NCERT Class 11 Business Studies Important Chapter 2 व्यावसायिक संगठन के स्वरूप

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NCERT Class 11 Business Studies Important Chapter 2 व्यावसायिक संगठन के स्वरूप

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Chapter: 2

भाग – 1: व्यवसाय के आधार
IMPORTANT QUESTION ANSWER

लघु उत्तरीय प्रश्न:

1. एकल स्वामित्व क्या है? 

उत्तर: एकल स्वामित्व उस व्यवसाय को कहते हैं जिसका स्वामित्व, प्रबंधन एवं नियंत्रण एक ही व्यक्ति के हाथ में होता है तथा वही संपूर्ण लाभ पाने का अधिकारी और हानि के लिए उत्तरदायी होता है।

2. संयुक्त हिंदू परिवार व्यवसाय में ‘कर्ता’ किसे कहते हैं? 

उत्तर: संयुक्त हिंदू परिवार व्यवसाय पर परिवार के मुखिया का नियंत्रण रहता है, जो परिवार का सबसे बड़ा सदस्य होता है और उसे ‘कर्ता’ कहा जाता है।

3. सह-समांशी का क्या अर्थ है? 

उत्तर: संयुक्त हिंदू परिवार व्यवसाय में सभी सदस्यों का पूर्वज की संपत्ति पर बराबर का स्वामित्व होता है तथा उन्हें ही सह-समांशी कहा जाता है।

4. किसी साझेदारी को प्रारंभ करने के लिए कितने सदस्यों की आवश्यकता होती है? 

उत्तर: किसी साझेदारी को प्रारंभ करने के लिए न्यूनतम दो सदस्यों की आवश्यकता होती है, और वर्तमान में कंपनी विविध नियम-2014 के अनुसार अधिकतम 50 सदस्य हो सकते हैं।

5. गुप्त साझेदार कौन होता है? 

उत्तर: गुप्त साझेदार वह होता है जिसके फर्म से संबंध को साधारण जनता नहीं जानती है, लेकिन वह पूँजी लगाता है, प्रबंध में भाग लेता है और लेनदारों के प्रति उसका दायित्व असीमित होता है।

6. साझेदारी संलेख क्या है? 

उत्तर: वह लिखित समझौता जो साझेदारी को शासित करने के लिए शर्तों व परिस्थितियों का उल्लेख करता है, उसे साझेदारी संलेख कहलाता है।

7. नाममात्र का साझेदार क्या होता है? 

उत्तर: यह वह साझेदार होता है जिसके नाम का प्रयोग फर्म करती है, लेकिन वह न तो पूँजी लगाता है, न ही प्रबंध में भाग लेता है और न ही लाभ-हानि में भागीदार होता है, यद्यपि फर्म के ऋणों के लिए वह तीसरे पक्षों के प्रति उत्तरदायी होता है।

8. सहकारी समिति का मुख्य उद्देश्य क्या है? 

उत्तर: सहकारी समिति का उद्देश्य पारस्परिक सहायता और सदस्यों के कल्याण के मूल्यों पर ज़ोर देना है, इसलिए इसके कार्यों में लाभ कमाने से अधिक सेवा भावना प्रधान रहती है।

9. सहकारी समिति में मताधिकार का क्या नियम होता है? 

उत्तर: सहकारी समिति ‘एक व्यक्ति एक वोट’ के सिद्धांत से शासित होती है, जिसमें सदस्यों द्वारा लगाई गई पूँजी की राशि से प्रभावित हुए बिना प्रत्येक सदस्य को वोट का समान अधिकार प्राप्त है।

10. क्या एक नाबालिग किसी साझेदारी फर्म में पूर्ण साझेदार बन सकता है? 

उत्तर: चूँकि एक नाबालिग अनुबंध नहीं कर सकता, इसलिए वह पूर्ण साझेदार नहीं बन सकता, लेकिन अन्य सभी साझेदारों की सहमति से उसे फर्म के लाभों में भागीदार बनाया जा सकता है।

11. उपभोक्ता सहकारी समितियाँ क्यों बनाई जाती हैं? 

उत्तर: उपभोक्ता सहकारी समितियों का गठन उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए किया जाता है, जिसका उद्देश्य मध्यस्थों (बिचौलियों) को समाप्त कर उच्च गुणवत्ता वाली वस्तुएँ उचित मूल्य पर प्राप्त करना होता है।

12. कंपनी को ‘कृत्रिम व्यक्ति’ (Artificial Person) क्यों कहा जाता है? 

उत्तर: कंपनी को कृत्रिम व्यक्ति कहा जाता है क्योंकि इसकी रचना कानून द्वारा होती है और प्राकृतिक व्यक्ति के समान यह संपत्ति रख सकती है, अनुबंध कर सकती है, लेकिन यह साँस नहीं ले सकती, खा नहीं सकती या बात नहीं कर सकती।

13. निजी कंपनी में सदस्यों की न्यूनतम और अधिकतम संख्या कितनी होती है? 

उत्तर: एक निजी कंपनी के निर्माण के लिए न्यूनतम 2 सदस्यों की आवश्यकता होती है तथा इसमें अधिकतम 200 सदस्य हो सकते हैं।

14. सार्वजनिक कंपनी में निदेशकों की न्यूनतम संख्या कितनी होती है? 

उत्तर: एक सार्वजनिक कंपनी में कम से कम तीन निदेशकों की आवश्यकता होती है।

15. एकल स्वामी का दायित्व कैसा होता है? 

उत्तर: एकल स्वामी का दायित्व असीमित होता है, जिसका अर्थ है कि यदि व्यवसाय की संपत्तियाँ ऋण चुकाने के लिए अपर्याप्त हैं, तो स्वामी अपनी निजी संपत्तियों से ऋणों का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न:

1. एकल स्वामित्व के प्रमुख लाभ और सीमाएं क्या हैं? 

उत्तर: एकल स्वामित्व व्यवसाय का वह स्वरूप है जहाँ एक ही व्यक्ति मालिक होता है, जिसके कई लाभ हैं जैसे बिना किसी से पूछे तुरंत निर्णय लेने की स्वतंत्रता, सूचनाओं की पूर्ण गोपनीयता, संपूर्ण लाभ पर एकाधिकार और बिना किसी जटिल कानूनी प्रक्रिया के व्यवसाय को आसानी से स्थापित व बंद करने की सुविधा। हालाँकि, इसकी कुछ गंभीर सीमाएं भी हैं, जिनमें व्यक्तिगत बचत और ऋण तक सीमित संसाधन, व्यवसाय का सीमित जीवनकाल, और सबसे महत्वपूर्ण ‘असीमित दायित्व’ शामिल है, जिसका अर्थ है कि व्यापारिक ऋण चुकाने के लिए मालिक की निजी संपत्ति भी बेची जा सकती है। और साथ ही एक ही व्यक्ति में सभी प्रबंधकीय योग्यताओं (क्रय, विक्रय, वित्त आदि) का अभाव भी व्यवसाय की वृद्धि को रोकता है।

2. संयुक्त हिंदू परिवार व्यवसाय की मुख्य विशेषताएं क्या हैं? 

उत्तर: संयुक्त हिंदू परिवार व्यवसाय भारत का एक विशिष्ट व्यावसायिक स्वरूप है, जिसके निर्माण के लिए परिवार में कम से कम दो सदस्यों और पैतृक संपत्ति का होना अनिवार्य है तथा इसमें सदस्यता अनुबंध से नहीं बल्कि जन्म से ही प्राप्त हो जाती है। इस व्यवसाय का पूर्ण नियंत्रण परिवार के सबसे बड़े सदस्य ‘कर्ता’ के हाथों में होता है जिसका दायित्व असीमित होता है, जबकि अन्य सभी सदस्यों (सह-समांशियों) का दायित्व संपत्ति में उनके अंश तक सीमित रहता है; इसके अलावा कर्ता की मृत्यु के बाद परिवार का अगला सबसे बड़ा सदस्य स्वतः कर्ता बन जाता है जिससे व्यवसाय में निरंतरता बनी रहती है और इसमें नाबालिग भी परिवार में जन्म लेने के कारण पूर्ण सदस्य हो सकते हैं।

3. साझेदारी के प्रमुख लक्षण और इसके पंजीकरण न कराने के परिणाम क्या हैं? 

उत्तर: साझेदारी भारतीय साझेदारी अधिनियम-1932 द्वारा शासित एक ऐसा कानूनी समझौता है जिसमें दो या दो से अधिक व्यक्ति लाभ कमाने के उद्देश्य से व्यवसाय चलाते हैं; इसकी प्रमुख विशेषताओं में साझेदारों का असीमित दायित्व, जोखिम वहन करना, आपसी सहमति से निर्णय लेना और एक ‘एजेंसी संबंध’ का होना शामिल है जहाँ प्रत्येक साझेदार मालिक और एजेंट दोनों होता है। यद्यपि साझेदारी फर्म का पंजीकरण कराना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है, लेकिन एक अपंजीकृत फर्म न तो बाहरी पक्षों (तृतीय पक्ष) पर और न ही अपने साझेदारों पर मुकदमा कर सकती है, तथा कोई साझेदार भी अपनी ही फर्म या अन्य साझेदारों के विरुद्ध मुकदमा दायर नहीं कर सकता है, इसलिए कानूनी विवादों से बचने के लिए फर्म का पंजीकरण कराना ही उचित और लाभदायक रहता है।

4. सहकारी समितियों के विभिन्न प्रकार और उनके प्रमुख लाभ क्या हैं? 

उत्तर: सहकारी समिति लोगों का एक स्वैच्छिक संगठन है जो पारस्परिक सहायता और सदस्यों के कल्याण के लिए बनाया जाता है, जिसके कई प्रकार होते हैं जैसे उच्च गुणवत्ता की वस्तुएं उचित मूल्य पर दिलाने वाली उपभोक्ता समिति, कच्चे माल की आपूर्ति करने वाली उत्पादक समिति, उपज बेचने में मदद करने वाली विपणन समिति, खाद-बीज उपलब्ध कराने वाली किसान समिति, आसान ऋण के लिए ऋण समिति और सस्ते मकान के लिए आवास समिति। इसके प्रमुख लाभों में ‘एक व्यक्ति एक वोट’ के सिद्धांत के आधार पर मताधिकार की समानता, सदस्यों का उनकी लगाई गई पूँजी तक सीमित दायित्व, स्थिर अस्तित्व, मध्यस्थों के न होने से संचालन में मितव्ययता और जन-कल्याण पर आधारित होने के कारण कम कर व अनुदान के रूप में मिलने वाली भारी सरकारी सहायता शामिल है।

5. संयुक्त पूँजी कंपनी की मुख्य विशेषताएं, इसके लाभ और सीमाएं क्या हैं? 

उत्तर: संयुक्त पूँजी कंपनी कानून द्वारा निर्मित एक कृत्रिम व्यक्ति है जिसका अपने सदस्यों से पृथक और स्थायी वैधानिक अस्तित्व होता है, जिसकी सबसे बड़ी विशेषता इसके शेयरधारकों का सीमित दायित्व और अंशों के आसान हस्तांतरण (सार्वजनिक कंपनी में) की सुविधा है जिससे विशाल मात्रा में पूँजी जुटाना और उच्च वेतन देकर पेशेवर प्रबंधकों को नियुक्त करना संभव हो पाता है। हालाँकि, इन बेहतरीन लाभों के बावजूद, एक कंपनी के निर्माण में जटिल और खर्चीली कानूनी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं, इसमें रजिस्ट्रार को जानकारी देने के कारण सूचनाओं की गोपनीयता का अभाव होता है, भारी सरकारी नियंत्रण और नियमों की बाध्यता होती है, और लोकतांत्रिक ढांचे (विभिन्न स्तरों पर अनुमोदन) के कारण निर्णय लेने में देरी के साथ-साथ अक्सर मालिकों (शेयरधारकों) और प्रबंधकों के हितों में टकराव की स्थिति बनी रहती है।

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