NCERT Class 11 Business Studies Chapter 9 सूक्ष्म लघु तथा मध्यम उद्यम और व्यावसायिक उद्यमिता

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NCERT Class 11 Business Studies Chapter 9 सूक्ष्म लघु तथा मध्यम उद्यम और व्यावसायिक उद्यमिता

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Chapter: 9

भाग – 2: व्यावसायिक संगठन, वित्त एवं व्यापारर
अभ्यास

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम किस वर्ष पारित हुआ?

उत्तर: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (MSMED) अधिनियम वर्ष 2006 में पारित हुआ था और यह अक्टूबर 2006 से लागू हुआ।

2. सूक्ष्म उद्यम क्या है?

उत्तर: सूक्ष्म उद्यम वह इकाई है जिसमें संयंत्र (Plant) और मशीनरी में निवेश 1 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होता है और जिसकी कुल बिक्री या कारोबार 5 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होता है।

3. कुटीर उद्योग क्या है?

उत्तर: कुटीर उद्योगों को ग्रामीण या पारंपरिक उद्योगों के रूप में जाना जाता है। अन्य आधुनिक लघु उद्योगों के विपरीत, कुटीर उद्योग पूँजी निवेश के किसी निश्चित मानदंडों से परिभाषित नहीं होते हैं।

4. ग्राम और खादी उद्योग से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: ग्राम उद्योग से अभिप्राय ग्रामीण क्षेत्र में स्थित किसी भी ऐसे उद्योग से है, जो ऊर्जा के उपयोग के साथ या उसके बिना माल का उत्पादन करता है या सेवा देता है, और जिसमें प्रति कारीगर या श्रमिक निश्चित पूँजी निवेश का निर्धारण केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर किया जाता है। खादी और ग्रामोद्योग इस क्षेत्र का एक प्रमुख उपसमूह है जो स्थानीय कौशल का उपयोग करके ग्रामीण औद्योगीकरण में मदद करता है।

5. उद्यमिता विकास की कोई दो विशेषताएँ दें।

उत्तर: उद्यमिता विकास की दो प्रमुख विशेषताएँ हैं:

(i) व्यवस्थित गतिविधि: यह एक चरण-दर-चरण और उद्देश्यपूर्ण गतिविधि है, जिसे ज्ञान, प्रशिक्षण और कार्य अनुभव द्वारा विकसित किया जा सकता है।

(ii) नवाचार: उद्यमिता रचनात्मक होती है क्योंकि इसमें नए उत्पादों को बाज़ार में लाना, नए बाज़ारों की खोज करना और संसाधनों का नए तरीके से संयोजन करना शामिल होता है।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्या है?

उत्तर: भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) ऐसी व्यावसायिक इकाइयाँ हैं जिन्हें उनके संयंत्र और मशीनरी में किए गए निवेश और उनकी कुल बिक्री (कारोबार) के आकार के आधार पर परिभाषित किया जाता है। इस क्षेत्र में ‘पारंपरिक’ जैसे- हथकरघा, खादी और ‘आधुनिक’ दोनों प्रकार के छोटे उद्योग शामिल होते हैं, जो विनिर्माण और सेवा दोनों क्षेत्रों में कार्य करते हैं।

2. उद्यमिता का अर्थ बताइए।

उत्तर: उद्यमिता का अर्थ यह है कि रोजगार या किसी पेशे में काम करने से अलग, अपना स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने की एक प्रक्रिया है। एक उद्यमी वह व्यक्ति होता है जो नए विचारों, नवाचार और संसाधनों को मिलाकर एक व्यावसायिक इकाई या उद्यम का निर्माण करता है, ताकि वह व्यक्तिगत लाभ और सामाजिक प्राप्ति के लिए मूल्य का सृजन कर सके।

3. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम और उद्यमिता परस्पर जुड़े हुए हैं। क्या आप सहमत हैं? दो कारण बताइए।

उत्तर: हाँ, ये दोनों पूरी तरह से परस्पर जुड़े हुए हैं। 

इसके दो मुख्य कारण हैं:

(i) अवसरों का सृजन: सूक्ष्म और लघु उद्यम उद्यमिता के लिए बहुत बड़े अवसर प्रदान करते हैं। कम पूँजी और न्यूनतम औपचारिकताओं के साथ, लोग अपने अव्यक्त कौशल का उपयोग करके छोटे व्यवसाय (MSME) शुरू कर सकते हैं और उद्यमी बन सकते हैं।

(ii) आर्थिक और रोजगार विकास: उद्यमिता केवल उद्यमी को स्वरोजगार नहीं देती, बल्कि MSME स्थापित करके समाज के अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करती है, जो देश के समग्र विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

4. किसी देश के विकास में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम की भूमिका बताइए।

उत्तर: देश के विकास में MSME की भूमिका बहुत बड़ी है। भारत में, ये उद्यम सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 29.7% और कुल निर्यात में 49.66% का योगदान करते हैं। कृषि क्षेत्र के बाद MSME सबसे अधिक लोगों को रोजगार लगभग 60 मिलियन लोगों को प्रदान करते हैं। ये उद्यम सरल तकनीकों का उपयोग करके देश के कोने-कोने में स्थापित किए जा सकते हैं, जिससे देश का संतुलित क्षेत्रीय विकास होता है।

5. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के आकार को मापने के लिए उपयोग किए जाने वाले विभिन्न मापदंड क्या हैं?

उत्तर: व्यवसायों के आकार को मापने के लिए कई मापदंड उपयोग किए जा सकते हैं, जैसे व्यवसाय में नियोजित व्यक्तियों की संख्या, व्यवसाय में निवेश की गई पूँजी, और कुल बिक्री या कारोबार। भारत सरकार द्वारा MSME को मापने के लिए मुख्य रूप से संयंत्र और मशीनरी में निवेश तथा कुल बिक्री या कारोबार का उपयोग किया जाता है।

6. ग्राम और खादी उद्योगों का अर्थ बताइए।

उत्तर: ग्राम उद्योग वे उद्योग हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित होते हैं और माल या सेवाओं का उत्पादन करते हैं। इन उद्योगों में प्रति श्रमिक पूँजी निवेश की एक सीमा केंद्र सरकार द्वारा तय की जाती है। खादी और ग्रामोद्योग पारंपरिक उद्योग हैं, जो स्थानीय संसाधनों और स्वदेशी कौशल पर निर्भर होते हैं। ये आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और ग्रामीण औद्योगीकरण के लिए महत्वपूर्ण हैं।

7. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के सामने आने वाली तीन प्रमुख समस्याएँ बताइए।

उत्तर: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के सामने आने वाली तीन प्रमुख समस्याएँ है-

(i) वित्त (पूँजी) की कमी: छोटे पूँजी आधार के कारण इन्हें बैंकों से ऋण प्राप्त करने में कठिनाई होती है, इसलिए इन्हें अक्सर साहूकारों पर निर्भर रहना पड़ता है।

(ii) कच्चे माल की प्राप्ति: चूँकि ये कम मात्रा में माल खरीदते हैं, इनकी सौदेबाजी की क्षमता कम होती है, जिससे इन्हें कच्चे माल के लिए ऊँची कीमत चुकानी पड़ती है या गुणवत्ता से समझौता करना पड़ता है।

(iii) विपणन: प्रत्यक्ष विपणन के लिए बुनियादी ढांचे के अभाव में, छोटे व्यवसायों को अपना उत्पाद बेचने के लिए बिचौलियों पर निर्भर रहना पड़ता है, जो प्रायः कम कीमत देकर उनका शोषण करते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. लघु उद्योग भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास में कैसे योगदान करते हैं? चर्चा करें।

उत्तर: लघु उद्योग भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास की रीढ़ हैं। भारत की कुल औद्योगिक इकाइयों में इनका हिस्सा 95% है

इनका योगदान इस प्रकार है:

(i) रोजगार सृजन: भारत जैसे श्रम-प्रचुर देश में, लघु उद्योग बड़े उद्योगों की तुलना में प्रति इकाई पूँजी निवेश पर अधिक रोजगार उत्पन्न करते हैं। यह कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता है।

(ii) संतुलित क्षेत्रीय विकास: चूंकि छोटे उद्योग स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्री और श्रम पर निर्भर करते हैं, इसलिए इन्हें देश में कहीं भी स्थापित किया जा सकता है। इससे विकास केवल शहरों तक सीमित न रहकर सभी क्षेत्रों तक पहुँचता है।

(iii) कम लागत का लाभ: कम ऊपरी खर्चों और स्थानीय संसाधनों के कारण छोटे उद्योगों की उत्पादन लागत कम होती है, जो उन्हें प्रतिस्पर्धी बनाती है।

(iv) विस्तृत उत्पादन: ये रोज़मर्रा की उपभोक्ता वस्तुओं (साबुन, कपड़े, फर्नीचर) से लेकर जटिल इलेक्ट्रॉनिक और इंजीनियरिंग उपकरणों तक का निर्माण करते हैं।

2. ग्रामीण भारत में छोटे व्यवसाय की भूमिका का वर्णन करें।

उत्तर: ग्रामीण भारत में छोटे व्यवसाय और ग्रामोद्योग अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। सरकार इन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में “अतिरिक्त उत्पादक रोजगार की संभावनाएं उत्पन्न करने” का एक शक्तिशाली साधन मानती है।

(i) आय के साधन और रोजगार: ग्रामीण क्षेत्रों में ये गैर-कृषि गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला के माध्यम से आय के स्रोत प्रदान करते हैं, जिससे कृषि पर निर्भरता कम होती है।

(ii) पलायन रोकना: MSME का विकास रोजगार की तलाश में ग्रामीण आबादी के शहरों की ओर होने वाले प्रवास को रोकता है।

(iii) पारंपरिक कौशल को बचाना: छोटे व्यवसाय स्थानीय संसाधनों का दोहन करते हैं और पारंपरिक कारीगरों व समाज के कमजोर वर्गों को रोज़गार प्रदान करके स्वदेशी कौशल को बढ़ावा देते हैं।

3. लघु उद्योगों के सामने आने वाली समस्याओं पर चर्चा करें।

उत्तर: लघु उद्योगों को अपने संचालन में कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है:

(i) वित्त की समस्या: पूँजी बाजार में साख न होने और संपार्श्विक (Collateral) के अभाव में बैंक ऋण मुश्किल से मिलता है। इस कारण इन्हें साहूकारों का शोषण सहना पड़ता है और कार्यशील पूँजी की कमी रहती है।

(ii) प्रबंधकीय कौशल की कमी: आमतौर पर इन्हें एक ही व्यक्ति द्वारा चलाया जाता है जिसके पास उत्पादन से लेकर मार्केटिंग तक के सभी तकनीकी और प्रबंधकीय कौशल नहीं होते।

(iii) कच्चा माल व गुणवत्ता: उचित कच्चे माल की समय पर और सस्ती दर पर अनुपलब्धता के कारण उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होती है। उनके पास अनुसंधान व गुणवत्ता नियंत्रण के संसाधन नहीं होते।

(iv) क्षमता उपयोग: मार्केटिंग कौशल या मांग की कमी के कारण वे अक्सर अपनी पूरी क्षमता से कम काम करते हैं, जिससे लागत बढ़ती है।

(v) वैश्विक प्रतिस्पर्धा: वैश्वीकरण के दौर में छोटे उद्योगों को अब न केवल बड़ी घरेलू कंपनियों बल्कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों से भी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है।

4. लघु उद्योग क्षेत्र में वित्त और विपणन की समस्या को हल करने के लिए सरकार ने क्या उपाय किए हैं?

उत्तर: (i) MSMED अधिनियम, 2006: सरकार ने ‘सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006’ लागू किया, जिसका मुख्य उद्देश्य इन उद्यमों के लिए ऋण (वित्त), विपणन (मार्केटिंग) और प्रौद्योगिकीय समस्याओं को कानूनी ढाँचा प्रदान करके प्राथमिकता से संबोधित करना था।

(ii) स्टार्टअप इंडिया पहल: नए व्यवसायों और स्टार्टअप्स के सामने आने वाली वित्तीय और बाजार सम्बन्धी बाधाओं को दूर करने के लिए ‘स्टार्टअप इंडिया योजना’ शुरू की गई है, जो नवाचार का पोषण करती है और समावेशी विकास को बल देती है।

5. नवाचार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों का अभिन्न अंग है। अपने उत्तर के लिए कारण देते हुए इस कथन पर चर्चा करें।

उत्तर: नवाचार का अर्थ है नई चीजों को खोजना, लागत कम करना या राजस्व बढ़ाना। MSME के लिए नवाचार एक अभिन्न अंग है, जिसके निम्नलिखित कारण हैं:

(i) प्रतिस्पर्धात्मक लाभ: वैश्वीकरण के वर्तमान दौर में बहुराष्ट्रीय कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए छोटे उद्यमों को लगातार उन्नत और नवाचारी तकनीकों को अपनाना पड़ता है।

(ii) मूल्य सृजन: एक उद्यमी नवाचार के माध्यम से ही नए उत्पादों को बाज़ार में लाता है, नए बाज़ारों की खोज करता है और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करता है।

(iii) बड़े अभियानों में भागीदारी: नवाचार के बल पर ही भारतीय MSME मंगलयान और चंद्रयान जैसे जटिल और उच्च-परिशुद्धता वाले अंतरिक्ष मिशनों के लिए महत्वपूर्ण उपकरणों का निर्माण कर पा रहे हैं। यदि कोई व्यवसाय लगातार नवाचार नहीं करेगा, तो वह शिथिल और निष्क्रिय हो जाएगा।

6. ‘रचनात्मकता और नवाचार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम की कुंजी है’। कथन का औचित्य प्रस्तुत करें।

उत्तर: यह कथन बिल्कुल उचित है। उद्यमिता अपने मूल रूप में एक रचनात्मक प्रक्रिया है। जब कोई उद्यमी किसी नए व्यावसायिक अवसर को पहचानता है, तो वह उत्पादन के विभिन्न कारकों (जैसे भूमि, श्रम, पूँजी और तकनीक) को रचनात्मक ढंग से मिलाकर उस अवसर को वास्तविक रूप देता है। आज स्टार्टअप्स कई ‘विघटनकारी तकनीकों’ (Disruptive Technologies) के लिए ज़िम्मेदार हैं जिन्होंने हमारे जीने और सोचने के तरीके को बदल दिया है। इसके अलावा, अपनी रचनात्मकता की रक्षा के लिए उद्यमियों को ‘बौद्धिक संपदा अधिकारों’ (IPR) जैसे पेटेंट, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क का उपयोग करना पड़ता है, जो उन्हें उनके नवाचार का मुद्रीकरण करने और बाज़ार में एकाधिकार व प्रतिस्पर्धा स्थापित करने में मदद करते हैं। अतः, बिना रचनात्मकता और नवाचार के MSME का विकास संभव नहीं है।

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