NIOS Class 12 Environmental Science Chapter 22 क्लीनर (अधिक साफ) प्रौद्योगिकी Solutions Hindi Medium As Per New Syllabus to each chapter is provided in the list so that you can easily browse throughout different chapters NIOS Class 12 Environmental Science Chapter 22 क्लीनर (अधिक साफ) प्रौद्योगिकी Notes in Hindi and select need one. NIOS Class 12 Environmental Science Solutions Hindi Medium Download PDF. NIOS Study Material of Class 12 Environmental Science Notes Paper Code: 333.
NIOS Class 12 Environmental Science Chapter 22 क्लीनर (अधिक साफ) प्रौद्योगिकी
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क्लीनर (अधिक साफ) प्रौद्योगिकी
Chapter: 22
| माड्यूल – 6 दीर्घोपयोगी विकास |
पाठगत प्रश्न 22.1
1. पर्यावरण में पाए जाने वाले अपशिष्टों की छः श्रेणियों के नाम बताइए।
उत्तर: पर्यावरण में पाए जाने वाले अपशिष्टों की छः श्रेणियों के नाम है—
(i) आद्योगिक ठोस व धातु।
(ii) नगरपालिका का ठोस व धातु।
(iii) गैसीय व रेडियोएक्टिव प्राय।
(iv) वातावरण में पाए जाते है।
(v) कृषि अपशिष्ट।
(vi) जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट।
2. उन विभिन्न विधियों का उल्लेख कीजिए जिनके द्वारा गैसीय अपशिष्टों का पूर्ण उपयोग किया जा सके।
उत्तर: विभिन्न स्रोतों द्वारा निष्कासित कार्बन डाइऑक्साइड का कैल्शियम कार्बोनेट के निर्माण में प्रयोग हो सकता है, निष्कासित सल्फर डॉइऑक्साइड का मूल सल्फर या जिप्सम में परिवर्तन हो सकता है। पेट्रोलियम की खान से निकली गैस मेथेनोल व पेट्रोल में परिवर्तित की जा सकती है।
3. क्लीनर तकनीक की परिभाषा दीजिए।
उत्तर: क्लीनर तकनीकें उद्योगों का प्रयोग उन पदार्थों के निर्माण में कर रही हैं जिनसे कोई प्रदूषण या अपशिष्ट नहीं होता।
4. ‘बाहर फेंकों/निपटान (Throw away)’ अर्थव्यवस्था क्या होती है? वह अपशिष्टों के जमा होने के लिए कैसे जिम्मेदार है?
उत्तर: थ्रो अवे (फेंक देना) अर्थव्यवस्था में पदार्थों के एक बार प्रयोग के पश्चात उनके फेंके जाने पर आधारित अर्थव्यवस्था का नाम है।
पाठगत प्रश्न 22.2
1. अपशिष्टों के प्रबंधन व निपटान से जूझते समय हमारी क्या प्राथमिकता होनी चाहिए?
उत्तर: अपशिष्टों का बचाव हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए न कि उसके निर्यात के बाद उसका संचालन मात्र करना।
2. अपशिष्टों के प्रबंधन के तीन ‘आर’ (अंग्रेजी वर्ण R) क्या हैं? (इनके नाम पाठ में अंग्रेजी में दिए गए हैं)।
उत्तर: अपशिष्टों के प्रबंधन के तीन ‘आर’ हैं- अपशिष्टों का रिडक्शेन (मात्रा में कमी), रियूज (पुनः प्रयोग) और रीसाइकल (पुर्नचक्रण)। उपभोग में कमी व पदार्थों को नई आकार में डालने के द्वारा हम अपशिष्टों की मात्रा में कमी ला सकते हैं। पदार्थों के पुनः प्रयोग द्वारा अपशिष्टों की मात्रा में कमी होगी। पुर्नचक्रण द्वारा अपशिष्टों को उपयोगी पदार्थों में बदला जा सकता है।
3. प्राथमिक व द्वितीय श्रेणियों के पुनर्चक्रण के उदाहरण दीजिए।
उत्तर: प्राथमिक किस्म की पुर्नचक्रण तब होता है जब पुराने अपशिष्टों को उसी प्रकार के नए पदार्थ के रूप में परिवर्तित किया जाता है। उदाहरण जब पुराने अखबारों का नए अखबारों की सामग्री के निर्माण में इस्तेमाल होता है।
द्वितीयक किस्म का पुर्नचक्रण तब होता है जब अपशिष्टों को अलग किस्म के पदार्थों के निर्माण में परिवर्तित किया जाता है। जैसे जब पुरानी गाड़ियों का टायरों का काट-छांटकर सड़क की सतह बनाने वाली सामग्री के रूप में प्रयोग किया जाता है।
4. ईंधन को कुशलता से प्रयोग में लाने वाली गाड़ी क्या होती है? वह संसाधनों का कैसे संरक्षण करती है?
उत्तर: एक ईंधन-कुशल गाड़ी वह है तो कम पेट्रोल के बावजूद ज्यादा मील की दौड़ दौड़ती है और इस तरह कीमती पेट्रोल का बचाव करती है।
पाठगत प्रश्न 22.3
1. बैकग्राउंड रेडियेशन (पृष्ठभूमि की विकिरण) क्या है?
उत्तर: प्राकृतिक संसाधनों से हमें बड़ी मात्रा में विकिरण मिलता है। यह हर स्थान पर, हर वक्त विद्यमान रहता है। इस विकिरण को ‘बैकग्राउंड (पृष्ठभूमि) के विकिरण के नाम से बुलाया जाता है।
2. रेडियोन्यूक्लाइड क्या होता है?
उत्तर: विकरित परमाणुओं को ‘रेडियोन्यूक्लाइड’ के नाम से भी बुलाया जाता है।
3. ईंधन के चक्रण के विभिन्न चरण क्या हैं?
उत्तर: ईंधन के चक्रण के विभिन्न चरण है — रेडियो ऐक्टिव कच्ची धातु को खान से निकालना, उसको परिपूर्ण करने के उद्देश्य से प्रवर्धित करना, उसे ईंधन के गोलों के रूप में ढालने के लिए फैक्ट्रियों तक ले जाना, नाभिकीय अभिक्रिया, नाभिकीय ऊर्जा के निर्माण के लक्ष्य से।
4. हाल में हुई दो अणुणीय दुर्घटनाओं का को बताइए व उनके प्रभावों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: श्री मील आइलैण्ड (अमरीका) सन् 1779 में व चेरेनोबिल (यूक्रेन) सन् 1986 में। दुर्घटनास्थल पर लोग बड़ी मात्रा के विकिरण से तुरंत प्रभावित हो गए थे। उनके कैंसर रोग से पीड़ित होने की संभावना बढ़ गयी थी। इस विकिरण का प्रभाव दूर-दूर तक फैला, जिससे लोग कैंसर और अन्य स्वास्थ्य संबंधी खतरों को सहने के जोखिम में पड़ गए।
5. उन तीन स्थलों के नाम लीजिए जिन्हें नाभिकीय अपशिष्टों के निपटारे के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है।
उत्तर: उन तीन स्थलों के नाम है जिन्हें नाभिकीय अपशिष्टों के निपटारे के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है-
(i) कम अवक्षेपण होने वाले स्थल।
(ii) जहां गहरी जल तालिका हो।
(iii) जहां सतही जल विद्यमान न हो।
पाठगत प्रश्न 22.4
1. एक उत्पाद के जीवन चक्र से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: एक पदार्थ का “जीवन-चक्र” उसके जीवनकाल के दौरान हुई मुख्य गतिविधियों के इर्द-गिर्द घूमता है। इसमें कच्ची सामग्री के एकत्रीकरण से लेकर, उसके निर्माण, प्रयोग, अनुरक्षण और अंतिम निपटारे के सब चरण शामिल हैं।
2. इको लेबलिंग (पर्यावरणीय अंकन) के उद्देश्य क्या हैं?
उत्तर: इको लेबलिंग (पर्यावरणीय अंकन) के उद्देश्य है—
(i) पर्यावरण का संरक्षण व उपभोक्ताओं को पर्यावरण संबंधी मुद्दों के प्रति सजग बनाना।
(ii) नवीकृत न होने वाले संसाधनों के कुशल प्रबंधन को प्रोत्साहन देना। इसमें जीवाश्म ईंधन शामिल हैं।
(iii) पारितंत्रों और प्रजातीय विविधता के संरक्षण को प्रोत्साहन देना।
(iv) आगामी पीढ़ियों के लिए, उपलब्ध संसाधनों के सही प्रबंधन को प्रोत्साहन देना।
(v) पदार्थों (गैर-जहरीले रसायनों) के सही प्रबंधन को प्रोत्साहन देना।
3. भारतीय ‘इको-लेबल’ को किस नाम से बुलाया जाता है व उसका प्रतीक क्या है?
उत्तर: भारतीय ‘इको-लेबल’ ‘इको-मार्क’ कहते हैं और इसका चिन्ह “मिट्टी का घड़ा” है। ‘मिट्टी का घड़ा’ जैविक रूप से पूरी तरह न खतरा पहुंचाने वाली सामग्री का प्रतीक है।

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