NCERT Class 7 Hindi Bal Mahabharat Katha Solutions

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NCERT Class 7 Hindi Bal Mahabharat Katha

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बाल महाभारत कथा

BAL MAHABHARAT KATHA

प्रश्न- भभ्यास

1. देवव्रत

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1. गंगा नदी के किनारे पर खड़ी युवती कौन थी? 

उत्तर: गंगा नदी के किनारे खड़ी युवती का नाम गंगा था।

प्रश्न 2. गंगा ने किससे, किसको आकर्षित कर लिया? 

उत्तर: गंगा ने अपने सौंदर्य और नवयौवन से राजा शांतनु को आकर्षित कर लिया।

प्रश्न 3. राजा शांतनु ने गंगा को क्या आश्वासन दिया? 

उत्तर: राजा शांतनु ने गंगा की बताई शर्तों को पूरी तरह पालन करने का आश्वासन दिया।

प्रश्न 4. गंगा ने अपने पुत्रों के साथ क्या किया?

उत्तर: गंगा ने अपने सात पुत्रों को गंगा नदी की धारा में बहाकर मृत्यु की नींद में सुला दिया। 

प्रश्न 5. राजा शांतनु गंगा द्वारा पुत्रों को नदीं में बहाते देखकर भी कुछ कर क्यों नहीं पाते थे?

उत्तर: राजा शांतनु गंगा से वचनबद्ध थे अतः कुछ नहीं कर पाते थे और मन मसोसकर रह जाते थे।

प्रश्न 6. आठवें बच्चे का क्या हुआ?

उत्तर: आठवें बच्चे को गंगा अपने साथ ले गई।

प्रश्न 7. यह आठवाँ बच्चा आगे चलकर किस नाम से प्रसिद्ध हुआ?

उत्तर: इस आठवें बच्चे का नाम तो देवव्रत था, पर आगे चलकर यह भीष्म पितामह के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

प्रश्न 8. राजा शांतनु ने किस काम में स्वयं को व्यस्त कर लिया?

उत्तर: राजा शांतनु ने भोग-विलास से मन हटाकर स्वयं को शासन के कामों में व्यस्त कर लिया। 

प्रश्न 9. एक दिन गंगा की धारा क्यों रुकी हुई थी?

उत्तर: एक सुंदर और गठीला युवक (देवव्रत) गंगा की बहती धारा पर बाण चला रहा था। उसी से गंगा की धारा रुकी हुई थी। 

प्रश्न 10. गंगा ने किसे राजा शांतनु को सौंपा? 

उत्तर: गंगा ने अपने आठवें पुत्र देवव्रत को राजा शांतनु को सौंपा।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. किसने राजा शांतनु के मन को मोह लिया? 

उत्तर: गंगा नदी ने एक सुंदर युवती का रूप धारण करके अपने सौंदर्य एवं नवयौवन से राजा शांतनु का मन मोह लिया। यह युवती गंगा थी। इसी से शांतनु ने विवाह किया।

प्रश्न 2. गंगा के किस व्यवहार से राजा शांतनु चकित होते थे?

उत्तर: गंगा अपनी संतान को जन्म देते ही उसे नदी में प्रवाहित कर देती थी। वह सात बच्चों को नदी में बहा चुकी थी। उसके इस अप्रत्याशित व्यवहार से राजा शांतनु चकित हो जाते थे। उन्हें इस पर क्षोभ भी होता था।

प्रश्न 3. राजा का ऐतराज़ सुनकर गंगा ने क्या उत्तर दिया?

उत्तर: राजा ने संतान को नदी में बहाने पर गंगा के सम्मुख अपना ऐतराज़ जताया तो वह बोली- राजन्! आप अपना वचन भूल गए। मालूम होता है कि आपको पुत्र से ही मतलब है, मुझसे नहीं। आपको मेरी परवाह नहीं है। शर्त के अनुसार मैं अब ठहर नहीं सकती। इस पुत्र को आपको पाल-पोसकर सौंप दूँगी।

प्रश्न 4. एक दिन राजा ने गंगा-तट पर क्या देखा? 

उत्तर: एक दिन राजा ने गंगा-तट पर देखा कि एक सुंदर और गठीला युवक गंगा की बहती धारा पर बाण चला रहा था। बाणों की बौछार से गंगा की प्रचंड धारा रुक गई थी। यह काम गंगा-पुत्र देवव्रत कर रहा था। इस दृश्य को देखकर वे दंग रह गए। यही युवक आगे चलकर देवव्रत के साथ भीष्म पितामह के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

प्रश्न 5. गंगा ने शांतनु को देवव्रत की किन-किन विशेषताओं से परिचित कराया?

उत्तर: गंगा ने देवव्रत की विशेषताओं से परिचत कराते हुए राजा शांतनु को बताया कि इसे महर्षि वशिष्ठ द्वारा शिक्षित किया गया है। इसके सामने शास्त्र ज्ञान में शुक्राचार्य और युद्धकला में केवल परशुराम ही इसका मुकाबला कर सकते हैं।

प्रश्न 6. गंगा के जाने के बाद शांतनु कैसा अनुभव करने लगे?

उत्तर: गंगा के जाने के बाद राजा शांतनु का मन व्याकुल

रहने लगा। उन्हें कुछ भी अच्छा नहीं लगता था। उन्होंने भोग-विलास से अपना मन हटाकर शासन के कामों में लगा दिया।

2. भीष्म प्रतिज्ञा

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. राजा किसे पाकर फूले नहीं समा पा रहे थे? 

उत्तर: राजा शांतनु देवव्रत के रूप में एक तेजस्वी और यशस्वी पुत्र पाकर फूले नहीं समा पा रहे थे।

प्रश्न 2. एक दिन शातंनु ने यमुना तट पर क्या देखा? 

उत्तर: राजा शातंनु ने यमुना तट पर एक अप्सरा के समान सुंदर कम उम्र की लड़की खड़ी देखी।

प्रश्न 3. उस लड़की का नाम क्या था? 

उत्तर: उस लड़की का नाम सत्यवती थी।

प्रश्न 4. सत्यवती को देखकर राजा शांतनु के मन में क्या इच्छा बलवती हो उठी?

उत्तर: सत्यवती को देखकर राजा शांतनु के मन में उसे अपनी पत्नी बनाने की इच्छा बलवती हो उठी।

प्रश्न 5. सत्यवती किसकी पुत्री थी? 

उत्तर: सत्यवती केवटराज की पुत्री थी।

प्रश्न 6. केवटराज ने सत्यवती के विवाह के लिए क्या शर्त लगाई?

उत्तर: केवटराज ने शर्त लगाई-शांतनु की मृत्यु के बाद सत्यवती का पुत्र ही हस्तिनापुर के राज-सिंहासन पर बैठेगा।

प्रश्न 7. राजा किसको सिंहासन पर बिठाना चाहते थे?

उत्तर: राजा देवव्रत को सिंहासन पर बिठाना चाहते थे।

प्रश्न 8. देवव्रत किस प्रकार का था?

उत्तर: देवव्रत कुशाग्र-बुद्धि का था।

प्रश्न 9. देवव्रत ने केवटराज को क्या वचन दिया? 

उत्तर: मेरे पिता के बाद केवल सत्यवती का पुत्र ही राजा   बनेगा।

प्रश्न 10. केवटराज की आशंका को दूर करने के लिए देवव्रत ने क्या प्रतिज्ञा की? 

उत्तर: भीष्म ने प्रतिज्ञा की-मैं आजीवन विवाह नहीं करूँगा और सदा ब्रह्मचारी रहूँगा।

प्रश्न 11. सत्यवती के कौन-कौन से पुत्र हुए? 

उत्तर: सत्यवती के दो पुत्र हुए-चित्रांगद और विचित्रवीर्य।

प्रश्न 12. चित्रांगद कैसे मर गए?

उत्तर: चित्रांगद की युद्ध में मृत्यु हो गई। 

प्रश्न 13. चित्रांगद के बाद कौन राजा बना?

उत्तर: चित्रांगद के बाद विचित्रवीर्य राजा बना।

प्रश्न 14. विचित्रवीर्य की रानियों के नाम बताओ।

उत्तर: अंबिका और अंबालिका। 

प्रश्न 15. अंबिका के पुत्र का नाम क्या था?

उत्तर: अंबिका के पुत्र का नाम धृतराष्ट्र था।

प्रश्न 16. अंबालिका के पुत्र का नाम क्या था?

उत्तर: अंबालिका के पुत्र का नाम पांडु था।

प्रश्न 17. धृतराष्ट्र के पुत्र क्या कहलाए? 

उत्तर: धृतराष्ट्र के पुत्र कौरव कहलाए।

प्रश्न 18. पांडु के पुत्र क्या कहलाए?

उत्तर: पांडु के पुत्र पांडव कहलाए। 

प्रश्न 19. देवव्रत का नाम भीष्म क्यों पड़ा?

उत्तर: देवव्रत द्वारा भीषण प्रतिज्ञा करने के कारण ही उनका नाम भीष्म पड़ा।

प्रश्न 20. सत्यवती से शांतनु के कितने और कौन-कौन से पुत्र हुए? 

उत्तर: सत्यवती से शांतनु के दो पुत्र हुए- चित्रांगद और विचित्रवीर्य।

प्रश्न 21. विचित्रवीर्य की रानियों और उनके पुत्रों के नाम बताओ।

उत्तर: विचित्रवीर्य की दो रानियाँ थीं-अंबिका और अंबालिका। अंबिका के पुत्र धृतराष्ट्र थे और अंबालिका के पुत्र पांडु थे।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. देवव्रत कौन था?

उत्तर: देवव्रत महाराज शांतनु का पुत्र था। उसकी माँ का नाम गंगा था। वह हस्तिनापुर का राजकुमार था। देवव्रत ही आगे चलकर भीष्म पितामह के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

प्रश्न 2. राजा शांतनु ने यमुना तट पर क्या देखा?

उत्तर: राजा शांतनु यमुना तट पर घूमने गए थे। उन्होंने वहाँ एक अप्सरा-सी सुंदर युवती को देखा। उसका नाम सत्यवती था। उस सुंदरी को देखते ही राजा शांतनु के मन में उसे अपनी पत्नी बनाने की इच्छा जाग गई। 

प्रश्न 3. सत्यवती कौन थी? उसने शांतनु की प्रेम-याचना का क्या उत्तर दिया?

उत्तर: सत्यवती मल्लाहों के सरदार दाशराज की पुत्री थी। जब राजा शांतनु ने उसके सम्मुख प्रेम-याचना की तब उसने पत्नी बनना तो स्वीकार कर लिया, पर पिता से आज्ञा लेने को कहा।

प्रश्न 4. केवटराज दाशराज ने क्या शर्त लगाई?

उत्तर: केवटराज दाशराज ने राजा शांतनु के सम्मुख यह शर्त रखी कि उनकी मृत्यु के बाद हस्तिनापुर के राज सिंहासन पर उनकी लड़की का पुत्र ही बैठेगा।

प्रश्न 5. देवव्रत ने केवटराज को क्या आश्वासन दिया?

उत्तर: देवव्रत ने केवटराज को यह आश्वासन दिया वे राज्य का लोभ न करेंगे तथा पिता की मृत्यु के उपरान्त सत्यवती का पुत्र ही हस्तिनापुर का राजा बनेगा।

प्रश्न 6. केवटराज देवव्रत के आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुए? क्यों

उत्तर: केवटराज चतुर एवं दूरदर्शी थे। वे भविष्य की संभावना को जानते थे अतः यह सुनिश्चित कर लेना चाहते थे कि देवव्रत के बाद उनकी संतान तो राजगद्दी पर अपना हक जताने नहीं लगेगी। वे इस शंका का समाधान चाहते थे।

प्रश्न 7. देवव्रत ने केवटराज को क्या बात कह कर पूर्णतः आश्वस्त कर दिया?

उत्तर: देवव्रत ने केवटराज के सम्मुख कठोर प्रतिज्ञा करते हुए कहा-मैं जीवन भर विवाह नहीं करूँगा। आजन्म ब्रह्मचारी रहूँगा। मेरे कोई संतान न होगी। अतः सिंहासन का अधिकार माँगने वाला कोई नहीं होगा। 

प्रश्न 8. पिता का दुख दूर करने के लिए देवव्रत ने क्या किया?

उत्तर: पिता का दुख करने के लिए देवव्रत ने पहले तो उनके सारथी से पूछताछ की। बात का पता चलने पर वे केवटराज के पास गए। उसकी शर्त सुनकर उसे पूरा करने का वचन दे दिया। उन्होंने राज्य का लोभ त्यागने की बात कह दी। इसके बाद भी जब केवटराज की आशंका दूर नहीं हुई, तब आजन्म ब्रह्मचारी रहने की भीषण प्रतिज्ञा कर डाली। इससे केवटराज संतुष्ट हो गया और देवव्रत के पिता शांतनु का विवाह सत्यवती के साथ हो गया। 

प्रश्न 9. भीष्म की प्रतिज्ञा से उनके चरित्र की किस विशेषता का पता चलता है?

उत्तर: भीष्म की प्रतिज्ञा से देवव्रत के चरित्र की निम्नलिखित विशेषताओं का पता चलता है-

• भीष्म पितृभक्त थे। वे पिता की खुशी के लिए कुछ भी

कर सकते थे।

• भीष्म के मन में राज्य का कोई लोभ नहीं था।

• उनमें असीम त्याग-भावना थी।

• वे अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहते थे।

3. अंबा और भीष्म

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. चित्रांगद किस स्वभाव का था?

उत्तर: यद्यपि चित्रांगद बहुत वीर था, पर वह अपनी मर्ज़ी का मालिक था।

प्रश्न 2. भीष्म को विचित्रवीर्य के लिए चिंता क्यों हुई? 

उत्तर: विचित्रवीर्य राजा बन गए थे और थोड़े दिनों बाद विवाह के योग्य हो गए थे। भीष्म को उनके विवाह की चिंता हुई। 

प्रश्न 3. भीष्म किस समाचार से प्रसन्न हुए?

उत्तर: जब भीष्म को पता चला कि काशिराज की पुत्रियों का स्वयंवर होने वाला है, तो वे प्रसन्न हुए।

प्रश्न 4. भीष्म को स्वयंवर मंडप में देखकर राजकुमारों ने क्या अनुमान लगाया? 

उत्तर: राजकुमारों ने अनुमान लगाया कि भीष्म केवल स्वयंवर देखने आए हैं।

प्रश्न 5. भीष्म को क्या बात बर्दाश्त नहीं हुई?

उत्तर: भीष्म को काशिराज की पुत्रियों द्वारा अपनी अवहेलना बर्दाश्त नहीं हुई।

प्रश्न 6. सौमदेश का राजा कौन और कैसा था?

उत्तर: सौमदेश का राजा शाल्व था और बड़ा प्रतापी था। 

प्रश्न 7. शाल्व को मन-ही-मन कौन प्रेम करती थी?

उत्तर: शाल्व को काशिराज की बड़ी कन्या अंबा मन-ही-मन प्रेम करती थी।

प्रश्न 8. भीष्म काशिराज की पुत्रियों को कहाँ ले गए? 

उत्तर: भीष्म काशिराज की पुत्रियों को हस्तिनापुर ले गए। 

प्रश्न 9. विचित्रवीर्य का विवाह किसके साथ हुआ? 

उत्तर: अंबिका और अंबालिका के साथ विचित्रवीर्य का विवाह हुआ।

प्रश्न 10. क्या शाल्व ने अंबा को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया?

उत्तर: नहीं, शाल्व ने अंबा को यह कहकर अस्वीकार कर दिया कि भीष्म द्वारा किए गए अपमान के बाद मैं तुम्हें स्वीकार नहीं कर सकता।

प्रश्न 11. अंत में अंबा किसके पास सहायता के लिए गई?

उत्तर: अंत में अंबा सहायता के लिए परशुराम के पास गई। 

प्रश्न 12. भीष्म-परशुराम युद्ध में कौन हारा?

उत्तर: इस युद्ध में परशुराम ने अपनी हार स्वीकार कर ली।

प्रश्न 13. अंबा ने तपोबल से क्या किया?

उत्तर: अंबा ने तपोबल से स्त्री रूप छोड़कर पुरुष रूप धारण कर लिया। उसने अपना नाम शिखंडी रख लिया। 

प्रश्न 14. अर्जुन ने उस शिखंडी का क्या लाभ उठाया?

उत्तर: अर्जुन ने उस शिखंडी को आगे करके भीष्म पितामह पर आक्रमण कर विजय प्राप्त की।

प्रश्न 15. अंबा का क्रोध कब शांत हुआ? 

उत्तर: जब भीष्म घायल होकर भूमि पर गिर पड़े तब जाकर अंबा का क्रोध शांत हुआ।

प्रश्न 16. चित्रांगद की मृत्यु कैसे हुई?

उत्तर: एक बार चित्रांगद का किसी गंधर्व के साथ युद्ध हुआ। उसी युद्ध में वह मारा गया।

प्रश्न 17. भीष्म को राज-काज क्यों सँभालना पड़ा?

उत्तर: जब भाई चित्रांगद की मृत्यु के उपरांत विचित्रवीर्य हस्तिनापुर की राजगद्दी पर बैठे तब उनकी आयु छोटी थी। उनके वयस्क होने तक भीष्म को ही राज-काज सँभालना पड़ा।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. राजकुमारों ने स्वयंवर मंडप में भीष्म को देखकर क्या अनुमान लगाया?

उत्तर: राजकुमारों ने अनुमान लगाया कि भीष्म स्वयंवर को देखने की मंशा से आए होंगे। वे जानते थे कि भीष्म ने विवाह न करने की प्रतिज्ञा कर रखी है और वे उसका सम्मान करना जानते थे।

प्रश्न 2. भीष्म काशिराज की कन्याओं के स्वयंवर में शामिल होने क्यों गए?

उत्तर: भीष्म काशिराज की कन्याओं के स्वयंवर में शामिल होने इसलिए गए ताकि वे विचित्रवीर्य के विवाह के लिए वधू ढूँढ सकें।

प्रश्न 3. विवाह-सभा में भीष्म पर क्या-क्या फब्तियाँ कसी गई?

उत्तर: विवाह मंडप की सभा में भीष्म पर निम्नलिखित फब्तियाँ कसी गई:

– भीष्म को स्वयंवर से क्या लेना-देना?

– उनके प्रण का क्या हुआ?

– जीवन भर ब्रह्मचारी रहने की प्रतिज्ञा क्या झूठी थी?

प्रश्न 4. काशिराज की कन्याओं की उपेक्षा से आहत होकर भीष्म ने क्या किया?

उत्तर: काशिराज की कन्याओं की उपेक्षा से आहत होकर भीष्म ने सभी राजकुमारों को हराकर तीनों राजकन्याओं को बलपूर्वक अपने रथ पर बिठा लिया और हस्तिनापुर की ओर चल दिए।

प्रश्न 5. काशिराज की बड़ी कन्या अंबा किससे प्रेम करती थी? मार्ग में क्या घटना घटी?

उत्तर: काशिराज की बड़ी कन्या अंबा सौमदेश के राजा शाल्व से प्रेम करती थी। उसे अंबा ने मन-ही-मन अपना पति मान लिया था। मार्ग में शाल्व ने भीष्म के रथ का पीछा किया। भीष्म और शाल्व के बीच युद्ध छिड़ गया। भीष्म ने शाल्व को हरा दिया। काशिराज की कन्याओं के अनुरोध पर उसे छोड़ दिया गया।

प्रश्न 6. अंबा ने एकांत में भीष्म से क्या प्रार्थना की? 

उत्तर: अंबा ने एकांत में भीष्म से यह प्रार्थना की- “गांगेय (भीष्म), मैंने अपने मन में सौमदेश के राजा शाल्व को अपना पति मान लिया था। इसी बीच आप मुझे बलपूर्वक यहाँ ले आए। आप मेरे मन की बात जानने के बाद अब मेरे बारे में जो उचित समझें, करें।”

प्रश्न 7. शाल्व ने क्या कहकर अंबा को स्वीकार करने से इंकार कर दिया?

उत्तर: शाल्व ने अंबा से यह कहा कि भीष्म ने युद्ध में मुझे पराजित किया और तुम्हें बलपूर्वक हरण करके ले गए। इतने बड़े अपमान के बाद वह उसे कैसे स्वीकार कर सकता है।

प्रश्न 8. अंबा ने भीष्म से बदला लेने की बात क्यों सोची?

उत्तर: अंबा को न तो शाल्व स्वीकार कर रहा था और न भीष्म। वह कहीं की नहीं रही। उसने अपने इस सारे दुःख का कारण भीष्म को माना। उसके मन में प्रतिहिंसा की आग जलने लगी। उसने भीष्म से बदला लेने का निश्चय किया। इसके लिए वह कई राजाओं और तपस्वियों के पास गई।

प्रश्न 9. अंबा की दुखभरी कहानी सुनकर परशुराम ने क्या प्रतिक्रिया व्यक्त की?

उत्तर: अंबा की दुखभरी कहानी सुनकर परशुराम का हृदय पसीन गया। उन्होंने रुद्र स्वर में कहा – “काशिराज-पुत्री, तुम मुझसे क्या आशा करती हो? परशुराम ने भीष्म को युद्ध के लिए ललकारा। दोनों में टक्कर भी हुई। कई दिनों तक युद्ध चलता रहा।”

4. विदुर

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. विदुर का पहला नाम क्या था? 

उत्तर: विदुर का पहला नाम धर्मदेव था।

प्रश्न 2. धर्मदेव का जन्म किसकी कोख से हुआ था? 

उत्तर: धर्मदेव का जन्म विचित्रवीर्य की रानी अंबालिका की दासी की कोख से हुआ था।

प्रश्न 3. विदुर की क्या विशेषता थी?

उत्तर: विदुर का ज्ञान धर्मशास्त्र और नीति में बहुत अधिक था।

प्रश्न 4. धृतराष्ट्र ने विदुर को क्या बनाया?

उत्तर: धृतराष्ट्र ने विदुर को अपना प्रधानमंत्री बनाया। 

प्रश्न 5. दुर्योधन को धृतराष्ट्र ने किसकी अनुमति दी? 

उत्तर: पांडवों के साथ जुआ खेलने की अनुमति दी। 

प्रश्न 6. विदुर ने किसको जुआ खेलने जाने से रोकना चाहा?

उत्तर: युधिष्ठिर को रोकना चाहा।

प्रश्न 7. युधिष्ठिर क्या तर्क देकर जुआ खेलने गए?

उत्तर: युधिष्ठिर क्षत्रिय-कुल की मर्यादा की रक्षा का तर्क देकर जुआ खेलने गए।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. विदुर का संक्षिप्त परिचय दीजिए।

उत्तर: विचित्रवीर्य की रानी अंबालिका की दासी की कोख से धर्मदेव का जन्म हुआ। यही बालक आगे चलकर विदुर के नाम से विख्यात हुआ। विदुर को धर्मशास्त्र और राजनीति का अथाह ज्ञान था। उन्हें क्रोध नहीं आता था। उनके विवेक और ज्ञान के कारण ही उन्हें धृतराष्ट्र का प्रधानमंत्री बनाया गया।

प्रश्न 2. धृतराष्ट्र का कौन-सा काम विदुर को ठीक नहीं जँचा और क्यों?

उत्तर: धृतराष्ट्र ने अपने पुत्र दुर्योधन को जुआ खेलने की अनुमति दे दी थी। उनका यही काम विदुर को ठीक नहीं जँचा। विदुर को आशंका थी कि इससे बेटों में आपसी वैर भाव बढ़ेगा।

प्रश्न 3. धृतराष्ट्र ने दुर्योधन को क्या बात समझाने का प्रयास किया?

उत्तर: धृतराष्ट्र ने दुर्योधन को यह बात समझाई कि विदुर बहुत बुद्धिमान हैं और हमेशा हमारा भला चाहते हैं। अत: उनका कहना मानकर जुआ खेलने का विचार छोड़ दो। यह जुआ खेलना राज्य के नाश का कारण बन जाएगा।

प्रश्न 4. विदुर युधिष्ठिर के पास क्यों गए? युधिष्ठिर ने उनको क्या उत्तर दिया?

उत्तर: विदुर युधिष्ठिर के पास जुआ खेलने को रोकने का प्रयत्न करने का अनुरोध लेकर गए। युधिष्ठिर ने बड़े आदरपूर्वक उत्तर दिया कि जब काका धृतराष्ट्र उन्हें बुलाएँगे तो हम इंकार नहीं कर सकेंगे।

प्रश्न 5. युधिष्ठिर जुआ खेलने क्यों गए? 

उत्तर: युधिष्ठिर क्षत्रिय कुल की मर्यादा रखने के लिए जुआ खेलने गए। उन्हें जुआ खेलने का निमंत्रण धृतराष्ट्र की ओर से मिला था। इसके लिए वे मना नहीं कर सकते थे।

प्रश्न 6. क्या आप युधिष्ठिर के तर्क से सहमत हैं? 

उत्तर: नहीं, हम युधिष्ठिर के तर्क से सहमत नहीं हैं। युधिष्ठिर को धृतराष्ट्र के गलत आमंत्रण को ठुकरा देना चाहिए थे। इससे कुल की मर्यादा नष्ट नहीं हो रही थी।

5. कुंती

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. राजा शूरसेन कौन थे?

उत्तर: राजा शूरसेन श्रीकृष्ण के पितामह थे।

प्रश्न 2. शूरसेन की पुत्री का नाम क्या था?

उत्तर: उसका नाम पृथा था।

प्रश्न 3. शूरसेन ने पृथा को किसे गोद दे दिया?

उत्तर: शूरसेन ने अपनी पृथा को कुंतिभोज को गोद दे दिया।

प्रश्न 4. कुंतिभोज के यहाँ आकर पृथा का नाम हो गया?

उत्तर: कुंती नाम हो गया।

प्रश्न 5. छुटपन में कुंती ने किस ऋषि को सेवा करके प्रसन्न कर दिया था?

उत्तर: छुटपन में कुंती ने ऋषि दुर्वासा को अपनी सेवा-सुश्रूषा से प्रसन्न कर दिया था। 

प्रश्न 6. कुंती ने विवाहपूर्व कैसे बालक को जन्म दिया?

उत्तर: कुंती ने सूर्य जैसे तेजस्वी और सुंदर बालक को जन्म दिया।

प्रश्न 7. यह बालक आगे चल कर किस नाम से प्रसिद्ध हुआ? 

उत्तर: यह बालक कर्ण के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

प्रश्न 8. कुंती ने किसके गले में वरमाला पहनाई? 

उत्तर: कुंती ने पांडु के गले में वरमाला पहनाई। 

प्रश्न 9. पांडु ने अन्य किस कन्या से विवाह कर लिया? 

उत्तर: भीष्म के सुझाव पर पांडु ने महाराज की कन्या माद्री से भी विवाह कर लिया। 

प्रश्न 10. पांडु को श्राप किसने दिया?

उत्तर: एक ऋषि ने पांडु को श्राप दिया।

प्रश्न 11. ऋषि के श्राप का क्या प्रभाव हुआ?

उत्तर: ऋषि के श्राप के प्रभाव-स्वरूप पांडु की मृत्यु हो गई।

प्रश्न 12. जब युधिष्ठिर भीष्म के पास पहुँचे तब उनकी आयु कितनी थी?

उत्तर: उस समय युधिष्ठिर की आयु लगभग सोलह साल थी। 

प्रश्न 13. सत्यवती किनको लेकर, कहाँ चली गई?

उत्तर: सत्यवती अपनी दोनों विधवा पुत्रवधुओं-अंबिका और अंबालिका को लेकर जंगल में चली गई।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. कुंती का संक्षिप्त परिचय दीजिए।

उत्तर: कुंती के बचपन का नाम पृथा था। वह यदुवंश के प्रसिद्ध राजा शूरसेन की पुत्री थी। उसे कुंतिभोज को गोद दे दिया था। वहीं उसका पालन-पोषण हुआ। बाद में उसका विवाह पांडु के साथ हुआ।

प्रश्न 2. पांडु की कितनी रानियाँ थीं? उनके नाम लिखो।

उत्तर: पांडु की दो रानियाँ थीं- कुंती और माद्री।

प्रश्न 3. पांडु से क्या गलत काम हो गया? 

उत्तर: एक बार पांडु वन में शिकार खेलने गए। वहीं जंगल में हिरण के रूप में एक ऋषि दम्पत्ति भी विहार कर रहे थे। पांडु ने अपने तीर से हिरण को मार गिराया। उनको यह पता नहीं था कि ये ऋषि-दम्पत्ति हैं। ऋषि ने मरते-मरते पांडु को श्राप दे दिया।

प्रश्न 4. महाराज पांडु की मृत्यु कैसे हुई?

उत्तर: बसंत ऋतु के आगमन के साथ समस्त वन की शोभा बढ़ गई थी। महाराज पांडु अपनी दूसरी पत्नी माद्री के साथ प्रकृति के सौंदर्य को निहार रहे थे। तभी ऋषि के श्राप का प्रभाव हो गया और उसी समय उनकी मृत्यु हो गई।

6. भीम

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. कौरव और पांडव संख्या में कितने थे?

उत्तर: कौरव सौ थे तथा पांडव पाँच थे। कौरव धृतराष्ट्र के थे और पांडव पांडु के।

प्रश्न 2. कौरव-पांडव किससे अस्त्र-विद्या सीखने लगे?

उत्तर: कौरव-पांडव कृपाचार्य से अस्त्र-विद्या सीखने लगे। 

प्रश्न 3. दुर्योधन क्या प्रयत्न करता रहता था?

उत्तर: दुर्योधन हर प्रकार से पांडवों को नीचा दिखाने का प्रयत्न करता रहता था। 

प्रश्न 4. भीम की मारने के लिए कौरवों ने क्या फैसला किया?

उत्तर: कौरवों ने भीम को गंगा में डुबो कर मारने का फैसला किया।

प्रश्न 5. दुर्योधन ने कपट से क्या काम किया?

उत्तर: दुर्योधन ने कपट से भीम के भोजन में विष मिला दिया।

प्रश्न 6. भीम पर विष का क्या असर हुआ?

उत्तर: विष के कारण भीम को बेहोशी आ गई और वह गंगा किनारे गिर पड़ा।

प्रश्न 7. पांडवों और कुंती की प्रसन्नता का कारण क्या था?

उत्तर: भीम झूमता-झामता चला आ रहा था। अतः उसे देखकर पांडवों और कुंती को प्रसन्नता हुई।

प्रश्न 8. कुंती ने अपनी चिंता किसके सामने प्रकट की?

उत्तर: कुंती ने अपनी चिंता विदुर के सामने प्रकट की। 

प्रश्न 9. विदुर ने क्या सलाह दी?

उत्तर: विदुर ने सलाह दी कि भीम वाली बात को अपने तक सीमित रखना अन्यथा वैर-भाव और बढ़ जाएगा।

प्रश्न 10. भीम के वापस आ जाने का दुर्योधन पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर: इससे दुर्योधन को बहुत आश्चर्य हुआ। उसकी ईर्ष्या भावना बढ़ गई।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. कौरवों ने आपस में सलाह करके क्या निश्चय किया?

उत्तर: कौरवों ने आपस में सलाह करके यह निश्चय किया कि भीम को गंगा में डुबो कर मार डाला जाए। उसके मरने पर युधिष्ठिर-अर्जुन आदि को कैद करके बंदी बना लिया जाए।

प्रश्न 2. एक दिन दुर्योधन ने क्या प्रबंध किया? क्यों?

उत्तर: एक दिन दुर्योधन ने धूमधाम से जलक्रीड़ा का प्रबंध किया और इसके लिए पाँचों पांडवों को न्यौता भेज दिया। दुर्योधन ने वहाँ खेलने, तैरने तथा भोजन का भी प्रबंध किया। भीम के भोजन में विष मिला दिया।

प्रश्न 3. भीम के साथ दुर्योधन ने क्या व्यवहार किया? 

उत्तर: दुर्योधन ने भीम के भोजन में विष मिला दिया। वह इसके प्रभाव के कारण बेहोश होकर गंगा किनारे की रेत पर गिर गया। दुर्योधन ने भीम के हाथ-पैर लताओं से बाँधकर उसे गंगा में बहा दिया। भीम का शरीर गंगा में बहता हुआ दूर तक निकल गया। प्रश्न 

4. कुंती की चिंता का क्या कारण था?

उत्तर: कुंती की चिंता का कारण यह था कि दुष्ट दुर्योधन भीम को मार डालना चाहता था। वह इसी चिंता का समाधान पूछने के लिए विदुर के पास गई थी।

प्रश्न 5. कौरव पांडवों से ईर्ष्या क्यों करते थे?

उत्तर: दुर्योधन और उसके भाई भीम के प्रति द्वेष-भाव रखते थे। उनके मन में पांडवों के लिए दुर्भावना का बीज पनपने लगा था। वे पांडवों को हर प्रकार से नीचा दिखाने का प्रयत्न करते रहते थे। वे राज्य पर भी एकाधिकार चाहते थे।

7. कर्ण

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. पांडवों ने किससे अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा हासिल को? 

उत्तर: पांडवों ने पहले कृपाचार्य से फिर द्रोणाचार्य से अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा हासिल की। 

प्रश्न 2. क्या देखकर दुर्योधन का मन ईर्ष्या-द्वेष से जलने लगा?

उत्तर: अर्जुन की धनुष विद्या का कमाल और चतुरता देख कर दुर्योधन का मन ईर्ष्या और द्वेष से जलने लगा। 

प्रश्न 3. रंगभूमि में अर्जुन के सामने खड़ा होने वाला तेजस्वी युवक कौन था?

उत्तर: वह युवक अधिरथ द्वारा पाला गया कुंती-पुत्र कर्ण था।

प्रश्न 4. कर्ण की चुनौती से किनमें खलबली मची तथा किसकी जान में जान आई?

उत्तर: कर्ण की चुनौती को सुनकर सभी दर्शकों में खल-बची मच गई तथा दुर्योधन की जान में जान आई। 

प्रश्न 5. कर्ण ने दुर्योधन के सामने क्या इच्छा प्रकट की?

उत्तर: कर्ण ने अर्जुन से द्वंद्व युद्ध करने और दुर्योधन से मित्रता करने की इच्छा प्रकट की।

प्रश्न 6. कर्ण को देखते ही कुंती की क्या अवस्था हुई?

उत्तर: कुंती ने कर्ण को पहचान लिया और वह शर्म से मूच्छित हो गई।

प्रश्न 7. कर्ण को लाचार देखकर दुर्योधन ने उसके लिए क्या किया?

उत्तर: दुर्योधन ने कर्ण को अंग देश का शासक बना दिया।

प्रश्न 8. वृद्ध, ब्राह्मण के वेश में कर्ण से कवच-कुंडलों की भिक्षा माँगने वाला वास्तव में कौन था?

उत्तर: वह इंद्र था। वह कर्ण की शक्ति कम करना चाहता था।

प्रश्न 9. देवराज इंद्र ने कर्ण को क्या वस्तु दी? 

उत्तर: इंद्र ने कर्ण को ‘शक्ति’ नामक शस्त्र प्रदान किया।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. समारोह का आयोजन क्यों किया गया था?

उत्तर: पांडवों ने कृपाचार्य और द्रोणाचार्य से अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा पूरी कर ली थी। उन्हें निपुणता प्राप्त हो गई थी। इस कौशल के प्रदर्शन हेतु एक भारी समारोह आयोजित किया गया। इसमें पांडवों ने अपने-अपने कौशल का प्रदर्शन किया।

प्रश्न 2. अर्जुन के सामने कौन किस रूप में आकर खड़ा हो गया?

उत्तर: जब अर्जुन अपनी धनुष-विद्या का कमाल दिखा रहा था, तभी रंगभूमि के द्वार पर एक रौबीला और तेजस्वी युवक मस्तानी चाल से चलते हुए अर्जुन के सामने आकर खड़ा हो गया। वह कर्ण था। उसने आते ही अर्जुन को ललकारा-मैं तुमसे भी बढ़िया कौशल दिखा सकता हूँ।

प्रश्न 3. कर्ण का आना किसे सूखद प्रतीत हुआ और क्यों? 

उत्तर: कर्ण का आना दुर्योधन को बड़ा सुखद प्रतीत हुआ क्योंकि कर्ण ने दुर्योधन की ईर्ष्या के पात्र अर्जुन को सीधी-सीधी चुनौती दी थी। दुर्योधन को लगा कि कर्ण उसके काम का आदमी है।

प्रश्न 4. कृपाचार्य ने कर्ण से क्या कहा?

उत्तर: कृपाचार्य ने कर्ण से अपना परिचय देने के लिए कहा। उन्होंने पूछा कि तुम कौन हो, किसके पुत्र हो, किस राजकुल को विभूषित करते हो ? उनके वालों में ही होता है। अनुसार द्वंद्व युद्ध बराबर

प्रश्न 5. कर्ण का सिर क्यों झुक गया? इसका समाधान किसने, किस प्रकार किया?

उत्तर: कर्ण का सिर इसलिए झुक गया क्योंकि वह किसी राजकुल से संबंधित न था। इसका समाधान दुर्योधन ने किया। दुर्योधन ने कर्ण को उसी वक्त अंगदेश का राजा घोषित कर दिया। अब वह पांडवों की बराबरी पर आ गया था।

प्रश्न 6. कर्ण के राज्याभिषेक के तुरंत बाद कौन आया? उसका परिचय दीजिए।

उत्तर: कर्ण के राज्याभिषेक के तुरंत बाद एक बूढ़ा व्यक्ति लाठी टेकता हुआ वहाँ आया। वह बूढ़ा सारथी अधिरथ था। उसी ने कर्ण का पालन-पोषण किया था। उसे देखते ही कर्ण धनुष नीचे रख उठ खड़ा हुआ और उसने उनके आगे आदर सहित सिर झुकाया। बूढ़े ने कर्ण को ‘बेटा’ कहकर गले लगा लिया।

प्रश्न 7. भीम ने क्या गर्वोक्ति की?

उत्तर: भीम ने गर्वोक्ति करते हुए कर्ण से कहा-सारथी के बेटे, धनुष छोड़कर हाथ में चाबुक लो, चाबुक । वही तुम्हें शोभा देगा। तुम भला कब से अर्जुन के साथ द्वंद्व युद्ध करने के योग्य हो गए?

प्रश्न 8. इंद्र ने कर्ण के साथ क्या चालाकी की? क्यों?

उत्तर: इंद्र ने बूढ़े ब्राह्मण का वेश बनाकर कर्ण से उसके जन्मजात कवच और कुंडल भिक्षा में माँग लिए। इद्र को डर था कि युद्ध में कर्ण की शक्ति से अर्जुन पर विपत्ति आ सकती है। कर्ण की ताकत कम करने की इच्छा से इंद्र ने कर्ण से कवच-कुंडल माँग लिए। कर्ण ने उनकी इच्छा पूरी कर दी।

प्रश्न 9. कर्ण ने इंद्र से क्या वरदान माँगा?

उत्तर: कर्ण ने इंद्र से शत्रुओं का संहार करने वाला शस्त्र ‘शक्ति’ माँग लिया। इसका प्रयोग जिस पर किया जाता वह अवश्य मारा जाता।

प्रश्न 10. कर्ण ने परशुराम से छल करके क्या शिक्षा प्राप्त की?

उत्तर: कर्ण ने स्वयं को ब्राह्मण बता कर परशुराम से ब्रह्मास्त्र चलाना सीख लिया। पर उसकी पोल खुल गई और परशुराम ने दी गई विद्या को भूल जाने का शाप दे दिया।

प्रश्न 11. परशुराम का कौन-सा शाप कर्ण को ले डूबा? 

उत्तर: परशुराम ने शाप दिया था कि रणक्षेत्र में कर्ण के रथ का पहिया पृथ्वी में धँस जाएगा। महाभारत के युद्ध में ऐसा ही होकर रहा। सेनापति के रूप में दो दिन तक युद्ध करने के बाद उसके रथ का पहिया धरती में धँस गया। जब वह पहिया निकालने का प्रयास कर रहा था तभी अर्जुन ने उस महारथी पर प्रहार किया।

8. द्रोणाचार्य

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. आचार्य द्रोण कौन थे?

उत्तर: आचार्य द्रोण महर्षि भरद्वाज के पुत्र थे।

प्रश्न 2. किस-किसमें गहरी दोस्ती थी? 

उत्तर: द्रुपद और द्रोण में गहरी दोस्ती थी।

प्रश्न 3. द्रोणाचार्य ने किसके साथ विवाह किया था?

उत्तर: द्रोणाचार्य ने कृपाचार्य की बहन से विवाह किया था।

प्रश्न 4. द्रोणाचार्य के पुत्र का नाम क्या था?

उत्तर: अश्वत्थामा था।

प्रश्न 5. द्रोण को धनुर्विद्या की शिक्षा किसने दी? 

उत्तर: परशुराम ने द्रोण को धनुर्विद्या की शिक्षा दी।

प्रश्न 6. द्रुपद ने द्रोण के साथ कैसा व्यवहार किया?

उत्तर: द्रुपद ने सत्ता के मद में द्रोण का अपमान कर दिया। 

प्रश्न 7. हस्तिनापुर के राजकुमारों का क्या काम द्रोण ने किया?

उत्तर: द्रोण ने उनकी कुएँ से गेंद निकाल दी तथा युधिष्ठिर की अंगूठी निकाल दी।

प्रश्न 8. द्रोणाचार्य ने गुरुदक्षिणा में राजकुमारों से क्या माँगा?

उत्तर: द्रोण ने माँगा कि वे गुरुदक्षिणा में पांचाल के राजा द्रुपद को कैदी बनाकर लाएँ।

प्रश्न 9. द्रुपद को कैद करके लाने में कौन सफल रहा?

उत्तर: अर्जुन द्रुपद को कैद करके लाने में सफल रहा। 

प्रश्न 10. द्रोण ने द्रुपद के साथ कैसा व्यवहार किया?

उत्तर: द्रोण ने द्रुपद से अपने अपमान का बदला ले लिया।

प्रश्न 11. द्रुपद के पुत्र व पुत्री के नाम क्या थे? 

उत्तर: पुत्र का नाम घृष्टद्युम्न तथा पुत्री का नाम द्रौपदी था।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. किस-किसने महर्षि भरद्वाज के आश्रम में शिक्षा प्राप्त की?

उत्तर: आचार्य द्रोण तो महर्षि भरद्वाज के पुत्र थे। उनके साथ पांचाल नरेश का पुत्र द्रुपद भी द्रोण के साथ भरद्वाज आश्रम में शिक्षा पा रहा था।

प्रश्न 2. द्रोण परशुराम के पास किस उद्देश्य से गए? 

उत्तर: द्रोण बहुत गरीब थे। वे धन प्राप्त कर स्त्री-पुत्र के साथ सुखपूर्वक रहना चाहते थे। उन्हें खबर लगी कि परशुराम अपनी सारी संपत्ति गरीब ब्राह्मणों में बाँट रहे हैं तो वे भी भागे-भागे वहाँ पहुँचे। तब तक परशुराम अपनी सारी संपत्ति बाँट चुके थे। द्रोण को देखकर वे बोले-अब तो मेरा शरीर और धनुर्विद्या शेष है। इस पर द्रोण ने धनुर्विद्या की शिक्षा माँग ली।

प्रश्न 3. द्रुपद ने राजा बनकर द्रोण के साथ कैसा व्यवहार किया?

उत्तर: द्रुपद अपने पिता की मृत्यु के बाद पांचाल की राजगद्दी पर बैठे। द्रुपद द्रोण के बचपन के साथी थे अतः द्रोण उनसे सहायता की उम्मीद लेकर उसके पास गए। द्रुपद को द्रोण का अपने पास आना तक बुरा लगा। उसने द्रोण का बहुत अपमान किया। उसने इतना तक कहा कि उसका इतना साहस कैसे हुआ कि वह उसे अपना मित्र कहे। मित्रता बराबर की हैसियत वालों में होती है। द्रोणाचार्य लज्जित और क्रोधित हुए। उन्होंने घमंडी राजा को सबक सिखाने का निश्चय किया।

प्रश्न 4. द्रोण ने वह क्या करतब कर दिखाया कि पांडव आश्चर्यचकित रह गए?

उत्तर: पांडवों की गेंद एक कुएँ में गिर गई थी। उसे निकालने के प्रयास में युधिष्ठिर की अँगूठी भी कुएं में गिर गई। पांडव इन चीजों को कुएँ से निकालने में असमर्थ रहे। तभी द्रोण ने इन दोनों चीजों को अपनी युक्ति से निकाल कर दिखा दिया। द्रोणाचार्य ने यह करतब सींकों से कर दिखाया। इस करतब को देखकर पांडव आश्चर्यचकित रह गए। उन्होंने उनका परिचय पूछा।

प्रश्न 5. भीष्म पितामह ने क्या निश्चय किया?

उत्तर: भीष्म पितामह ने द्रोण के बारे में जानकर यह निश्चय किया कि वे अपने राजकुमारों को अस्त्र शिक्षा द्रोणाचार्य के हाथों पूरी कराएँगे। उन्होंने राजकुमारों को आदेश दिया कि वे गुरु द्रोण से ही धनुर्विद्या सीखा करें।

प्रश्न 6. द्रोणाचार्य ने पांडवों से गुरुदक्षिणा में क्या माँगा? 

उत्तर: द्रोणाचार्य ने पांडवों से गुरुदक्षिणा के रूप में पांचाल राज द्रुपद को कैद कर लाने के लिए कहा। अर्जुन ने पांचाल नरेश की सेना को तहस-नहस कर दिया और राजा द्रुपद को उसके मंत्री सहित कैद कर आचार्य द्रोण के सामने ला खड़ा किया।

प्रश्न 7. द्रोणाचार्य ने द्रुपद को क्या एहसास कराया?

उत्तर: द्रोणाचार्य ने द्रुपद को यह एहसास कराया कि ऐश्वर्य के मद में आकर किसी का अपमान करना ठीक नहीं है। तुम राजा के साथ ही मित्रता करना चाहते थे। आज मेरे पास राज्य है, तुम्हारे पास कुछ नहीं। मैं तुम्हें आधा राज्य लौटाता हूँ। अब तुम बराबरी पर आ गए हो।

प्रश्न 8. द्रुपद के जीवन का क्या उद्देश्य बन गया? 

उत्तर: द्रोण से प्रतिशोध लेना द्रुपद के जीवन का उद्देश्य बन गया। इसके लिए उसने कई कठोर व्रत और तप किए। वह ऐसा पुत्र चाहता था जो द्रोण के जीवन का अंत कर सके। उसे ऐसा पुत्र धृष्टद्युम्न मिल ही गया।

9. लाख का घर

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. दुर्योधन की ईर्ष्या क्यों बढ़ती जा रही थी? 

उत्तर: भीमसेन की शारीरिक ताकत और अर्जुन की युद्धकला को देखकर दुर्योधन की ईर्ष्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी।

प्रश्न 2. दुर्योधन को कुमंत्रणा कौन-कौन दे रहे थे? 

उत्तर: मामा शकुनि तथा कर्ण दुर्योधन को कुमंत्रणा दे रहे थे।

प्रश्न 3. धृतराष्ट्र कैसे थे?

उत्तर: यद्यपि धृतराष्ट्र बुद्धिमान थे पर वे दृढ़निश्चयी नहीं थे।

प्रश्न 4. लोग चौराहों तथा सभा-समाजों में क्या कहते थे।

उत्तर: वे कहते थे कि सिंहासन पर बैठने के योग्य युधिष्टिर ही हैं।

प्रश्न 5. धृतराष्ट्र को शासन का कार्यभार क्यों सँभालना पड़ा था?

उत्तर: पांडु की अकाल मृत्यु हो जाने के कारण धृतराष्ट्र को शासन का कार्यभार सँभालना पड़ा था।

प्रश्न 6. दुर्योधन ने अपने पिता धृतराष्ट्र को क्या करने को कहा?

उत्तर: उसने पिता धृतराष्ट्र से पांडवों को किसी बहाने वारणावत भिजवाने के लिए कहा। 

प्रश्न 7. धृतराष्ट्र को पांडवों के विरुद्ध कौन मड़का रहा था?

उत्तर: शकुनि का मंत्री कर्णिक धृतराष्ट्र को पांडवों के विरुद्ध भड़का रहा था।

प्रश्न 8. पुरोचन ने क्या काम किया था?

उत्तर: पुरोचन ने सन, घी, मोम, तेल, लाख, पदार्थों से एक सुंदर भवन बनाने का काम किया था। चरबी आदि

प्रश्न 9. इस भवन की क्या विशेषता थी?

उत्तर: यह भवन शीघ्र आग पकड़ सकता था।

प्रश्न 10. किनको जलाकर मारने का षड्यंत्र रचा गया था?

उत्तर: पांडवों को जलाकर मारने का षड्यंत्र रचा गया था।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. धृतराष्ट्र की क्या स्थिति थी?

उत्तर: धृतराष्ट्र अंधे एवं बूढ़े थे। वे बुद्धिमान थे। उनका भतीजों के प्रति स्नेह तो था, पर वे पुत्र मोह में फँसे थे। उनमें दृढ़ निश्चय की कमी थी। वे अपने बेटों पर अंकुश नहीं रख पाते थे। उन्हें पता था कि दुर्योधन बुरी राह पर चल रहा है। इसके बावजूद उन्होंने उसका साथ दिया।

प्रश्न 2. उन दिनों जनता में किसकी लोकप्रियता बढ़ रही थी और लोग क्या कह रहे थे?

उत्तर: उन दिनों पांडवों की लोकप्रियता बढ़ रही थी। लोगों का कहना था कि राजगद्दी पर बैठने के योग्य तो युधिष्ठिर ही है। वे कहते थे कि पांडु की अकाल मृत्यु के समय पांडवों की आयु छोटी थी। अतः धृतराष्ट्र ने शासन सँभाला था। अब युधिष्ठिर बड़े हो गए हैं। अतः भीष्म का कर्तव्य है कि वे राज्य का भार धृतराष्ट्र से लेकर युधिष्ठिर को दिला दें। युधिष्ठिर ही प्रजा के साथ न्याय कर सकेंगे।

प्रश्न 3. दुर्योधन ने पिता धृतराष्ट्र पर किस बात के लिए दबाव डाला?

उत्तर: दुर्योधन ने अपने पिता धृतराष्ट्र पर इस बात के लिए दबाव डाला कि वे पांडवों को किसी-न-किसी बहाने वारणावत के मेले में भिजवा दें। दुर्योधन ने इस काम में कर्णिक नामक ब्राह्मण का भी सहारा लिया।

प्रश्न 4. पांडव क्यों वारणावत जाने को तैयार हो गए? 

उत्तर: दुर्योधन के पृष्ठ पोषक वारणावत की सुंदरता और खूबियों के बारे में पांडवों को ललचाने में जुट गए। उन्होंने यह भी कहा कि वारणावत में एक भारी मेला होने वाला है। इसकी शोभा देखते ही बनेगी। इन सब बातों को सुनकर पांडव वारणावत जाने की उत्सुक हो गए।

प्रश्न 5. दुर्योधन ने पुरोचन के साथ गुप्त बैठक करके क्या योजना बनाई?

उत्तर: दुर्योधन ने पुरोचन के साथ गुप्त बैठक करके यह योजना बनाई कि पांडवों के वारणावत पहुँचने से पहले ही वहाँ एक ज्वलनशील पदार्थों को मिट्टी में मिलाकर एक महल तैयार किया जाए। उसमें पांडव ठहरें और एक रात उसमें आग लगा दी जाए ताकि पांडव जलकर भस्म हो जाएँ। इससे कौरवों पर कोई दोष भी नहीं लगेगा।

प्रश्न 6. महल किन-किन चीज़ों से तैयार किया गया?

उत्तर: वारणावत में महल निम्नलिखित चीजों से तैयार किया गया: सन, घी, मोम, तेल, लाख, चरबी आदि। ये सभी चीजें ज्वलनशील थीं। ये शीघ्र आग पकड़ने वाली थीं।

10. पांडवों की रक्षा

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. पुरोचन पांडवों को कहाँ ले गया?

उत्तर: पुरोचन पांडवों को लाख से बने भवन ले गया। 

प्रश्न 2. विदुर के द्वारा भेजे गए आदमी ने भवन के अंदर क्या चीज बना दी? 

उत्तर: उस व्यक्ति ने भवन के अंदर एक सुरंग बना दी जिससे पांडव बाहर निकल सकें।

प्रश्न 3. माता कुंती ने किसका आयोजन किया? 

उत्तर: माता कुंती ने रात्रि को एक बड़े भोज का आयोजन किया।

प्रश्न 4. रात्रि को भवन आग किसने लगाई? 

उत्तर: रात्रि को भवन में आग भीमसेन ने लगाई। 

प्रश्न 5. हस्तिनापुर में आग लगने की सूचना किसने पहुँचाई? 

उत्तर: हस्तिनापुर में आग लगने की सूचना वारणावत के लोगों ने पहुँचाई।

प्रश्न 6. किसने पांडवों की मृत्यु पर शोक मनाया?

उत्तर: धृतराष्ट्र और उसके बेटों ने पांडवों की मृत्यु पर शोक मनाया।

प्रश्न 7. पांडव कहाँ रहकर कैसे गुजर करने लगे? 

उत्तर: पांडव माता कुंती के साथ एकचक्रा नगरी में भिक्षा माँगकर गुजर करने लगे।

प्रश्न 8. ब्राह्मण परिवार क्यों दुखी था?

उत्तर: बकासुर राक्षस के पास भोजन लेकर जाने की बारी ब्राह्मण परिवार की आ गई थी।

प्रश्न 9. बकासुर का भोजन लेकर कौन गया?

उत्तर: भीमसेन बकासुर का भोजन लेकर गया।

प्रश्न 10. राक्षस बकासुर क्रोध में क्यों आ गया?

उत्तर: राक्षस बकासुर भीमसेन के दुस्साहस को देखकर क्रोधित हो गया।

प्रश्न 11. अंत में क्या हुआ?

उत्तर: अंत में बकासुर मारा गया। भीम उसकी लाश को घसीटकर नगर के फाटक तक ले गया।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. वारणावत पहुँचकर पांडव कहाँ रहने लगे?

उत्तर: वारणावत पहुँचकर पांडव पहले तो दूसरे घरों में रहे, पर लाख का भवन तैयार हो जाने पर पुरोचन उनको उसमें लिवा लाया। वे वहीं रहने लगे।

प्रश्न 2. विदुर ने किसको, क्या काम करने के लिए भेजा?

उत्तर: विदुर ने हस्तिनापुर एक सुरंग बनाने वाला कारीगर वारणावत भेजा ताकि लाख के भवन के नीचे गुप्त रूप से एक सुरंग तैयार की जा सके। उसने कुछ ही दिनों में सुरंग तैयार कर दी।

प्रश्न 3. युधिष्ठिर ने माता कुंती को क्या सलाह दी?

उत्तर: युधिष्ठिर ने माता कुंती को एक रात बड़े भोज के आयोजन की सलाह दी। नगर के सभी लोगों को भोजन कराया गया। उसमें बड़ी धूमधाम रही।

प्रश्न 4. युधिष्ठिर ने पुरोचन की योजना को किस प्रकार असफल कर दिया?

उत्तर: उत्सव मनाकर सब लोग खा-पीकर सो गए। पुरोचन भी सो गया। पांडवों ने सुरंग के रास्ते बच निकलने की योजना बनाई। भीम ने स्वयं लाख के महल में जगह-जगह आग लगा दी। पुरोचन का स्थान भी जलकर नष्ट हो गया और पुरोचन भी जलकर मर गया। पांडव सुरक्षित बच निकले। पुरोचन उस महल को जलाता, इससे पहले पांडवों ने ही आग लगाकर पुरोचन की योजना को असफल कर दिया।

प्रश्न 5. लाख के महल से बच निकलकर पांडव कहाँ जा पहुँचे?

उत्तर: लाख के महल से सुरंग के रास्ते बच निकलकर पांडव जंगल की ओर निकल गए। वहाँ एक नाव पर बैठकर एकचक्रा नगरी जा पहुँचे। वहाँ वे भीख माँग कर अपना गुजारा करने लगे।

प्रश्न 6. ब्राह्मण परिवार के दुःख का क्या कारण था?

उत्तर: एकचक्रा नगरी के समीप की गुफा में बकासुर नामक राक्षस रहता था। वह लोगों पर अत्याचार करता था। एक समझौते के अनुसार नगर के लोग बारी-बारी से उसके लिए भोजन सामग्री लेकर एक आदमी भिजवाते थे। आज उस ब्राह्मण परिवार की बारी थी, अतः वे दुःखी थे।

प्रश्न 7. बकासुर का वध किसने किया?

उत्तर: बकासुर नामक राक्षस का वध भीमसेन ने किया। उसने बकासुर की पीठ पर घुटने मारकर उसकी रीढ़ को तोड़ डाला। उसके प्राण पखेरू उड़ गए। भीम उसकी लाश को नगर के फाटक तक घसीट लाया।

11. द्रौपदी स्वयंवर

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. पांडव एकचक्रा नगरी में किस रूप में जीवन व्यतीत कर रहे थे?

उत्तर: पांडव एकचक्रा नगरी में ब्राह्मणों के रूप में जीवन व्यतीत कर रहे थे।

प्रश्न 2. किसके स्वयंवर की तैयारियाँ होने लगीं ?

उत्तर: पांचाल नरेश की पुत्री द्रौपदी के स्वयंवर की तैयारियाँ होने लगीं।

प्रश्न 3. स्वयंवर मंडप में क्या रखा हुआ था? 

उत्तर: स्वयंवर मंडप में एक वृहदाकार धनुष रखा हुआ था।

प्रश्न 4. बहुत ऊँचाई पर क्या टँगी थी? 

उत्तर: बहुत ऊँचाई पर एक सोने की मछली टँगी थी।

प्रश्न 5. स्वयंवर में पांडवों के अलावा कौन-कौन शामिल हुए? 

उत्तर: स्वयंवर में पांडवों के अलावा धृतराष्ट्र के सौ पुत्र, अंग- नरेश कर्ण, श्रीकृष्ण, शिशुपाल और जरासंध आदि शामिल हुए।

प्रश्न 6. राजकुमार धृष्टद्युम्न किस प्रकार आए?

उत्तर: राजकुमार धृष्टद्युम्न घोड़े पर सवार होकर आए। 

प्रश्न 7. द्रौपदी किस प्रकार स्वयंवर मंडप में आई?

उत्तर: द्रौपदी हाथी पर सवार होकर आई। उसके हाथों में फूलों का हार था।

प्रश्न 8. कर्ण के साथ क्या घटना घट गई?

उत्तर: कर्ण ने जैसे ही धनुष की डोरी चढ़ानी शुरू की, धनुष का डंडा उसके हाथ से छूटकर उसके मुँह पर जा लगा। 

प्रश्न 9. धनुष पर डोरी चढ़ाने और निशाने पर बाण मारने में कौन सफल रहा?

उत्तर: धनुष पर डोरी चढ़ाने और फिर निशाने पर बाण मारने में अर्जुन सफल रहा।

प्रश्न 10. जब भीम और अर्जुन द्रौपदी को साथ लेकर सभा से जाने लगे तो उनके पीछे कौन हो लिया? 

उत्तर: तब उनके पीछे बिना किसी को बताए धृष्टद्युम्न हो लिया।

प्रश्न 11. अग्नि शिखा की भाँति तेजस्वी देवी कौन थी?

उत्तर: वह कुंती देवी थी।

प्रश्न 12. अब दुपद की क्या चिंता जाती रही?

उत्तर: अब राजा द्रुपद की द्रोणाचार्य से शुत्रता की चिंता जाती रही।

प्रश्न 13. द्रौपदी कौन थी?

उत्तर: द्रौपदी पांचाल नरेश द्रुपद की पुत्री और धृष्टद्युम्न की बहन थी। 

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. द्रौपदी के स्वयंवर की क्या शर्त थी?

उत्तर: द्रौपदी के स्वयंवर की यह शर्त थी:

जो राजकुमार उस भारी धनुष के मध्य में तीर चलाकर ऊपर टँगे निशाने को गिरा देगा, उसी को द्रौपदी वरमाला पहनाएगी। 

प्रश्न 2. अर्जुन ने स्वयंवर में क्या करिश्मा कर दिखाया? 

उत्तर: अर्जुन ने धनुष पर तीर चढ़ाया और एक के बाद एक कर पाँच बाण उस घूमते हुए चक्र में मारे और हज़ारों लोगों के देखते-देखते निशान टूटकर नीचे गिर पड़ा। सभा में कोलाहल मच गया। बाजे बज उठे। अर्जुन का यह काम एक करिश्मा ही था।

प्रश्न 3. भीम अपने भाइयों के साथ घर क्यों नहीं गया? 

उत्तर: भीम अर्जुन के साथ सभा मंडप में ही ठहरा रहा। उसे भय था कि निराश राजकुमार कहीं अर्जुन को कुछ कर न बैठें। उसका अनुमान ठीक ही निकला। वहाँ उपस्थित राजकुमारों में हलचल मच गई थी। ऐसा प्रतीत होता कि भारी विप्लव मच जाएगा।

प्रश्न 4. धृष्टद्युम्न ने पिताजी को क्या सूचना दी?

उत्तर: धृष्टद्युम्न ने पिताजी को यह सूचना दी कि स्वयंवर में विजेता रहे लोग पांडव ही हैं। जिस कुटिया में ये लोग ठहरे हैं वहाँ एक तेजस्विनी देवी बैठी थी।

प्रश्न 5. पांडवों का परिचय जानकर द्रुपद की क्या दशा हुई?

उत्तर: पांडवों का सही परिचय जानकर राजा द्रुपद फूले न समाए। उनकी इच्छा पूरी हो गई। उनका द्रोण से भय भी जाता रहा क्योंकि महाबली अर्जुन उसकी बेटी के पति हो गए थे। उसे द्रोण की शत्रुता का भय जाता रहा।

12. इंद्रप्रस्थ

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. द्रौपदी स्वयंवर की बात सुनकर विदुर पर क्या प्रभाव हुआ?

उत्तर: विदुर की खुशी का ठिकाना न रहा। 

प्रश्न 2. दुर्योधन को क्या डर सताने लगा?

उत्तर: दुर्योधन को लगा कि पांडव अब पहले से भी अधिक शक्तिशाली हो गए हैं। अतः खतरनाक हो गए हैं।

प्रश्न 3. क्या राजा द्रुपद धन का लालची था?

उत्तर: नहीं, राजा द्रुपद धन के लालच में पड़ने वाला नहीं था। 

प्रश्न 4. कर्ण ने दुर्योधन को क्या सुझाव दिया?

उत्तर: पांडवों की शक्ति बढ़ने से पहले ही उन पर आक्रमण कर दिया जाए।

प्रश्न 5. भीष्म ने क्या सुझाव दिया?

उत्तर: भीष्म ने सुझाव दिया कि पांडवों के साथ संधि करके आधा राज्य प्रदान करना ठीक रहेगा।

प्रश्न 6. द्रोणाचार्य ने गुस्से से कर्ण के बारे में क्या कहा?

उत्तर: यह दुष्ट कर्ण राजा को गलत रास्ता बता रहा है।

प्रश्न 7. विदुर को पांचाल देश क्यों भेजा गया?

उत्तर: पांडवों को द्रौपदी और कुंती के साथ आदर सहित हस्तिनापुर लिवा लाने के लिए विदुर को भेजा गया। 

प्रश्न 8. हस्तिनापुर में कैसी तैयारियाँ होने लगीं?

उत्तर: हस्तिनापुर में पांडवों के स्वागत की तैयारियाँ बहुत धूमधाम से होने लगीं।

प्रश्न 9. धृतराष्ट्र ने युधिष्ठिर से अपने पुत्रों के बारे में क्या कहा?

उत्तर: उसने कहा-युधिष्ठिर, मेरे बेटे बड़े दुरात्मा हैं।

प्रश्न 10. पांडवों ने अपनी नई राजधानी कहाँ बनाई?

उत्तर: पांडवों ने खांडवप्रस्थ के भग्नावशेषों पर अपनी नई राजधानी इंद्रप्रस्थ बनाई।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. विदुर ने धृतराष्ट्र को क्या शुभ समाचार सुनाया?

उत्तर: विदुर ने धृतराष्ट्र को यह शुभ समाचार सुनाया कि पांडव अभी जीवित हैं। अर्जुन ने स्वयंवर में राजा द्रुपद की पुत्री को प्राप्त किया है। पाँचों भाइयों ने विधिपूर्वक द्रौपदी के साथ व्याह कर लिया है।

प्रश्न 2. विदुर का समाचार सुनकर धृतराष्ट्र ने क्या प्रतिक्रिया प्रकट की?

उत्तर: विदुर के मुँह से शुभ समाचार सुनकर धृतराष्ट्र ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा-“विदुर! तुम्हारी बातों से मुझे असीम आनंद हो रहा है। राजा द्रुपद की बेटी हमारी बहू बन गई है, यह बड़ा ही अच्छा हुआ।”

प्रश्न 3. दुर्योधन के मन में ईर्ष्या की आग क्यों प्रबल हो उठी?

उत्तर: दुर्योधन को लगा कि पांडव पांचालराज की कन्या से ब्याह करके और भी अधिक शक्तिशाली बन गए हैं। अतः उसके मन में पांडवों के प्रति ईर्ष्या की आग प्रबल हो उठी।

प्रश्न 4. कर्ण ने दुर्योधन को क्या उपाय सुझाया?

उत्तर: कर्ण ने दुर्योधन को यह उपाय सुझाया कि पांडवों की ताकत बढ़ने से पहले ही उन पर हमला कर दिया जाए। 

प्रश्न 5. भीष्म ने क्या परामर्श दिया?

उत्तर: भीष्म ने धृतराष्ट्र को परामर्श दिया कि पांडवों के साथ संधि करके उन्हें आधा राज्य दे देना ही उचित है। 

प्रश्न 6. विदुर ने क्या राय प्रकट की?

उत्तर: विदुर ने कहा कि हमारे कुल के नायक भीष्म तथा आचार्य द्रोण ने जो बताया है, वही श्रेयस्कर है। कर्ण की सलाह किसी काम की नहीं है।

प्रश्न 7. अंत में धृतराष्ट्र ने क्या निश्चय किया?

उत्तर: अंत में धृतराष्ट्र ने यह निश्चय किया कि पांडु पुत्रों को आधा राज्य देकर संधि कर ली जाए और पांडवों को द्रौपदी तथा कुंती सहित आदर सहित लिवाने विदुर पांचाल चले जाएँ।

प्रश्न 8. जब विदुर ने पांचाल पहुँचकर धृतराष्ट्र की ओर से यह अनुरोध किया कि पांडवों को द्रौपदी सहित हस्तिनापुर जाने की अनुमति दी जाए, तब किस-किसके मन में क्या शंका हुई?

उत्तर: विदुर का अनुरोध सुनकर राजा द्रुपद के मन में शंका हुई। उनको धृतराष्ट्र पर विश्वास न हुआ। माता कुंती के मन में भी शंका हुई कि कहीं उसके पुत्रों पर कोई आफत न आ जाए। 

प्रश्न 9. विदुर ने माता कुंती को क्या समझाया?

उत्तर: विदुर ने माता कुंती को यह समझाया कि आप निश्चिंत रहें। आपके बेटों का कोई कुछ न बिगाड़ सकेगा। वे संसार में खूब यश कमाएँगे और विशाल राज्य के स्वामी बनेंगे।

प्रश्न 10. धृतराष्ट्र ने युधिष्ठिर को आशीर्वाद देते हुए क्या कहा?

उत्तर: धृतराष्ट्र ने राज्याभिषेक के अवसर पर युधिष्ठिर को आशीर्वाद देते हुए कहा-“मेरे बेटे बड़े दुरात्मा हैं। एक साथ रहने से संभव है तुम दोनों के बीच वैर बढ़े। मेरी सलाह है कि तुम खांडवप्रस्थ को अपनी राजधानी बना लेना और वहीं से राज करना।” युधिष्ठिर ने उनकी सलाह स्वीकार कर ली।

प्रश्न 11. इंद्रप्रस्थ कैसा नगर बन गया था?

उत्तर: इंद्रप्रस्थ एक शानदार एवं भव्य नगर बन गया था। इसमें सुंदर भवन, अभेद्य दुर्ग बनाए गए थे। इसी नगर को राजधानी बनाया गया। यहाँ पांडवों ने 23 साल तक न्यायपूर्वक राज्य किया।

13. जरासंध

प्रश्न -अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. श्रीकृष्ण कहाँ से चलकर कहाँ जा पहुँचे?

उत्तर: श्रीकृष्ण द्वारका से चलकर इंद्रप्रस्थ जा पहुँचे। 

प्रश्न 2. नियम के अनुसार राजसूय यज्ञ कौन कर सकता था?

उत्तर: जो समस्त संसार के राजाओं में पूज्य हो तथा उनके द्वारा सम्मानित हो।

प्रश्न 3. जरासंध कौन था?

उत्तर: जरासंध मगध देश का राजा था। अन्य राजा उसकी ताकत स्वीकारते थे।

प्रश्न 4. महाराज उग्रसेन का बेटा कौन था और क्या किया था?

उत्तर: महाराज उग्रसेन का नासमझ बेटा कंस था। उसने जरासंघ की बेटी से ब्याह कर लिया था। 

प्रश्न 5. जरासंध के साथ कौन तीन साल तक लड़ता रहा? इसका क्या परिणाम निकला?

उत्तर: जरासंध के साथ श्रीकृष्ण तीन साल तक लड़ते रहे और अंत में हार स्वीकार कर द्वारका चले गए।

प्रश्न 6. जरासंध ने क्या कर रखा था?

उत्तर: जरासंध ने अनेक राजा-महाराजाओं को अपने बंदीगृह में डाल रखा था।

प्रश्न 7. श्रीकृष्ण की बातें सुनकर युधिष्ठिर ने क्या मंतव्य प्रकट किया?

उत्तर: उसने मंतव्य प्रकट किया कि साम्राज्याधीश बनने का विचार छोड़ दिया जाए।

प्रश्न 8. वीर अर्जुन ने क्या कहा?

उत्तर: यदि हम यशस्वी भारतवंश की संतान होकर भी कोई हिम्मतभरा काम न करें, तो हमें धिक्कार है।

प्रश्न 9. श्रीकृष्ण, अर्जुन और भीम किस रूप में जरासंध के पास पहुँचे?

उत्तर: वे व्रती लोगों का-सा वेश बनाकर जरासंघ के पास पहुँचे।

प्रश्न 10. श्रीकृष्ण की अग्र पूजा का विरोध किसने किया?

उत्तर: श्रीकृष्ण की अग्र पूजा का विरोध शिशुपाल ने किया।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. युधिष्ठिर के भाइयों तथा साथियों की क्या इच्छा हुई?

उत्तर: युधिष्ठिर के भाइयों तथा साथियों के मन में यह इच्छा हुई कि अब राजसूय यज्ञ करके सम्राट-पद प्राप्त किया जाए।

प्रश्न 2. युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से क्या कहा?

उत्तर: युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से कहा कि मित्रों का कहना है कि मैं राजसूय यज्ञ करके सम्राट पद प्राप्त करूँ। पर राजसूय यज्ञ वही कर सकता है जो सारे संसार के नरेशों का पूज्य हो और उनके द्वारा सम्मानित हो। आप ही इस विषय में मुझे सही सलाह दे सकते हैं।

प्रश्न 3. श्रीकृष्ण ने राजसूय यज्ञ में क्या बाधा बताई? 

उत्तर: श्रीकृष्ण ने राजसूय यज्ञ में जरासंध की बाधा बताई। उसके जीवित रहते इस प्रकार का यज्ञ करना संभव नहीं था। सभी राजा उसका लोहा मानते थे। उसके नाम से सभी डरते थे। श्रीकृष्ण भी उससे तीन वर्ष तक लड़ते रहे, पर उसे जीत नहीं पाए। उसने अनेक राजाओं को बंदीगृह में डाल रखा है। उनको छुड़ाना होगा। जरासंध के वध के बाद ही राजसूय यज्ञ हो पाएगा।

प्रश्न 4. भीम और अर्जुन को क्या बात पसंद नहीं आई?

उत्तर: भीम और अर्जुन को युधिष्ठिर की अत्यधिक विनयशीलता पसंद नहीं आई। वे जरासंध की शक्ति को चूर-चूर कर देना चाहते थे। अर्जुन का विचार था-यदि हम यशस्वी भारतवंश की संतान होकर भी कोई साहस का काम न करें तो धिक्कार है हमें और हमारे जीवन को जिस काम को करने की हममें सामर्थ्य है, भाई युधिष्ठिर क्यों समझते हैं कि उसे हम न कर सकेंगे।

प्रश्न 5. अंत में क्या निश्चय हुआ?

उत्तर: अंत में यह निश्चय हुआ कि जरासंध के साथ युद्ध किया जाए। इसके लिए एक योजना बनाई गई। श्रीकृष्ण, भीमसेन और अर्जुन वल्कल वस्त्र पहनकर जरासंध की राजधानी पहुँच गए। वे जरासंध की यज्ञशाला में ही ठहर जाने में सफल रहे।

प्रश्न 6. जरासंध किस प्रकार मारा गया?

उत्तर: जरासंध अतिथियों का परिचय जानकर उनसे द्वंद्व युद्ध करने लगा। वे तेरह दिन तक लड़ते रहे। चौदहवें दिन जरासंध थका और थोड़ी देर के लिए रुका। श्रीकृष्ण ने भीम को इशारे से कुछ समझाया। भीम ने जरासंध को उठाकर ज़ोर से चारों ओर घुमाया और उसे ज़मीन पर ज़ोर से पटक दिया। इस प्रकार जरासंध का अंत हो गया।

प्रश्न 7. जरासंध के वध के बाद पांडवों ने क्या किया?

उत्तर: जरासंध के वध के बाद पांडवों ने अपना राजसूय यज्ञ पूरा किया।

प्रश्न 8. शिशुपाल का वध किसने, क्यों किया? 

उत्तर: शिशुपाल का वध श्रीकृष्ण ने किया। शिशुपाल राजसूय यज्ञ में श्रीकृष्ण की अग्र-पूजा का विरोध कर रहा था। उसके हठ और घमंड को तोड़ने के लिए श्रीकृष्ण ने उसके साथ युद्ध किया। इसमें शिशुपाल मारा गया।

14. शकुनि का प्रवेश

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. एक दिन युधिष्ठिर ने क्या कसम खाई? 

उत्तर: एक दिन युधिष्ठिर ने तेरह साल तक भाइयों से युद्ध न करने की कसम खाई।

प्रश्न 2. युधिष्ठिर की बात भाइयों को कैसी लगी? 

उत्तर: युधिष्ठिर की बात उसके भाइयों को औचित्यपूर्ण लगी।

प्रश्न 3. दुर्योधन के मन को क्या बात खाए जा रही थी?

उत्तर: दुर्योधन के मन को राजसूय यज्ञ का ठाठ-बाट और पांडवों की यश-समृद्धि की बात खाए जा रही थी।

प्रश्न 4. पांडवों के यश को याद करके दुर्योधन को क्या होता था?

उत्तर: पांडवों के यश को याद करके युधिष्ठिर के मन में जलन बढ़ती जाती थी।

प्रश्न 5. दुर्योधन को अपना जीना कैसा लग रहा था? 

उत्तर: दुर्योधन को अपना जीना व्यर्थ मालूम होता था।

प्रश्न 6. मामा शकुनि ने पहले पांडवों के बारे में दुर्योधन को क्या कहा?

उत्तर: पांडव तुम्हारे भाई हैं। उनके सौभाग्य पर तुम्हें ईर्ष्या नहीं होनी चाहिए।

प्रश्न 7. दुर्योधन ने मामा शकुनि को कहाँ पर आक्रमण की बात कही?

उत्तर: दुर्योधन ने मामा शकुनि को इंद्रप्रस्थ पर आक्रमण की बात कही।

प्रश्न 8. शकुनि ने धृतराष्ट्र को क्या सलाह दी?

उत्तर: शकुनि ने धृतराष्ट्र को सलाह दी कि चौसर खेल के लिए पांडवों को बुलाया जाए।

प्रश्न 9. शकुनि ने युधिष्ठिर और स्वयं को चौसर का कैसा खिलाड़ी बताया? 

उत्तर: शकुनि ने युधिष्ठिर को चौसर का अनाड़ी खिलाड़ी और स्वयं को मँजा हुआ खिलाड़ी बताया।

प्रश्न 10. धृतराष्ट्र ने विदुर से सलाह की बात क्यों कही?

उत्तर: धृतराष्ट्र विदुर को अत्यधिक समझदार मानते थे।

प्रश्न 11. धृतराष्ट्र ने जुए के खेल को कैसा बताया?

उत्तर: धृतराष्ट्र ने जुए के खेल को वैर-भाव की जड़ बताया।

प्रश्न 12. धृतराष्ट्र ने विदुर को क्या आज्ञा वी? 

उत्तर: धृतराष्ट्र ने विदुर को युधिष्ठिर को न्यौता देकर बुला लाने का आदेश दिया।

प्रश्न 13. दुर्योधन क्या चाहता था?

उत्तर: दुर्योधन इंद्रप्रस्थ पर चढ़ाई कर देना चाहता था।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. एक दिन युधिष्ठिर ने क्या निश्चय किया? 

उत्तर: एक दिन युधिष्ठिर ने निश्चय किया वे अपने भाई-बंधुओं के मध्य युद्ध की संभावना मिटा देने के उद्देश्य से तेरह वर्ष तक किसी को बुरा-भला नहीं कहेंगे और अपने मन में क्रोध को निकाल देंगे। वे दुर्योधन और अन्य कौरवों की बात को कभी न टालेंगे। उनकी इच्छानुसार कार्य करेंगे।

प्रश्न 2. दुर्योधन के मन को क्या बात खाए जा रही थी? 

उत्तर: पांडवों के राजसूय यज्ञ की ठाठ-बाट तथा पांडवों की यश-समृद्धि का स्मरण दुर्योधन के मन को खाए जा रहा था। वह ईर्ष्या और जलन से बेचैन हो रहा था। अनेक देश पांडवों के मित्र बन गए थे, यह भी दुर्योधन की चिंता का कारण था।

प्रश्न 3. मामा शकुनि ने दुर्योधन को सांत्वना देते हुए क्या कहा?

उत्तर: दुर्योधन को सांत्वना देते हुए मामा शकुनि ने कहा- तुम इस तरह मन छोटा क्यों करते हो? तुम्हें पांडवों के भाग्य पर जलन नहीं होनी चाहिए। उन्हें न्यायपूर्वक जो राज्य मिला है, वे उसी का उपभोग कर रहे हैं। उन्होंने किसी का कुछ बिगाड़ा नहीं है। फिर उनकी शक्ति और सौभाग्य से तुम्हारा कुछ बिगड़ता भी नहीं है। तुम्हारे साथ हम सभी हैं। फिर चिंता की क्या बात है?

प्रश्न 4. शकुनि ने किस प्रकार की चतुराई बरतने का उपाय दुर्योधन को बताया?

उत्तर: शकुनि ने युधिष्ठिर को चौसर खेलने के लिए आमंत्रित करने का उपाय बताया। युधिष्ठिर को चौसर खलने का शौक था, पर वह इस खेल में कुशल न था । शकुनि ने दुर्योधन को कहा कि वह इस खेल में उसकी ओर से खेलेगा और युधिष्ठिर को हराकर उसका राज्य छीनकर उसके (दुर्योधन के) हवाले कर देगा।

प्रश्न 5. धृतराष्ट्र ने शकुनि के प्रस्ताव पर क्या प्रतिक्रिया प्रकट की? 

उत्तर: धृतराष्ट्र ने शकुनि के प्रस्ताव पर तुरंत हाँ नहीं भरी । उसने विदुर से सलाह करने की बात कही। दुर्योधन को विदुर से सलाह करना ठीक प्रतीत नहीं हुआ।

प्रश्न 6. दुर्योधन ने चौसर के बारे में क्या तर्क दिया?

उत्तर: दुर्योधन ने चौसर के बारे में तर्क दिया – चौसर का खेल हमने तो ईजाद किया नहीं है। यह तो हमारे पूर्वजों का ही चलाया हुआ है।

प्रश्न 7. विदुर ने चौसर खेल पर क्या राय दी?

उत्तर: विदुर ने कहा कि इससे सारे वंश का नाश हो जाएगा। इसके कारण हमारे वंश में मनमुटाव होंगे और झगड़े-फिसाद होंगे आऔर हम पर भारी विपदा आ जाएगी। 

प्रश्न 8. अंततः धृतराष्ट्र ने विदुर से क्या कहा? 

उत्तर: अंततः धृतराष्ट्रों ने कहा- “भाई विदुर, मुझे खेल का डर नहीं है। लेकिन हम कर ही क्या सकते हैं? इसलिए तुम ही युधिष्ठिर के पास जाओ और उसे मेरी ओर से खेल का निमंत्रण देकर बुला लाओ।”

15. चौसर का खेल व द्रौपदी की व्यथा

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. विदुर के चौसर खेल के निमंत्रण पर युधिष्ठिर ने क्या कहा?

उत्तर: युधिष्ठिर ने कहा कि चौसर का खेल ठीक नहीं है। इससे परस्पर झगड़े और बैर उत्पन्न होते हैं।

प्रश्न 2. राजवंशों की क्या प्रथा थी?

उत्तर: राजवंशों की प्रथा थी कि खेल के लिए निमंत्रण को अस्वीकार नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 3. मंगल समाचार पूछने के बाद शकुनि ने क्या कहा?

उत्तर: शकुनि ने कहा- “युधिष्ठिर, खेल के लिए चौपड़ बिछा हुआ है। चलिए, दो हाथ खेल लें।”

प्रश्न 4. दुर्योधन ने चौसर में अपनी जगह किसे खेलाया?

उत्तर: दुर्योधन ने चौसर में अपनी जगह मामा शकुनि को खेलाया।

प्रश्न 5. खेल के मंडप में कौन-कौन वयोवृद्ध विराजमान थे?

उत्तर: खेल के मंडप में द्रोण, भीष्म, कृपाचार्य, विदुर और धृतराष्ट्र जैसे वयोवृद्ध विराजमान थे।

प्रश्न 6. युधिष्ठिर ने सहदेव को कैसा बताया?

उत्तर: युधिष्ठिर ने सहदेव को सारी विद्याओं को पार पाने वाला बताया।

प्रश्न 7. दुराचारी शकुनि को क्या संदेह हुआ? 

उत्तर: दुराचारी शकुनि को संदेह हुआ कि कहीं युधिष्ठिर खेल बंद न कर दे।

प्रश्न 8. अंत में शकुनि ने युधिष्ठिर में किसे दाँव पर लगाने को कहा?

उत्तर: अंत में शकुनि ने द्रौपदी को दाँव पर लगाने को कहा।

प्रश्न 9. धृतराष्ट्र का कौन-सा बेटा द्रौपदी को दाँव पर लगाने की बात पर संतप्त हो उठा?

उत्तर: धृतराष्ट्र का एक बेटा युयुत्सु संतप्त हो उठा।

प्रश्न 10. दुर्योधन ने विदुर को क्या आदेश दिया? 

उत्तर: आप तुरंत रनिवास में जाएँ और द्रौपदी को यहाँ ले आएँ।

प्रश्न 11. द्रौपदी को लाने के प्रश्न पर विदुर ने क्या उत्तर दिया?

उत्तर: मूर्ख! क्यों बिना समय मृत्यु को निमंत्रण देने’ चला है? अपनी विषम परिस्थिति की तुम्हें जानकारी नहीं है। 

प्रश्न 12. दुर्योधन से दुःशासन को क्या आज्ञा दी? 

उत्तर: दुःशासन से कहा यह सारथी भीमसेन से भयभीत लगता है। तुम्हीं जाकर उस अभिमानी औरत (द्रौपदी) को ले आओ।

प्रश्न 13. द्रौपदी की दीन दशा देखकर किस बेटे को दुख हुआ?

उत्तर: द्रौपदी की दीन दशा देखकर धृतराष्ट्र ने एक बेटे विकर्ण को बड़ा दुख हुआ।

प्रश्न 14. धृतराष्ट्र ने पांडवों को कैसे शांत किया?

उत्तर: धृतराष्ट्र ने पांडवों को जुए में द्वारा राज्य व सम्पत्ति लौटाकर पांडवों को शांत किया।

प्रश्न 15. दूसरी बार चौपड़ में हारने पर क्या शर्त लगाई गई?

उत्तर: हारने वाले को अपने भाइयों के साथ 12 वर्ष तक वन में रहना पड़ेगा तथा उसके बाद एक वर्ष का अज्ञातवास होगा। 

प्रश्न 16. दूसरी बार चौपड़ में कौन हारा?

उत्तर: दूसरी बार भी युधिष्ठिर हारे और वचन के अनुसार भाइयों के साथ दन में चले गए।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. विदुर ने युधिष्ठिर के पास जाकर क्या कहा? 

उत्तर: विदुर ने युधिष्ठिर से कहा कि हस्तिनापुर में खेल के लिए एक सभा मंडप बनाया गया है। मैं राजा धृतराष्ट्र की ओर से तुम्हें सभा मंडप देखने और चौसर खेलने का न्यौता देने आया हूँ।

प्रश्न 2. युधिष्ठिर को यह निमंत्रण क्यों स्वीकार करना पड़ा?

उत्तर: न चाहते हुए भी युधिष्ठिर को यह निमंत्रण इसलिए स्वीकार करना पड़ा क्योंकि राजवंश की रीति के अनुसार किसी को भी खेल का बुलावा मिलने पर उसे अस्वीकार नहीं किया जा सकता था।

प्रश्न 3. युधिष्ठिर ने चौसर के खेल का क्या कहकर विरोध किया?

उत्तर: युधिष्ठिर ने कहा कि यह खेल ठीक नहीं है। बाजी जीत लेना साहस का काम नहीं। जुआ खेलना धोखा देने के समान है।

प्रश्न 4. युधिष्ठिर क्या-क्या हार गए?

उत्तर: युधिष्ठिर चौसर में निम्नलिखित को हार गए: 

– रत्न = सोने-चाँदी के खजाने गए।

– रथ-घोड़े = भाइयों के शरीर के आभूषण और वस्त्र।

– नकुल -सहदेव = भीम-अर्जुन।

– स्वय को = द्रौपदी।

प्रश्न 5. प्रतिकामी ने जाकर द्रौपदी को क्या कहा? 

उत्तर: प्रतिकामी ने रनिवास में जाकर द्रौपदी से कहा कि चौसर के खेल में युधिष्ठिर आपको दाँव पर हार बैठे हैं। अब आप राजा दुर्योधन के अधीन हो गई हैं। अब आपको धृतराष्ट्र के महल में दासी का काम करना है। मैं आपको लेने आया हूँ।

प्रश्न 6. द्रौपदी ने प्रतिकामी को क्या कहा? 

उत्तर: प्रतिकामी को द्रौपदी ने कहा- जाकर उस हारने वाले जुए के खिलाड़ी से पूछो कि पहले वह अपने आपको हारे थे या मुझे? सारी सभा में यह प्रश्न उनसे करना और जो उत्तर मिले वह मुझे आकर बताओ। उसके बाद मुझे ले जाना।

प्रश्न 7. दुःशासन ने द्रौपदी के साथ क्या दुर्व्यवहार किया?

उत्तर: दु:शासन ने द्रौपदी के गुंथे बाल बिखेर डाले, उसके गहने तोड़-फोड़ दिए और वह उसे बलपूर्वक घसीटता हुआ सभा में लाया।

प्रश्न 8. विकर्ण ने क्या प्रश्न उठाकर अपना विरोध प्रकट किया?

उत्तर: विकर्ण ने प्रश्न उठाया-चौसर के खेल के लिए युधिष्ठिर को धोखे से बुलाया गया। द्रौपदी अकेले युधिष्ठिर की ही पत्नी नहीं, बल्कि पाँचों पांडवों की है। अतः उसे दाँव पर लगाम का अकेले युधिष्ठिर को अधिकार नहीं था। जब युधिष्ठिर खुर को ही हार बैठे तो तब वे द्रौपदी को दाँव पर लगाने का अधिकार नहीं रखते थे। यह सब चौसर के खेल के नियमों के विरुद्ध है। मेरी राय में द्रौपदी नियमपूर्वक जीती नहीं गई।

प्रश्न 9. द्रौपदी के वस्त्र-हरण के समय भीम ने क्या प्रतिज्ञा की? 

उत्तर: द्रौपदी के वस्त्र हरण के समय भीम ने प्रतिज्ञा की- “उपस्थित सज्जनो। मैं शपथ खाकर कहता हूँ- कि जब तक भरत वंश पर बट्टा लगाने वाले इस दुरात्मा दुःशासन की अ छाती को चीर न लूँगा तब तक इस संसार को छोड़कर नहीं जाऊँगा।” 

प्रश्न 10. भीम की प्रतिज्ञा सुनकर धृतराष्ट्र ने क्या अनुभव किया? और क्या उपाय किया?

उत्तर: भीम की प्रतिज्ञा सुनकर धृतराष्ट्र ने कि इस घटना का परिणाम अच्छा नहीं होगा। यह उनके पुत्रों के अनुभव किया कुल की बर्बादी का कारण बन जाएगी। परिस्थिति को सँभालने के इरादे से उन्होंने द्रौपदी को अपने पास बुलाकर शांत किया तथा युधिष्ठिर से कहा- – दुर्योधन के इस षड्यंत्र को माफ कर दो। अपना राज्य और सम्पत्ति सब ले जाओ और इंद्रप्रस्थ जाकर सुखपूर्वक रहो।

प्रश्न 11. इसके बाद क्या घटना घटी?

उत्तर: इसके बाद पांडवों को एक बार फिर चौसर खेलने को बुलाया गया। शर्त यह रखी गई कि हारा हुआ दल अपने भाइयों के साथ 12 वर्ष तक बनवास करेगा तथा उसके बाद एक वर्ष का अज्ञातवास बिताएगा। इसका पता नहीं चलना चाहिए। पता चलने पर पुनः 12 वर्ष का बनवास भोगना होगा।

16. धृतराष्ट्र की चिंता

प्रश्न -अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. जब पांडव वन की ओर जाने लगे तब धृतराष्ट्र मे विदुर को बुलाकर क्या पूछा?

उत्तर: धृतराष्ट्र ने विदुर से पूछा पांडु के बेटे और द्रौपदी कैसे वन को जा रहे हैं। 

प्रश्न 2. विदुर ने द्रौपदी की दशा के बारे में क्या बताया?

उत्तर: विदुर ने बताया कि द्रौपदी ने बालों को बिखेरकर मुँह ढक रखा है और रोती हुई जा रही है।

प्रश्न 3. विदुर ने धृतराष्ट्र से क्या प्रार्थना की?

उत्तर: विदुर ने प्रार्थना कि आप पांडवों से समझौता कर लें।

प्रश्न 4. धृतराष्ट्र ने झुँझलाकर क्या उत्तर दिया?

उत्तर: मुझे तुम्हारे सुझाव की आवश्यकता नहीं है। यदि तुम चाहो तो तुम भी पांडवों के साथ जा सकते हो।

प्रश्न 5. विदुर ने मन में क्या कहा? 

उत्तर: विदुर ने मन में कहा कि अब इस वंश का संपूर्ण विनाश निश्चित है।

प्रश्न 6. बाद में धृतराष्ट्र ने अपनी भूल को ठीक करने के लिए किसे बुलाया?

उत्तर: धृतराष्ट्र ने संजय को बुलाया और उसे विदुर को लौटा लाने के लिए भेजा।

प्रश्न 7. जंगल में संजय ने विदुर से क्या कहा?

उत्तर: धृतराष्ट्र अपनी भूल पर पछता रहे हैं। आप यदि वापस नहीं आएँगे तो वह अपने प्राण छोड़ देंगे।

प्रश्न 8. महर्षि मैत्रेय की युधिष्ठिर से भेट कहाँ हुई? 

उत्तर: महर्षि मैत्रेय की युधिष्ठिर से भेंट काम्पक वन में हुई थी।

प्रश्न 9. दुर्योधन ने महर्षि मैत्रेय का अपमान किस प्रकार किया?

उत्तर: दुर्योधन ने महर्षि की ओर देखा तक नहीं। वह अपनी जाँघ पर हाथ ठोकता, पैर के अँगूठे से जमीन कुरेदता तथा मुस्कराता रहा।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. विदुर ने धृतराष्ट्र के पांडवों की दशा के बारे में क्या बताया?

उत्तर: विदुर ने धृतराष्ट्र को बताया- कुंतीपुत्र युधिष्ठिर कपड़े से चेहरा ढाँपकर जा रहे हैं। भीमसेन अपनी दोनों भुजाओं को निहार रहा है, अर्जुन बाल बिखेरता जा रहा है तथा नकुल और सहदेव ने शरीर पर धूत्य रमा रखी है, द्रौपदी ने बिखरे बालों से मुख ढक रखा है।

प्रश्न 2. धृतराष्ट्र ने विदुर से क्षमा माँगते हुए क्या कहा? 

उत्तर: धृतराष्ट्र ने विदुर को प्रेम से गले लगाते हुए कहा-विदुर! मैं उतावली में जो बुरा-भला कह बैठा, उसका बुरा न मानना और मुझे क्षमा कर देना।

प्रश्न 3. महर्षि मैत्रेय ने दुर्योधन को क्या सलाह दी? 

उत्तर: महर्षि मैत्रेय ने दुर्योधन को सलाह देते हुए कहा- राजकुमार, तुम्हारी भलाई के लिए कहता हूँ सुनो! पांडवों को धोखा देने का विचार छोड़ दो। उनसे वैर न लो। उनके साथ संधि कर लो। इसी में तुम्हारी भलाई है।

प्रश्न 4. श्रीकृष्ण में द्रौपदी को क्या कहकर सांत्वना दी?

उत्तर: श्रीकृष्ण ने सांत्वना देते हुए द्रौपदी से कहा-बहन द्रौपदी। जिन्होंने तुम्हारा अपम्मान किया है, उन सबकी लाशें युद्ध के मैदान में खून से लथपथ होकर गिर पड़ेगी। तुम शोक न करो। मैं वचन देता हूँ कि पांडवो की हर तरह से सहायता करूँगा। यह भी निश्चय मानो कि तुम सम्राज्ञी के पद को फिर सुशोभित करोगी।

प्रश्न 5. महर्षि मैवैय ने दुर्योधन को क्या सलाह दी?

उत्तर: महषि ने दुर्योधन की ओर देखकर सलाह दी मैं तुम्हारी भलाई के लिए कहता हूँ कि पाँडवो की धोखा देने का विचार त्याग दो। उनसे ईषये न रखो। उनके साथ समझौत कर ली। इसी में तुम्हारी भलाई।। 

प्रश्न 6. दुर्योधन की बदतमीज़ी की देखकर महर्षि ने क्या शाप दिया?

उत्तर: महर्षि ने कहा- “दुर्योधन! याद रखो। अपने अभिमान का फल तुम अवश्य पाओगे।”

प्रश्न 7. श्रीकृष्ण और धृष्टद्युम्न ने द्रौपदी की सांत्वना देने के बाद क्या किया?  

उत्तर: श्रीकृष्ण अर्जुन की पत्नी सुभद्रा और उनके पुत्र अभिमन्यु की द्वारिका पुरी ले गए। द्रौपदी के पुत्रों की  धृष्टद्युम्न पांचाल देश लेकर चला गया।

17. भीम और हनुमान

प्रश्न -अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. द्रौपदी ने भीमसेन से क्या वस्तु लाने के लिए कहा?

उत्तर: द्रौपदी ने हवा में उड़ता हुआ फूल दिखाकर भीमसेन से वैसे ही कुछ और फूल लाने के लिए कहा।

प्रश्न 2. भीमसेन को बगीचे के मध्य कौन लेटा मिला? 

उत्तर: भीमसेन को बगीचे के मध्य एक बहुत भारी बंदर रास्ता रोककर लेटा हुआ मिला।

प्रश्न 3. बंदर ने भीम की तरफ देखकर क्या कहा? 

उत्तर: बंदर ने भीम से कहा- मैं कुछ अस्वस्थ हूँ इसलिए लेटा हुआ हूँ। तुमने मेरी नींद खराब कर दी।

प्रश्न 4. बंदर ने अपनी क्या असमर्थता जताई?

उत्तर: बंदर ने असमर्थता जताते हुए कहा-मैं बूढ़ा हूँ, “मुश्किल से उठ बैठ सकता हूँ।

प्रश्न 5. भीमसेन को क्या बात अनुचित लगी?

उत्तर: भीमसेन को किसी जानवर को लाँघना अनुचित लगा।

प्रश्न 6. बंदर ने भीम से क्या प्रश्न पूछा?

उत्तर: मुझे जरा बताना कि वह हनुमान कौन था, जो समुद्र को लाँघ गया था?

प्रश्न 7. हनुमान ने भीम को क्या हटाकर चले जाने को कहा?

उत्तर: हनुमान ने अपनी पूछ हटाकर एक ओर करके चले जाने को भीम से कहा।

प्रश्न 8. क्या भीम से बंदर की पूँछ हटी? 

उत्तर: भीम से बंदर की पूँछ हटानी तो दूर, हिली तक नहीं।

प्रश्न 9. बंदर ने अपना परिचय किस रूप में दिया?

उत्तर: बंदर ने अपना परिचय देते हुए कहा “हे पांडुवीर हनुमान मैं ही हूँ।”

प्रश्न 10. भीम ने हनुमान के दर्शन पाकर कैसा अनुभव किया?

उत्तर: हनुमान के दर्शन पाकर भीम ने स्वयं को भाग्यवान अनुभव किया।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. भीम को बगीचे में कौन किस अवस्था में मिला?

उत्तर: भीम को बगीचे में एक बड़ा भारी बंदर मिला। वह रास्ता रोके हुए लेटा था। उसने स्वयं को अस्वस्थ बताया।

प्रश्न 2. भीम ने क्रोध करते हुए बंदर से क्या कहा? 

उत्तर: भीम ने क्रोध करते हुए बंदर से कहा-” जानते हो, मैं कौन हूँ? मैं कुरुवंश का वीर, कुंती का बेटा हूँ। मुझे रोको मत। मेरे रास्ते से हट जाओ और मुझे आगे जाने दो।” 

प्रश्न 3. हनुमान ने आशीर्वाद देते हुए भीम से क्या कहा?

उत्तर: हनुमान ने भीम को आशीर्वाद देते हुए कहा- “भीम, युद्ध के समय तुम्हारे भाई अर्जुन के रथ पर उड़ने वाली ध्वजा पर मैं विद्यमान रहूँगा। विजय तुम्हारी ही होगी।”

प्रश्न 4. हनुमान ने भीम को क्या दिखाए तथा भीम ने क्या किया?

उत्तर: हनुमान ने भीम को झरने के पास खिले सुगंधित फूल दिखाए। भीम ने द्रौपदी के लिए सुगंधित फूल तोड़े और आश्रम की ओर लौट आए।

18. द्वेष करने वाले का जी नहीं भरता

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. दुर्योधन की चापलूसी कौन करते थे?

उत्तर: कर्ण और शकुनि दुर्योधन की चापलूसी किया करते थे।

प्रश्न 2. चौपायों की गणना का काम किसका होता है?

उत्तर: चौपायों की गणना का काम राजकुमारों का ही होता है। 

प्रश्न 3. दुर्योधन ने धृतराष्ट्र को क्या विश्वास दिलाया? 

उत्तर: दुर्योधन ने विश्वास दिलाया कि पांडव जहाँ होंगे, वहाँ हम नहीं जाएँगे।

प्रश्न 4. कौरव बड़ी सेना लेकर कहाँ के लिए निकल पड़े? 

उत्तर: कौरव एक बड़ी सेना लेकर द्वैतवन की ओर निकल पड़े।

प्रश्न 5. जलाशय के निकट किस-किसमें संग्राम हुआ?

उत्तर: जलाशय के निकट गंधर्वों और कौरवों की सेना में संग्राम हुआ।

प्रश्न 6. दुर्योधन को किसने पकड़ लिया?

उत्तर: दुर्योधन को गंधर्वराज चित्रसेन ने पकड़ लिया। 

प्रश्न 7. दुर्योधन को किसने छुड़ाया?

उत्तर: दुर्योधन को पांडवों ने छुड़ाया।

प्रश्न 8. दुर्योधन क्या चाहता था? 

उत्तर: दुर्योधन यह चाहता था कि वह पांडवों को मुसीबत में पड़े हुए अपनी आँखों से देखे।

प्रश्न 9. आश्रम के निकट जलाशय के तट पर और किसने डेरा डाल रखा था? 

उत्तर: आश्रम के निकट जलाशय के तट पर गंधर्वराज चित्रसेन ने अपना डेरा डाल रखा था। 

प्रश्न 10. जलाशय के निकट किस-किसमें युद्ध हुआ?

उत्तर: जलाशय के निकट गंधवों और कौरवों की सेनाओं में युद्ध हुआ। इसमें कर्ण और दुर्योधन पराजित हो गए।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. युधिष्ठिर ने दुर्योधन के पकड़े जाने पर भीमसेन से क्या कहा?

उत्तर: युधिष्ठिर ने गंभीर स्वर में भीमसेन से कहा-भाई भीमसेन! ये हमारे ही कुटुंबी हैं। तुम अभी जाओ और किसी तरह अपने बंधुओं को गंधवों के बंधन से छुड़ा लाओ।

प्रश्न 2. दुर्योधन ने महर्षि दुर्वासा से क्या वर माँगा?

उत्तर: दुर्योधन पांडवों को अपमानित करना चाहता था। अतः उसने महर्षि दुर्वासा से माँगा-आप अपने शिष्यों सहित पांडवों के यहाँ जाकर उनका सत्कार स्वीकार करें। पर ऐसे समय में युधिष्ठिर के आश्रम में जाएँ जब द्रौपदी पांडवों एवं परिवार को भोजन करा चुकी हो और वे विश्राम कर रहे हों।

प्रश्न 3. बनवास के शुरू में युधिष्ठिर से खुश होकर सूर्य ने उन्हें क्या प्रदान किया?

उत्तर: बनवास के शुरू में सूर्य ने युधिष्ठिर को एक अक्षयपात्र प्रदान करते हुए कहा कि बारह बरस तक इसके द्वारा मैं तुम्हें भोजन दिया करूँगा। द्रौपदी इससे चाहे जितने लोगों को भोजन खिला सकेगी।

प्रश्न 4. कर्ण ने क्या युक्ति बताई?

उत्तर: कर्ण ने यह युक्ति बताई कि द्वैतवन में कुछ बस्तियाँ हैं जो हमारे अधीन हैं। उन बस्तियों मे चौपायों (पशुओं) की गणना करना राजकुमारों का ही काम होता है। हम पिताजी से आज्ञा लेकर उनकी गणना के बहाने वहाँ जाएँगे। उस स्थान से कुछ दूरी पर पांडव ठहरे हुए हैं।

प्रश्न 5. दुर्योधन की क्या इच्छा पूरी न हो सकी? क्यों?

उत्तर: दुर्योधन की इच्छा राजसूय यज्ञ करने की थी किंतु पंडितों ने सलाह दी कि धृतराष्ट्र और युधिष्ठिर के रहते दुर्योधन को राजसूय यज्ञ करने का अधिकार नहीं है। अतः ब्राह्मणों की सलाह मानकर दुर्योधन ने वैष्णव यज्ञ करके संतोष कर लिया।

प्रश्न 6. ऋषि दुर्वासा को पांडवों के यहाँ भिजवाने के पीछे दुर्योधन की क्या चाल थी? 

उत्तर: ऋषि दुर्वासा अत्यंत क्रोधी थे। उनके पास दस हज़ार शिष्यों की फौज थी। दुर्वासा को युधिष्ठिर के यहाँ भिजवाने के पीछे दुर्योधन की यह चाल थी कि वहाँ उन्हें भोजन नहीं मिलेगा और वे पांडवों को शाप दे देंगे।

प्रश्न 7. क्या दुर्योधन की चाल सफल रही?

उत्तर: नहीं, दुर्योधन की चाल सफल न रही। ऋषि दुर्वासा के शिष्यों ने पेट भरकर भोजन किया। ऐसा अक्षयपात्र के वरदान स्वरूप संभव हो पाया। दुर्वासा ऋषि और उसके शिष्य संतुष्ट होकर लौटे।

19. मायावी सरोवर

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. युधिष्ठिर ने नकुल से पेड़ पर चढ़कर क्या देखने को कहा?

उत्तर: नकुल से पेड़ पर चढ़कर कोई जलाशय या नदी देखने को कहा।

प्रश्न 2. पेड़ पर चढ़कर नकुल को क्या दिखाई दिया?

उत्तर: नकुल को कुछ दूरी पर जैसे पौधे दिखाई दिए जो पानी के पास ही उगते हैं।

प्रश्न 3. नकुल ने क्या सोचा?

उत्तर: नकुल ने सोचा कि पहले मैं अपनी प्यास बुझा लूँ फिर तरकश में पानी भरकर भाइयों के लिए ले चलूँगा। 

प्रश्न 4. नकुल ने यक्ष की आवाज़ की परवाह क्यों नहीं की?

उत्तर: नकुल को बहुत तेज प्यास लगी थी। अतः उसने यक्ष की वाणी की परवाह नहीं की।

प्रश्न 5. सहदेव ने जलाशय के पास जाकर क्या देखा?

उत्तर: सहदेव ने जलाशय के पास जाकर देखा कि नकुल भूमि पर पड़ा हुआ है।

प्रश्न 6. अर्जुन क्या बात समझ नहीं पाया?

उत्तर: अर्जुन यह नहीं समझ पाया कि नकुल-सहदेव की मृत्यु का क्या कारण है।

प्रश्न 7. यक्ष का प्रश्न सुनकर अर्जुन ने क्या किया?

उत्तर: यक्ष का प्रश्न सुनकर अर्जुन क्रोध में भर गया और बाण छोड़ने शुरू कर दिए।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. युधिष्ठिर ने नकुल से क्या करने को कहा? 

उत्तर: युधिष्ठिर ने नकुल से पेड़ पर चढ़कर जलाशय या नदी देखने को कहा ताकि वहाँ से पानी लाकर प्यास बुझाई जा सके।

प्रश्न 2. नकुल को पानी का पता किस प्रकार चला? 

उत्तर: नकुल ने पेड़ पर चढ़कर देखा कि कुछ दूरी पर ऐसे पौधे दिखाई दे रहे हैं जो पानी के नज़दीक उगते हैं। उसके आस-पास कुछ बगुले भी बैठे थे। इन चिह्नों से पता चलता था कि कहीं आस-पास पानी है।

प्रश्न 3. नकुल को क्या आवाज़ सुनाई दी? 

उत्तर: नकुल को यह आवाज़ सुनाई दी “माद्री के पुत्र!

दुःसाहस न करो। यह जलाशय मेरे अधीन है। पहले मेरे प्रश्नों के उत्तर दो, फिर पानी पियो।”

प्रश्न 4. बारी-बारी से पांडवों का क्या हाल हुआ और क्यों?

उत्तर: नकुल, सहदेव, अर्जुन और भीम ने यक्ष की आवाज़ अनसुनी कर दी थी और उसके प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया था। अतः वे सभी बेहोश होकर ज़मीन पर गिर पड़े थे।

प्रश्न 5. भाइयों को लौटते न देखकर युधिष्ठिर की क्या दशा हुई?

उत्तर: भाइयों को लौटते न देखकर युधिष्ठिर चिंतित हो गए। वे घबराने लगे और सोचने लगे कि बड़े आश्चर्य की बात है कि कोई भी अब तक नहीं लौटा। आखिर भाइयों को हो क्या गया? क्या कारण है कि अभी तक वे लौटे नहीं। मैं ही जाकर देखूं कि क्या बात है?

20. यक्ष-प्रश्न

प्रश्न 1. मनुष्य का कौन साथ देता है?

उत्तर: धैर्य ही मनुष्य का साथी होता है। 

प्रश्न 2. कौन-सा शास्त्र (विद्या) है, जिसका अध्ययन करके मनुष्य बुद्धिमान बनता है? 

उत्तर: कोई भी शास्त्र ऐसा नहीं। महान लोगों की संगति से ही मनुष्य बुद्धिमान बनता है।

प्रश्न 3. भूमि से भारी चीज़ क्या है?

उत्तर: संतान को कोख में धारण करने वाली माता भूमि से भी भारी होती है।

प्रश्न 4. आकाश से भी ऊँचा कौन है?

उत्तर: पिता।

प्रश्न 5. हवा से भी तेज चलने वाला कौन है?

उत्तर: मन। 

प्रश्न 6. घास से भी तुच्छ कौन सी चीज होती है?

उत्तर: चिंता। 

प्रश्न 7. विदेश जाने वाले का कौन साधी होता है?

उत्तर: विद्या।

प्रश्न 8. घर ही में रहने वाले का कौन साथी होता है?

उत्तर: पत्नी।

प्रश्न 9. मरणासन्न वृद्ध का मित्र कौन होता है?

उत्तर: दान, क्योंकि वही मृत्यु के बाद अकेले चलने वाले जीव के साथ-साथ चलता है।

प्रश्न 10. बरतनों में सबसे बड़ा कौन-सा है? 

उत्तर: भूमि हो सबसे बड़ा बरतन है जिसमें सब कुछ समा सकता है।

प्रश्न 11. सुख क्या है?

उत्तर: सुख वह चीज़ है जो शील और सच्चरित्रता पर स्थित है। 

प्रश्न 12. किसके छूट जाने पर मनुष्य सर्वप्रिय बनता है?

उत्तर: अहंभाव के छूट जाने पर।

प्रश्न 13. किस चीज़ के खो जाने से दुःख नहीं होता?

उत्तर: क्रोध के खो जाने से।

प्रश्न 14. किस चीज को गँवाकर मनुष्य धनी बनता है?

उत्तर: लालच को।

प्रश्न 15. युधिष्ठिर! निश्चित रूप से बताओ कि किसी का ब्राह्मण होना किस बात पर निर्भर करता है? उसके जन्म पर, विद्या पर या शील स्वभाव पर? 

उत्तर: कुल या विद्या के कारण ब्राह्मणत्व प्राप्त नहीं हो जाता। ब्राह्मणत्व तो शील स्वभाव पर ही निर्भर होता है। जिसमें शोल न हो वह ब्राह्मण नहीं हो सकता। जिसमें बुरे व्यसन हों, वह चाहे कितना ही पढ़ा-लिखा क्यों न हो ब्राह्मण नहीं कहला सकता। चारों वेदों को जान करके भी कोई चरित्र भ्रष्ट हो तो उसे नीच हो समझना चाहिए।

प्रश्न 16. संसार में सबसे बड़े आश्चर्य की बात क्या है?

उत्तर: हर रोज आँखों के सामने कितने ही प्राणियों को मृत्यु के मुँह में जाते देखकर भी बचे हम प्राणी जो यह चाहते हैं कि अमर रहे, यही महान आश्चर्य की बात है।

इसी प्रकार यक्ष ने कई प्रश्न किए और युधिष्ठिर ने उन सबके ठीक-ठीक उत्तर दिए।

अंत में यक्ष बोला- “राजन् मैं तुम्हारे मृत भाइयों में से एक को जिला सकता हूँ। तुम जिस किसी को भी जिलाना चाहो वह जीवित हो जाएगा।’

युधिष्ठिर ने पलभर सोचा कि किसे जिलाऊँ? और जुरा देर रुककर बोले- “मेरा सबसे छोटा भाई नकुल जी उठे।”

युधिष्ठिर के इस प्रकार बोलते हो यक्ष ने सामने प्रकट होकर पूछा- “युधिष्ठिर! दस हज़ार हाथियों के बल वाले भीमसेन को छोड़कर नकुल को तुमने क्यों जिलाना ठीक समझा?”

युधिष्ठिर ने कहा- “यक्षराज! मनुष्य की रक्षा न तो भीम से होती है, न अर्जुन से। धर्म ही मनुष्य की रक्षा करता है और विमुख होने पर धर्म हो से मनुष्य का नाश भी होता है। मैंने जो नकुल को जिलाना चाहा वह सिर्फ इसी कारण कि मेरे पिता की दो पालियों में से, कुती का एक पुत्र में तो बच्चा हूँ, मैं चाहता हूँ कि माद्री का भी एक पुत्र जो उठे, जिससे हिसाब बराबर हो जाए। अतः आप कृपा करके नकुल को जिला दें। “

“पक्षपात से रहित मेरे प्यारे पुत्र! तुम्हारे चारों ही भाई जो उठे।” यक्ष ने वर दिया।

यक्ष ने युधिष्ठिर को छाती से लगाते हुए आशीर्वाद दिया कि अब तुम्हारी बारह बरस की वनवास की अवधि पूरी होने वाली है। एक वर्ष का अज्ञातवास भी सफलता से पूरा हो जाएगा। इतना कहकर धर्मदेव अंतर्धान हो गए। युधिष्ठिर ने अज्ञातवास का एक वर्ष मत्स्याधिपति राजा विराट के यहाँ बिताने का निश्चय किया क्योंकि वह दुर्योधन की बातों में आने वाला नहीं था।

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. युधिष्ठिर कहाँ जा पहुँचे?

उत्तर: युधिष्ठिर उसी विषैले तालाब के निकट जा पहुँचे जहाँ उनके चारों भाई मृत अवस्था में पड़े थे।

प्रश्न 2. यक्ष ने पहला प्रश्न क्या किया? युधिष्ठिर ने क्या उत्तर दिया?

उत्तर: यक्ष का पहला प्रश्न यह था-मनुष्य का साथ कौन देता है? युधिष्ठिर ने इसका उत्तर दिया-धैर्य ही मनुष्य का साथी होता है।

प्रश्न 3. आकाश से भी ऊँचा कौन है?

उत्तर: पिता। 

प्रश्न 4. भूमि से भारी चीज क्या है?

उत्तर: संतान को कोख में धारण करने वाली माता भूमि से भी भारी होती है।

प्रश्न 5. घास से भी छोटी वस्तु किसे बताया गया है?

उत्तर: चिंता को।

प्रश्न 6. किस वस्तु को गँवाकर मनुष्य धनी बनता है?

उत्तर: लालच को।

प्रश्न 7. दुर्योधन ने किस भाई को जीवित करने को कहा?

उत्तर: नकुल को।

प्रश्न 8. यक्ष ने भीम को कैसा बताया?

उत्तर: भीम को दस हज़ार हाथियों के समान बल वाला बताया।

प्रश्न 9. युधिष्ठिर के सद्गुणों से मुग्ध होकर यक्ष ने क्या किया?

उत्तर: उसने युधिष्ठिर को छाती से लगा लिया।

प्रश्न 10. पांडवों ने बनवास का तेरहवाँ वर्ष कहाँ बिताने का निश्चय किया?

उत्तर: पांडवों ने यह वर्ष मत्स्य देश के राजा विराट के यहाँ बिताने का निश्चय किया।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. संसार में सबसे बड़े आश्चर्य की बात क्या है?

उत्तर: संसार में सबसे बड़े आश्चर्य की बात यह है कि हर रोज कितने ही प्राणी मृत्यु के मुँह में चले जाते हैं, फिर भी हर प्राणी यह चाहता है कि वह अमर रहे। 

प्रश्न 2. युधिष्ठिर ने नकुल को ही जिलाना क्यों ठीक समझा?

उत्तर: युधिष्ठिर ने यक्ष को बताया कि मेरे पिता की दो पत्नियाँ हैं। एक पत्नी कुती से मैं जीवित हूँ। माद्री का भी एक पुत्र जीवित रहना चाहिए। अतः मैंने उसके पुत्र नकुल को जीवित कराना चाहा है।

प्रश्न 3. युधिष्ठिर का उत्तर सुनकर यक्ष ने क्या प्रतिक्रिया वर्शायी? 

उत्तर: युधिष्ठिर का उत्तर सुनकर यक्ष प्रसन्न हो गया और युधिष्ठिर को छाती से लगा लिया। उनके चारों भाइयों को जीवित कर दिया।

प्रश्न 4. युधिष्ठिर को आशीर्वाद देते हुए यक्ष ने क्या कहा?

उत्तर: यक्ष ने आशीर्वाद देते हुए कहा- “बारह वर्ष का बनवास का समय पूर्ण होने में अब थोड़े ही दिन शेष रह गए हैं। तुम्हारा अज्ञातवास भी सफलता से पूरा हो जाएगा। तुम्हें और तुम्हारे भाइयों को कोई नहीं पहचान सकेगा।”

प्रश्न 5. बनवास की 12 वर्ष की अवधि पूरी होने पर पांडवों ने क्या-क्या किया?

उत्तर: बनवास की अवधि पूरी होने पर पांडवों ने निम्नलिखित काम किए-

• अर्जुन ने इंद्रदेव से दिव्यास्त्र प्राप्त किया।

• भीम हनुमान का आलिंगन प्राप्त कर दस गुना शक्तिशाली हो गया।

• युधिष्ठिर को धर्मदेव के दर्शन का सौभाग्य मिला।

• पांडव आधी रात को कहीं चले गए।

• पांडवों ने मत्स्य देश के राजा विराट के यहाँ तेरहवाँ वर्ष बिताने का निश्चय किया।

21. अज्ञातवास

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. विराट के दरबार में युधिष्ठिर क्या बन गए?

उत्तर: युधिष्ठिर कंक के नाम से विराट के दरबारी बन गए।

प्रश्न 2. भीमसेन को क्या काम मिला?

उत्तर: भीमसेन को रसोइयों का मुखिया बनाया गया। वे वल्लभ के रूप में काम करने लगे।

प्रश्न 3. अर्जुन किस नाम से क्या काम करने लगा?

उत्तर: अर्जुन ‘बृहन्नला’ के नाम से रनिवास की स्त्रियों, खासकर विराट की कन्या उत्तरा को नाच-गाने सिखाने का काम करने लगे।

प्रश्न 4. नकुल ने क्या काम स्वीकार किया? 

उत्तर: नकुल ने ‘ग्रंथिक’ के नाम से घोड़ों को साधने, उनका इलाज करने तथा देखभाल का काम करना स्वीकार किया।

प्रश्न 5. सहदेव क्या काम करता रहा?

उत्तर: सहदेव ‘तंतिपाल’ के रूप में गाय-बैलों की देखभाल करता रहा।

प्रश्न 6. द्रौपदी क्या करने लगी?

उत्तर: द्रौपदी रानी की आज्ञाकारिणी दासी बन गई। वह विराट की पत्नी सुदेष्णा की सेवा करने लगी।

प्रश्न 7. द्रौपदी ने अपना नाम क्या रख लिया?

उत्तर: सैरंधी नाम रख लिया।

प्रश्न 8. रानी सुदेष्णा का भाई कौन था व कैसा था? 

उत्तर: सुदेष्णा का भाई कीचक बहुत बलिष्ठ और प्रतापी वीर था।

प्रश्न 9. द्रोण ने क्या बात भीष्म को बता दी? 

उत्तर: आचार्य द्रोण ने भीष्म को यह बात बता दी कि राजकुमार उत्तर के साथ अर्जुन ही है।

प्रश्न 10. कीचक के बारे में मत्स्य देश में क्या कहा जाता था? 

उत्तर: कीचक की धाक के बारे में लोगों का कहना था कि मत्स्य देश के राजा तो कीचक हैं, विराट नहीं। 

प्रश्न 11. किस सूचना से दुर्योधन का माथा ठनक गया?

उत्तर: कीचक वध की सूचना से दुर्योधन का माथा ठनक गया कि कीचक का वध भीम ने ही किया होगा।

प्रश्न 12. दुर्योधन ने राजसभा में क्या मत प्रकट किया?

उत्तर: उसका मत था कि मत्स्य देश पर आक्रमण कर दिया जाए।

प्रश्न 13. त्रिर्गत देश का सुशर्मा क्या बोला?

उत्तर: सुशर्मा बोला-मत्स्य देश के राजा विराट मेरे शत्रु हैं। कीचक ने मुझे भी बहुत तंग किया है। मैं भी अपना पुराना बैर चुका लेना चाहता हूँ।

प्रश्न 14. सुशर्मा को किस ओर आक्रमण करने की जिम्मेदारी दी गई?

उत्तर: सुशर्मा को मत्स्य राज्य पर दक्षिण की ओर से आक्रमण करने की जिम्मेदारी दी गई।

प्रश्न 15. अर्जुन ने राजकुमार उत्तर को कहाँ बिठा दिया? 

उत्तर: अर्जुन ने राजकुमार को सारथी के स्थान पर बिठा कर रास उसके हाथ में पकड़ा दी।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. पांडवों को क्या-क्या काम करने को मिला?

उत्तर: पांडवों को निम्नलिखित काम करने को मिले:  

युधिष्ठिर कंक नाम से विराट के दरबारी बन गए। वे राजा के साथ चौपड़ खेलकर दिन बिताने लगे।

भीमसेन रसोइयों का प्रमुख बन गए। वे मशहूर पहलवानों को कुश्ती भी लड़ाते थे।

अर्जुन बृहन्नला के नाम से रनिवास की रानियों को नाच-गाना सिखाने लगे।

नकुल घोड़ों को साधने और उनकी बीमारियों का इलाज करने का काम करने लगे।

सहदेव गाय-बैलों की देखभाल करने लगे। 

द्रौपदी सैरंध्री नाम से विराट की पत्नी सुदेष्णा की सेवा -सश्रुषा का काम करने लगी।

प्रश्न 2. कीचक का परिचय दीजिए।

उत्तर: कीचक रानी सुदेष्णा का भाई था। वह वहा बलिष्ठ और प्रतापी वीर था। मत्स्य देश की सेना का वही नायक बना हुआ था। उसने बूढ़े विराटराज की शक्ति और सत्ता में खूप वृद्धि कर दी थी।लोगों पर कीचक की धाक जमी हुई थी। लोग कीचक को ही मत्स्य का राजा मानते थे। एक दिन उसके मारे जाने की खबर फैल गई।

प्रश्न 3. दुर्योधन ने मत्स्य देश पर हमला क्यों किया? 

उत्तर: कीचक वध से दुर्योधन ने अनुमान लगाया कि कीचक का वध भीम ने ही किया होगा। (उसका अनुमान सही था।) भीम और अन्य पांडवों को विराट ने आश्रय दे रखा था। अतः दुर्योधन ने मत्स्य देश पर हमला करने का निश्चय किया। 

प्रश्न 4. सुशर्मा कौन था? उसने दुर्योधन का साथ क्यों दिया?

उत्तर: सुशर्मा त्रिगर्त देश का राजा था। मत्स्य देश का राजा विराट उसका भी शत्रु था। कीचक ने उसे बहुत तंग किया था। वह भी इस अवसर का लाभ उठाना चाहता था। अतः उसने भी दुर्योधन का साथ दिया।

प्रश्न 5. बंदी विराट को किसने छुड़ाया?

उत्तर: भीमसेन सुशर्मा की सेना पर बाणों की बौछार करके थोड़ी ही देर में विराट को छुड़ा लिया और सुशमां को कैद कर लिया। 

प्रश्न 6. दुर्योधन ने कर्ण से क्या कहा?

उत्तर: दुर्योधन कर्ण से बोला-हमें इस बात से क्या मतलब कि यह औरत के भेष में कौन है ? मान से यह अर्जुन ही है। फिर भी हमारा तो उससे काम बनता ही बनता है। शर्त के अनुसार उन्हें और 12 वर्ष वनवास भुगतान पड़ेगा।

प्रश्न 7. कंक बने युधिष्ठिर ने विराट को किन शब्दों में सांत्वना दी?

उत्तर: युधिष्ठिर ने सांत्वना देते हुए कहा-राजन्, आप परवाह न करें। मैंने भी अस्त्र-शस्त्र विद्या सीखी हुई है। आपका रसोइया, अश्वपाल व ततिपाल वास्तव में पांडव भी कुशल योद्धा हैं। मैं कवच पहनकर रथ पर सवार होकर आपके साथ जाऊँगा।

प्रश्न 8. अर्जुन ने क्या क्रिया?

उत्तर: अर्जुन ने कौरव सेना के सामने रथ लाकर खड़ा कर दिया। उसने गांडीव सँभाल कर और डोरी चढ़ाकर तीन बार जोर से टंकार की और शंख ध्वनि की।

22. प्रतिज्ञा-पूर्ति

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. द्रोण ने क्या कहा?

उत्तर: द्रोण ने कहा- मालूम होता है, यह तो अर्जुन ही आया है।

प्रश्न 2. कर्ण ने कृपाचार्य पर क्या आरोप लगाया?

उत्तर: उसने कहा-आचार्य, आप तो अर्जुन की तारीफ करते कभी नहीं थकते। अर्जुन की शक्ति को बढ़ा-चढ़ा कर बताने की आपकी आदत सी पड़ गई है।

प्रश्न 3. अश्वत्थामा ने कर्ण पर क्या व्यंग्य किया?

उत्तर: उसने व्यंग्य करते हुए कहा कि तुमने कुछ किया नहीं है, केवल डींगें मारने में समय खराब कर रहे थे। 

प्रश्न 4. भीष्म ने दुर्योधन को समय के बारे में क्या बताया?

उत्तर: भीष्म ने बताया कि प्रतिज्ञा का समय तो कल ही पूर्ण हो चुका है।

प्रश्न 5. भीष्म ने दुर्योधन को क्या सुझाव दिया?

उत्तर: युद्ध शुरू करने से पहले यह निश्चय कर लेना होगा कि पांडवों के साथ समझौता कर लें या नहीं।

प्रश्न 6. इसका दुर्योधन ने क्या उत्तर दिया?

उत्तर: दुर्योधन ने कहा-मैं संधि नहीं चाहता। राज्य तो दूर रहा, मैं तो एक गाँव तक पांडवों को देने को तैयार नहीं हूँ।

प्रश्न 7. अर्जुन ने कर्ण के साथ क्या किया?

उत्तर: अर्जुन ने कर्ण पर आक्रमण करके उसे बुरी तरह घायल करके मैदान से खदेड़ दिया।

प्रश्न 8. अश्वत्थामा के साथ क्या हुआ?

उत्तर: अर्जुन अश्वत्थामा पर टूट पड़ा और अश्वत्थामा को हार माननी पड़ी।

प्रश्न 9. अर्जुन ने दुर्योधन का क्या हाल किया?

उत्तर: अर्जुन दुर्योधन का पीछा करते हुए उसके पास पहुँच गया। दुर्योधन घायल होकर मैदान छोड़कर भाग गया। 

प्रश्न 10. युद्ध में किसको विजय का श्रेय दिया गया?

उत्तर: युद्ध में राजकुमार उत्तर को विजय का श्रेय दिया गया।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. दुर्योधन ने कर्ण से क्या कहा?

उत्तर: दुर्योधन ने कर्ण से कहा यदि तेरहवें वर्ष में अर्जुन हमारे सामने प्रकट हो गया है तो डर किस बात का? शर्त के अनुसार पांडवों को फिर से बारह वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास बिताना होगा। आप लोग भय से काँप क्यों रहे हैं? आपको दिल खोलकर लड़ना चाहिए।

प्रश्न 2. कर्ण ने द्रोणाचार्य पर क्या व्यंग्य किया? 

उत्तर: कर्ण ने द्रोणाचार्य पर व्यंग्य करते हुए कहा कि आप तो अर्जुन की प्रशंसा करते-करते नहीं थकते। आपको अर्जुन की शक्ति को बढ़ा-चढ़ा कर बताने की आदत सी पड़ गई है। पता नहीं यह सब भय के कारण है या अर्जुन से अत्यधिक प्यार के कारण है।

प्रश्न 3. पितामह ने दुर्योधन को क्या बात समझाई?

उत्तर: पितामह भीष्म ने दुर्योधन को यह बात समझाई कि प्रतिज्ञा का समय कल ही पूरा हो चुका है। तुम्हारी गणना में कुछ भूल हुई है। प्रत्येक वर्ष के महीने एक जैसे नहीं होते। जब अर्जुन ने गांडीव धनुष की टंकार की, तभी मैं समझ गया कि प्रतिज्ञा की अवधि पूरी हो गई। अतः तुम लोग पांडवों के साथ संधि कर लो। 

प्रश्न 4. कौरवों की व्यूह-रचना का क्या हाल हुआ? 

उत्तर: कौरव वीरों द्वारा की गई व्यूह-रचना बुरी तरह परास्त हुई। पांडवों ने कर्ण को बुरी तरह से घायल करके मैदान से भगा दिया। द्रोणाचार्य को खिसकने को मौका मिल गया। अर्जुन अश्वत्थामा पर टूट पड़ा। उसे हार माननी पड़ी। कृपाचार्य भी हार गए। सारी कौरव सेना तितर-बितर हो गई। अर्जुन ने दुर्योधन का पीछा किया। वह घायल होकर मैदान छोड़कर भाग खड़ा हुआ। भीष्म के कहने पर सारी सेना हस्तिनापुर लौट गई।

प्रश्न 5. युद्ध से लौटते हुए अर्जुन ने उत्तर से क्या कहा? 

उत्तर: अर्जुन ने उत्तर से कहा-अपना रथ नगर की ओर ले चलो। तुम्हारी गायें छुड़ा ली गई हैं। शत्रु भाग गए हैं। इस विजय का यश तुम्हें ही मिलना चाहिए। इसलिए चंदन लगाकर और फूलों का हार पहनकर नगर में प्रवेश करना।

23. विराट का भ्रम

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. क्या बात सुनकर विराट चौंक पड़े?

उत्तर: जब राजा विराट को पता चला कि कुमार उत्तर कौरवों से लड़ने गए हैं, तब वे चौंक पड़े।

प्रश्न 2. कंक ने राजा को क्या विश्वास दिलाया?

उत्तर: कंक ने कहा कि आप राजकुमार की चिंता न करें क्योंकि वृहन्नला उनके साथ सारथी बनकर गई है।

प्रश्न 3. राजा विराट को किस सूचना पर आश्चर्य हुआ? 

उत्तर: जब राजा को यह सूचना मिली कि राजकुमार ने युद्ध जीत लिया है, तो उन्हें आश्चर्य हुआ।

प्रश्न 4. राजा विराट किसके द्वारा अपनी प्रसन्नता प्रकट करना चाहता था?

उत्तर: वह कंक के साथ चौपड़ खेलकर अपनी प्रसन्नता प्रकट करना चाहता था।

प्रश्न 5. राजा किस बात पर झुंझला उठा?

उत्तर: राजा बार-बार बृहन्नला का नाम सुनकर झुंझला उठा था।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. पुत्र की जीत का समाचार सुनकर राजा विराट ने क्या प्रतिक्रिया प्रकट की?

उत्तर: इस समाचार को सुनकर विराट आनंद और अभिमान के मारे फूला न समाए। उन्होंने दूतों को रत्न एवं धन पुरस्कार के रूप में दिया। फिर चौपड़ खेलने को कहा।

प्रश्न 2. कंक ने द्वारपाल को केवल राजकुमार को लाने के लिए क्यों कहा?

उत्तर: युधिष्ठिर (कंक) को भय था कि राजा के हाथों लगी चोट को यदि अर्जुन (वृहन्नला) ने देख लिया तो कहीं उसे क्रोध न आ जाए और कहीं कोई अनिष्ट न हो जाए।

प्रश्न 3. राजा विराट ने अर्जुन के सामने क्या प्रस्ताव रखा?

उत्तर: राजा विराट ने अपनी पुत्री उत्तरा के साथ विवाह करने का प्रस्ताव अर्जुन के सामने रखा जिसे अर्जुन ने यह कहकर अस्वीकार कर दिया कि उत्तरा मेरे लिए बेटी के समान है। हाँ, मेरे पुत्र अभिमन्यु के साथ उसका विवाह हो सकता है। विराट ने इसे स्वीकार कर लिया।

24. मंत्रणा

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. तेरहवाँ साल पूरा होते ही पांडव कहाँ रहने लगे?

उत्तर: तेरहवाँ साल पूरा होते ही पांडव विराट राज्य के एक नगर उपप्लव्य में रहने लगे। 

प्रश्न 2. सर्वप्रथम वहाँ क्या कार्य सम्पन्न हुआ?

उत्तर: सर्वप्रथम वहाँ अभिमन्यु के साथ उत्तरा का विवाह सम्पन्न हुआ।

प्रश्न 3. श्रीकृष्ण ने संधि के लिए क्या उपाय बताया?

उत्तर: श्रीकृष्ण ने दुर्योधन के पास एक व्यक्ति को दूत बनाकर भेजने का उपाय बताया।

प्रश्न 4. किसे श्रीकृष्ण का सुझाव न्यायसंगत लगा?

उत्तर: बलराम को श्रीकृष्ण का सुझाव न्यायसंगत लगा।

प्रश्न 5. राजा द्रुपद किस बात से खुश हुए?

उत्तर: राजा द्रुपद सात्यकि की दृढ़तापूर्ण और प्रभावशाली बात से खुश हुए।

प्रश्न 6. श्रीकृष्ण ने हस्तिनापुर दूत भेजने का काम किसे सौंपा?

उत्तर: श्रीकृष्ण ने यह काम द्रुपदराज को सौंपा।

प्रश्न 7. युद्ध की तैयारियों में कौन लग गए?

उत्तर: विराट, द्रुपद, युधिष्ठिर आदि युद्ध की तैयारियों में लग गए।

प्रश्न 8. कर्ण ने शल्य को क्या बनाया?

उत्तर: कर्ण ने शल्य को अपना सारथी बनाया।

प्रश्न 9. श्रीकृष्ण ने पहले किसे देखा?

उत्तर: श्रीकृष्ण ने पहले अर्जुन को देखा।

प्रश्न 10. अर्जुन ने युद्ध के लिए किसे चुना? 

उत्तर: अर्जुन ने युद्ध के लिए श्रीकृष्ण को चुना।

प्रश्न 11. दुर्योधन ने किसका चुनाव किया?

उत्तर: दुर्योधन ने श्रीकृष्ण की विशाल सेना का चुनाव किया।

प्रश्न 12. मत्र देश के राजा शल्य कौन थे? 

उत्तर: मद्र देश के राजा शल्य नकुल सहदेव की माँ माद्री के भाई थे।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. तेरहवाँ वर्ष पूरा होते ही क्या-क्या परिवर्तन आए?

उत्तर: पांडवों के वनवास का तेरहवाँ वर्ष पूरा होते ही पांडव प्रकट रूप में उपप्लव्य नामक नगर में रहने लगे। वहाँ पांडवों के परिचितों की भीड़ रहने लगी। श्रीकृष्ण, बलराम, सुभद्रा तथा अभिमन्यु भी वहाँ आ गए। सबसे पहले अभिमन्यु का विवाह उत्तरा के साथ संपन्न हुआ। कृष्ण ने कौरवों के पास एक दूत भिजवाने का परामर्श दिया।

प्रश्न 2. श्रीकृष्ण के द्वारका लौटने के उपरांत क्या होने लगा? 

उत्तर: श्रीकृष्ण के द्वारका लौटने के उपरांत पांडवों और कौरवों दोनों ओर से युद्ध की तैयारियाँ होने लगीं।

प्रश्न 3. अर्जुन और दुर्योधन द्वारका किस उद्देश्य से गए?

उत्तर: वे दोनों संभावित युद्ध में श्रीकृष्ण से मदद माँगने के उद्देश्य से गए थे। श्रीकृष्ण ने दोनों की सहायता की।

प्रश्न 4. श्रीकृष्ण को सोता देखकर दुर्योधन और अर्जुन कहाँ बैठे?

उत्तर: दुर्योधन श्रीकृष्ण के सिरहाने एक ऊँचे आसन पर जा बैठा और अर्जुन श्रीकृष्ण के पैताने हाथ जोड़े खड़ा रहा। 

प्रश्न 5. जागने पर श्रीकृष्ण ने उन दोनों के सामने सहायता का प्रस्ताव किस रूप में रखा?

उत्तर: श्रीकृष्ण ने प्रस्ताव रखते हुए कहा- मेरी सारी सेना एक तरफ होगी और दूसरी तरफ अकेला मैं रहूँगा। मेरी प्रतिज्ञा यह भी है कि युद्ध में मैं हथियार नहीं उठाऊँगा।

प्रश्न 6. अर्जुन ने क्या माँगा और दुर्योधन ने क्या माँगा? 

उत्तर: अर्जुन ने अकेले श्रीकृष्ण को माँगा और दुर्योधन ने श्रीकृष्ण की सेना माँग ली।

प्रश्न 7. श्रीकृष्ण ने ‘पार्थसारथी’ की पदवी कैसे प्राप्त की?

उत्तर: श्रीकृष्ण अर्जुन के सारथी बने। अर्जुन को पार्थ कहा जाता है अतः वे ‘पार्थसारथी’ बन गए।

प्रश्न 8. राजा शल्य कौन थे?

उत्तर: राजा शल्य नकुल सहदेव की माँ माद्री के भाई थे। वे पांडवों की सहायता करने के लिए एक भारी सेना लेकर उपप्लव्य की ओर चल दिए।

प्रश्न 9. रास्ते में राजा शल्य कैसे बदल गए?

उत्तर: रास्ते में दुर्योधन ने छल करके राजा शल्य और उसकी सेना का भरपूर सत्कार किया। इसका शल्य पर यह प्रभाव हुआ कि वे अपने भानजों पांडवों को छोड़कर कौरवों की ओर हो गए। बाद वे अपने निर्णय पर पछताए भी, पर वचन दे देने के कारण उन्हीं के लिए लड़े।

प्रश्न 10. राजा शल्य किस कारण दुर्योधन के साथ हो गया?

उत्तर: जब दुर्योधन ने सुना कि राजा शल्य विशाल सेना लेकर पांडवों की मदद के लिए जा रहे हैं तो उसने शल्य को अपनी ओर करने के इरादे से रास्ते में शल्य को हर प्रकार की सुविधा प्रदान की। शल्य पर दुर्योधन के आदर सत्कार का इतना प्रभाव हुआ कि वह भानजों का मोह छोड़कर दुर्योधन के पक्ष में युद्ध करने का वचन दे बैठा।

25. राजदूत संजय

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. उपप्लव्य में रहते हुए पांडवों ने कितनी सेना इकट्ठी की?

उत्तर: उपप्लव्य में रहते हुए पांडवों ने अपने मित्र शासकों को दूतों द्वारा संदेश भेजकर कोई सात अक्षौहिणी सेना इकट्ठी का ली।

प्रश्न 2. युधिष्ठिर की ओर से कौन दूत बनकर राष्ट्र की सभा में पहुँचे?

उत्तर: पांचाल नरेश के पुरोहित युधिष्ठिर के दूत बनकर हस्तिनापुर गए। 

प्रश्न 3. धृतराष्ट्र ने किसे अपना दूत बनाकर पांडवों के पास भेजा?

उत्तर: संजय को दूत बनाकर पांडवों के पास भेजा गया। 

प्रश्न 4. संजय ने युधिष्ठिर के पास जाकर क्या कहा?

उत्तर: उसने कहा-धृतराष्ट्र युद्ध की बात नहीं करना चाहते। वह तो आपकी मित्रता चाहते हैं।

प्रश्न 5. युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण के बारे में क्या कहा? 

उत्तर: युधिष्ठिर ने कहा-श्रीकृष्ण दोनों पक्षों के लोगों के शुभचिंतक हैं। वह जो सुझाव देंगे, वैसा ही मैं करूँगा।

प्रश्न 6. युधिष्ठिर ने क्या माँगा?

उत्तर: युधिष्ठिर ने कहा कि धृतराष्ट्र हमें केवल पाँच गाँव ही दे दें। हम पाँचों भाई इसी में संतोष कर लेंगे।

प्रश्न 7. धृतराष्ट्र ने दुर्योधन को क्या समझाया? 

उत्तर: उन्होंने समझाया-भीष्म पितामह जो कहते हैं, वही करने योग्य है। युद्ध का विचार छोड़कर समझौता कर लो।

प्रश्न 8. दुर्योधन ने धृतराष्ट्र को क्या उत्तर दिया?

उत्तर: मैं तो सुई की नोंक के बराबर भूमि भी पांडवों को नहीं देना चाहता।

प्रश्न 9. श्रीकृष्ण ने क्या सुझाव दिया? 

उत्तर: श्रीकृष्ण ने कहा कि मैंने एक बार स्वयं हस्तिनापुर जाने का निश्चय कर लिया है। 

प्रश्न 10. ‘युधिष्ठिर नहीं चाहते थे कि श्रीकृष्ण हस्तिनापुर जाएँ-क्यों?’ 

उत्तर: क्योंकि युधिष्ठिर को किसी अनहोनी घटित होने की आशंका थी।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. पांचाल नरेश के पुरोहित ने दूत बनकर धृतराष्ट्र की सभा में क्या कहा?

उत्तर: पुरोहित ने पांडवों की ओर से संधि प्रस्ताव करते हुए कहा- युधिष्ठिर का विचार है कि युद्ध से संसार का नाश होगा और इसी कारण वे युद्ध से घृणा करते हैं-वे लड़ना नहीं चाहते। इसलिए न्याय और पहले के समझौते के अनुसार यह उचित होगा कि आप उनका हिस्सा देने की कृपा करें। इसमें विलंब न कीजिए।

प्रश्न 2. भीष्म ने कर्ण को क्या फटकार लगाई?

उत्तर: भीष्म ने कर्ण को फटकार लगाते हुए कहा-राधा-पुत्र! तुम बेकार की बातें कर रहे हो। यदि हम युधिष्ठिर के दूत के कहे अनुसार संधि न करेंगे तो निश्चय ही युद्ध छिड़ जाएगा और उसमें दुर्योधन आदि सबको पराजित होकर मृत्यु के मुँह में जाना पड़ेगा।

प्रश्न 3. धृतराष्ट्र ने संजय कहाँ और किसलिए भेजा? 

उत्तर: धृतराष्ट्र ने संजय को पांडवों के पास इसलिए भेजा ताकि वे युद्ध को टाल सकें। 

प्रश्न 4. संजय की बात सुनकर युधिष्ठिर ने क्या प्रतिक्रिया व्यक्त की?

उत्तर: संजय की बात सुनकर युधिष्ठिर प्रसन्न हो गए। उन्होंने कहा कि युद्ध का विचार करते ही उनका मन घृणा से भर जाता है। यदि हमें अपना राज्य वापस मिल जाए तो हम अपने सारे कष्ट भूल जाएँगे।

प्रश्न 5. संजय के मुँह से युधिष्ठिर की इच्छा जानकर दुर्योधन ने क्या प्रतिक्रिया प्रकट की?

उत्तर: दुर्योधन को लगा कि पांडव कौरवों का सैन्य-बल देखकर घबरा गए हैं। अतः वे आधे राज्य की माँग छोड़कर पाँच गाँव लेने को तैयार हो गए हैं। उसने कहा कि मैं उन्हें सुई की नोंक के बराबर भी जमीन न दूँगा। अब तो फैसला युद्धभूमि में ही होगा।

प्रश्न 6. युधिष्ठिर श्रीकृष्ण को हस्तिनापुर जाने से क्यों रोक रहे थे?

उत्तर: युधिष्ठिर को भय था कि दुर्योधन श्रीकृष्ण के साथ कुछ उल्टा काम न कर बैठे। अतः वे उन्हें हस्तिनापुर जाने से रोक रहे थे।

प्रश्न 7. युधिष्ठिर की शंका को देखते हुए श्रीकृष्ण ने क्या मंतव्य प्रकट किया?

उत्तर: श्रीकृष्ण ने कहा-मैं दुर्योधन से अच्छी तरह परिचित हूँ। फिर भी हमें एक कोशिश अवश्य करनी चाहिए। मैं यह कहने का मौका नहीं देना चाहता कि मैंने शांति स्थापित करने का प्रयास नहीं किया। मेरा वहाँ जाना सही होगा।

26. शांतिदूत श्रीकृष्ण

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. श्रीकृष्ण किस उद्देश्य से हस्तिनापुर पहुँचे?

उत्तर: श्रीकृष्ण शांति वार्तालाप करने के उद्देश्य से हस्तिनापुर पहुँचे।

प्रश्न 2. श्रीकृष्ण हस्तिनापुर क्यों गए? उनके साथ कौन थे?

उत्तर: श्रीकृष्ण शांतिदूत बनकर पांडवों की ओर से हस्तिनापुर गए। उनके साथ सात्यकि भी गए।

प्रश्न 3. रास्ते में श्रीकृष्ण ने कहाँ रात का विश्राम किया?

उत्तर: रास्ते में श्रीकृष्ण ने कुशस्थल नामक स्थान पर एक रात का विश्राम किया।

प्रश्न 4. श्रीकृष्ण के आने की सूचना पाकर धृतराष्ट्र ने क्या आज्ञा दी?

उत्तर: धृतराष्ट्र ने हस्तिनापुर नगर को खूब सजाने की आज्ञा दी।

प्रश्न 5. दुःशासन का भवन कैसा था?

उत्तर: दुःशासन का भवन दुर्योधन के भवन से अधिक ऊँचा और सुंदर था।

प्रश्न 6. हस्तिनापुर पहुँचकर श्री कृष्ण पहले कहाँ गए फिर बाद में कहाँ?

उत्तर: पहले श्रीकृष्ण धृतराष्ट्र के भवन में गए फिर विदुर के भवन में।

प्रश्न 7. दुर्योधन के भोजन के निमंत्रण पर श्रीकृष्ण ने क्या उत्तर दिया?

उत्तर: मैं पहले जिसे उद्देश्य आया हूँ वह पूर्ण हो जाए तब तुम्हारा भोजन का निमंत्रण देना ठीक रहेगा।

प्रश्न 8. विदुर ने श्रीकृष्ण को क्या सलाह दी? 

उत्तर: विदुर ने कहा- दुर्योधन की सभा में आपका जाना ठीक नहीं है।

प्रश्न 9. विदुर की शंका का निवारण करते हुए श्रीकृष्ण ने क्या उत्तर दिया?

उत्तर: श्रीकृष्ण ने कहा- “मेरे प्राणों की चिंता आप कदापि न करें। ” 

प्रश्न 10. श्रीकृष्ण को सभा में किस बात पर हँसी आ गई?

उत्तर: सभा में जब दुर्योधन स्वयं को निर्दोष सिद्ध करने का प्रयत्न करने लगा तब श्रीकृष्ण को हँसी आ गई।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. श्रीकृष्ण हस्तिनापुर में कहाँ-कहाँ गए? 

उत्तर: श्रीकृष्ण हस्तिनापुर पहुँचकर पहले धृतराष्ट्र के भवन में गए। फिर धृतराष्ट्र से विदा लेकर वह विदुर के भवन में गए। कुंती वहीं कृष्ण की प्रतीक्षा में बैठी थीं। श्रीकृष्ण को देखते ही उन्हें अपने पुत्रों का स्मरण हो आया। श्रीकृष्ण ने उन्हें मीठे वचनों से सांत्वना दी और उनसे विदा लेकर दुर्योधन के भवन में गए। 

प्रश्न 2. वासुदेव के सभा में आते ही क्या हुआ? उन्होंने सभा के सामने क्या माँग रखी?

उत्तर: वासुदेव के सभा में प्रविष्ट होते ही सभी सभासद उठ खड़े हुए। श्रीकृष्ण ने बड़ों को विधिवत् नमस्कार किया और आसन पर बैठे। राजदूत एवं संभ्रांत अतिथि सा उनका सत्कार किया गया। इसके बाद श्रीकृष्ण उठे और पांडवों की माँग सभा के सामने रखी और फिर धृतराष्ट्र की ओर देखकर बोले-“राजन्, पांडव शांतिप्रिय हैं, परंतु साथ ही यह भी समझ लीजिए कि वे युद्ध के लिए भी तैयार हैं। पांडव आपको पितास्वरूप मानते हैं। और ऐसा उपाय करें जिससे आप भाग्यशाली बनें।”

यह सुनकर धृतराष्ट्र ने कहा-“सभासदो। मैं भी वही चाहता हूँ जो श्रीकृष्ण को प्रिय है।”

प्रश्न 3. श्रीकृष्ण ने दुर्योधन से क्या कहा?

उत्तर: श्रीकृष्ण दुर्योधन से बोले- “मैं इतना ही कहना चाहता हूँ कि पांडवों को आधा राज्य लौटा दो और उनके साथ संधि कर लो। यदि यह बात हो गई तो स्वयं पांडव तुम्हें युवराज और धृतराष्ट्र को महाराज के रूप में सहर्ष स्वीकार कर लेंगे।”

प्रश्न 4. दुःशासन ने क्या आशंका प्रकट की? 

उत्तर: दुःशासन क्रुद्ध हो उठा और दुर्योधन से बोला- “भाई, मालूम होता है, ये लोग आपको कैद करके कहीं पांडवों के हवाले न कर दें। इसलिए चलिए, यहाँ से निकल चलें।” इस पर दुर्योधन उठा और अपने भाइयों के साथ सभा से बाहर चला गया।

प्रश्न 5. दुर्योधन ने क्या षड्यंत्र रचा?

उत्तर: दुर्योधन ने अपने साथियों के साथ मिलकर एक षड्यंत्र रचा और राजदूत श्रीकृष्ण को पकड़ने का प्रयत्न किया। श्रीकृष्ण ने तो पहले ही से इन बातों की कल्पना कर ली थी। दुर्योधन की यह चेष्टा देखकर वह हँस पड़े। श्रीकृष्ण उठे। सात्यकि और विदुर उनके दोनों ओर हो गए। सब सभासदों से विधिवत् आज्ञा ली और सभा से चलकर सीधे कुंती के पास पहुँचे और उनको सभा का सारा हाल कह सुनाया।

प्रश्न 6. कुंती अपने पुत्रों की सुरक्षा पर विचार करते हुए कहाँ जा पहुँची?

उत्तर: चिंता के कारण आकुल हो रही कुंती अपने पुत्रों की सुरक्षा का विचार करती हुई गंगा के किनारे पहुँची, जहाँ कर्ण रोज संध्या वंदन किया करता था। मध्याह्न के बाद कर्ण का जप पूरा हुआ तो उसे यह जानकर असीम आश्चर्य हुआ कि महाराज पांडु की पत्नी और पांडवों की माता कुंती ही उसका उत्तरीय सिर पर लिए खड़ी है। 

प्रश्न 7. कुंती ने कर्ण को क्या रहस्य बताया?

उत्तर: कुंती ने गद्गद स्वर में कर्ण को रहस्य बताते हुए कहा-“कर्ण ! यह न समझो कि तुम केवल सूत पुत्र ही हो न तो राधा तुम्हारी माँ है, न अधिरथ तुम्हारे पिता। तुमको जानना चाहिए कि राजकुमारी पृथा की कोख में सूर्य के अंश से तुम उत्पन्न हुए हो।” थोड़ा सुस्ताने के बाद वह फिर बोली- “बेटा! दुर्योधन के पक्ष में होकर अपने भाइयों से ही शत्रुता कर रहे हो। धृतराष्ट्र के लड़कों के आश्रित रहना तुम्हारे लिए अपमान की बात है। तुम अर्जुन के साथ मिल जाओ, वीरता से लड़ो और राज्य प्राप्त करो। वे भी तुम्हारे अधीन रहेंगे और तुम उनसे घिरे हुए प्रकाशमान होओगे।”

प्रश्न 8. कर्ण ने माता कुंती को क्या उत्तर दिया?

उत्तर: कर्ण माता कुंती का यह अनुरोध सुनकर बोला- “माँ! यदि इस समय मैं दुर्योधन का साथ छोड़कर पांडवों की तरफ चला गया तो लोग ही मुझे कायर कहेंगे। अब, जब युद्ध सामने आ गया है, तो उनको मंझधार में कैसे छोड़ जाऊँ? यह कैसी तुम्हारी सलाह है? आज मेरा कर्तव्य यही है कि मैं पांडवों के विरुद्ध सारी शक्ति लगा कर लहूँ। मैं तुमसे असत्य क्यों बोलूँ? मुझे क्षमा कर दो। लेकिन हाँ, तुम्हारी भी बात एकदम व्यर्थ न होगी। अब मैं यह करूँगा कि अर्जुन को छोड़कर और किसी पांडव के प्राण नहीं लूँगा। या तो अर्जुन इस युद्ध में काम आएगा, या मैं काम से जाऊँगा। दोनों में से एक को तो मरना ही पड़ेगा। दूसरे चारों मुझे चाहे कितना भी तंग करें, मैं उनको नहीं मारूँगा। माँ, तुम्हारे तो पाँच पुत्र हर हालत में रहेंगे- चाहे मैं मर जाऊँ, चाहे अर्जुन। हम दोनों में से एक बचेगा और बाकी चार तो रहेंगे ही। तुम चिंता न करो।”

27. पांडवों और कौरवों के सेनापति

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. युधिष्ठिर ने अपने भाइयों से क्या कहा?

उत्तर: युधिष्ठिर ने अपने भाइयों से कहा-अब सेना सुसज्जित करो और व्यूह रचना सुचारू रूप से कर लो। 

प्रश्न 2. पांडवों की सेना को कितने हिस्सों में बाँटा गया?

उत्तर: पांडवों की सेना को सात हिस्सों में बाँटा गया।

प्रश्न 3. पांडवों ने अपनी सेना का सेनापति किसे बनाया?

उत्तर: पांडवों ने अपनी सेना का सेनापति कुमार धृष्टद्युम्न को बनाया।

प्रश्न 4. कौरव सेना के पहले सेनापति कौन बने? 

उत्तर: कौरव सेना के पहले सेनापति भीष्म पितामह बने।

प्रश्न 5. इस युद्ध के समय कौन से दो राजा तटस्थ रहे? 

उत्तर: एक बलराम तथा दूसरे भोजकट के राजा रुक्मी।

प्रश्न 6. रुक्मी ने स्वयं को अपमानित क्यों महसूस किया?

उत्तर: रुक्मी की सैन्य सहायता को पांडवों व कौरवों दोनों ने ठुकरा दिया था।

प्रश्न 7. युद्ध से पूर्व दोनों पक्षों के वीरों ने क्या किया? 

उत्तर: कानून के अनुसार दोनों पक्ष के वीरों ने युद्ध-नीति पर चलने की प्रतिज्ञाएँ ली। 

प्रश्न 8. युधिष्ठिर ने अर्जुन को क्या आज्ञा दी?

उत्तर: युधिष्ठिर ने अर्जुन को सेना को सूची-मुख (सुई की नोक को समान) व्यूह में सज्जित करने की आज्ञा दी। 

प्रश्न 9. अर्जुन के भ्रम को दूर करने के लिए श्रीकृष्ण ने क्या किया?

उत्तर: अर्जुन के भ्रम को दूर करने के लिए श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को कर्मयोग का उपदेश दिया।

प्रश्न 10. युधिष्ठिर रथ से उतरकर अचानक किघर चल दिए?

उत्तर: युधिष्ठिर अपना कवच और धनुष-बाण उतारकर, रथ पर रखकर अचानक कौरव सेना की ओर चल पड़े। 

प्रश्न 11. युधिष्ठिर ने युद्ध प्रारंभ करने से पूर्व किस-किससे आशीर्वाद लिया? 

उत्तर: युधिष्ठिर ने युद्ध प्रारंभ करने से पूर्व भीष्म पितामह, आचार्य द्रोण, कृपाचार्य और शल्य का आशीर्वाद लिया।

प्रश्न 12. दुर्योधन से कौन जा भिड़ा? 

उत्तर: दुर्योधन से भीमसेन जा भिड़ा।

प्रश्न 13. आचार्य द्रोण पर किसने आक्रमण बोला?

उत्तर: आचार्य द्रोण पर धृष्टद्युम्न ने आक्रमण बोला। 

प्रश्न 14. सत्रहवें दिन की लड़ाई में कौन मारा गया? 

उत्तर: सत्रहवें दिन की लड़ाई में कर्ण मारा गया। 

प्रश्न 15. कर्ण के बाद कौरवों का सेनापति कौन बना?

उत्तर: शल्य कौरव सेना का सेनापति बना।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. कर्ण ने क्या हठकर लिया था? 

उत्तर: कर्ण ने हठकर लिया कि जब तक भीष्म जीवित रहेंगे, तब तक वह युद्ध-भूमि में प्रवेश नहीं करेगा। भीष्म के मारे जाने के बाद ही वह लड़ाई में भाग लेगा और केवल अर्जुन को ही मारेगा। दुर्योधन ने सब सोचकर भीष्म की शर्त मान ली और उन्हीं को सेनापति नियुक्त किया। फलतः कर्ण तब तक के लिए युद्ध से विरत रहा।

प्रश्न 2. बलराम ने पांडवों की छावनी में आकर क्या कहा?

उत्तर: इधर युद्ध की तैयारियाँ हो रही थीं और उधर एक रोज बलराम पांडवों की छावनी में एकाएक जा पहुँचे। बलरामजी ने अपने बड़े-बूढ़े-विराटराज और द्रुपदराज को विधिवत् प्रणाम किया और धर्मराज के पास बैठ गए। वह बोले- “कितनी ही बार मैंने कृष्ण को कहा कि हमारे लिए तो पांडव और कौरव-दोनों ही एक समान हैं। इसमें हमें बीच में पड़ने की आवश्यकता नहीं, पर कृष्ण ने मेरी नहीं मानी। अर्जुन के प्रति उसका इतना स्नेह है कि उसने तुम्हारे पक्ष में रहकर युद्ध करना भी स्वीकार किया और जिस तरफ कृष्ण हो, उसके विपक्ष में मैं भला कैसे जाऊँ? भीम और दुर्योधन-दोनों ने ही मुझसे गदा-युद्ध सीखा है। दोनों ही मेरे शिष्य हैं। दोनों पर मेरा एक जैसा प्यार है। इन दोनों कुरुवंशियों को यों आपस में लड़ते-मरते देखकर मुझसे नहीं रहा जाता। लड़ो तुम लोग, पर यह सब देखने को मैं यहाँ नहीं रह सकता। मुझे अब संसार से विराग हो गया है। अतः मैं जा रहा हूँ।”

प्रश्न 3. रुक्मी ने अर्जुन के सामने क्या प्रस्ताव रखा? उस पर अर्जुन ने क्या उत्तर दिया?

उत्तर: कुरुक्षेत्र में होने वाले युद्ध के समाचार सुनकर रुक्मी एक अक्षौहिणी सेना लेकर युद्ध में सम्मिलित होने को गया। उसने सोचा कि यह अवसर वासुदेव की मित्रता प्राप्त कर लेने के लिए ठीक होगा। इसलिए वह पांडवों के पास पहुँचा और अर्जुन से बोला- “पांडुपुत्र ! आपकी सेना से शत्रु-सेना कुछ अधिक मालूम होती है। इसी कारण मैं आपकी सहायता करने आया हूँ।”

यह सुनकर अर्जुन हँसते हुए रुक्मी से बोला-“राजन् ! आप बिना शर्त के सहायता करना चाहते हो तो आपका स्वागत है। नहीं तो आपकी जैसी इच्छा।” 

प्रश्न 4. श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्मयोग का उपदेश कब दिया?

उत्तर: जब दोनों पक्षों की सेनाओं की व्यूह रचना हो गई। अर्जुन ने युद्ध के लिए तैयार हुए वीरों को देखा तो उसके मन में शंका हुई कि हम यह क्या करने जा रहे हैं। उसने अपनी यह शंका श्रीकृष्ण पर प्रकट की और तब अर्जुन के इस भ्रम को दूर करने के लिए श्रीकृष्ण ने जिस कर्मयोग का उपदेश दिया, वह तो विश्वविख्यात है।

प्रश्न 5. युद्ध शुरू होने से पहले लोगों ने क्या दृश्य देखा?

उत्तर: सब लोग इसी की राह देख रहे थे कि कब युद्ध शुरू हो, पर एकाएक पांडव सेना के बीच में हलचल मच गई। युधिष्ठिर ने अचानक अपना कवच और धनुष-बाण उतार कर रथ पर रख दिया और रथ से उतरकर हाथ जोड़े कौरव सेना की हथियारबंद पंक्तियों को चीरते हुए भीष्म की ओर पैदल चले गए। बिना सूचना दिए उनको इस प्रकार जाते देखकर दोनों ही पक्षवाले अचंभे में आ गए।

शत्रु सेना के हथियारबंद वीरों की कतार को चीरते हुए युधिष्ठिर सीधे पितामह भीष्म के पास पहुँचे और झुककर उनके चरण छुए। फिर बोले—“पितामह ! हमने आपके साथ लड़ने का दुःसाहस कर ही लिया । कृपया हमें युद्ध की अनुमति दीजिए और आशीर्वाद भी कि हम युद्ध में विजय प्राप्त करें।”

प्रश्न 6. कौरवों की सेना में कौन-कौन सेनापति बने?

उत्तर: भीष्म के नेतृत्व में कौरव वीरों ने दस दिन तक युद्ध किया। दस दिन के बाद भीष्म आहत हुए और द्रोणाचार्य सेनापति नियुक्त किए गए। द्रोणाचार्य भी जब खेत रहे तो कर्ण को सेनापतित्व ग्रहण करना पड़ा। सत्रहवें दिन की लड़ाई में कर्ण का भी स्वर्गवास हो गया। इसके बाद शल्य ने कौरवों का सेनापति बनकर सेना का संचालन किया। इस प्रकार महाभारत का युद्ध कुल अठारह दिन चला।

28. पहला, दूसरा और तीसरा दिन

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. कौरवों की सेना के अग्रभाग पर सामान्यतया कौन रहता था?

उत्तर: अग्रभाग पर सामान्यतया दुःशासन ही रहा करता था।

प्रश्न 2. पहले दिन की लड़ाई के बाद घबराहट में पांडव किसके पास गए?

उत्तर: पांडव घबराहट में श्रीकृष्ण के पास गए।

प्रश्न 3. कौरव सेना में अर्जुन की मुकाबला करने वाले वीर कौन-कौन थे?

उत्तर: ऐसे तीन वीर थे-भीष्म, द्रोण और कर्ण।

प्रश्न 4. धृष्टद्युम्न किसका जन्म से बैरी था?

उत्तर: द्रोणाचार्य का।

प्रश्न 5. घायल दुर्योधन को किसने बचाया? 

उत्तर: घायल दुर्योधन को कृपाचार्य ने बड़ी चतुराई से बचा लिया।

प्रश्न 6. सात्यकि द्वारा छोड़े बाण ने किसको स्वर्ग पहुँचाया?

उत्तर: उस बाण ने भीष्म के सारथी को स्वर्ग पहुँचाया। 

प्रश्न 7. दुर्योधन किसके बाण से धक्का खाकर बेहोश हो गया?

उत्तर: भीमसेन द्वारा चलाए बाण से दुर्योधन जोर का धक्का खाकर बेहोश हो गया। 

प्रश्न 8. भीष्म के छोड़े गए बाण किसके शरीर पर लग गए? 

उत्तर: भीष्म के कई बाण अर्जुन और श्रीकृष्ण के शरीर पर लग गए।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. पहले दिन की लड़ाई में क्या हुआ?

उत्तर: पहले दिन की लड़ाई में पांडव सेना की जो दुर्गति हुई उससे सबक लेकर पांडव सेना के नायक धृष्टद्युम्न ने दूसरे दिन बड़ी सतर्कता के साथ व्यूह-रचना की और सैनिकों का साहस बँधाया।

प्रश्न 2. कौरव सेना में कौन-कौन वीर अर्जुन का मुकाबला कर सकते थे? भीष्म-अर्जुन युद्ध का वर्णन करो। 

उत्तर: सारी कौरव-सेना में तीन ही ऐसे वीर थे, जो अर्जुन का मुकाबला कर सकते थे-भीष्म, द्रोण और कर्ण। सारे कौरव-वीरों को अपना प्रतिरोध करते देख अर्जुन ने अपना गांडीव धनुष हाथ में लेकर इस कुशलता से युद्ध किया कि कौरव सेना के सभी महारथी देखकर दंग रह गए। भीष्म ने अर्जुन पर जोरों से हमला कर दिया। इस प्रकार अर्जुन और भीष्म के बीच बड़ी देर तक युद्ध होता रहा। फिर भी हार-जीत का कोई निर्णय न हो सका। एक ओर यह अद्भुत युद्ध हो रहा था, दूसरी ओर द्रुपद के पुत्र धृष्टद्युम्न, जो द्रोणाचार्य के जन्म के बैरी थे, आचार्य के साथ भिड़े हुए थे।

प्रश्न 3. सात्यकि ने क्या कर दिखाया? 

उत्तर: सात्यकि के चलाए गए एक बाण ने भीष्म के सारथी को मार गिराया। सारथी के गिर जाने पर घोड़े हवा से बातें करते हुए अत्यंत वेग से भाग खड़े हुए। इससे कौरव-सेना में बड़ी तबाही मची। सब कौरव वीर पश्चिम की ओर देख-देख कर यह मनाने लगे कि कब सूर्यास्त हो और युद्ध बंद हो, ताकि इस तबाही से मुक्ति मिले।

प्रश्न 4. भीम के बाण ने दुर्योधन का क्या हाल कर दिया?

उत्तर: भीमसेन के चलाए एक बाण से दुर्योधन ज़ोर का धक्का खाकर बेहोश हो गया और रथ पर गिर पड़ा। यह देख उसके सारथी ने सोचा कि दुर्योधन को लड़ाई के मैदान से हटा लिया जाए, जिससे कौरव सेना को दुर्योधन के मूच्छित होने का पता न चले। इन्हीं विचारों से प्रेरित होकर सारथी जल्दी से रथ को युद्ध भूमि से हटाकर छावनी की ओर ले गया, किंतु उसने जो सोचा था, हुआ उससे उलटा ही। वही उसके अनुशासन के टूटने और सेना में खलबली मच जाने का कारण बन गया। सैनिकों में भगदड़ मच गई।

प्रश्न 5. भीष्म के हमले का क्या असर देखने को मिला?

उत्तर: भीष्म ने ऐसा भयानक हमला किया कि पांडव सेना के पाँव उखड़ गए। श्रीकृष्ण, अर्जुन और शिखंडी के प्रयत्नों के बावजूद सेना अनुशासन न रख सकी। भीष्म के चलाए हुए कई बाण अर्जुन एवं श्रीकृष्ण के शरीर पर लग ही गए। इस पर श्रीकृष्ण को असीम क्रोध हो आया। उनसे न रहा गया। उन्होंने खुद भीष्म को मारने की ठानी। अर्जुन यह देखकर सन्न रह गया। उसने सोचा कि यह तो बड़ा अनर्थ हो जाएगा। वह रथ से उतरा और श्रीकृष्ण के पीछे भागा। अर्जुन के आग्रह पर श्रीकृष्ण वापस लौट कर फिर से अर्जुन का रथ हाँकने लगे। श्रीकृष्ण के इस कार्य से अर्जुन उत्तेजित हो उठा और कौरव सेना पर वह मानो वज्र के समान गिरा और शाम होते-होते कौरव-सेना बड़ी बुरी तरह से हार गई। थकी-हारी सेना मशालों की रोशनी में अपने शिविरों को लौट चली।

29. चौथा, पाँचवाँ और छठा दिन

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. चौथे दिन की लड़ाई में कौन मारा गया?

उत्तर: चौथे दिन की लड़ाई में शल्य का पुत्र मारा गया। 

प्रश्न 2. घटोत्कच के क्रोध का ठिकाना क्यों न रहा? 

उत्तर: जब घटोत्कच ने देखा कि उसके पिता भीम की छाती में दुर्योधन ने भीषण अस्त्र चलाकर उनको मूच्छित कर दिया तब घटोत्कच के क्रोध का ठिकाना न रहा।

प्रश्न 3. भीष्म ने युद्ध क्यों बंद कर दिया? 

उत्तर: घटोत्कच ने इतना भयंकर युद्ध किया था कि उसके आगे कौरव सेना टिक न सकी। सेना को विह्वल होती देखकर भीष्म ने युद्ध बंद कर दिया।

प्रश्न 4. कौन, कहाँ का आँखों देखा हाल किसे सुना रहा था?

उत्तर: संजय कुरुक्षेत्र के मैदान में हो रहे युद्ध का आँखों देखा हाल धृतराष्ट्र को सुना रहा था।

प्रश्न 5. छठे दिन के युद्ध में क्या हुआ?

उत्तर: छठे दिन के युद्ध में भारी जन-हानि हुई। उस दिन के अंत में द्रोण ने जो भयंकर तबाही मचाई उससे पांडव सेना के पाँव उखड़ गए।

30. सातवाँ, आठवाँ और नवाँ दिन

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. सातवें दिन के युद्ध की क्या विशेषता थी? 

उत्तर: सातवें दिन के युद्ध की यह विशेषता थी कि वह एक स्थान पर केंद्रित न रहकर अनेक मोर्चों पर लड़ा जा रहा था।

प्रश्न 2. सातवें दिन के युद्ध में किसे प्राण त्यागने पड़े? 

उत्तर: सातवें दिन के युद्ध में कुमार शंख के पिता ने देखते-देखते प्राण त्याग दिए।

प्रश्न 3. युधिष्ठिर का किसके साथ द्वंद्व हो रहा था? 

उत्तर: युधिष्ठिर का श्रुतायु के साथ द्वंद्व हो रहा था।

प्रश्न 4. आठवें दिन के युद्ध में भीमसेन ने क्या किया? 

उत्तर: भीमसेन ने धृतराष्ट्र के आठ बेटों को मार गिराया। 

प्रश्न 5. नवें दिन के युद्ध में किस-किसमें घोर संग्राम छिड़ा?

उत्तर: नवें दिन के युद्ध में अभिमन्यु और अलंबुष में घोर संग्राम छिड़ गया।

प्रश्न 6. आठवें दिन के युद्ध में अर्जुन क्यों शोक विह्वल हो उठा?

उत्तर: इस युद्ध में अर्जुन का लाड़ला, साहसी और वीर बेटा इरावान मारा गया। वह एक नागकन्या से उत्पन्न हुआ था।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. सातवें दिन के प्रमुख मोर्चों का वर्णन करो। 

उत्तर: सातवें दिन के प्रमुख मोर्चे ये थे:

1. अर्जुन के विरुद्ध भीष्म डटे थे।

2. द्रोणाचार्य और विराटराज में युद्ध।

3. शिखंडी और अश्वत्थामा में युद्ध।

4. नकुल-सहदेव अपने मामा शल्य पर बाण वर्षा कर रहे थे।

5. दुर्योधन के चार भाइयों की खबर अकेला भीमसेन ले रहा था।

6. युधिष्ठिर की श्रुतायु से टक्कर थी।

7. कृपाचार्य और चेकिस्तान भिड़े हुए थे।

प्रश्न 2. आठवें दिन के युद्ध की प्रमुख बातें बताइए।

उत्तर: आठवें दिन के युद्ध के पहले धावे में भीमसेन ने धृतराष्ट्र के आठ बेटों को मार गिराया। इसी दिन अर्जुन का लाड़ला व वीर बेटा इरावान भी मारा गया। इरावान को मरा देखकर भीम के बेटे घटोत्कच ने इतनी भीषण गर्जना की कि कौरव सेना में प्रलय मचने लगी।

31. भीष्म शर-शय्या पर

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. दसवें दिन के युद्ध में अर्जुन ने किसकी आड़ लेकर किस पर तीर बरसाए?

उत्तर: अर्जुन ने शिखंडी की आड़ लेकर भीष्म पितामह पर तोर  बरसाए। 

प्रश्न 2. भीष्म ने अर्जुन पर क्या चलाया?

उत्तर: भीष्म ने अर्जुन पर शक्ति-अस्त्र चलाया।

प्रश्न 3. भीष्म का शरीर भूमि से क्यों नहीं लगा?

उत्तर: भीष्म के सारे शरीर में बाण घुसे हुए थे। अत: भीष्म का शरीर बाणों पर टिककर भूमि से ऊपर ही रहा।

प्रश्न 4. भीष्म ने कब तक शरीर नहीं त्यागा?

उत्तर: जब तक सूर्यनारायण उत्तरायण नहीं हो गए तब तक भीष्म ने शरीर नहीं त्यागा। 

प्रश्न 5. भीष्म ने मृत्यु-शय्या पर पड़े हुए कर्ण को क्या सलाह दी?

उत्तर: कर्ण से कहा तुम पांडवों में सबसे बड़े हो, अतः उनसे मित्रता कर लो।

प्रश्न 6. भीष्म के बाद कौरवों ने किसे अपना सेनापति बनाया?

उत्तर: भीष्म के बाद कौरवों ने द्रोणाचार्य को अपना सेनापति बनाया।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. दसवें दिन के युद्ध में पांडवों ने किसको आगे किया और क्यों?

उत्तर: दसवें दिन के युद्ध में पांडवों ने शिखंडी को आगे किया। शिखंडी की आड़ से अर्जुन ने भीष्म पर बाण बरसाए। भीष्म शिखंडी के बाणों का उत्तर नहीं देते थे।

प्रश्न 2. भीष्म को कब ऐसा निश्चय हो गया कि आज का युद्ध उनका आखिरी युद्ध होगा? 

उत्तर: भीष्म ने अर्जुन पर शक्ति-अस्त्र चलाया था। अर्जुन ने उसे तीन बाणों से काट दिया था। इससे भीष्म को निश्चय हो गया कि आज का युद्ध उनका अंतिम युद्ध होगा।

प्रश्न 3. युद्ध में भीष्म की क्या दशा हुई?

उत्तर: युद्ध में भीष्म के शरीर में इतने बाण चुभ गए थे कि शरीर में उँगली रखने को जगह न बची। ऐसी अवस्था में वे रथ से सिर के बल ज़मीन पर गिर पड़े।

अन्य आवश्यक प्रश्न

प्रश्न 1. भीष्म ने घायलावस्था में अर्जुन से क्या काम करने को कहा?

उत्तर: भीष्म ने घायलावस्था में अर्जुन से दो काम करने को कहा:

1. अपने लटकते सिर के नीचे सहारा लगाने को कहा। अर्जुन ने अपने तरकश से तीन तेज बाण निकालकर पितामह भीष्म के नीचे तकिये की तरह लगा दिए।

2. भीष्म को प्यास लग रही थी। अर्जुन ने पृथ्वी में एक तीर मारकर पानी की धार निकालकर भीष्म के मुँह तक पहुँचा दी! उनकी प्यास बुझ गई।

प्रश्न 2. मरते समय भीष्म ने कर्ण से क्या कहा?

उत्तर: भीष्म चुभे हुए बाणों से होने वाले कष्ट को दबाकर बोले- “बेटा, तुम राधा के पुत्र नहीं, कुंती के पुत्र हो । सूर्यपुत्र ! मैंने तुमसे द्वेष नहीं किया। अकारण ही तुमने पांडवों से वैर रखा। इसी कारण तुम्हारे प्रति मेरा मन मलिन हुआ। तुम्हारी दानवीरता और शूरता से मैं भली-भाँति परिचित हूँ। इसमें कोई संदेह नहीं कि शूरता में तुम कृष्ण और अर्जुन की बराबरी कर सकते हो। तुम पांडवों के जेठे हो। इस कारण तुम्हारा कर्तव्य है कि तुम उनसे मित्रता कर लो। मेरी यही इच्छा है कि युद्ध में मेरे सेनापतित्व के साथ-ही-साथ पांडवों के प्रति तुम्हारे वैर-भाव का भी आज ही अंत हो जाए।”

प्रश्न 3. भीष्म की बात सुनकर कर्ण ने क्या उत्तर दिया?

उत्तर: पितामह भीष्म की बातें सुनकर कर्ण बड़ी नम्रता के साथ बोला- “पितामह ! मैं जानता हूँ कि मैं कुंती का पुत्र हूँ। यह भी मुझे मालूम है कि मैं सूत पुत्र नहीं हूँ। यह बात मुझसे नहीं हो सकती कि अब मैं दुर्योधन का साथ छोड़ दूँ और उनके शत्रुओं “से जा मिलूँ। मेरा कर्तव्य यही है कि दुर्योधन के ही पक्ष में रह कर युद्ध करूँ। आप कृपया मुझे इस बात की अनुमति दें कि मैं दुर्योधन की तरफ से लहूँ। मैंने जो कुछ किया या कहा, उसमें जितने दोष हों, उसके लिए मुझे क्षमा कर दें।”

प्रश्न 4. युधिष्ठिर को जीवित पकड़ लेने में दुर्योधन का क्या उद्देश्य था?

उत्तर: दुर्योधन को यह भी पता चल गया था कि युधिष्ठिर का वध करने से कोई लाभ नहीं हो सकता। उल्टे, यदि युधिष्ठिर को जिन्दा ही पकड़ लिया जाए तो युद्ध भी शीघ्र ही बंद हो जाएगा और जीत भी कौरवों की होगी। थोड़ा राज्य युधिष्ठिर को देने का बहाना करना होगा, सो वह कर देंगे और बाद में फिर जुआ खेल कर सहज ही उसे वापस छीन भी लेंगे। इन्हीं सब विचारों से प्रेरित होकर दुर्योधन ने द्रोणाचार्य से युधिष्ठिर को जीवित पकड़ लाने का अनुरोध किया था। लेकिन द्रोण को जब दुर्योधन के असली उद्देश्य का पता लगा तो वह बहुत उदास हो गए। इससे उसके मन में दुर्योधन के प्रति तीव्र घृणा उत्पन्न हो गई। मन-ही-मन यह सोच कर उन्होंने संतोष मान लिया कि युधिष्ठिर के प्राण न लेने का कोई-न-कोई बहाना तो मिला ही।

प्रश्न 5. युधिष्ठिर को जीवित पकड़े जाने की योजना का क्या हुआ?

उत्तर: अर्जुन के हमले के कारण द्रोणाचार्य को पीछे हटना पड़ा। युधिष्ठिर को जीवित पकड़ने का उनका प्रयत्न विफल हो गया और संध्या होते-होते उस दिन का युद्ध भी बंद हो गया। कौरव-सेना में भय छा गया। पांडव-सेना के वीर शान से अपने-अपने शिविर को लौट चले। सैन्य-समूह के पीछे-पीछे चलते हुए कृष्ण और अर्जुन अपने शिविर में जा पहुँचे। इस प्रकार ग्यारहवें दिन का युद्ध समाप्त हुआ।

32. बारहवाँ दिन

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. बारहवें दिन के युद्ध के लिए कौरवों ने क्या निश्चय किया?

उत्तर: यह निश्चय किया गया कि अर्जुन को युद्ध के लिए चुनौती दी जाए और उसे युधिष्ठिर से दूर ले जाया जाए। 

प्रश्न 2. बारहवें दिन के युद्ध में क्या अफवाह फैल गई थी?

उत्तर: बारहवें दिन के युद्ध में यह अफवाह फैल गई कि भगदत्त के हाथी ने भीमसेन को मार दिया।

प्रश्न 3. अर्जुन कहाँ किससे लड़ रहा था?

उत्तर: अर्जुन दूर संशप्तकों से लड़ रहा था।

प्रश्न 4. भगदत्त ने किस पर बाण छोड़ने आरंभ किए?

उत्तर: भगदत्त ने अर्जुन और श्रीकृष्ण पर बाण छोड़ने आरंभ कर दिए।

प्रश्न 5. अर्जुन ने गुस्से में भगदत्त से क्या कहा?

उत्तर: भगदत्त, अब इस दुनिया को आखिरी बार अच्छी तरह से देख लो।

प्रश्न 6. अर्जुन ने भगदत्त का क्या हाल कर दिया? 

उत्तर: अर्जुन ने भगदत्त के नाजुक स्थानों पर बाण चला कर उन्हें छेद डाला, उसकी रेशमी पट्टी काट डाली।

प्रश्न 7. अर्जुन के बाणों का शकुनि पर क्या असर हुआ?

उत्तर: अर्जुन के बाणों से शकुनि ऐसा घायल हुआ कि उसे युद्ध-क्षेत्र से भाग जाना पड़ा।

प्रश्न 8. सूर्यास्त होते ही युद्ध का क्या हुआ?

उत्तर: सूर्यास्त होते ही युद्ध बंद हो गया। दोनों पक्षों की सेनाएँ अपने-अपने डेरों को चल दीं।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. भगदत्त ने अर्जुन पर कैसे वार किया? 

उत्तर: भगदत्त ने हाथी पर सवार होकर अर्जुन और श्रीकृष्ण दोनों पर तीर बरसाने शुरू किए। भगदत्त ने अर्जुन पर तोमर वार चलाया। तोमर अर्जुन के मुकुट पर जा लगा। 

प्रश्न 2. अर्जुन ने भगदत्त का काम कैसे तमाम किया?

उत्तर: अर्जुन ने अपने गांडीव से भगदत्त पर बाण चलाए। इससे भगदत्त का धनुष टूट गया और तरकश का भी बुरा हाल हुआ। फिर अर्जुन ने भगदत्त के मर्मस्थलों पर बाणों की चोटकर छेद डाला। अर्जुन के तेज बाणों से भगदत्त की आँखों के ऊपर बंधी रेशम की पट्टी कट गई जो उसकी आँखों के ऊपर लटक आने वाली चमड़ी को ऊपर रखती थी। इससे भगदत्त की आँखें बंद हो गई। उसे कुछ नहीं सूझने लगा। वह अँधेरे में मानो विलीन हो गया। थोड़ी ही देर बाद एक और पैने बाण ने उसकी छाती छेद डाली। भगदत्त को गिरते देखकर कौरवों की सेना मारे भय के तितर-बितर हो गई।

प्रश्न 3. शकुनि के दो भाई कौन थे? उनके मारे जाने पर शकुनि की क्या प्रतिक्रिया हुई?

उत्तर: शकुनि के दो भाई थे-वृषक और अचक। अर्जुन ने उन दोनों को मार डाला। अपने अनुपम वीर भाइयों के मारे जाने पर शकुनि के क्रोध और क्षोभ की सीमा न रही। उसने युद्ध शुरू कर दिया और उन सब उपायों से काम लिया जिनमें उसे कुशलता प्राप्त थी परंतु अर्जुन ने उसके एक-एक अस्त्र को अपने जवाबी अस्त्रों से काट डाला। अंत में अर्जुन के बाणों से शकुनि ऐसा आहत हुआ कि उसे युद्ध क्षेत्र से हट जाना पड़ा।

प्रश्न 4. बारहवें दिन के युद्ध के अंत में क्या हुआ? 

उत्तर: बारहवें दिन के बाद युद्ध के अंत में पांडवों की सेना द्रोणाचार्य की सेना पर टूट पड़ी। असंख्य वीर खेत रहे। खून की नदियाँ वह चलीं। थोड़ी देर बाद सूर्य अस्त हुआ। अपनी सेना का यह हाल देख कर द्रोणाचार्य ने लड़ाई बंद कर दी। दोनों पक्षों की सेनाएँ अपने-अपने डेरों को चल दीं और इस प्रकार बारहवें दिन का युद्ध समाप्त हुआ।

33. अभिमन्यु

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. तेरहवें दिन किस-किस में युद्ध छिड़ गया?

उत्तर: तेरहवें दिन अर्जुन और सशप्तकों के बीच घोर संग्राम छिड़ गया।

प्रश्न 2. द्रोणाचार्य ने किसकी रचना की?

उत्तर: द्रोणाचार्य ने कौरव-सेना से चक्रव्यूह की रचना की। 

प्रश्न 3. अभिमन्यु किसका पुत्र था?

उत्तर: अभिमन्यु अर्जुन-सुभद्रा का पुत्र था।

प्रश्न 4. चक्रव्यूह के बारे में अभिमन्यु क्या जानता था? 

उत्तर: अभिमन्यु चक्रव्यूह में प्रवेश करना तो जानता था, पर निकलना नहीं जानता था।

प्रश्न 5. भीमसेन ने अभिमन्यु को क्या विश्वास दिलाया? 

उत्तर: भीमसेन ने अभिमन्यु को विश्वास दिलाया कि मैं तुम्हारे ठीक पीछे-पीछे चलूँगा तथा अन्य वीर भी होंगे।

प्रश्न 6. बालक अभिमन्यु को किसकी वीरता का स्मरण हो आया?

उत्तर: अभिमन्यु को अपने मामा श्रीकृष्ण और पिता अर्जुन की वीरता का स्मरण हो आया।

प्रश्न 7. जयद्रथ कौन था?

उत्तर: जयद्रथ सिंधु देश का राजा तथा धृतराष्ट्र का दामाद था। 

प्रश्न 8. लक्ष्मण कौन था तथा उसका क्या हाल हुआ?

उत्तर: लक्ष्मण दुर्योधन का वीर पुत्र था। वह अभिमन्यु के बाणों व भाले की चोट से मृत होकर गिर पड़ा।

प्रश्न 9. अर्जुन-श्रीकृष्ण कब अपने शिविर में लौटे? 

उत्तर: संशप्तकों (त्रिगर्तौ) का संहार करने के बाद अर्जुन और श्रीकृष्ण शिविर में लौटे।

प्रश्न 10. अर्जुन ने क्या प्रतिज्ञा की?

उत्तर: मैं कल सूर्यास्त से पूर्व जयद्रथ का वध करके रहूँगा।

 प्रश्न 11. दुर्योधन को कब क्रोध आ गया?

उत्तर: जब अभिमन्यु ने दुर्योधन के पुत्र लक्ष्मण को मार डाला तब दुर्योधन को क्रोध आ गया।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. युधिष्ठिर ने अभिमन्यु को बुलाकर क्या कहा? 

उत्तर: युधिष्ठिर ने इस वीर बालक अभिमन्यु को बुलाकर कहा- “बेटा! द्रोण के रचे चक्रव्यूह को तोड़ना हमारे और किसी वीर से नहीं हो सकता। अकेले तुम्हीं ऐसे हो, जिसके लिए द्रोण के बनाए इस व्यूह को तोड़ना संभव है। तुम द्रोण की सेना पर आक्रमण करने को तैयार हो?”

प्रश्न 2. युधिष्ठिर की बात का अभिमन्यु ने क्या उत्तर दिया? इस पर युधिष्ठिर ने क्या कहा?

उत्तर: युधिष्ठिर की बात सुन अभिमन्यु बोला- “महाराज, इस चक्रव्यूह में प्रवेश करना तो मुझे आता है, पर प्रवेश करने के बाद कहीं कोई संकट आ गया तो व्यूह से बाहर निकलना मुझे याद नहीं है।” युधिष्ठिर ने कहा- “बेटा ! व्यूह को तोड़कर एक बार तुम भीतर प्रवेश कर लो, फिर तो जिधर से तुम आगे बढ़ोगे, उधर से ही हम तुम्हारे पीछे-पीछे चले आएँगे और तुम्हारी मदद को तैयार रहेंगे।”

प्रश्न 3. युधिष्ठिर की बात का समर्थन करते भीमसेन ने क्या कहा?

उत्तर: युधिष्ठिर की बातों का समर्थन करते हुए भीमसेन ने कहा- “तुम्हारे ठीक पीछे-पीछे मैं चलूँगा। धृष्टद्युम्न, सात्यकि आदि वीर भी अपनी-अपनी सेनाओं के साथ तुम्हारा अनुकरण करेंगे। एक बार तुमने व्यूह को तोड़ दिया तो फिर यह निश्चित् समझना कि हम सब कौरव-सेना को तहस-नहस कर डालेंगे।”

प्रश्न 4. भीमसेन की बात सुनकर बालक अभिमन्यु ने क्या प्रतिक्रिया प्रकट की?

उत्तर: भीम की बात सुन कर बालक अभिमन्यु को अपने मामा श्रीकृष्ण और पिता अर्जुन की वीरता का स्मरण हो आया। बड़े उत्साह के साथ वह बोला- “मैं अपनी वीरता और पराक्रम से मामा श्रीकृष्ण और पिताजी को अवश्य प्रसन्न करूँगा।”

प्रश्न 5. अभिमन्यु व्यूह में कैसे दाखिल हुआ? व्यूह में क्या हुआ?

उत्तर: द्रोणाचार्य के देखते-देखते उनका बनाया व्यूह टूट गया और अभिमन्यु व्यूह के अंदर दाखिल हो गया। कौरव-वीर एक-एक करके अभिमन्यु का सामना करने आते गए और इस प्रकार कूच करते गए जैसे आग में पड़कर पतंगे भस्म हो जाते हैं। जो भी सामने आया, उस बाल-वीर के बाणों की मार से मारा गया। जैसा कि पहले तय हुआ था, पांडवों की सेना अभिमन्यु के पीछे-पीछे चली और जहाँ से व्यूह तोड़कर अभिमन्यु अंदर घु था, वहीं से व्यूह के अंदर प्रवेश करने लगी। यह देख सिंधु देश का पराक्रमी राजा जयद्रथ जो धृतराष्ट्र का दामाद था, अपनी सेना को लेकर पांडव सेना पर टूट पड़ा। 

प्रश्न 6. कर्ण ने क्या किया?

उत्तर: द्रोण ने कर्ण के पास आकर कहा- “इसका कवच भेदा नहीं जा सकता। ठीक से निशाना बाँधकर इसके रथ के घोड़ों की रास काट डालो और पीछे की ओर से इस पर अस्त्र चलाओ।”

कर्ण ने यही किया। पीछे की ओर से बाण चलाए गए। अभिमन्यु का धनुष कट गया। घोड़े और सारथी मारे गए। वह रथविहीन हो गया। तुरंत ही अभिमन्यु ने टूटे रथ का पहिया हाथ में उठा लिया और उसे घुमाने लगा। इस समय अभिमन्यु भयानक युद्ध कर रहा था। यह देख सारी सेना एक साथ उस पर टूट पड़ी। उसके हाथ का पहिया चूर-चूर हो गया।

प्रश्न 7. अभिमन्यु कैसे मारा गया?

उत्तर: दुःशासन का पुत्र गदा लेकर अभिमन्यु पर झपटा। इस पर अभिमन्यु ने भी पहिया फेंककर गदा उठा ली और दोनों आपस में भिड़ पड़े। दोनों में घोर युद्ध छिड़ गया। एक-दूसरे पर गदा का भीषण वार करते हुए दोनों ही राजकुमार आहत होकर गिर पड़े। दोनों ही हड़बड़ाकर उठने लगे। दुःशासन का पुत्र जरा पहले उठ खड़ा हुआ। अभिमन्यु अभी उठ ही रहा था कि दुःशासन के पुत्र ने उसके सिर पर ज़ोर से गदा प्रहार किया। यों भी अभिमन्यु अब कइयों से अकेला लड़ते हुए घायल हो चुका था और थककर चूर हो रहा था। गदा की मार पड़ते ही उसके प्राण-पखेरू उड़ गए।

प्रश्न 8. अर्जुन ने अभिमन्यु की मृत्यु पर क्या प्रतिज्ञा की?

उत्तर: अर्जुन ने दृढ़तापूर्वक प्रतिज्ञा की- “जिसके कारण मेरे प्रिय पुत्र की मृत्यु हुई, उस जयद्रथ का मैं कल सूर्यास्त होने से पहले वध करके रहूँगा। यह मेरी प्रतिज्ञा है।”

यह कहकर अर्जुन ने गांडीव धनुष को जोर से टंकार किया। 

प्रश्न 9. अर्जुन की प्रतिज्ञा सुनकर जयद्रथ का क्या हाल हुआ?

उत्तर: सिंधु देश के सुप्रसिद्ध राजा वृद्धक्षत्र के पुत्र जयद्रथ को जब अर्जुन की प्रतिज्ञा का हाल मालूम हुआ तो वह दुर्योधन के पास गया और बोला- “मुझे युद्ध की चाह नहीं। मैं अपने देश चला जाना चाहता हूँ।” यह सुन दुर्योधन ने उसको धीरज बँधाया और बोला- “सैंधव! आप भय न करें। मेरी सारी सेना आपकी रक्षा करने के लिए नियुक्त की जाएगी, आप नि:शंक रहें।” दुर्योधन के इस प्रकार आग्रह करने पर जयद्रथ ने उसकी बात मान ली।

प्रश्न 10. अर्जुन से जयद्रथ को बचाने के लिए कौन-कौन वीर सक्रिय हो उठे? 

उत्तर: भूरिश्रवा, कर्ण, वृषसेन, शल्य, अश्वत्थामा आदि महारथी जयद्रथ को अर्जुन के वार से बचाने के लिए सक्रिय हो उठे। अर्जुन जयद्रथ की ओर बढ़ा चला आ रहा था।

34. युधिष्ठिर की चिंता और कामना

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. धृष्टद्युम्न ने क्या चालाकी की?

उत्तर: धृष्टद्युम्न ने द्रोणाचार्य पर आक्रमण करके जयद्रथ की रक्षा के लिए जाने से रोके रखा।

प्रश्न 2. धृष्टद्युम्न कहाँ जा चढ़ा?

उत्तर: धृष्टद्युम्न उछलकर द्रोणाचार्य के रथ पर जा चढ़ा।

प्रश्न 3. युधिष्ठिर किसकी आवाज़ सुनकर चिंतित हो गए?

उत्तर: युधिष्ठिर श्रीकृष्ण के पांचजन्य की ध्वनि सुनकर चिंतित हो गए। 

प्रश्न 4. सात्यकि पर किसकी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी थी?

उत्तर: सात्यकि पर युधिष्ठिर की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी वासुदेव और अर्जुन ने सौंपी थी।

प्रश्न 5. आचार्य द्रोण का क्या प्रण था? 

उत्तर: उनका प्रण था-युधिष्ठिर को जीवित पकड़ना।

प्रश्न 6. युधिष्ठिर किस बात से खुश हुए?

उत्तर: युधिष्ठिर भीम, श्रीकृष्ण और अर्जुन के सिंहनादों को सुनकर खुश हुए।

प्रश्न 7. युधिष्ठिर मन-ही-मन क्या कामना कर रहे थे?

उत्तर: युधिष्ठिर मन-ही-मन शांति स्थापना की कामना कर रहे थे।

प्रश्न 8. कर्ण ने भीम को क्यों नहीं मारा?

उत्तर: कर्ण ने माता कुंती को वचन दिया था कि वह अर्जुन के अलावा युद्ध में अन्य किसी पांडव को नहीं मारेगा।

अन्य आवश्यक प्रश्न

प्रश्न 1. धृष्टद्युम्न और द्रोण के मध्य हुए युद्ध का वर्णन करो।

उत्तर: धृष्टद्युम्न द्रोणाचार्य के रथ पर उछलकर जा चढ़ा और द्रोण पर पागलों की भाँति वार करने लगा। धृष्टद्युम्न का हमला जारी रहा। अंत में द्रोण ने क्रोध में आकर एक पैना बाण चलाया। वह पांचाल कुमार के प्राण ही ले लेता, यदि सात्यकि का बाण उसे बीच में ही न काट देता। अचानक सात्यकि के बाण रोक लेने पर द्रोण का ध्यान उसकी ओर फिर गया। इसी बीच पांचाल-सेना के रथ-सवार धृष्टद्युम्न को वहाँ से हटा ले गए परंतु सात्यकि भी कोई मामूली वीर नहीं था। पांडव सेना के सबसे चतुर योद्धाओं में उसका स्थान था। जब उसने द्रोणाचार्य को अपनी ओर झपटते देखा तो वह खुद भी उनकी ओर झपटा। इस तरह बहुत देर तक दोनों वीर लड़ते रहे।

प्रश्न 2. युधिष्ठिर ने धृष्टद्युम्न को क्या आज्ञा दी?

उत्तर: युधिष्ठिर धृष्टद्युम्न से बोले- “द्रुपद कुमार! आपको अभी जाकर द्रोणाचार्य पर आक्रमण करना चाहिए, नहीं तो डर है कि कहीं आचार्य के हाथों सात्यकि का वध न हो जाए।” युधिष्ठिर ने धृष्टद्युम्न के साथ द्रोण पर हमला करने के लिए एक बड़ी सेना भेज दी। समय पर कुमुक के पहुँच जाने पर भी बड़े परिश्रम के बाद सात्यकि को द्रोण के फँदे से छुड़ाया जा सका।

प्रश्न 3. जब सात्यकि युधिष्ठिर को छोड़कर अर्जुन की ओर चला तब क्या घटित हुआ?

उत्तर: जैसे ही सात्यकि युधिष्ठिर को छोड़कर अर्जुन की ओर चला, वैसे ही द्रोणाचार्य ने पांडव सेना पर हमले करने शुरू कर दिए। पांडव-सेना की पंक्तियाँ कई जगह से टूट गईं और उन्हें पीछे हटना पड़ गया। यह देख युधिष्ठिर बड़े चिंतित हो उठे और बोले- “भीम, मेरा कहा मानो तो तुम भी अर्जुन के पास चले जाओ और सात्यकि और अर्जुन का हाल चाल मालूम करो और इसके लिए जो कुछ करना जरूरी हो, वह करके वापस आकर मुझे सूचना दो। मेरा कहना मानकर ही सात्यकि अर्जुन की सहायता को कौरव-सेना से युद्ध करता हुआ गया है। यदि तुम उनको कुशलपूर्वक पाओ तो सिंहनाद करना। मैं समझ लूँगा कि सब कुशल हैं।”

प्रश्न 4. भीमसेन ने धृष्टद्युम्न से क्या कहा?

उत्तर: भीमसेन ने भ्रष्टद्युम्न से कहा, “पांचाल कुमार! आचार्य द्रोण के इरादे से तो आप परिचित हैं ही। किसी-न-किसी तरह युधिष्ठिर को जीवित हो पकड़ने का उनका प्रण है। राजा की रक्षा करना ही हमारा प्रथम कर्तव्य है। जब वह स्वयं मुझे जाने की आज्ञा दे रहे हैं तो उसका भी पालन करना मेरा धर्म हो जाता है। इस कारण युधिष्ठिर को आपके ही भरोसे पर छोड़कर जा रहा हूँ। इनकी भली-भाँति रक्षा करना।”

प्रश्न 5. अर्जुन को सुरक्षित देखकर भीमसेन ने क्या किया? इसका अर्जुन, कृष्ण और युधिष्ठिर पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर: अर्जुन को सुरक्षित देखते ही भीमसेन ने सिंहनाद किया। भीम का सिंहनाद सुनकर श्रीकृष्ण और अर्जुन आनंद के मारे उछल पड़े और उन्होंने भी जोरों से सिंहनाद किया। इन सिंहनादों को सुनकर युधिष्ठिर बहुत ही प्रसन्न हुए। उनके मन से शोक के बादल हट गए। उन्होंने अर्जुन को मन-ही-मन आशीर्वाद दिया। वह सोचने लगे-अभी सूरज डूबने से पहले अर्जुन अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर लेगा और जयद्रथ का वध करके लौट आएगा। हो सकता है, जयद्रथ के वध के बाद दुर्योधन शायद संधि कर ले। इधर युधिष्ठिर मन-ही-मन शांति स्थापना की कामना कर रहे थे और उधर मोर्चे पर जहाँ भीम, सात्यकि और अर्जुन थे, घोर संग्राम हो रहा था। 

प्रश्न 6. कर्ण और भीम के युद्ध में भीम की क्या दुर्दशा हुई?

उत्तर: कर्ण और भीम के युद्ध में इस बार भीमसेन के रथ के घोड़े मारे गए। सारथी भी कटकर गिर पड़ा। रथ टूट-फूट गया और धनुष भी कट गया। भीम ने ढाल-तलवार ले ली और जान झोंककर लड़ने लगा। पलक मारते-मारते कर्ण ने उसकी ढाल के भी टुकड़े कर दिए। जब ढाल भी न रही तो भीम को खूब परेशान किया। इससे भीम बहुत ही पीड़ित हुआ। उसे असीम क्रोध आया। वह उछलकर कर्ण के रथ पर जा कूदा। कर्ण ने रथ के ध्वन-स्तंभ की आड़ लेकर भीमसेन की झपट से अपने को बचा लिया। भीम नीचे जमीन पर कूद पड़ा और विलक्षण युद्ध करने लगा।

35. भूरिश्रवा, जयद्रथ और आचार्य द्रोण का अंत

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. सात्यकि ने किसको मारा?

उत्तर: सात्यकि ने भूरिश्रवा का सिर धड़ से अलग कर दिया। 

प्रश्न 2. पहले भूरिश्रवा क्या कर रहा था?

उत्तर: पहले भूरिश्रवा सात्यकि को ज़मीन पर घसीट रहा था। 

प्रश्न 3. भूमिश्रवा का दाहिना हाथ कैसे कटा?

उत्तर: अर्जुन के बाण से भूरिश्रवा का दाहिना हाथ कटकर दूर जमीन पर जा गिरा।

प्रश्न 4. किस बालक के वध पर कौरवों ने विजयोत्सव मुनाया था?

उत्तर: अभिमन्यु के वध पर कौरवों ने विजयोत्सव मनाया था।

प्रश्न 5. जयद्रथ कैसा वीर था?

उत्तर: जयद्रथ असाधारण वीर और प्रसिद्ध योद्धा था। 

प्रश्न 6. श्रीकृष्ण ने अर्जुन को क्या चेताया?

उत्तर: श्रीकृष्ण ने चेताया-अर्जुन, अभी सूर्य डूबा नहीं है। अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने का यही मौका है।

प्रश्न 7. जयद्रथ का कटा सिर कहाँ जाकर गिरा?

उत्तर: जयद्रथ का कटा सिर उसके वृद्ध पिता वृद्धक्षत्र की गोद में जाकर गिरा।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. अर्जुन-जयद्रथ युद्ध के बारे में बताइए।

उत्तर: कौरव सेना को तितर-बितर करता हुआ अर्जुन जयद्रथ के पास आखिर पहुँच ही गया। पर जयद्रथ भी कोई साधारण वीर नहीं था। वह सुविख्यात योद्धा था। डटकर लड़ने लगा। उसे हराना अर्जुन के लिए भी सुगम न था। बड़ी देर तक युद्ध होता रहा। दोनों पक्षों के वीर सूर्य की ओर बार-बार देखने लगे। धीरे-धीरे पश्चिम में लालिमा छाने लगी और सूर्यास्त का समय भी नज़दीक आने लगा परंतु जयद्रथ और अर्जुन का युद्ध समाप्त होने के कोई लक्षण नज़र नहीं आते थे।

प्रश्न 2. दुर्योधन क्यों खुश था?

उत्तर: यह देख दुर्योधन के मन में आनंद की लहर उठने लगी। उसने सोचा कि अब ज़रा-सी देर और है। जयद्रथ तो बच ही गया और अर्जुन की प्रतिज्ञा विफल हुई ही-सी है। जयद्रथ ने भी पश्चिम की ओर देखते हुए मन में कहा- “चलो, प्राण बचे!”

प्रश्न 3. श्रीकृष्ण ने अर्जुन से क्या कहा? उन्होंने क्या चेतावनी दी?

उत्तर: श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा- “अर्जुन! जयद्रथ सूर्य की तरफ देखने में लगा है और मन में समझ रहा है कि सूर्य डूब गया परंतु अभी तो सूर्य डूबा नहीं है। अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने का तुम्हारे लिए यही अवसर है।”

श्रीकृष्ण के ये वचन अर्जुन के कान में पड़े ही थे कि अर्जुन गांडीव से एक तेज बाण छूटा और जयद्रथ के सिर को उड़ा ले गया। श्रीकृष्ण ने समय पर ही एक चेतावनी अर्जुन को दे दी थी कि जयद्रथ के सिर को जमीन पर नहीं गिरने देना है। अर्जुन ने ऐसा ही किया।

प्रश्न 4. जयद्रथ का सिर कहाँ जाकर गिरा?

उत्तर: जब जयद्रथ का सिर उड़ा तब जयद्रथ के पिता राजा वृद्धक्षत्र अपने आश्रम में बैठे संध्या-वंदन कर रहे थे कि इतने में जयद्रथ का सिर ध्यान-मग्न राजा की गोद में जा गिरा। ध्यान समाप्त होने पर जब वृद्धक्षत्र की आँखें खुलीं और वह उठे तो जयद्रथ का सिर उनकी गोद से जमीन पर गिर पड़ा और उसी क्षण बूढ़े वृद्धक्षत्र के सिर के भी सौ टुकड़े हो गए।

प्रश्न 5. द्रोण का वध कैसे हुआ?

उत्तर: भीम ने अश्वत्थामा नामक हाथी को मारकर यह शोर मचाया कि मैंने अश्वत्थामा को मार डाला। यह समाचार द्रोण को विचलित कर गया। उन्होंने युधिष्ठिर से इस समाचार की पुष्टि कर ली, भले ही उन्होंने अधूरा सत्य बताया। इस समाचार से द्रोण ध्यानमग्न बैठे थे कि धृष्टद्युम्न ने तलवार से उनकी गर्दन काट दी। उनका सिर जमीन पर जा गिरा।

36. कर्ण और दुर्योधन भी मारे गए

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. द्रोण के मारे जाने पर कौरव सेना का सेनापति कौन बना? 

उत्तर: द्रोण के मारे जाने पर कौरव सेना का सेनापति कर्ण बना। उसका सारथी मद्रराज शल्य बना। 

प्रश्न 2. दुःशासन को किसने, कैसे मारा?

उत्तर: दुःशासन को भीम ने मारा। भीम ने एक ही धक्के में उसे जमीन पर गिरा दिया और उसका एक-एक अंग तोड़-मरोड़ डाला।

प्रश्न 3. भीमसेन का डरावना रूप देखकर कौन काँपने लगा?

उत्तर: भीमसेन का डरावना रूप देखकर कर्ण का शरीर थर-थर काँपने लगा।

प्रश्न 4. अर्जुन के मुकुट को कौन उड़ा ले गया?

उत्तर: कर्ण द्वारा चलाया सर्पमुखास्त्र अर्जुन के उड़ा ले गया। 

प्रश्न 5. कर्ण किस बात से घबरा गया?

उत्तर: जब कर्ण के रथ का बाईं ओर का पहिया धरती में धँस गया, तब कर्ण घबरा गया।

प्रश्न 6. कर्ण की मृत्यु के बाद कौरव सेना का सेनापति कौन बना?

उत्तर: कर्ण की मृत्यु के बाद कौरव सेना का सेनापति मद्रराज शल्य बना। 

प्रश्न 7. कृपाचार्य ने दुर्योधन को ढाढस देते हुए क्या कहा?

उत्तर: उन्होंने कहा-राजन्! अब तुम्हारा धर्म यही है कि पांडवों से किसी प्रकार समझौता कर लो।

प्रश्न 8. क्या दुर्योधन को कृपाचार्य का सुझाव पसंत आया?

उत्तर: नहीं, उसे कृपाचार्य का सुझाव कतई पसंद नहीं आया। 

प्रश्न 9. अब पांडवों की सेना के संचालन का भार किस पर आ गया?

उत्तर: अब पांडवों की सेना के संचालन का भार युधिष्ठिर के कंधों पर आ गया।

प्रश्न 10. शकुनि को मारने से पूर्व सहदेव ने क्या कहा?

उत्तर: सहदेव ने कहा-शकुनि अपने किये का फल भुगत लो।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. कृष्ण ने क्या चालाकी करके अर्जुन को कर्ण के बाण से बचा लिया?

उत्तर: अर्जुन की ओर कर्ण का भयानक तीर आता देख कर कृष्ण ने रथ को पाँव के अँगूठे से दबा दिया। इससे रथ ज़मीन में पाँच अँगुल धँस गया। कृष्ण की इस युक्ति से अर्जुन मरते-मरते बच गया।

प्रश्न 2. कर्ण का वध कैसे हुआ?

उत्तर: कर्ण के रथ का पहिया कीचड़ में फँस गया था। वह उससे निकल नहीं पाया। कर्ण रथ से उतरा हुआ था। तभी कृष्ण के कहने पर अर्जुन ने ऐसा बाण मारा कि कर्ण का सिर कटकर जमीन पर गिर पड़ा।

प्रश्न 3. शकुनि कैसे मारा गया?

उत्तर: सहदेव ने तलवार की पैनी धार के समान नोंक वाला बाण शकुनि पर चलाया। इससे शकुनि का सिर कटकर गिर पड़ा और वह मारा गया।

प्रश्न 4. दुर्योधन कहाँ छिप गया?

उत्तर: दुर्योधन अकेले हाथ में गदा लिए हुए एक जलाशय (तालाब) में जा छिपा। युधिष्ठिर और उनके भाइयों ने उसे ढूँढ निकाला।

प्रश्न 5. युधिष्ठिर के व्यंग्य का दुर्योधन ने क्या उत्तर दिया?

उत्तर: युधिष्ठिर के व्यंग्य का उत्तर देते हुए दुर्योधन ने व्यथित होकर कहा- “मैं न तो डरा हुआ ही हूँ और न ही मुझे प्राणों का ही मोह है। फिर भी, सच पूछो तो युद्ध से मेरा जी हट गया है। मेरे सभी संगी-साथी और बंधु-बांधव मारे जा चुके हैं। अब मैं बिल्कुल अकेला हूँ। राज्य-सुख का मुझे लोभ नहीं रहा। यह सारा राज्य अब तुम्हारा ही है। निश्चिंत होकर तुम्हीं इसका उपभोग करो।”

प्रश्न 6. दुर्योधन ने युधिष्ठिर के कर क्या चुनौती दी? मुख से कठोर बातें सुन कर क्या चुनौती दी?

उत्तर: दुर्योधन ने जब स्वयं युधिष्ठिर के मुख से ये कठोर बातें सुनीं तो उसने गदा उठा ली और जल में ही उठ खड़ा हुआ और बोला- “अच्छा यही सही! तुम एक-एक करके मुझसे भिड़ लो! मैं अकेला हूँ और तुम पाँच हो। पाँचों का अकेले के साथ लड़ना न्यायोचित नहीं। मैं थका हुआ और घायल हूँ। कवच भी मेरे पास नहीं है। इसलिए एक-एक करके निपट लो। चलो!”

प्रश्न 7. दुर्योधन ने कृष्ण पर क्या आरोप लगाया?

उत्तर: दुर्योधन ने कृष्ण पर आरोप लगाते हुए चिल्लाकर कहा- “कृष्ण! धर्म-युद्ध करने वाले हमारे पक्ष के सारे यशस्वी महारथियों को तुमने कुचक्र रचकर मरवा डाला है। यदि तुमने कुचक्र न रचा होता, तो कर्ण, भीष्म, द्रोण भला समर में परास्त होने वाले थे?”

प्रश्न 8. कृष्ण ने आरोप का क्या उत्तर दिया?

उत्तर: मरणासन्न अवस्था में दुर्योधन को इस प्रकार विलाप करते हुए देख श्रीकृष्ण बोले- “दुर्योधन! तुम अपने ही किए का फल पा रहे हो। यह क्यों नहीं समझते और उसका पश्चात्ताप करते? अपने अपराध के लिए दूसरों को दोष देना बेकार है। तुम्हारे नाश का कारण मैं नहीं हूँ। लालच में पड़कर तुमने जो महापाप किया, उसी का यह फल तुम्हें भुगतना पड़ रहा है।”

37. अश्वत्थामा

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. दुर्योधन की दशा पर कौन क्षुब्ध हो उठा?

उत्तर: अश्वत्थामा क्षुब्ध हो उठा।

प्रश्न 2. अश्वत्थामा के मस्तिष्क से क्या बात नहीं निकल पा रही थी?

उत्तर: उसके पिता द्रोणाचार्य को मारने के लिए पांडवों ने जो कुचक्र रचा, वह अश्वत्थामा के मस्तिष्क से नहीं निकल पाया।

प्रश्न 3. अश्वत्थामा ने क्या प्रतिज्ञा की?

उत्तर: अश्वत्थामा ने दृढ़तापूर्वक प्रतिज्ञा की कि वह आज ही रात्रि में पांडवों का अंत करके रहेगा।

प्रश्न 4. अश्वत्थामा की प्रतिज्ञा से किसे प्रसन्नता हुई?

उत्तर: अश्वत्थामा की प्रतिज्ञा से दुर्योधन को प्रसन्नता हुई।

प्रश्न 5. अश्वत्थामा ने किसे जगाकर अपना निश्चय सुनाया?

उत्तर: अश्वत्थामा ने कृपाचार्य को जगाकर अपना निश्चय सुनाया।

प्रश्न 6. कृपाचार्य ने किस बात को अधर्म बताया?

उत्तर: कृपाचार्य ने सोते हुए को मारने को अधर्म बताया।

प्रश्न 7. धृष्टद्युम्न कैसे मारा गया?

उत्तर: धृष्टद्युम्न को अश्वत्थामा ने अपने पैरों तले कुचलकर मार डाला।

प्रश्न 8. इस हत्याकांड में अश्वत्थामा का हाथ किसने बँटाया?

उत्तर: कृपाचार्य और कृतवर्मा ने हाथ बँटाया।

प्रश्न 9. अश्वत्थामा ने और किसकी हत्या कर दी? 

उत्तर: द्रौपदी के सभी पुत्रों और सैनिकों की हत्या कर दी। 

प्रश्न 10. पांडव वंश को किसने चलाया? 

उत्तर: पांडव वंश को उत्तरा के पुत्र परीक्षित ने चलाया।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. दुर्योधन के साथ हुए दुर्व्यवहार को जानकर अश्वत्थामा ने क्या प्रतिज्ञा की?

उत्तर: पांडवों द्वारा दुर्योधन के साथ किए गए दुर्व्यवहार का समाचार जानकर अश्वत्थामा ने प्रतिज्ञा की कि वह आज ही रात में पांडवों को नष्ट करके रहेगा।

प्रश्न 2. अब कौरव सेना का सेनापति कौन बना?

उत्तर: अब कौरव सेना का सेनापति अश्वत्थामा बना।

प्रश्न 3. अश्वत्थामा की योजना सुनकर कौन व्यथित हुए? 

उत्तर: अश्वत्थामा की योजना सुनकर कृपाचार्य व्यथित हुए। वे बोले- अश्वत्थामा, सोते हुओं को मारना कभी धर्म नहीं हो सकता। अतः तुम यह विचार छोड़ दो।

प्रश्न 4. अश्वत्थामा ने किसे पैरों तले कुचल दिया? 

उत्तर: अश्वत्थामा सोए हुए धृष्टद्युम्न पर उन्मत्त होकर उछलने-कूदने लगा। अश्वत्थामा के पैरों तले कुचलकर धृष्टद्युम्न मर गया।

प्रश्न 5. अश्वत्थामा ने किसके पुत्रों को मार डाला?

उत्तर: अश्वत्थामा ने द्रौपदी के पुत्रों को मार डाला।

प्रश्न 6. पांडवों के वंश का एकमात्र चिह्न कौन बच गया?

उत्तर: पांडव वंश का एकमात्र चिह्न उत्तरा के गर्भ में पल रहा पिंड बच गया। वह पिंड परीक्षित के रूप में उत्पन्न हुआ।

अन्य आवश्यक प्रश्न

प्रश्न 1. अश्वत्थामा ने क्या निर्वयतापूर्ण कार्य किया और उसके काम में किसने हाथ बँटाया?

उत्तर: कृपाचार्य और कृतवर्मा ने भी इस हत्याकांड में अश्वत्थामा का हाथ बँटाया। वहाँ तीनों ने ऐसे-ऐसे अत्याचार किए जैसे कि अब तक किसी ने सुने भी न थे। तीनों ने वहाँ आग लगा दी। आग भड़क उठी और सारे शिविरों में फैल गई। इससे सोए पड़े सारे सैनिक जाग पड़े और भयभीत होकर इधर-उधर भागने लगे। उन सबको अश्वत्थामा ने बड़ी निदर्यता से मार डाला। 

प्रश्न 2. अश्वत्थामा ने दुर्योधन के पास पहुँचकर क्या समाचार सुनाया?

उत्तर: अश्वत्थामा ने दुर्योधन के पास पहुँचकर कहा- “महाराज दुर्योधन, आप अभी जीवित हैं क्या? देखिए, आपके लिए मैं ऐसा अच्छा समाचार लाया हूँ कि जिसे सुनकर आपका कलेजा ज़रूर ठंडा हो जाएगा। जो कुछ हम लोगों ने किया है, उसे आप ध्यान से सुनें। सारे पांचाल खत्म कर दिए गए। पांडवों के भी सारे पुत्र मारे गए। पांडवों की सारी सेना का हमने सोते में ही सर्वनाश कर दिया। पांडवों के पक्ष में अब केवल सात व्यक्ति ही बच गए हैं। हमारे पक्ष में कृपाचार्य, कृतवर्मा और मैं तीन रह गए हैं।”

प्रश्न 3. अश्वत्थामा की बात सुनकर दुर्योधन ने क्या प्रतिक्रिया प्रकट की?

उत्तर: अश्वत्थामा की बात सुनकर दुर्योधन बहुत प्रसन्न हुआ और बोला- “गुरु भाई अश्वत्थामा, आपने मेरी खातिर वह काम किया है जो न भीष्म पितामह से हुआ और न जिसे महावीर कर्ण ही कर सके।” इतना कहकर दुर्योधन ने अपने प्राण त्याग दिए।

प्रश्न 4. युद्ध के अंत में क्या हुआ?

उत्तर: युद्ध के अंत में अश्वत्थामा और भीमसेन में युद्ध छिड़ गया लेकिन अंत में अश्वत्थामा हार गया। वह अपनी पराजय के चिह्न के रूप में अपने माथे का उज्ज्वल रत्न पांडवों को भेंट करके अरण्य में चला गया। हस्तिनापुर का सारा नगर निःसहाय स्त्रियों और अनाथ बच्चों के रोने-कलपने के हृदय विदारक शब्दों से गूंज उठा। युद्ध समाप्त होने का समाचार पाकर हजारों निःसहाय स्त्रियों को लेकर वृद्ध महाराज धृतराष्ट्र कुरुक्षेत्र की समर-भूमि में गए, जहाँ एक ही वंश के भाई-बंदों ने एक-दूसरे से भयानक युद्ध करके अपने कुल का सर्वनाश कर डाला था। अंधे धृतराष्ट्र ने बीती बातों का स्मरण करते हुए बहुत विलाप किया।

38. युधिष्ठिर की वेदना

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. धृतराष्ट्र ने किसको अपने पास बुलाया? 

उत्तर: धृतराष्ट्र ने भीम को अपने पास बुलाया।

प्रश्न 2. श्रीकृष्ण ने भीम के स्थान पर किसे धृतराष्ट्र के पास भेज दिया?

उत्तर: श्री कृष्ण ने भीम के स्थान पर एक लोहे की प्रतिमा धृतराष्ट्र के सामने खड़ी कर दी।

प्रश्न 3. धृतराष्ट्र ने भीम की प्रतिमा का क्या हाल कर डाला?

उत्तर: धृतराष्ट्र ने प्रतिमा को भीम समझकर जोरों से छाती से लगाकर कस लिया। इससे प्रतिमा चूर चूर हो गई।

प्रश्न 4. गुस्सा शांत होने पर धृतराष्ट्र ने क्या किया?

उत्तर: गुस्सा शांत होने पर धृतराष्ट्र ने प्रायश्चित किया और पांडवों को आशीर्वाद देकर विदा किया।

प्रश्न 5. धृतराष्ट्र से आज्ञा पाकर पाँचों पांडव कहाँ गए?

उत्तर: धृतराष्ट्र से आज्ञा पाकर पाँचों पांडव श्रीकृष्ण के साथ गांधारी के पास गए।

प्रश्न 6. द्रौपदी की क्या दशा थी?

उत्तर: द्रौपदी अपने पाँचों मुकुमार बालकों के मारे जाने के  कारण शोक-विह्वल थी।

प्रश्न 7. गांधारी ने क्या कहकर द्रौपदी को तसल्ली दी?

उत्तर: उसने कहा-मैं और तुम एक जैसी हैं। हमें सांत्वना देने वाला कौन है?

प्रश्न 8. युधिष्ठिर के मन में क्या बात समा गई?

उत्तर: युधिष्ठिर के मन में यह बात समा गई कि हमने अपने बंधु-बांधवों को मारकर राज्य पाया है।

प्रश्न 9. युधिष्ठिर ने क्या निश्चय किया?

उत्तर: युधिष्ठिर ने वन जाने का निश्चय किया।

प्रश्न 10. शरशय्या पर पड़े भीष्म ने युधिष्ठिर को क्या समझाया?

उत्तर: भीष्म ने युधिष्ठिर को धर्म का मर्म समझाया।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. श्रीकृष्ण ने क्या चतुरता दिखाई?

उत्तर: श्रीकृष्ण जान गए कि धृतराष्ट्र क्रोध में हैं। अतः उन्होंने भीम के स्थान पर एक लोहे की प्रतिमा अंधे धृतराष्ट्र के आगे खड़ी कर दी। धृतराष्ट्र ने उसे भीम समझकर गले से लगाया और उसे चूर-चूर कर डाला। 

प्रश्न 2. धृतराष्ट्र को क्या बात जानकर धीरज बँधा?

उत्तर: जब धृतराष्ट्र को यह पता चला कि भीम ज़िन्दा हैं तो उन्हें धीरज बँध गया।

प्रश्न 3. धृतराष्ट्र की आज्ञा पाकर पांडव कहाँ गए? 

उत्तर: धृतराष्ट्र से आज्ञा पाकर पाँचों भाई श्रीकृष्ण के साथ गांधारी के पास गए। गांधारी का शोकोद्वेग देखकर अर्जुन भी डर गया और श्रीकृष्ण के पीछे ही खड़ा रहा। कुछ बोला नहीं। गांधारी ने अपने दग्ध- हृदय को धीरे-धीरे शांत कर लिया और पांडवों को आशीर्वाद देकर विदा किया।

प्रश्न 4. गांधारी ने शोक-विह्वल द्रौपदी को क्या कहकर धैर्य बँधाया?

उत्तर: द्रौपदी की अवस्था पर गांधारी को बड़ी दया आई। वह बोली– “बेटी, दु:खी न होओ। मैं और तुम एक ही जैसी हैं। हमें सांत्वना देने वाला कौन है? इस सबकी दोषी तो मैं ही हूँ। मेरे ही दोष के कारण आज इस कुल का सर्वनाश हुआ है। पर अब अपने को भी दोष देने से क्या लाभ?”

अन्य आवश्यक प्रश्न

प्रश्न 1. युधिष्ठिर के मन में क्या बात समा गई? उसे किस-किसने, कैसे दूर किया?

उत्तर: युधिष्ठिर के मन में यह बात समा गई थी कि हमने अपने बंधु-बांधवों को मार कर राज्य पाया है। इससे उनको भारी व्यथा रहने लगी। वह यही सोचते रहते। अंत में उन्होंने वन में जाने का निश्चय किया ताकि इस पाप का प्रायश्चित हो सके। यह सुन कर सब भाइयों पर मानो वज्र गिर गया। वे बहुत चिंतित हो उठे और बारी-बारी से सब युधिष्ठिर को समझाने लगे। अर्जुन ने गृहस्थ धर्म की श्रेष्ठता पर प्रकाश डाला। भीमसेन ने कटु वचनों से काम लिया। नकुल ने प्रमाणपूर्वक यह सिद्ध करने का प्रयत्न किया कि कर्म-मार्ग न केवल सुगम है बल्कि उचित भी, जबकि संन्यास-मार्ग कंटीला और दुष्कर है। इस तरह देर तक युधिष्ठिर से वाद-विवाद होता रहा। सहदेव ने नकुल के पक्ष का समर्थन किया और अंत में अनुरोध किया कि हमारे पिता, माता, आचार्य, बंधु-सब कुछ आप ही हैं। हमारी ढिठाई क्षमा करें। द्रौपदी भी इस वाद-विवाद में पीछे न रही। वह बोली- “अब तो आपका यही कर्तव्य है कि राजोचित धर्म का पालन करते हुए राज्य शासन करें और चिंता न करें।”

प्रश्न 2. शासन-सूत्र ग्रहण करने से पहले युधिष्ठिर किसके पास गए? उन्होंने युधिष्ठिर को क्या बात समझाई?

उत्तर: शासन-सूत्र ग्रहण करने से पहले युधिष्ठिर भीष्म के पास गए, जो कुरुक्षेत्र में शर-शय्या पर पड़े मृत्यु की प्रतीक्षा कर रहे थे। पितामह भीष्म ने युधिष्ठिर को धर्म का मर्म समझाया और उपदेश भी दिया। भीमसेन ने भी उनको सांत्वना व शांति की बातें कहकर बहुत आश्वासन दिया। धृतराष्ट्र भी युधिष्ठिर के पास आकर सांत्वना देते हुए बोले- “बेटा, तुम्हें इस तरह शोक-विह्वल नहीं होना चाहिए। दुर्योधन ने जो मूर्खताएँ कीं, उनको सही समझ कर मैंने धोखा खाया। इस कारण मेरे सौ-के-सौ पुत्र उसी भाँति काल-कवलित हो गए जैसे सपने में मिला धन नींद खुलने पर लोप हो जाता है। अब तुम्हीं मेरे पुत्र हो। इस कारण तुम्हें दुःखी न होना चाहिए।”

39. पांडवों का धृतराष्ट्र के प्रति व्यवहार

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. युधिष्ठिर ने अपने भाइयों को क्या आज्ञा दे रखी थी?

उत्तर: युधिष्ठिर ने अपने भाइयों को आज्ञा दे रखी थी कि राजा धृतराष्ट्र को किसी तरह का कष्ट न पहुँचने पाए।

प्रश्न 2. धृतराष्ट्र पांडवों के साथ कैसा व्यवहार करते थे?

उत्तर: धृतराष्ट्र पांडवों के साथ स्नेहपूर्ण व्यवहार किया करते थे। 

प्रश्न 3. भीमसेन का व्यवहार धृतराष्ट्र व गांधारी के प्रति कैसा था?

उत्तर: भीमसेन धृतराष्ट और गांधारी को कभी-कभी ऐसी बातें कह देता था जिससे उनके दिल को चोट पहुँच जाती थी।

प्रश्न 4. गांधारी कैसी स्त्री थीं?

उत्तर: गांधारी विवेकशीला थीं तथा धर्म का मर्म जानती थीं। 

प्रश्न 5. धृतराष्ट्र का जी सुख भोग में क्यों नहीं लगता था? 

उत्तर: वह बहुत बूढ़े हो गए थे तथा भीम की अप्रिय बातों से उनका मन खिन्न हो जाता था।

प्रश्न 6. धृतराष्ट्र युधिष्ठिर से किस बात की अनुमति चाहते थे?

उत्तर: जंगल जाकर तपस्या करने की अनुमति चाहते थे।

प्रश्न 7. कौन-कौन वन को गए?

उत्तर: धृतराष्ट्र, गांधारी और कुंती वन को गए।

अन्य आवश्यक प्रश्न

प्रश्न 1. पांडव अंधे वृद्ध धृतराष्ट्र के साथ कैसा व्यवहार करते थे?

उत्तर: युधिष्ठिर ने अपने भाइयों को आज्ञा दे रखी थी कि पुत्रों के विछोह से दुःखी राजा धृतराष्ट्र को किसी भी तरह की व्यथा न पहुँचने पाए। सिवाय भीमसेन के और सब पांडव युधिष्ठिर के ही आदेशानुसार व्यवहार करते थे। पांडव वृद्ध धृतराष्ट्र का खूब आदर करते हुए उन्हें हर प्रकार का सुख एवं सुविधा पहुँचाने के प्रयत्न में लगे रहते, जिससे धृतराष्ट्र को अपने पुत्रों का अभाव महसूस न हो। धृतराष्ट्र भी पांडवों से स्नेहपूर्ण व्यवहार किया करते थे।

प्रश्न 2. भीमसेन का व्यवहार धृतराष्ट्र व गांधारी के प्रति कैसा था? इसका कारण क्या था?

उत्तर: भीमसेन कभी-कभी ऐसी बातें कर दिया करता था जिससे धृतराष्ट्र के दिल को चोट पहुँचती। युधिष्ठिर के राजाधिराज बनने के थोड़े ही दिन बाद भीमसेन धृतराष्ट्र की किसी आज्ञा को परिणत न होने देता था। कभी धृतराष्ट्र को सुनाते हुए कह भी देता कि दुर्योधन और उसके साथी अपनी नासमझी के कारण मारे गए। 

बात यह थी कि दुर्योधन-दुःशासन आदि के किए अत्याचारों और अपमानों का दुःखद स्मरण भीमसेन के मन में अमिट रूप से अंकित हो चुका था। इस कारण न तो वह अपना पुराना वैर भूल सकता था और न क्रोध को ही चबा सकता था। कभी-कभी वह गांधारी तक के आगे उल्टी-सीधी बातें कर दिया करता था। 

प्रश्न 3. धृतराष्ट्र ने धर्मराज के भवन में जाकर क्या कहा?

उत्तर: धृतराष्ट्र धर्मराज के भवन में जाकर बोले- “तुम तो शास्त्रों के ज्ञाता हो और यह भी जानते हो कि हमारे वंश की परंपरागत प्रथा के अनुसार हम वृद्धों को वल्कल धारण करके वन में जाना चाहिए। इसके अनुसार ही मैं अब तुम्हारी भलाई की कामना करता हुआ वन में जाकर रहना चाहता हूँ। तुम्हें इस बात की अनुमति मुझे देनी ही होगी।”

प्रश्न 4. धृतराष्ट्र की बात सुनकर युधिष्ठिर ने क्या प्रतिक्रिया प्रकट की?

उत्तर: धृतराष्ट्र की बातें सुनकर युधिष्ठिर बहुत खिन्न हुए और भरे हुए हृदय से बोले- “अब मैंने तय किया है कि आज से आपका ही पुत्र युयुत्सु राजगद्दी पर बैठे या जिसे आप चाहें राजा बना दें अथवा शासन की बागडोर स्वयं अपने हाथों में ले लें और प्रजा का पालन करें। मैं वन में चला जाऊँगा। राजा मैं नहीं, बल्कि आप ही हैं। ऐसी हालत में आपको अनुमति कैसे दे सकता हूँ?”

प्रश्न 5. धृतराष्ट्र ने वन में जाने के लिए क्या तर्क दिया?

उत्तर: धृतराष्ट्र ने कहा- “कुंती पुत्र! मेरे मन में वन में जाकर तपस्या करने की इच्छा बड़ी प्रबल हो रही है। तुम्हारे साथ मैं इतने बरसों सुखपूर्वक रहा और तुम और तुम्हारे भाई सभी मेरी सेवा-सुश्रूषा करते रहे। वन में जाने का मेरा ही समय है, तुम्हारा नहीं। इस कारण वन में जाने की अनुमति तुम्हें देने का सवाल ही नहीं उठता। यह अनुमति तो तुमको देनी ही होगी।”

40. श्रीकृष्ण और युधिष्ठिर

प्रश्न-अभ्यास

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद श्रीकृष्ण द्वारका में कितने साल तक राज्य करते रहे?

उत्तर: श्रीकृष्ण द्वारका में 36 साल तक राज्य करते रहे।

प्रश्न 2. यदुवंश का नाश क्यों हुआ?

उत्तर: आपासी फूट के कारण यदुवंश का नाश हुआ।

प्रश्न 3. वंश-नाश देखकर बलराम ने क्या किया? 

उत्तर: उन्होंने समाधि में बैठकर शरीर त्याग दिया।

प्रश्न 4. बंधु-बांधवों का सर्वनाश देखकर श्रीकृष्ण की क्या दशा हुई?

उत्तर: बधु-बाधंवों का सर्वनाश हुआ देखकर श्रीकृष्ण भी ध्यानमग्न हो गए। वे वन में अकेले विचरण करते रहे। 

प्रश्न 5. श्रीकृष्ण विचारमग्न दशा में कहाँ लेट गए?

उत्तर: श्रीकृष्ण ज़मीन पर एक पेड़ के नीचे लेट गए।

प्रश्न 6. शिकारी ने श्रीकृष्ण को क्या समझा? 

उत्तर: शिकारी ने श्रीकृष्ण को दूर से एक हिरन समझ लिया।

प्रश्न 7. शिकारी ने क्या किया?

उत्तर: ‘शिकारी ने अपना धनुष तानकर एक तीर मारा जो श्रीकृष्ण के तलुए को छेदकर शरीर में घुस गया।

प्रश्न 8. यह तीर किसका कारण बना?

उत्तर: यह तीर श्रीकृष्ण की मृत्यु का कारण बना।

प्रश्न 9. पाँचों पांडव कहाँ चले गए?

उत्तर: पाँचों पांडव अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित को राजगद्दी पर बिठाकर तीर्थयात्रा करते हुए हिमालय की ओर चल दिए।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. बलराम ने शरीर क्यों त्याग दिया?

उत्तर: जब बलराम ने अपने समानवंशी राजाओं को आपस में कट-मरते देखा तो बलराम व्यथित हो गए। उन्होंने समाधि लेकर अपने प्राण त्याग दिए।

प्रश्न 2. श्रीकृष्ण कैसे मारे गए?

उत्तर: एक शिकारी ने पेड़ के नीचे सोते हुए श्रीकृष्ण को हिरण समझा और उसे मारने के लिए तीर चला दिया। वह तीर कृष्ण के तलुए को बंधता हुआ शरीर में घुस गया और उनका शरीर निष्प्राण हो गया।

प्रश्न 3. पांडव कहाँ चले गए?

उत्तर: पाँचों पांडव द्रौपदी को साथ लेकर हिमालय की ओर चले गए। रास्ते में युधिष्ठिर को छोड़कर सभी मृत्यु को प्राप्त हो गए।

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