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NCERT Class 11 Business Studies Chapter 10 आंतरिक व्यापार
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आंतरिक व्यापार
Chapter: 10
| भाग – 2: व्यावसायिक संगठन, वित्त एवं व्यापारर |
| अभ्यास |
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. आंतरिक व्यापार से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: जब वस्तुओं एवं सेवाओं का क्रय-विक्रय एक ही देश की सीमाओं के अंदर किया जाता है, तो इसे आंतरिक व्यापार कहा जाता है। इसमें कोई सीमा शुल्क या आयात कर नहीं लगता क्योंकि वस्तुएँ घरेलू उत्पादन का भाग होती हैं।
2. स्थायी दुकान फुटकर व्यापारियों की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: स्थायी दुकान फुटकर विक्रेताओं की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
(i) भ्रमणशील व्यापारियों की तुलना में इनके पास अधिक संसाधन होते हैं और ये बड़े पैमाने पर व्यापार करते हैं।
(ii) ये टिकाऊ और गैर-टिकाऊ दोनों प्रकार की विभिन्न वस्तुओं का व्यापार करते हैं।
(iii) इनकी ग्राहकों के बीच अच्छी साख होती है और ये घर पहुँच सेवा, गारंटी, मरम्मत, और उधार बिक्री जैसी कई अतिरिक्त सेवाएँ प्रदान करते हैं।
3. थोक व्यापारी द्वारा भण्डारण की सुविधा किस उद्देश्य के लिए दी जाती है?
उत्तर: थोक विक्रेता माल का उत्पादन होते ही उसे कारखानों से खरीद लेते हैं और अपने गोदामों में संग्रहीत कर लेते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य निर्माताओं को तैयार माल स्टोर करने की समस्या से मुक्त करना है। इसके साथ ही, यह फुटकर विक्रेताओं को भी बड़ी मात्रा में माल एकत्र करने और उसके संग्रहण के जोखिम से बचाता है।
4. थोक व्यापारी से मिलने वाली बाजार जानकारी से निर्माता को किस प्रकार के लाभ मिलते हैं?
उत्तर: थोक विक्रेता फुटकर विक्रेताओं के सीधे संपर्क में रहते हैं, जिससे वे निर्माताओं को ग्राहकों की रुचि, पसंद, बाजार की स्थिति और प्रतियोगियों की गतिविधियों के बारे में विशेषज्ञ सलाह और सूचनाएँ प्रदान करते हैं। यह जानकारी निर्माताओं को बाजार की आवश्यकता के अनुसार उत्पाद बनाने में मदद करती है।
5. थोक व्यापारी निर्माता को बड़े पैमाने की मितव्ययता में किस प्रकार मदद करता है?
उत्तर: थोक विक्रेता बड़ी संख्या में फुटकर विक्रेताओं से छोटी मात्रा में आदेश लेते हैं और उन्हें इकट्ठा करके निर्माताओं को एक साथ बड़ी मात्रा में क्रय करने का आदेश देते हैं। इससे उत्पादकों को बड़े पैमाने पर उत्पादन करने में मदद मिलती है और उन्हें इसके लाभ प्राप्त होते हैं।
6. एक वस्तु भंडार और विशिष्टीकृत भंडार के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए। क्या आप ऐसे भंडारों को ज्ञात कर सकते हैं?
उत्तर: (i) एक वस्तु भंडार: ये भंडार किसी एक ही श्रेणी की वस्तुओं (जैसे केवल जूते, घड़ियाँ या कपड़े) का विक्रय करते हैं।
(ii) विशिष्टीकृत भंडार: ये भंडार उस श्रेणी के भीतर भी किसी एक विशिष्ट प्रकार की वस्तुओं (जैसे केवल बच्चों के सिले-सिलाए वस्त्र) पर अपना ध्यान केंद्रित करते हैं।
7. पटरी व्यापारी और सस्ते दर की दुकान में किस प्रकार अंतर्भेद करेंगे?
उत्तर: (i) पटरी विक्रेता: ये उन स्थानों पर पाए जाते हैं जहाँ लोगों का भारी आवागमन रहता है (जैसे रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड) और ये साधारण दैनिक उपयोग की वस्तुएं बेचते हैं। ये अपना स्थान आसानी से नहीं बदलते।
(ii) सस्ते दर की दुकान: इनकी किसी व्यावसायिक क्षेत्र में एक स्वतंत्र अस्थायी दुकान होती है। ये व्यापार की संभावनाओं को देखते हुए अपना स्थान एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में बदलते रहते हैं।
8. थोक व्यापारी द्वारा निर्माता को दी जाने वाली सेवाओं की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: थोक व्यापारी निर्माताओं को कई प्रकार की सेवाएँ देते हैं, जैसे— बड़े पैमाने पर उत्पादन में सहायता करना, माल के मूल्य कम होने या खराब होने का जोखिम उठाना, नकद भुगतान करके वित्तीय सहायता देना, बाजार की विशेषज्ञ सलाह देना, माल का संग्रहण करना और उत्पादन में निरंतरता बनाए रखने में मदद करना।
9. फुटकर व्यापारी द्वारा थोक व्यापारी और उपभोक्ता को दी जाने वाली सेवाएँ बताइए।
उत्तर: (i) थोक व्यापारी/उत्पादकों के प्रति: वस्तुओं को बड़े भौगोलिक क्षेत्र में फैले उपभोक्ताओं तक पहुँचाकर वितरण में सहायक होना, व्यक्तिगत विक्रय करना, संवर्धन (promotion) में मदद करना और ग्राहकों की रुचि से जुड़ी बाजार सूचनाएँ एकत्र करना।
(ii) उपभोक्ताओं के प्रति: उपभोक्ताओं को उत्पादों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करना, क्रय में सुविधा देना, वस्तुओं के चयन के लिए विकल्प देना, बिक्री के बाद की सेवाएँ और नियमित ग्राहकों को उधार की सुविधा देना।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. भारत में भ्रमणशील फुटकर विक्रेता आंतरिक व्यापार का महत्वपूर्ण अंग हैं। थोक फुटकर व्यापारी से उसकी प्रतिस्पर्धा के बजाय बचाव के कारणों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर: भ्रमणशील फुटकर विक्रेता गली-गली और घर-घर जाकर सामान बेचते हैं।
थोक और बड़े फुटकर व्यापारियों से इनके बचाव के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
(i) सुविधा और घर पहुँच सेवा: ये विक्रेता ग्राहकों के दरवाजे पर दैनिक उपयोग की वस्तुएँ (जैसे फल, सब्जियाँ, प्रसाधन सामग्री) पहुँचाने की अत्यधिक सुविधाजनक सेवा देते हैं।
(ii) छोटे स्तर का व्यापार: ये बहुत कम पूंजी और सीमित संसाधनों से व्यापार करते हैं।
(iii) आवासीय क्षेत्रों में पहुँच: ये आवासीय क्षेत्रों में, गलियों में और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में आसानी से पहुँच जाते हैं, जहाँ बड़े स्टोर्स का जाना संभव नहीं है। ग्राहकों को तुरंत और बिना किसी परेशानी के सामान उपलब्ध कराने की उनकी यह क्षमता ही उन्हें बड़े व्यापारियों की प्रतिस्पर्धा से बचाती है।
2. विभागीय भंडार की विशेषताओं का वर्णन कीजिए। ये श्रृंखला भंडार या बहुसंख्यक दुकानों से किस प्रकार भिन्न हैं?
उत्तर: ये बड़े आकार के संगठन होते हैं जिनका उद्देश्य एक ही छत के नीचे ग्राहक की लगभग सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करना होता है। ये केंद्रीय स्थानों पर स्थित होते हैं, विश्राम गृह या रेस्तरां जैसी आधुनिक सुविधाएँ प्रदान करते हैं, और इनमें माल के क्रय की व्यवस्था केंद्रीकृत होती है।
श्रृंखला भंडार से अंतर:
(i) स्थिति: विभागीय भंडार एक केंद्रीय स्थान पर होते हैं, जबकि श्रृंखला भंडार अलग-अलग क्षेत्रों में फैले होते हैं।
(ii) उत्पादों की श्रेणी: विभागीय भंडार सभी प्रकार की आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करते हैं, जबकि श्रृंखला भंडार किसी एक ही वस्तु की विभिन्न किस्मों पर केंद्रित होते हैं।
(iii) सेवाएँ: विभागीय भंडार ग्राहकों को अधिकतम सेवाएँ देते हैं, जबकि श्रृंखला भंडार सीमित सेवाएँ (जैसे गारंटी) ही देते हैं।
(iv) उधार सुविधा: बहुसंख्यक (श्रृंखला) दुकानों में केवल नकद बिक्री होती है, जबकि विभागीय भंडार में उधार सुविधा भी दी जाती है।
3. उपभोक्ता सहकारी भंडार को कम खर्चीला क्यों माना जाता है? थोक फुटकर व्यापारी से संबंधित लाभ क्या हैं?
उत्तर: उपभोक्ता सहकारी भंडार को कम खर्चीला इसलिए माना जाता है क्योंकि इसका मुख्य उद्देश्य मध्यस्थों की संख्या को कम करना है। ये संगठन माल को सीधे उत्पादकों या थोक विक्रेताओं से बड़ी मात्रा में खरीदते हैं, जिससे बिचौलियों का मुनाफा खत्म हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप, उपभोक्ताओं और सदस्यों को अच्छी गुणवत्ता वाली वस्तुएं सस्ती दरों पर प्राप्त होती हैं। साथ ही, इनमें प्रायः नकद बिक्री होती है, जिसके कारण कार्यशील पूँजी की आवश्यकता कम होती है और अशोध्य ऋण (bad debts) का जोखिम नहीं होता।
4. स्थानीय बाजार के बिना अपने जीवन की कल्पना कीजिए। फुटकर दुकान के नहीं होने पर उपभोक्ता को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है?
उत्तर: फुटकर विक्रेता वस्तुओं के वितरण श्रृंखला की वह अंतिम कड़ी होते हैं जो सीधे उपभोक्ताओं तक माल पहुँचाते हैं।
यदि स्थानीय बाजार या फुटकर दुकानें न हों, तो उपभोक्ताओं को भारी कठिनाइयाँ होंगी:
(i) थोक व्यापारी बड़ी मात्रा में माल बेचते हैं; फुटकर दुकानों के बिना उपभोक्ताओं को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में दैनिक आवश्यकता की वस्तुएं खरीदना मुश्किल हो जाएगा।
(ii) उपभोक्ताओं को उत्पादों की नियमित उपलब्धता नहीं मिलेगी।
(iii) घर के पास सुविधाजनक समय पर सामान खरीदने की सुविधा छिन जाएगी।
(iv) वस्तुओं को चुनने के पर्याप्त विकल्प, उधार की सुविधा, और बिक्री के बाद की सेवाएँ (जैसे मरम्मत या घर पर डिलीवरी) प्राप्त नहीं हो सकेंगी।
5. डाक आदेश गृहों की उपयोगिता का वर्णन कीजिए। इनके द्वारा किस प्रकार की वस्तुएँ दी जाती हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: डाक आदेश गृहों की उपयोगिता: इस व्यापार प्रणाली में खरीदार और विक्रेता के बीच कोई व्यक्तिगत संपर्क नहीं होता; विज्ञापन के जरिए ऑर्डर लिए जाते हैं और माल डाक से भेजा जाता है। इसकी उपयोगिता यह है कि इसे कम पूंजी से शुरू किया जा सकता है, इसमें मध्यस्थों की समाप्ति हो जाती है, देश भर के विस्तृत क्षेत्र में माल भेजा जा सकता है, और ग्राहकों को घर पर सुपुर्दगी की सुविधा मिलती है। इसमें कोई उधार बिक्री नहीं होती इसलिए अशोध्य ऋण का जोखिम भी नहीं होता।
बेची जाने वाली वस्तुओं के प्रकार: इनके द्वारा सभी प्रकार का माल नहीं बेचा जा सकता। इसके लिए केवल वही वस्तुएं उपयुक्त हैं:
(i) जिनका आसानी से श्रेणीकरण और मानकीकरण किया जा सके।
(ii) जिन्हें कम लागत पर ले जाया जा सके और जो जल्दी नष्ट होने वाली न हों।
(iii) जिनकी पूरे वर्ष बाजार में मांग हो और प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हों।
(iv) जिनका चित्रों या इश्तहारों के माध्यम से आसानी से वर्णन किया जा सके।


