NCERT Class 11 Business Studies Chapter 11 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

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NCERT Class 11 Business Studies Chapter 11 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

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Chapter: 11

भाग – 2: व्यावसायिक संगठन, वित्त एवं व्यापारर
अभ्यास

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार एवं अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय में अंतर्भेद कीजिए। 

उत्तर: 

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय
मुख्य रूप से दो या दो से अधिक देशों के बीच वस्तुओं के आयात एवं निर्यात से संबंधित होता है।दो या दो से अधिक देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, विदेशी निवेश तथा विदेशों में उत्पादन से संबंधित सभी व्यावसायिक गतिविधियों को शामिल करता है।
इसका कार्यक्षेत्र केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित होता है।इसका कार्यक्षेत्र व्यापक होता है, जिसमें वस्तुओं के साथ-साथ सेवाएँ, निवेश और उत्पादन भी शामिल होते हैं।
इसकी मुख्य गतिविधियाँ आयात (Import) एवं निर्यात (Export) हैं।इसकी मुख्य गतिविधियों में आयात-निर्यात, सेवाओं का व्यापार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), पोर्टफोलियो निवेश (FPI), लाइसेंसिंग, फ्रेंचाइजिंग तथा संयुक्त उपक्रम आदि शामिल हैं।
यह अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय का एक भाग है।यह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से व्यापक अवधारणा है, जिसमें व्यापार के साथ अन्य अंतर्राष्ट्रीय व्यावसायिक गतिविधियाँ भी सम्मिलित होती हैं।
इसका उद्देश्य वस्तुओं का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर क्रय-विक्रय करना है।इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर व्यापार, निवेश, उत्पादन एवं सेवाओं का विस्तार करना है।

2. अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय के किन्हीं तीन लाभों की व्याख्या कीजिए। 

उत्तर: अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय के तीन प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं: 

(i) इसके माध्यम से देश को विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती है जिससे आवश्यक पूँजीगत वस्तुओं, उर्वरकों और तकनीकी उत्पादों का आयात किया जा सकता है। 

(ii) इससे देश और फर्मों को अपने संसाधनों का अधिक क्षमता और कुशलता से उपयोग करने का अवसर मिलता है। 

(iii) घरेलू बाजार में मूल्य कम होने पर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में माल बेचकर फर्में उच्च लाभ कमा सकती हैं और अपनी अतिरिक्त उत्पादन क्षमता का उपयोग कर सकती हैं।

3. दो देशों के बीच व्यापार के प्रमुख कारण क्या हैं? 

उत्तर: दो देशों के बीच व्यापार का सबसे प्रमुख कारण प्राकृतिक संसाधनों का असमान वितरण और उत्पादन के साधनों की उपलब्धता में भिन्नता है। इसके अलावा विभिन्न देशों की श्रम उत्पादकता, उत्पादन लागत, और भौगोलिक, सामाजिक तथा आर्थिक परिस्थितियों में अंतर होता है। इन्हीं कारणों से एक देश कुछ विशेष वस्तुओं का उत्पादन दूसरे देश की तुलना में कम लागत और अधिक कुशलता से कर सकता है, जो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को जन्म देता है।

4. विदेशों में ठेका उत्पादन एवं संपूर्ण स्वामित्व वाली उत्पादन सहायक कंपनी के अंतर्भेद कीजिए। 

उत्तर: विदेशों में ‘ठेका उत्पादन’ के अंतर्गत एक अंतर्राष्ट्रीय कंपनी बिना अपनी पूंजी लगाए विदेशी स्थानीय उत्पादकों से अनुबंध करके अपनी वस्तुओं या घटकों का उत्पादन करवाती है, जिसमें निवेश और जोखिम न के बराबर होता है। इसके विपरीत, ‘संपूर्ण स्वामित्व वाली उत्पादन सहायक कंपनी’ में जनक कंपनी को विदेशी कंपनी में 100 प्रतिशत पूँजी निवेश करना होता है और विदेशी प्रचालन पर पूरा नियंत्रण होने के साथ-साथ व्यावसायिक और राजनीतिक घाटे का सारा जोखिम भी उसी को उठाना पड़ता है।

5. एक निर्यात फर्म के लिए लदान-पूर्व निरीक्षण कराना क्यों आवश्यक है? 

उत्तर: भारत से केवल अच्छी गुणवत्ता वाली वस्तुओं का ही निर्यात हो, यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने ‘निर्यात गुणवत्ता नियंत्रण एवं निरीक्षण अधिनियम–1963’ लागू किया है। इसके अंतर्गत यह आवश्यक है कि कुछ निर्दिष्ट वस्तुओं का निर्यात करने से पहले फर्म किसी अधिकृत एजेंसी (जैसे ई.आई.ए.) से लदान-पूर्व निरीक्षण कराए और प्रमाण-पत्र प्राप्त करे।

6. माल को उत्पादन शुल्क विभाग से अनुमति के लिए प्रक्रिया की संक्षेप में विवेचना कीजिए। 

उत्तर: माल को उत्पादन शुल्क विभाग से निकासी दिलाने के लिए निर्यातक को संबंधित क्षेत्रीय उत्पादन शुल्क कमिश्नर को आवेदन करना होता है। यदि कमिश्नर संतुष्ट हो जाता है तो वह उत्पादन शुल्क की छूट का प्रमाण-पत्र जारी कर देता है। यदि माल का उत्पादन केवल निर्यात के लिए किया गया है, तो सरकार उत्पादों को विश्व बाजार में अधिक प्रतियोगी बनाने के लिए उत्पादन शुल्क से छूट प्रदान करती है या उसे ‘शुल्क वापसी’ के रूप में लौटा देती है।

7. साख पत्र क्या है? निर्यातक को इस प्रलेख की क्या आवश्यकता है?

उत्तर: साख पत्र आयातक के बैंक द्वारा जारी की गई एक गारंटी है जिसमें वह निर्यातक के बैंक को एक निश्चित राशि तक के निर्यात बिलों के भुगतान का वचन देता है। निर्यातक को इस प्रलेख की आवश्यकता इसलिए होती है ताकि माल गंतव्य पर पहुँचने के बाद आयातक द्वारा भुगतान न करने के जोखिम से पूरी तरह बचा जा सके।

8. निर्यात का भुगतान प्राप्त करने की प्रक्रिया की विवेचना कीजिए। 

उत्तर: माल को जहाज से भेजने के बाद निर्यातक बीजक, जहाजी बिल्टी, पैकिंग सूची, और साख-पत्र जैसे आवश्यक प्रलेख अपने बैंक के माध्यम से आयातक के बैंक को भेजता है। इन प्रलेखों के साथ एक ‘विनिमय विपत्र’ भी भेजा जाता है। जब आयातक इस विनिमय विपत्र को स्वीकार कर लेता है, तो उसे प्रलेख सौंप दिए जाते हैं और निर्यातक का बैंक आयातक के बैंक से भुगतान प्राप्त करके उसे निर्यातक के खाते में जमा कर देता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 

1. अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से अधिक व्यापक है। विवेचना कीजिए।

उत्तर: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का अर्थ ऐतिहासिक रूप से केवल भौतिक (मूर्त) वस्तुओं के आयात और निर्यात तक ही सीमित रहा है। जबकि अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय एक बहुत ही विस्तृत अवधारणा है, जिसमें वस्तुओं के साथ-साथ सेवाओं जैसे- पर्यटन, परिवहन, बैंकिंग, संचार का अदृश्य व्यापार भी शामिल होता है। इसके अलावा, अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय में विदेशों में प्रत्यक्ष और पोर्टफोलियो निवेश (FDI), लाइसेंसिंग, फ्रैंचाइज़िंग और दूसरे देशों में जाकर स्वयं वस्तुओं व सेवाओं का उत्पादन करना भी शामिल है। अतः स्पष्ट है कि व्यापार, अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय का मात्र एक हिस्सा है।

2. अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय से व्यावसायिक इकाइयों को क्या लाभ हैं?

उत्तर: अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय से व्यावसायिक इकाइयों (फर्मों) को मुख्य रूप से निम्नलिखित लाभ होते हैं:

(i) उच्च लाभ की संभावनाएं: घरेलू बाजार की तुलना में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में माल बेचकर अधिक लाभ कमाया जा सकता है।

(ii) बढ़ी हुई क्षमता का उपयोग: फर्म अपनी अतिरिक्त स्थापित उत्पादन क्षमता का उपयोग विदेशी मांग को पूरा करने में कर सकती हैं, जिससे लागत कम होती है।

(iii) विकास की संभावनाएं: घरेलू बाजार में मांग स्थिर होने (ठहराव आने) पर फर्में विदेशी बाजारों में प्रवेश करके तेजी से विकास कर सकती हैं।

(iv) घोर प्रतियोगिता से बचाव: आंतरिक बाजार में जब गहन प्रतियोगिता हो, तो विदेशी बाजार फर्मों के विकास के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनते हैं।

(v) व्यावसायिक दृष्टिकोण: यह फर्मों की रणनीतिक दृष्टि और अंतर्राष्ट्रीयकरण का हिस्सा बनता है जिससे उनकी प्रचालन क्षमता में सुधार होता है।

3. अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय में प्रवेश हेतु निर्यात किस प्रकार से विदेशों में संपूर्ण स्वामित्व कंपनियों की स्थापना से श्रेष्ठतर माध्यम है?

उत्तर: अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय में प्रवेश के लिए निर्यात, संपूर्ण स्वामित्व कंपनियों की स्थापना से निम्नलिखित कारणों से श्रेष्ठ है:

(i) सरलता: संयुक्त उपक्रम या विदेशी सहायक कंपनी स्थापित करने की तुलना में आयात/निर्यात सबसे सरल और कम जटिल तरीका है।

(ii) कम निवेश: निर्यात में फर्मों को दूसरे देश में उत्पादन संयंत्र या मशीनरी लगाने के लिए भारी पूँजी निवेश करने की आवश्यकता नहीं होती है। जबकि संपूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी में जनक कंपनी को 100 प्रतिशत निवेश करना होता है।

(iii) न्यूनतम जोखिम: क्योंकि निर्यात में विदेशों में पूंजी नहीं लगी होती है, इसलिए इसमें निवेश डूबने या राजनीतिक हस्तक्षेप का जोखिम शून्य या बहुत कम होता है। इसके विपरीत संपूर्ण स्वामित्व कंपनी के असफल होने पर पूरा घाटा और जोखिम जनक कंपनी को ही उठाना पड़ता है।

4. रेखा गारमेंट्स को आस्ट्रेलिया में स्थित स्विफ्ट इंपोर्ट्स लि. को 2000 पुरुष पैंट के निर्यात का आदेश प्राप्त हुआ है। इस निर्यात आदेश को क्रियान्वित करने में रेखा गारमेंट्स को किस प्रक्रिया से गुज़रना होगा? विवेचना कीजिए।

उत्तर: इस निर्यात आदेश को पूरा करने के लिए रेखा गारमेंट्स को निम्नलिखित निर्यात प्रक्रिया का पालन करना होगा:

(i) आदेश प्राप्ति और साख आँकलन: इंडेंट प्राप्त होने पर, भुगतान सुनिश्चित करने के लिए रेखा गारमेंट्स स्विफ्ट इंपोर्ट्स से ‘साख पत्र’ मांगेगी।

(ii) निर्यात लाइसेंस और वित्त: इसके बाद फर्म को बैंक में खाता, आयात-निर्यात कोड (IEC), और अपैरल निर्यात संवर्धन परिषद (AEPC) में पंजीकरण कराकर लदान-पूर्व वित्त (Pre-shipment finance) प्राप्त करना होगा।

(iii) उत्पादन और निरीक्षण: 2000 पैंटों का उत्पादन कर अधिकृत एजेंसी से लदान-पूर्व गुणवत्ता निरीक्षण प्रमाण-पत्र लेना होगा।

(iv) शुल्क निकासी: क्षेत्रीय उत्पादन शुल्क कमिश्नर से निकासी और उद्गम प्रमाण-पत्र (Certificate of Origin) प्राप्त किया जाएगा।

(v) लदान और सीमा शुल्क निकासी: जहाजी कंपनी से जगह आरक्षित कर, माल पैक किया जाएगा और सीमा शुल्क कार्यालय में ‘जहाजी बिल’ (Shipping Bill) व अन्य प्रलेख जमा कर निकासी प्राप्त की जाएगी।

(vi) मेट्स रसीद और जहाजी बिल्टी: जहाज पर माल लदने के बाद कैप्टन से ‘मेट्स रसीद’ प्राप्त कर उसे जहाजी कंपनी को सौंपकर ‘जहाजी बिल्टी’ प्राप्त की जाएगी।

(vii) बीजक और भुगतान: अंत में, बीजक तैयार कर सभी मूल प्रलेखों को अपने बैंक के माध्यम से ऑस्ट्रलियाई बैंक को भेजा जाएगा ताकि विनिमय विपत्र के स्वीकृत होने पर भुगतान प्राप्त किया जा सके।

5. आपकी फर्म कनाडा से कपड़ा मशीनरी के आयात की योजना बना रही है। आयात प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।

उत्तर: कनाडा से कपड़ा मशीनरी के आयात के लिए हमारी फर्म को यह आयात प्रक्रिया अपनानी होगी:

(i) व्यापारिक पूछताछ: सर्वप्रथम कनाडाई निर्यातकों से व्यापारिक पूछताछ करके मशीनरी के मूल्य और नियमों का ‘प्रारूप बीजक’ प्राप्त किया जाएगा।

(ii) आयात लाइसेंस और विदेशी मुद्रा: मशीनरी के लिए यदि आयात लाइसेंस आवश्यक है तो वह प्राप्त किया जाएगा और भारतीय रिज़र्व बैंक के नियमों के अनुसार भुगतान के लिए विदेशी मुद्रा की व्यवस्था की जाएगी।

(iii) आदेश और साख पत्र: निर्यातक को मशीनरी का आयात आदेश (इंडेंट) भेजा जाएगा और अपने बैंक से एक साख-पत्र जारी करवाकर कनाडाई फर्म को भेजा जाएगा ताकि उसे भुगतान की गारंटी मिल सके।

(iv) वित्त व्यवस्था: माल पहुँचने पर लगने वाले सीमा शुल्क और डॉक प्रभारों के लिए फर्म द्वारा पहले से ही अग्रिम वित्त की व्यवस्था कर ली जाएगी।

(v) लदान सूचना और प्रलेख प्राप्ति: कनाडा से लदान की सूचना मिलने पर, बैंक के माध्यम से आए विनिमय विपत्र को स्वीकार करके मशीनरी छुड़ाने के आवश्यक प्रलेख (जहाजी बिल्टी, बीजक आदि) प्राप्त किए जाएंगे।

(vi) सीमा शुल्क निकासी: मशीनरी के बंदरगाह पर आगमन के बाद, ‘प्रवेश बिल’ और अन्य प्रलेखों के आधार पर सीमा शुल्क का भुगतान किया जाएगा और निकासी एजेंट के माध्यम से मशीनरी प्राप्त कर ली जाएगी।

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