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NCERT Class 11 Business Studies Important Chapter 5 व्यवसाय की उभरती पद्धतियाँ
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व्यवसाय की उभरती पद्धतियाँ
Chapter: 5
| भाग – 1: व्यवसाय के आधार |
| IMPORTANT QUESTION ANSWER |
लघु उत्तरीय प्रश्न:
1. ई-व्यवसाय क्या है?
उत्तर: ई-व्यवसाय को ऐसे उद्योग, व्यापार और वाणिज्य के संचालन के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जिसमें हम कंप्यूटर नेटवर्क (मुख्यतः इंटरनेट) का प्रयोग करते हैं।
2. ई-कॉमर्स और ई-व्यवसाय में क्या अंतर है?
उत्तर: ई-कॉमर्स में केवल इंटरनेट पर क्रय-विक्रय शामिल होता है, जबकि ई-व्यवसाय अधिक विस्तृत है और इसमें उत्पादन, विपणन, और मानव संसाधन जैसे अन्य व्यावसायिक कार्य भी शामिल होते हैं।
3. फमर् से फमर् कॉमर्स क्या है?
उत्तर: इसमें ई-कॉमर्स लेन-देन में शामिल दोनों पक्ष व्यावसायिक फर्में होती हैं, जैसे एक निर्माता द्वारा अपने आपूर्तिकर्ता से कलपुर्जे खरीदना।
4. फमर् से ग्राहक कॉमर्स से क्या आशय है?
उत्तर: बी2सी लेन-देन में एक छोर पर व्यावसायिक फमर् और दूसरे छोर पर उसके ग्राहक होते हैं, जैसे ऑनलाइन खरीदारी करना या एटीएम (ATM) से पैसे निकालना।
5. अंत: बी (Intra-B) कॉमर्स का क्या अर्थ है?
उत्तर: जब इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन में शामिल सभी पक्ष एक ही व्यावसायिक फमर् के भीतर के विभिन्न विभाग या व्यक्ति होते हैं, तो उसे अंत: बी कॉमर्स कहा जाता है।
6. ग्राहक से ग्राहक कॉमर्स का एक उपयुक्त उदाहरण क्या है?
उत्तर: ‘ई-बे’ सी2सी कॉमर्स का एक बेहतरीन उदाहरण है, जहाँ उपभोक्ता अपनी वस्तुएं और सेवाएं सीधे दूसरे उपभोक्ताओं को बेचते हैं।
7. ई-व्यवसाय का एक प्रमुख लाभ क्या है?
उत्तर: ई-व्यवसाय का एक प्रमुख लाभ इसकी वैश्विक पहुँच है, क्योंकि इंटरनेट सीमाविहीन है और यह विक्रेता को वैश्विक बाजार प्रदान करता है।
8. ऑनलाइन लेन-देन में कुकीज का क्या उपयोग है?
उत्तर: कुकीज टेलीफोन कॉलर पहचानकर्ता के समान होते हैं, जो विक्रेता को ग्राहक का नाम, पता और उसके पिछले क्रय भुगतान विवरण जैसी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराते हैं।
9. ‘अंकीय नकद’ क्या है?
उत्तर: यह इलेक्ट्रॉनिक मुद्रा का एक रूप है जिसका अस्तित्व केवल साइबर स्पेस में होता है और यह वास्तविक मुद्रा को इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में प्रस्तुत करता है।
10. ई-व्यवसाय की एक प्रमुख सीमा क्या है?
उत्तर: ई-व्यवसाय में वैयक्तिक मानवीय स्पर्श का अभाव होता है, इसलिए यह उच्च व्यक्तिगत स्पर्श चाहने वाले उत्पादों (जैसे- वस्त्र) के लिए कम उपयुक्त है।
11. ‘आदेश लेन-देन संबंधी चूक’ किसे कहते हैं?
उत्तर: जब विक्रेता यह कहने से मना कर दे कि उसे आदेश मिला था, या ग्राहक मुकर जाए कि उसने कभी आदेश दिया था, तो इसे ‘आदेश लेन-देन संबंधी चूक’ कहते हैं।
12. ई-व्यवसाय में अंकीय-विभाजन (Digital Divide) का क्या अर्थ है?
उत्तर: ई-व्यवसाय के लिए कंप्यूटर और इंटरनेट की तकनीकी क्षमता की आवश्यकता होती है, जिससे समाज में तकनीकी रूप से परिचित और अपरिचित लोगों के बीच एक विभाजन उत्पन्न हो जाता है जिसे अंकीय-विभाजन कहते हैं।
13. ऑनलाइन लेन-देन की तीन मुख्य अवस्थाएँ कौन सी हैं?
उत्तर: ऑनलाइन लेन-देन की तीन अवस्थाएं हैं – पहली क्रय-पूर्व/विक्रय अवस्था (प्रचार), दूसरी क्रय/विक्रय अवस्था (मोलभाव और भुगतान), और तीसरी सुपुर्दगी अवस्था।
14. क्रिप्टोग्राफी या कूट लेखन विधि क्या है?
उत्तर: यह डाटा को एक अपठनीय प्रारूप (साइबर टेक्स्ट) में बदलने की कला है ताकि प्रसारण के दौरान महत्वपूर्ण डाटा सुरक्षित रहे और उसे कोई चुरा न सके।
15. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 का क्या महत्व है?
उत्तर: यह अधिनियम इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों और अंकीय (डिजिटल) हस्ताक्षरों को कानूनी मान्यता प्रदान करके व्यापार और सरकारी क्षेत्र में कागजरहित लेन-देन को संभव बनाता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न:
1. ई-व्यवसाय के कार्यक्षेत्र को किन-किन दिशाओं में परिकल्पित किया जा सकता है? विस्तार से समझाएं।
उत्तर: ई-व्यवसाय के कार्यक्षेत्र को निम्नलिखित चार मुख्य दिशाओं में परिकल्पित किया जा सकता है:
(i) फमर् से फमर् कॉमर्स: इसमें दोनों पक्ष व्यावसायिक फर्में होती हैं, जैसे एक कंपनी का दूसरी कंपनी से माल खरीदना।
(ii) फमर् से ग्राहक कॉमर्स: इसमें एक व्यावसायिक फमर् अपने ग्राहकों के साथ लेन-देन करती है, जैसे ऑनलाइन मार्केटिंग और वस्तुओं की बिक्री।
(iii) अंत: बी (Intra-B) कॉमर्स: इसमें लेन-देन एक ही फमर् के विभिन्न विभागों या कर्मचारियों के बीच इंटरनेट के माध्यम से होता है।
(iv) ग्राहक से ग्राहक कॉमर्स: इसमें व्यवसाय की उत्पत्ति ग्राहकों से होती है और इसका अंतिम गंतव्य भी ग्राहक ही होता है, जैसे पुरानी किताबों या कपड़ों की बिक्री।
2. पारंपरिक व्यवसाय और ई-व्यवसाय के बीच मुख्य अंतर क्या हैं?
उत्तर: पारंपरिक व्यवसाय और ई-व्यवसाय में कई महत्वपूर्ण अंतर हैं:
| पारंपरिक व्यवसाय | ई-व्यवसाय |
| स्थापना कठिन होती है तथा दुकान/कार्यालय जैसी भौतिक उपस्थिति आवश्यक होती है। | स्थापना सरल होती है तथा भौतिक उपस्थिति आवश्यक नहीं होती। |
| परिचालन लागत अधिक होती है। | परिचालन लागत कम होती है। |
| वैश्विक पहुँच सीमित होती है। | वैश्विक पहुँच बहुत अधिक होती है। |
| ग्राहकों के साथ आमने-सामने संपर्क होने से मानवीय स्पर्श अधिक होता है। | प्रत्यक्ष संपर्क कम होने के कारण मानवीय स्पर्श का अभाव होता है। |
3. ई-व्यवसाय के प्रमुख लाभों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: ई-व्यवसाय के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
(i) निर्माण में आसानी: पारंपरिक व्यवसाय के विपरीत, ई-व्यवसाय को प्रारंभ करना बहुत आसान है और इसके लिए कम निवेश की आवश्यकता होती है।
(ii) सुविधापूर्ण: इंटरनेट 24 घंटे, सप्ताह के 7 दिन और वर्ष के 365 दिन व्यवसाय की सुविधा प्रस्तुत करता है, जिससे कभी भी खरीदारी की जा सकती है।
(iii) गति: इंटरनेट के माध्यम से सूचनाओं और धन का आदान-प्रदान केवल माउस के एक क्लिक पर तुरंत हो जाता है।
(iv) वैश्विक पहुँच: इंटरनेट व्यवसायों को बिना किसी सीमा के दुनिया भर के ग्राहकों तक पहुँचने की स्वतंत्रता देता है।
(v) कागजरहित समाज: ई-व्यवसाय लालफीताशाही और कागजी कार्यवाही को कम करके कागजरहित लेन-देन को बढ़ावा देता है।
4. ई-व्यवसाय की मुख्य सीमाएं क्या हैं? क्या ये सीमाएं ई-व्यवसाय के भविष्य को रोकती हैं?
उत्तर: ई-व्यवसाय की कुछ प्रमुख सीमाएं इस प्रकार हैं:
(i) मानवीय स्पर्श का अभाव: इसमें अंतर्व्यक्तिगत संपर्क नहीं होता, जिससे कपड़ों आदि जैसी वस्तुओं के लिए यह कम उपयुक्त है।
(ii) आदेश और सुपुर्दगी की गति में अंतर: इंटरनेट पर आदेश तुरंत मिल जाता है, लेकिन भौतिक वस्तुओं की सुपुर्दगी में समय लगता है।
(iii) तकनीकी क्षमता की आवश्यकता: कंप्यूटर और इंटरनेट के ज्ञान की कमी समाज में ‘अंकीय-विभाजन’ पैदा करती है।
(iv) सुरक्षा जोखिम: पक्षों की अनामता के कारण हैकिंग, वायरस, और क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी जैसे जोखिम अधिक होते हैं।
5. ऑनलाइन लेन-देन में भुगतान तंत्र के विभिन्न विकल्प कौन-कौन से हैं?
उत्तर: ऑनलाइन खरीदारी के माध्यम से किए गए लेन-देन का भुगतान निम्नलिखित विधियों से किया जा सकता है:
(i) सुपुर्दगी के समय नकद: इसमें ग्राहक आदेशित वस्तुओं का भुगतान वस्तुओं की भौतिक सुपुर्दगी मिलने के समय नकद में करता है।
(ii) चेक: ऑनलाइन विक्रेता ग्राहक से चेक प्राप्त कर सकता है और चेक की वसूली के बाद वस्तु की सुपुर्दगी की जाती है।
(iii) नेट बैंकिंग हस्तांतरण: ग्राहक आई.एम.पी.एस (IMPS), एन.ई.एफ़.टी (NEFT) या आर.टी.जी.एस (RTGS) के माध्यम से विक्रेता के खाते में इलेक्ट्रॉनिक रूप से पैसे ट्रांसफर कर सकता है।
(iv) क्रेडिट और डेबिट कार्ड: इन्हें ‘प्लास्टिक मुद्रा’ कहा जाता है। लगभग 95 प्रतिशत ऑनलाइन लेन-देन इन्हीं के द्वारा होते हैं, जिनमें कार्ड धारक के खाते से पैसे इलेक्ट्रॉनिक रूप से कट जाते हैं।
(v) अंकीय (डिजिटल) नकद: यह साइबर स्पेस में मौजूद एक इलेक्ट्रॉनिक मुद्रा है जिसे विशेष सॉफ्टवेयर के जरिए इंटरनेट पर भुगतान के लिए प्रयोग किया जाता है।


