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NCERT Class 11 Economics Important Chapter 1 स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर भारतीय अर्थव्यवस्था

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NCERT Class 11 Economics Important Chapter 1 स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर भारतीय अर्थव्यवस्था

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Chapter: 1

भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास
IMPORTANT SOLUTIONS

लघु उत्तरीय प्रश्न:

1. औपनिवेशिक शासन के अंतर्गत भारत में कृषि क्षेत्रक की गतिहीनता का मुख्य कारण क्या था?

उत्तर: औपनिवेशिक शासन द्वारा लागू की गई भू-व्यवस्था प्रणालियाँ, विशेषकर जमींदारी व्यवस्था, कृषि की गतिहीनता का मुख्य कारण थीं।

2. बंगाल का कौन-सा सूती कपड़ा पूरे विश्व में अपनी उत्कृष्टता के लिए विख्यात था?

उत्तर: बंगाल, विशेषकर ढाका के आस-पास के क्षेत्र का मलमल पूरे विश्व में विख्यात था।

3. ब्रिटिश शासन में भारत के राष्ट्रीय और प्रति व्यक्ति आय का आकलन करने वाले कुछ प्रमुख अर्थशास्त्रियों के नाम क्या थे?

उत्तर: प्रमुख आकलनकर्ता दादा भाई नौरोजी, विलियम डिग्बी, फिण्डले शिरास, डॉ. वी.के.आर.वी. राव तथा आर.सी. देसाई थे।

4. भारत में पहली बार जनसंख्या की विस्तृत जानकारी किस वर्ष एकत्रित की गई थी?

उत्तर: भारत में पहली जनगणना वर्ष 1881 में की गई थी।

5. जनांकिकीय संक्रमण के द्वितीय सोपान का आरंभ किस वर्ष से माना जाता है?

उत्तर: वर्ष 1921 के बाद के समय को जनांकिकीय संक्रमण के द्वितीय सोपान का आरंभ माना जाता है।

6. अंग्रेजों ने भारत में रेलों का आरंभ किस वर्ष किया था?

उत्तर: अंग्रेजों ने भारत में रेलों का आरंभ वर्ष 1850 में किया था, जिसे उनका सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान माना जाता है।

7. भारत में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (TISCO) की स्थापना कब हुई थी?

उत्तर: टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (TISCO) की स्थापना वर्ष 1907 में हुई थी।

8. स्वतंत्रता से पूर्व भारत में साक्षरता दर कितनी थी?

उत्तर: उस समय भारत की कुल साक्षरता दर 16 प्रतिशत से भी कम थी, और इसमें महिला साक्षरता दर मात्र 7 प्रतिशत थी।

9. औपनिवेशिक काल में भारत में शिशु मृत्यु दर कितनी थी?

उत्तर: औपनिवेशिक काल में शिशु मृत्यु दर बहुत अधिक, लगभग 218 प्रति हजार थी।

10. पूँजीगत उद्योग किसे कहते हैं?

उत्तर: पूँजीगत उद्योग वे उद्योग होते हैं जो तात्कालिक उपभोग में काम आने वाली वस्तुओं के उत्पादन के लिए मशीनों और कलपुर्जों का निर्माण करते हैं।

11. स्वेज नहर के खुलने से ब्रिटिश व्यापार पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर: 1869 में स्वेज नहर के खुलने से परिवहन लागतें बहुत कम हो गईं, जिससे भारतीय बाज़ार तक ब्रिटिश उत्पादों की पहुँच सुगम हो गई और भारत के व्यापार पर अंग्रेजी नियंत्रण और सख्त हो गया।

12. स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत की कितनी प्रतिशत जनसंख्या प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कृषि पर निर्भर थी?

उत्तर: देश की लगभग 70-75 प्रतिशत (तथा गाँवों में बसी 85 प्रतिशत) जनसंख्या अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर थी।

13. औपनिवेशिक काल में भारतीय संपत्ति का दोहन किस प्रकार हुआ?

उत्तर: भारत के भारी निर्यात अधिशेष का उपयोग अंग्रेजों द्वारा भारत पर शासन करने के खर्चों, युद्धों पर व्यय और अदृश्य मदों के आयात पर किया गया, जिससे भारत की संपदा का दोहन हुआ।

14. ब्रिटिश शासन के दौरान भारत के विदेशी व्यापार पर किसका एकाधिकार था?

उत्तर: भारत के आयात-निर्यात व्यापार पर व्यावहारिक रूप से इंग्लैंड ने अपना एकाधिकार जमाए रखा था और आधे से अधिक व्यापार केवल वहीं तक सीमित था।

15. स्वतंत्रता के समय भारत में जीवन प्रत्याशा स्तर क्या था?

उत्तर: उस समय भारत का जीवन प्रत्याशा स्तर केवल 32 वर्ष था।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न:

1. ब्रिटिश औपनिवेशिक शासकों द्वारा भारत के व्यवस्थित वि-औद्योगीकरण के पीछे क्या दोहरे उद्देश्य थे?

उत्तर: भारत के वि-औद्योगीकरण के पीछे विदेशी शासकों का दोहरा उद्देश्य था:

(i) वे भारत को इंग्लैंड में तेजी से विकसित हो रहे आधुनिक उद्योगों के लिए केवल एक कच्चे माल का निर्यातक देश बनाना चाहते थे।

(ii) वे उन ब्रिटिश उद्योगों के उत्पादन के लिए भारत को एक विशाल बाज़ार बनाना चाहते थे। 

(iii) इस प्रकार वे भारत के सहारे इंग्लैंड के लिए अधिकतम लाभ सुनिश्चित करना चाहते थे। 

(iv) इसके परिणामस्वरूप भारत की विश्व प्रसिद्ध शिल्पकलाओं का पतन हो गया, देश में बड़े स्तर पर बेरोजगारी फैली और भारतीय बाज़ार इंग्लैंड से आयातित सस्ते उत्पादों से भर गए।

2. औपनिवेशिक शासन के अंतर्गत कृषि क्षेत्र में आई गतिहीनता और किसानों की दुर्दशा के मुख्य कारण क्या थे?

उत्तर: कृषि क्षेत्र की गतिहीनता का मुख्य कारण अंग्रेजों द्वारा लागू की गई भू-व्यवस्था प्रणालियाँ थीं, विशेषकर बंगाल प्रेसीडेंसी में लागू की गई जमींदारी व्यवस्था। इस व्यवस्था में कृषि से होने वाले सभी लाभों को जमींदार हड़प लेते थे और किसानों के पास कुछ नहीं बचता था। जमींदारों की रुचि कृषि सुधारने में नहीं, बल्कि किसानों की आर्थिक दुर्दशा की अनदेखी कर उनसे अधिकतम लगान संग्रह करने में थी। लगान जमा न कर पाने पर जमींदारों के अधिकार छीन लिए जाते थे, इसलिए वे किसानों का शोषण करते थे। इसके अलावा, प्रौद्योगिकी के निम्न स्तर, सिंचाई सुविधाओं के अभाव और उर्वरकों के नगण्य प्रयोग ने भी कृषि उत्पादकता को बेहद निचले स्तर पर रखा, जिससे किसानों की दुर्दशा और बढ़ी।

3. स्वतंत्रता से पूर्व भारत की जनांकिकीय परिस्थिति का वर्णन करें।

उत्तर: स्वतंत्रता से पूर्व भारत की जनांकिकीय स्थिति जन-स्वास्थ्य और शिक्षा के मामले में बहुत पिछड़ी हुई थी:

(i) साक्षरता: कुल साक्षरता दर 16 प्रतिशत से भी कम थी, और महिला साक्षरता मात्र 7 प्रतिशत के नगण्य स्तर पर थी।

(ii) स्वास्थ्य सेवाएँ: जन-स्वास्थ्य सेवाएँ अधिकांश जनता को उपलब्ध ही नहीं थीं। जहाँ थीं, वहाँ वे अपर्याप्त थीं, जिसके कारण जल और वायु जनित संक्रमण रोगों का भारी प्रकोप रहता था।

(iii) मृत्यु दर: देश की सकल मृत्यु दर बहुत ऊँची थी। शिशु मृत्यु दर विशेष रूप से चौंकाने वाली 218 प्रति हजार थी।

(iv) जीवन प्रत्याशा: औसत जीवन प्रत्याशा उस समय केवल 32 वर्ष थी, और समाज में व्यापक स्तर पर गरीबी फैली हुई थी।

4. ब्रिटिश शासन के दौरान भारत के विदेशी व्यापार की संरचना और दिशा पर औपनिवेशिक नीतियों का क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर: औपनिवेशिक सरकार की प्रतिबंधकारी व्यापार नीतियों का भारत के विदेशी व्यापार पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ा:

(i) भारत मात्र कच्चे माल (जैसे रेशम, कपास, ऊन, चीनी, नील और पटसन) का निर्यातक और इंग्लैंड के कारखानों में बनी अंतिम उपभोक्ता वस्तुओं (सूती, रेशमी, ऊनी वस्त्र) व हल्की मशीनों का आयातक बनकर रह गया।

(ii) इंग्लैंड ने भारत के व्यापार पर एकाधिकार स्थापित कर लिया। भारत का आधे से अधिक व्यापार केवल इंग्लैंड तक सीमित कर दिया गया, जबकि शेष व्यापार कुछ गिने-चुने देशों (चीन, श्रीलंका, ईरान) से ही होता था।

(iii) स्वेज नहर के खुलने से ब्रिटेन का भारत के व्यापार पर नियंत्रण और अधिक सख्त हो गया। विदेशी व्यापार से होने वाले बड़े ‘निर्यात अधिशेष’ का उपयोग भारत के विकास के बजाय ब्रिटिश शासन के खर्चों और युद्धों को पोषित करने में किया गया।

5. अंग्रेजों द्वारा भारत में आधारिक संरचना (Infrastructure) के विकास का वास्तविक उद्देश्य क्या था?

उत्तर: औपनिवेशिक शासन के दौरान भारत में रेलों, पत्तनों, जल परिवहन और डाक-तार का विकास अवश्य हुआ, लेकिन इसका उद्देश्य जनसामान्य को सुविधाएँ प्रदान करना नहीं, बल्कि औपनिवेशिक हितों को साधना था।

(i) सड़कें: सड़कों का निर्माण देश के भीतर अंग्रेजी सेनाओं के आवागमन और कच्चे माल को निकटतम रेलवे स्टेशन या पत्तन तक पहुँचाने के लिए किया गया था, ताकि उसे इंग्लैंड भेजा जा सके।

(ii) रेलवे (1850): रेलों के विकास ने भारतीय कृषि के व्यावसायीकरण को बढ़ावा दिया, लेकिन इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आत्मनिर्भरता नष्ट हो गई। यद्यपि भारत का निर्यात बढ़ा, लेकिन इसका लाभ देशवासियों को नहीं मिला।

(iii) तार और संचार: महँगी तार व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य अंग्रेजी कानून व्यवस्था को बनाए रखना था, न कि जनता का कल्याण करना।

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