NCERT Class 11 Economics Important Chapter 2 भारतीय अर्थव्यवस्था 1950-1990 Solutions Hindi Medium As Per New Syllabus. to each chapter is provided in the list so that you can easily browse through different chapters NCERT Class 11 Economics Important Chapter 2 भारतीय अर्थव्यवस्था 1950-1990 Notes and select need one. NCERT Class 11 Economics Additional Question Answers Download PDF. NCERT Class 11 Economics Important Solutions Hindi Medium.
NCERT Class 11 Economics Important Chapter 2 भारतीय अर्थव्यवस्था 1950-1990
Also, you can read the NCERT book online in these sections Solutions by Expert Teachers as per Central Board of Secondary Education (CBSE) Book guidelines. CBSE Class 11 Economics Additional Notes Hindi Medium are part of All Subject Solutions. Here we have given NCERT Class 11 Economics Important Notes Hindi Medium, CBSE Class 11 Economics Arthavyavastha ka Vikas Important Solutions for All Chapters, You can practice these here.
भारतीय अर्थव्यवस्था 1950-1990
Chapter: 2
| भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास |
| IMPORTANT SOLUTIONS |
लघु उत्तरीय प्रश्न:
1. भारत में योजना आयोग की स्थापना कब हुई थी?
उत्तर: भारत में योजना आयोग की स्थापना वर्ष 1950 में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई थी।
2. भारत में पंचवर्षीय योजनाओं के मुख्य लक्ष्य क्या थे?
उत्तर: पंचवर्षीय योजनाओं के चार मुख्य लक्ष्य थे: संवृद्धि, आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भरता और समानता।
3. भारतीय योजनाओं का निर्माता किसे माना जाता है?
उत्तर: विख्यात सांख्यिकीविद प्रशांतचंद्र महालनोबिस (पी.सी. महालनोबिस) को भारतीय योजनाओं का निर्माता माना जाता है।
4. आर्थिक संवृद्धि का क्या अर्थ है?
उत्तर: संवृद्धि का अर्थ देश में वस्तुओं और सेवाओं की उत्पादन क्षमता में वृद्धि से है, जिसका प्रामाणिक सूचक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में निरंतर वृद्धि होना है।
5. आधुनिकीकरण से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: उत्पादन बढ़ाने के लिए नई प्रौद्योगिकी (जैसे नए बीज या मशीनें) को अपनाना तथा सामाजिक दृष्टिकोण में परिवर्तन लाना आधुनिकीकरण कहलाता है।
6. आत्मनिर्भरता की नीति क्यों अपनाई गई?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य उन चीज़ों के आयात से बचना था जिनका देश में ही उत्पादन संभव था, विशेषकर खाद्यान्न के लिए विदेशी निर्भरता और विदेशी हस्तक्षेप को कम करना।
7. भूमि-सुधारों का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: कृषि में समानता लाने के लिए जोतों के स्वामित्व में परिवर्तन करना और बिचौलियों (ज़मींदारों) का उन्मूलन कर वास्तविक कृषकों को भूमि का स्वामी बनाना इसका मुख्य उद्देश्य था।
8. हरित क्रांति क्या है?
उत्तर: हरित क्रांति का तात्पर्य उच्च पैदावार वाली किस्मों के बीजों (HYV), विशेषकर गेहूँ तथा चावल के बीजों, उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग से कृषि उत्पादन में होने वाली भारी वृद्धि से है।
9. विपणित अधिशेष (Marketed Surplus) किसे कहते हैं?
उत्तर: किसानों द्वारा अपने निजी उपभोग के बाद उत्पादन का जो अंश बाज़ार में बेचा जाता है, उसे विपणित अधिशेष कहा जाता है।
10. औद्योगिक नीति प्रस्ताव, 1956 का मुख्य लक्ष्य क्या था?
उत्तर: इस प्रस्ताव का मुख्य लक्ष्य भारी उद्योगों पर राज्य (सरकार) का नियंत्रण स्थापित करना और समाज के समाजवादी स्वरूप का आधार तैयार करना था।
11. कर्वे समिति किससे संबंधित है?
उत्तर: 1955 में गठित कर्वे समिति (ग्राम तथा लघु उद्योग समिति) लघु उद्योगों के विकास और ग्राम विकास को प्रोत्साहित करने से संबंधित थी।
12. लघु उद्योग की पहचान किस आधार पर की जाती है?
उत्तर: लघु उद्योग की परिभाषा किसी इकाई की परिसंपत्तियों में किए जाने वाले अधिकतम निवेश की सीमा के आधार पर दी जाती है (जैसे 1950 में यह सीमा 5 लाख रुपये थी)।
13. आयात प्रतिस्थापन क्या है?
उत्तर: यह एक व्यापार नीति है जिसका उद्देश्य आयात किए जाने वाले उत्पादों को घरेलू उत्पादन द्वारा बदलना (देश में ही बनाना) है, ताकि विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचा जा सके।
14. प्रशुल्क और कोटा क्या होते हैं?
उत्तर: प्रशुल्क आयातित वस्तुओं पर लगाया गया कर है जिससे वे महँगी हो जाती हैं, जबकि कोटा आयातित की जाने वाली वस्तुओं की अधिकतम मात्रा तय करता है।
15. स्वतंत्रता के समय भारत की कितनी प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर आश्रित थी?
उत्तर: स्वतंत्रता के समय देश की लगभग 75 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर आश्रित थी।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न:
1. स्वतंत्रता के बाद भारत ने पूँजीवाद या पूर्ण समाजवाद की जगह ‘मिश्रित अर्थव्यवस्था’ को क्यों चुना?
उत्तर: स्वतंत्रता के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू और अन्य विचारकों ने ऐसा विकल्प खोजा जो पूँजीवाद और समाजवाद की कमियों से मुक्त हो। वे पूर्ण सोवियत समाजवाद नहीं अपनाना चाहते थे क्योंकि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में नागरिकों के भूमि-स्वामित्व और संपत्ति को छीनना संभव नहीं था। दूसरी ओर, पूर्ण पूँजीवाद में उत्पादन और वितरण सिर्फ क्रय-शक्ति के आधार पर होता है, जिससे गरीब लोगों को अपनी स्थिति सुधारने का अवसर नहीं मिल पाता। इसलिए, भारत ने मिश्रित अर्थव्यवस्था अपनाई, जिसमें निजी संपत्ति और लोकतंत्र के साथ-साथ एक सशक्त सार्वजनिक क्षेत्र (सरकार) भी हो, ताकि सामाजिक कल्याण और विकास सुनिश्चित किया जा सके।
2. पंचवर्षीय योजनाओं के चार प्रमुख लक्ष्यों की विस्तार से व्याख्या कीजिए।
उत्तर: पंचवर्षीय योजनाओं के चार प्रमुख लक्ष्य निम्नलिखित थे:
(i) संवृद्धि: देश में वस्तुओं और सेवाओं की उत्पादन क्षमता बढ़ाना। इसे सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में निरंतर वृद्धि के रूप में मापा जाता है।
(ii) आधुनिकीकरण: उत्पादन बढ़ाने के लिए नई तकनीक अपनाना (जैसे कृषि में नए बीज या कारखानों में नई मशीनें)। इसका अर्थ महिलाओं को समान अधिकार देने जैसे सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव भी है।
(iii) आत्मनिर्भरता: विशेषकर पहली सात योजनाओं में यह तय किया गया कि जिन वस्तुओं का देश में उत्पादन हो सकता है, उनका आयात रोका जाए, ताकि खाद्यान्न और तकनीक के लिए विदेशी शक्तियों पर निर्भरता खत्म हो।
(iv) समानता: केवल आर्थिक वृद्धि पर्याप्त नहीं है; विकास का लाभ समाज के सबसे गरीब वर्गों तक भी पहुँचना चाहिए ताकि धन-संपत्ति के वितरण में असमानताएँ कम हों।
3. हरित क्रांति ने भारतीय कृषि को कैसे लाभ पहुँचाया और इसके संभावित जोखिम क्या थे?
उत्तर: हरित क्रांति ने उच्च पैदावार वाले (HYV) बीजों, उर्वरकों और सिंचाई के प्रयोग के जरिए कृषि क्षेत्र को गतिहीनता से उबारा।
लाभ: इससे कृषि उत्पादकता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई, जिससे भारत खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बन गया। किसानों का विपणित अधिशेष बढ़ा, जिससे बाज़ार में अनाज की कीमतें स्थिर हुईं और सरकार आपात स्थिति के लिए बफर स्टॉक बना सकी।
जोखिम: यह डर था कि महँगे उर्वरक और बीज केवल अमीर किसान ही खरीद पाएंगे, जिससे छोटे और बड़े किसानों के बीच असमानता बढ़ेगी। साथ ही, HYV फसलों पर कीटनाशकों के हमले का डर था। लेकिन, सरकार द्वारा कम ब्याज पर ऋण और उर्वरकों पर सब्सिडी (Subsidy) देने के कारण छोटे किसानों को भी लाभ मिला और ये जोखिम टल गए।
4. 1950 से 1990 के दौरान औद्योगिक विकास में सार्वजनिक क्षेत्र (सरकार) को अग्रणी भूमिका क्यों सौंपी गई?
उत्तर: औद्योगिक विकास में सार्वजनिक क्षेत्र को मुख्य भूमिका सौंपने के प्रमुख कारण ये थे:
(i) पूँजी का अभाव: स्वतंत्रता के समय भारतीय उद्योगपतियों के पास अर्थव्यवस्था के विकास के लिए ज़रूरी बड़े और भारी उद्योगों में निवेश करने के लिए पर्याप्त पूँजी नहीं थी।
(ii) बाज़ार का छोटा आकार: उस समय भारतीय बाज़ार इतना बड़ा नहीं था कि उद्योगपतियों को बड़े पैमाने पर निवेश करने का प्रोत्साहन मिलता।
(iii) समाजवादी लक्ष्य: भारतीय अर्थव्यवस्था को समाजवाद के मार्ग पर ले जाने के लिए सरकार चाहती थी कि अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण और भारी उद्योगों पर राज्य का पूर्ण नियंत्रण रहे, जिससे विकास के लाभ पूरे समाज को मिलें। निजी क्षेत्र की नीतियाँ सार्वजनिक क्षेत्र की पूरक के रूप में रखी गईं।
5. ‘आयात प्रतिस्थापन’ की नीति क्या थी और भारतीय उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से संरक्षण क्यों दिया गया?
उत्तर: आयात प्रतिस्थापन एक अंतर्मुखी व्यापार नीति थी, जिसका उद्देश्य आयात की जाने वाली वस्तुओं (जैसे मोटर वाहन) का देश के भीतर ही घरेलू उद्योगों द्वारा उत्पादन करना था। घरेलू उद्योगों को प्रशुल्क और कोटा के माध्यम से संरक्षण दिया गया, जिसके पीछे मुख्य धारणा यह थी कि विकासशील देश (भारत) के उद्योग अभी इतने परिपक्व नहीं थे कि विकसित देशों की उन्नत वस्तुओं से प्रतिस्पर्धा कर सकें। योजनाकारों का मानना था कि यदि घरेलू उद्योगों को संरक्षण मिलेगा, तो वे समय के साथ सीखकर प्रतिस्पर्धी बन जाएंगे। इसके अलावा, विलासिता की वस्तुओं के आयात पर विदेशी मुद्रा के खर्च को रोकने के लिए भी यह संरक्षण आवश्यक माना गया।
Subject Ka Complete Video Solution Dekhein
Step-by-step easy concept explanation aur full questions Answer ke liye watch karein ya app download karein:



