🪔 Diwali Maha Offer Class 10 & 12 Bundles @ ₹299 ₹599
Ends in:
03d
14h
35m
40s

NCERT Class 11 Economics Chapter 4 भारत में मानव पूँजी का निर्माण

NCERT Class 11 Economics Chapter 4 भारत में मानव पूँजी का निर्माण Solutions Hindi Medium As Per New Syllabus. to each chapter is provided in the list so that you can easily browse through different chapters NCERT Class 11 Economics Chapter 4 भारत में मानव पूँजी का निर्माण Notes and select need one. NCERT Class 11 Economics Chapter 4 भारत में मानव पूँजी का निर्माण Question Answers Download PDF. NCERT Class 11 Economics Bharatiya Arthavyavastha ka Vikas Hindi Medium Solutions.

NCERT Class 11 Economics Chapter 4 भारत में मानव पूँजी का निर्माण

Also, you can read the NCERT book online in these sections Solutions by Expert Teachers as per Central Board of Secondary Education (CBSE) Book guidelines. CBSE Class 11 Economics Bharatiya Arthavyavastha ka Vikas Textual Solutions are part of All Subject Solutions. Here we have given NCERT Class 11 Economics Notes Hindi Medium, CBSE Class 11 Economics Bharatiya Arthavyavastha ka Vikas in Hindi Medium Solutions for All Chapters, You can practice these here.

Chapter: 4

भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास
अभ्यास

1. किसी देश में मानवीय पूँजी के दो प्रमुख स्रोत क्या होते हैं?

उत्तर: किसी देश में मानवीय पूँजी निर्माण के दो सबसे महत्वपूर्ण स्रोत शिक्षा में निवेश और स्वास्थ्य में निवेश हैं। इनके अतिरिक्त कार्य के दौरान प्रशिक्षण, प्रवासन (migration) और सूचना पर व्यय भी मानव पूँजी निर्माण के अन्य स्रोत माने जाते हैं।

2. किसी देश की शैक्षिक उपलब्धियों के दो सूचक क्या होंगे?

उत्तर: किसी देश की शैक्षिक उपलब्धियों के प्रमुख दो सूचक हैं—

(i) साक्षरता दर। 

(ii) नामांकन दर।

3. भारत में शैक्षिक उपलब्धियों में क्षेत्रीय विषमताएँ क्यों दिखाई दे रही हैं?

उत्तर: भारत में शैक्षिक उपलब्धियों और शिक्षा के अवसरों में क्षेत्रीय विषमताएँ इसलिए हैं क्योंकि विभिन्न राज्यों के बीच प्रारंभिक शिक्षा पर प्रति विद्यार्थी सार्वजनिक व्यय में भारी अंतर है। उदाहरण के लिए, वर्ष 2020-21 के आंकड़ों के अनुसार, सिक्किम में प्रति विद्यार्थी व्यय का उच्च स्तर ₹96,968 था, जबकि बिहार में यह मात्र ₹10,710 था। इसी वित्तीय विषमता के कारण राज्यों की शैक्षिक उपलब्धियों में बहुत बड़ा अंतर दिखाई देता है।

4. मानव पूँजी निर्माण और मानव विकास के भेद को स्पष्ट करें।

उत्तर: मानव पूँजी और मानव विकास के बीच मुख्य भेद है:

मानव पूँजी निर्माणमानव विकास
इसका उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य एवं प्रशिक्षण के माध्यम से व्यक्ति की उत्पादक क्षमता बढ़ाना है।इसका उद्देश्य लोगों के जीवन की समग्र गुणवत्ता एवं कल्याण में सुधार करना है।
यह मुख्यतः आर्थिक विकास से संबंधित है।यह आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक सभी पहलुओं से संबंधित है।
इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल में निवेश पर बल दिया जाता है।इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, समानता, स्वतंत्रता और जीवन स्तर सभी शामिल होते हैं।

5. मानव पूँजी की तुलना में मानव विकास किस प्रकार से अधिक व्यापक है?

उत्तर: मानव विकास की अवधारणा मानव पूँजी की तुलना में अधिक व्यापक है क्योंकि यह मनुष्य को केवल श्रम की उत्पादकता बढ़ाने वाली एक मशीन या साधन नहीं मानती, बल्कि यह मानव को ही साध्य (अंतिम लक्ष्य) मानती है। मानव विकास का मानना है कि समाज के प्रत्येक सदस्य को साक्षर होने तथा स्वस्थ जीवन जीने का मौलिक अधिकार है, श्रम उत्पादकता में इसका योगदान हो या न हो। यह अधिक व्यापक इसलिए है क्योंकि जब लोगों के पास पढ़ने-लिखने और सुदीर्घ स्वस्थ जीवन जीने की क्षमता होती है, तभी वे ऐसे अन्य विकल्पों का चयन करने में सक्षम हो पाते हैं जिन्हें वे अपने कल्याण के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं। अतः मानव विकास केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित न रहकर समग्र मानव कल्याण की बात करता है।

6. मानव पूँजी के निर्माण में किन कारकों का योगदान रहता है?

उत्तर: मानव पूँजी के निर्माण में मुख्य रूप से निम्नलिखित पाँच कारकों का योगदान रहता है:

(i) शिक्षा में निवेश: इसे मानव पूँजी का सबसे प्रमुख स्रोत माना जाता है।

(ii) स्वास्थ्य में निवेश: स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च करने से एक स्वस्थ और उत्पादक श्रमबल तैयार होता है।

(iii) कार्य के दौरान प्रशिक्षण: यह कर्मचारियों के कौशल और उत्पादकता को बढ़ाता है।

(iv) प्रवासन (Migration): बेहतर आय और रोजगार के अवसरों के लिए दूसरे स्थानों पर जाना।

(v) सूचना पर व्यय: श्रम बाजार, शिक्षा और स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी प्राप्त करने पर किया गया खर्च।

7. सरकारी संस्थाएँ भारत में किस प्रकार स्कूल एवं अस्पताल की सुविधाएँ उपलब्ध करवाती हैं?

उत्तर: भारत में शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों पर व्यय संघ (केंद्र), राज्य तथा स्थानीय निकायों (जैसे- नगर निगम, ग्राम पंचायत) द्वारा साथ-साथ वहन किया जाता है।

शिक्षा के क्षेत्र में: संघ और राज्य स्तर पर शिक्षा मंत्रालय, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) जैसी संस्थाएँ स्कूल और उच्च शिक्षा की सुविधाएँ और मानक तय करती हैं।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में: संघ और राज्य स्तरों पर स्वास्थ्य मंत्रालय/विभाग, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) आदि संस्थाएँ अस्पताल और चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध करवाती हैं। चूँकि भारत की एक बड़ी आबादी बुनियादी शिक्षा और विशिष्ट स्वास्थ्य सुविधाओं का खर्च नहीं उठा सकती, इसलिए सरकार इन्हें नागरिकों का अधिकार मानकर, विशेषकर सामाजिक रूप से वंचित वर्गों को, निःशुल्क प्रदान करने का प्रयास करती है।

8. शिक्षा को किसी राष्ट्र के विकास में एक महत्वपूर्ण आगत माना जाता है। क्यों?

उत्तर: शिक्षा को किसी राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण आगत इसलिए माना जाता है क्योंकि:

(i) एक शिक्षित व्यक्ति का श्रम-कौशल अशिक्षित की तुलना में अधिक होता है, जिससे वह अधिक आय का सृजन करता है और आर्थिक वृद्धि में उसका योगदान बढ़ता है।

(ii) शिक्षा व्यक्ति को जीवन में बेहतर विकल्पों का चयन करने के योग्य बनाती है।

(iii) यह समाज में हो रहे परिवर्तनों की बेहतर समझ प्रदान करती है और वैज्ञानिक प्रगति तथा नव-परिवर्तनों को बढ़ावा देती है।

(iv) शिक्षित श्रम शक्ति नई प्रौद्योगिकियों को तेज़ी से अपनाने में सहायक होती है, जिससे विकास प्रक्रिया को गति मिलती है।

9. पूँजी निर्माण के निम्नलिखित स्रोतों पर चर्चा कीजिए:

(क) स्वास्थ्य आधारिक संरचना।

उत्तर: शिक्षा की तरह स्वास्थ्य भी देश के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण आगत है। यदि चिकित्सा सुविधाएँ सुलभ न हों, तो एक बीमार श्रमिक काम से विमुख रहेगा जिससे उत्पादकता घटेगी। इसलिए निवारक आयुर्विज्ञान (जैसे- टीकाकरण), चिकित्सीय आयुर्विज्ञान (बीमारियों का इलाज), सामाजिक आयुर्विज्ञान (स्वास्थ्य साक्षरता) और स्वच्छ पेयजल पर किया गया व्यय सीधे तौर पर स्वस्थ श्रमबल की पूर्ति को बढ़ाता है। इस प्रकार स्वास्थ्य पर किया गया व्यय मानव पूँजी निर्माण का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।

(ख) प्रवासन पर व्यय।

उत्तर: प्रवासन पर व्यय भी मानव पूँजी निर्माण का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। लोग बेहतर शिक्षा, प्रशिक्षण तथा अधिक आय वाले रोजगार की खोज में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं। प्रवासन के दौरान परिवहन, आवास और अन्य आवश्यक खर्च किए जाते हैं। इन खर्चों के परिणामस्वरूप व्यक्ति को बेहतर रोजगार, अधिक आय तथा नए कौशल प्राप्त होते हैं। इसलिए प्रवासन पर किया गया व्यय मानव पूँजी में निवेश माना जाता है।

10. मानव संसाधनों के प्रभावी प्रयोग के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा पर व्यय संबंधी जानकारी प्राप्त करने की आवश्यकता का निरूपण करें।

उत्तर: लोग श्रम बाजार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित सही सूचनाएँ प्राप्त करने के लिए भी धन व्यय करते हैं। वे यह जानना चाहते हैं कि विभिन्न कार्यों में वेतनमान क्या है, या कौन सी शैक्षिक संस्थाएँ उचित लागत पर सही प्रकार के कौशल का प्रशिक्षण दे रही हैं। यह जानकारी इसलिए आवश्यक है क्योंकि इसके माध्यम से लोग मानव पूँजी में सही जगह निवेश कर पाते हैं और प्राप्त मानव पूँजी के भंडार (अपने कौशल और ज्ञान) का अधिक प्रभावी ढंग से सदुपयोग कर पाते हैं। इसलिए, सटीक सूचना प्राप्त करने पर किया गया व्यय भी मानव संसाधनों के बेहतर उपयोग और पूँजी निर्माण के लिए बहुत आवश्यक है।

11. मानव पूँजी में निवेश आर्थिक समृद्धि में किस प्रकार सहायक होता है?

उत्तर: मानव पूँजी में निवेश से लोगों की शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल और कार्यकुशलता में वृद्धि होती है। इससे उनकी उत्पादकता बढ़ती है तथा वे अधिक कुशलता से कार्य कर पाते हैं। शिक्षित और स्वस्थ श्रमिक नई तकनीकों को आसानी से अपनाते हैं, जिससे उत्पादन तथा राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है। इसके परिणामस्वरूप रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, लोगों की आय में सुधार होता है और जीवन स्तर ऊँचा उठता है। मानव पूँजी में निवेश नवाचार, अनुसंधान तथा आर्थिक विकास को भी प्रोत्साहित करता है। इसलिए मानव पूँजी में किया गया निवेश किसी भी देश की आर्थिक समृद्धि और सतत विकास का प्रमुख आधार माना जाता है।

12. विश्व भर में औसत शैक्षिक स्तर में सुधार के साथ-साथ विषमताओं में कमी की प्रवृत्ति पायी गयी है। टिप्पणी करें।

उत्तर: पिछले कुछ दशकों में विश्व के अधिकांश देशों में शिक्षा का स्तर लगातार बढ़ा है। सरकारों द्वारा शिक्षा के प्रसार, सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा, बालिका शिक्षा, वयस्क शिक्षा तथा तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के कारण साक्षरता दर और विद्यालयों में नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके परिणामस्वरूप शिक्षा में क्षेत्रीय, सामाजिक तथा लैंगिक विषमताओं में भी कमी आई है। यद्यपि विकासशील देशों में अभी भी कुछ असमानताएँ विद्यमान हैं, फिर भी वैश्विक स्तर पर शिक्षा के अवसर पहले की अपेक्षा अधिक समान हुए हैं। इसलिए यह कहा जा सकता है कि विश्व में औसत शैक्षिक स्तर बढ़ने के साथ-साथ शैक्षिक विषमताओं में भी कमी की प्रवृत्ति देखी गई है।

13. किसी राष्ट्र के आर्थिक विकास में शिक्षा की भूमिका का विश्लेषण करें।

उत्तर: राष्ट्र के आर्थिक विकास में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निम्नलिखित हैं:

(i) शिक्षा श्रम-कौशल को बढ़ाती है, जिससे व्यक्ति की आय उपार्जन क्षमता में वृद्धि होती है और राष्ट्रीय आय बढ़ती है।

(ii) एक सुशिक्षित व्यक्ति लोकतांत्रिक प्रक्रिया में प्रभावपूर्ण भागीदारी करके राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में बड़ा योगदान देता है।

(iii) शिक्षा लोगों को नई तकनीक को अपनाने, नवाचार करने और समाज में हो रहे परिवर्तनों को बेहतर ढंग से समझने के योग्य बनाती है।

14. समझाइए कि शिक्षा में निवेश आर्थिक समृद्धि को किस प्रकार प्रभावित करता है?

उत्तर: शिक्षा में निवेश से व्यक्तियों के ज्ञान, कौशल और कार्यक्षमता का विकास होता है। शिक्षित व्यक्ति अधिक उत्पादक होते हैं और उन्हें बेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं। इससे उनकी आय बढ़ती है तथा वे देश की आर्थिक गतिविधियों में अधिक प्रभावी योगदान देते हैं। शिक्षा नई तकनीकों के विकास और उनके उपयोग को बढ़ावा देती है, जिससे उत्पादन और राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त शिक्षा उद्यमिता, अनुसंधान तथा नवाचार को प्रोत्साहित करती है, जो दीर्घकालीन आर्थिक विकास के लिए आवश्यक हैं। इसलिए शिक्षा में निवेश आर्थिक समृद्धि का प्रमुख साधन माना जाता है।

15. किसी व्यक्ति के लिए कार्य के दौरान प्रशिक्षण क्यों आवश्यक होता है?

उत्तर: कार्य के दौरान प्रशिक्षण व्यक्ति की कार्यकुशलता और व्यावसायिक क्षमता को बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। प्रशिक्षण के द्वारा कर्मचारी अपने कार्य से संबंधित नई तकनीकों, आधुनिक उपकरणों तथा बेहतर कार्य-पद्धतियों का ज्ञान प्राप्त करता है। इससे कार्य की गुणवत्ता और उत्पादकता में वृद्धि होती है तथा गलतियों की संभावना कम हो जाती है। प्रशिक्षण प्राप्त कर्मचारी बदलती तकनीकों और परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को आसानी से ढाल सकता है। इसके अतिरिक्त प्रशिक्षण से पदोन्नति, अधिक वेतन तथा बेहतर रोजगार के अवसर भी प्राप्त होते हैं। इसलिए कार्य के दौरान प्रशिक्षण मानव पूँजी निर्माण का एक महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है।

16. मानव पूँजी और आर्थिक समृद्धि के बीच संबंध स्पष्ट करें।

उत्तर: मानव पूँजी और आर्थिक समृद्धि के बीच एक गहरा और ‘कारण-प्रभाव’ (Cause and Effect) वाला संबंध है; ये दोनों एक-दूसरे को परस्पर प्रभावित करते हैं। एक ओर, उच्च आय (आर्थिक समृद्धि) होने पर शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं पर अधिक निवेश किया जा सकता है, जिससे उच्च स्तर की मानव पूँजी का निर्माण होता है। दूसरी ओर, उच्च मानव पूँजी निर्माण (शिक्षित और स्वस्थ श्रमिक) श्रम की उत्पादकता बढ़ाकर आय की संवृद्धि (आर्थिक समृद्धि) में सहायता करता है।

17. भारत में स्त्री शिक्षा के प्रोत्साहन की आवश्यकता पर चर्चा करें।

उत्तर: भारत में स्त्री शिक्षा को विशेष प्रोत्साहन देने की अत्यधिक आवश्यकता है क्योंकि:

(i) यह महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक प्रतिष्ठा प्रदान करती है।

(ii) स्त्री शिक्षा का प्रजनन दर (fertility rate) को कम करने में अनुकूल प्रभाव पड़ता है।

(iii) एक शिक्षित महिला अपने तथा अपने बच्चों के स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल कर सकती है, जिससे भावी पीढ़ी की गुणवत्ता में सुधार होता है।

18. शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में सरकार के विविध प्रकार के हस्तक्षेपों के पक्ष में तर्क दीजिए।

उत्तर: शिक्षा और स्वास्थ्य में सरकारी हस्तक्षेप (Government Intervention) निम्नलिखित कारणों से अनिवार्य है:

(i) दीर्घकालिक प्रभाव: इन क्षेत्रों में किए गए खर्च का प्रभाव दीर्घकालिक होता है। यदि बच्चे को गलत स्कूल या अस्पताल में भेज दिया जाए, तो सुधारने से पहले भारी नुकसान हो चुका होता है।

(ii) शोषण से बचाव: आम उपभोक्ताओं को इन सेवाओं की गुणवत्ता और लागत की पूरी जानकारी नहीं होती, जिससे निजी संस्थाएं एकाधिकार बनाकर उनका शोषण कर सकती हैं।

(iii) गरीबों की पहुँच: भारत की एक बड़ी आबादी गरीबी रेखा से नीचे है, जो बुनियादी शिक्षा और स्वास्थ्य का खर्च नहीं उठा सकती। इसलिए, सरकार को सामाजिक रूप से वंचित वर्गों को ये सुविधाएँ मुफ्त या सस्ती दरों पर उपलब्ध करानी चाहिए।

19. भारत में मानव पूँजी निर्माण की मुख्य समस्याएँ क्या हैं?

उत्तर: भारत में मानव पूँजी निर्माण की मुख्य समस्याएँ हैं:

(i) क्षेत्रीय विषमताएँ: प्रारंभिक शिक्षा पर प्रति विद्यार्थी खर्च में राज्यों के बीच भारी असमानता है (जैसे सिक्किम में खर्च बहुत अधिक है जबकि बिहार में बहुत कम)।

(ii) कम सार्वजनिक व्यय: शिक्षा पर सरकारी व्यय अभी भी लक्षित सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 6 प्रतिशत से बहुत कम (लगभग 4 प्रतिशत के आसपास) है।

(iii) निरक्षरता: शत-प्रतिशत साक्षरता आज भी एक सपना है; आज भी देश में निरक्षरों की भारी संख्या है।

(iv) उच्च शिक्षा का अभाव और बेरोजगारी: बहुत कम लोग उच्च शिक्षा तक पहुँच पाते हैं (शिक्षा का पिरामिड बहुत नुकीला है)। इसके अलावा, स्नातक या उससे अधिक पढ़े-लिखे युवाओं (विशेषकर ग्रामीण महिलाओं) में बेरोजगारी की दर बहुत अधिक है।

20. क्या आपके विचार में सरकार को शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल संस्थानों में लिए जाने वाले शुल्कों की संरचना निर्धारित करनी चाहिए? यदि हाँ, तो क्यों?

उत्तर: हाँ, सरकार को इन संस्थानों के शुल्कों (Fees) की संरचना अवश्य निर्धारित करनी चाहिए। इसका कारण यह है कि व्यक्तिगत उपभोक्ताओं (मरीजों और छात्रों के अभिभावकों) को इन सेवाओं की वास्तविक गुणवत्ता और लागत की पूर्ण जानकारी नहीं होती है। ऐसी स्थिति में निजी सेवा प्रदाता एकाधिकार (monopoly) स्थापित करके मनमानी कीमतें वसूल कर लोगों का शोषण कर सकते हैं। इसलिए, सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह शुल्क निर्धारित करे और निजी संस्थाओं को उचित मानकों के साथ सही कीमत पर सेवाएँ देने के लिए बाध्य करे।

NEW VIDEO CLASS

Subject Ka Complete Video Solution Dekhein

Step-by-step easy concept explanation aur full questions Answer ke liye watch karein ya app download karein:

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Scroll to Top