसायन: कीटनाशक, उर्वरक और रासायनिक पदार्थ जो खेतों से नदियों में पहुंचते हैं।
(iv) प्लास्टिक और ठोस कचरा: नदियों और तालाबों में फेंका गया कचरा।
(v) तेल और पेट्रोलियम पदार्थ: समुद्री और नदियों में तेल का रिसाव।
जल प्रदूषण के हानि:
(i) मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव, जैसे पेट और त्वचा रोग।
(ii) जल जीवों और मछलियों का जीवन संकट में पड़ना।
(iii) पेयजल संकट और कृषि में सिंचाई के लिए दूषित जल का उपयोग।
(iv) पारिस्थितिकी तंत्र में असंतुलन और जैव विविधता में कमी।
जल प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपाय:
(i) औद्योगिक और घरेलू अपशिष्ट का शोधन (treatment) करके ही जल में छोड़ा जाए।
(ii) रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक के सीमित उपयोग को बढ़ावा देना।
(iii) नदियों, झीलों और समुद्र तटों से कचरा और प्लास्टिक हटाना।
(iv) जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना।
(v) जन-जागरूकता: लोगों को जल प्रदूषण के दुष्प्रभावों और बचाव के उपायों के प्रति शिक्षित करना।
(vi) सरकार द्वारा कड़े जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण नियम लागू करना।
3. भारत में पर्यावरण-प्रदूषण का सामान्य विवरण प्रस्तुत कीजिए। पर्यावरण संरक्षण के सरकारी उपायों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: भारत में पर्यावरण-प्रदूषण:
भारत में बढ़ती आबादी, औद्योगिकीकरण और शहरीकरण के कारण पर्यावरण-प्रदूषण गंभीर समस्या बन गया है।
मुख्य प्रकार हैं:
(i) वायु प्रदूषण: वाहनों और उद्योगों से धुआँ और गैसें।
(ii) जल प्रदूषण: नदियों व झीलों में औद्योगिक और घरेलू अपशिष्ट।
(iii) मृदा प्रदूषण: रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक और प्लास्टिक।
(iv) ध्वनि प्रदूषण: यातायात और औद्योगिक शोर।
सरकारी उपाय:
(i) जल एवं वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम लागू करना।
(ii) स्वच्छ भारत अभियान और वृक्षारोपण कार्यक्रम।
(iii) औद्योगिक अपशिष्ट का शोधन अनिवार्य।
(iv) नवीकरणीय ऊर्जा और पुनर्चक्रण को बढ़ावा।
(v) जन-जागरूकता और पर्यावरण शिक्षा।

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