NCERT Class 11 Business Studies Chapter 7 कंपनी निर्माण

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NCERT Class 11 Business Studies Chapter 7 कंपनी निर्माण

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Chapter: 7

भाग – 2: व्यावसायिक संगठन, वित्त एवं व्यापारर
अभ्यास

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. कंपनी के निर्माण की विभिन्न स्थितियों के नाम लिखें। 

उत्तर: कंपनी निर्माण की प्रक्रिया को तीन अलग-अलग चरणों (स्थितियों) में बाँटा जा सकता है: 

(i) प्रवर्तन। 

(ii) समामेलन। 

(iii) पूँजी का अभिदान।

2. कंपनी समामेलन के लिए आवश्यक प्रलेखों को सूचीबद्ध करें। 

उत्तर: कंपनी के समामेलन (पंजीकरण) के लिए कंपनी रजिस्ट्रार के पास निम्नलिखित आवश्यक प्रलेख जमा कराने होते हैं:

(i) कंपनी के संस्थापन प्रलेख।

(ii) कंपनी के अंतर्नियम।

(iii) प्रस्तावित निदेशकों द्वारा निदेशक बनने के लिए लिखित सहमति।

(iv) प्रस्तावित प्रबंध निदेशक, प्रबंधक अथवा पूर्णकालिक निदेशक के साथ समझौता (यदि कोई हो)।

(v) पंजीकरण से संबंधित वैधानिक घोषणा।

(vi) फीस भुगतान की रसीद।

3. प्रविवरण पत्र क्या है? क्या प्रत्येक कंपनी के लिए प्रविवरण पत्र जमा कराना आवश्यक है? 

उत्तर: प्रविवरण पत्र ऐसा कोई भी दस्तावेज़ है (जिसमें सूचना, परिपत्र, विज्ञापन आदि शामिल हैं), जो जनता से जमा आमंत्रित करता है या एक निगमित संस्था की प्रतिभूतियाँ खरीदने के लिए जनता से प्रस्ताव आमंत्रित करता है। नहीं, प्रत्येक कंपनी के लिए इसे जमा कराना आवश्यक नहीं है। एक निजी कंपनी प्रविवरण पत्र जारी नहीं कर सकती क्योंकि उस पर जनसाधारण से धन जुटाने पर प्रतिबंध है। केवल वह सार्वजनिक कंपनी जो जनता से धन माँगती है, उसे ही प्रविवरण पत्र जमा करना होता है।

4. ‘आवंटन विवरणी’ शब्द को संक्षेप में समझाइए। 

उत्तर: ‘आवंटन विवरणी’ एक ऐसा प्रलेख है जिसमें अंशधारकों के नाम, उनके पते तथा आवंटित अंशों की संख्या लिखी होती है। अंशों के सफल आवंटन के 30 दिन के अंदर निदेशक अथवा सचिव के हस्ताक्षरयुक्त ‘आवंटन विवरणी’ कंपनी रजिस्ट्रार के पास जमा कराई जाती है।

5. कंपनी निर्माण के किस स्तर पर उसे सेबी (SEBI) से संपर्क करना होता है? 

उत्तर: कंपनी निर्माण के ‘पूँजी अभिदान’ स्तर पर कंपनी को सेबी (SEBI) से संपर्क करना होता है। जब कोई सार्वजनिक कंपनी जनता से धन जुटाती है, तो उसे निवेशकों की सुरक्षा के लिए सेबी से पूर्वानुमति लेनी होती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 

1. प्रवर्तन शब्द का क्या अर्थ है? प्रवर्तकों ने जिस कंपनी का प्रवर्तन किया है उसके संदर्भ में उनकी कानूनी स्थिति की चर्चा कीजिए। 

उत्तर: प्रवर्तन का अर्थ: कंपनी निर्माण में प्रवर्तन प्रथम स्थिति है, जिसमें व्यवसाय के अवसरों की खोज की जाती है एवं कंपनी स्थापना के लिए पहल की जाती है। जो लोग कंपनी निर्माण का विचार करते हैं, कदम उठाते हैं एवं जोखिम उठाते हैं, वे इसके ‘प्रवर्तक’ कहलाते हैं।

प्रवर्तकों की कानूनी स्थिति: कानूनी रूप से प्रवर्तक न तो कंपनी के एजेंट होते हैं और न ही उसके ट्रस्टी। वे एजेंट इसलिए नहीं हो सकते क्योंकि कंपनी का समामेलन अभी होना बाकी होता है। अतः समामेलन से पूर्व के अनुबंधों (समझौतों) के लिए प्रवर्तक ही उत्तरदायी होते हैं। कंपनी के प्रवर्तकों की स्थिति एक न्यासी (Fiduciary) की होती है, जिसका उन्हें दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। उन्हें गुप्त रूप से लाभ नहीं कमाना चाहिए; यदि वे लाभ कमाते हैं तो उन्हें इसे उजागर करना चाहिए। महत्वपूर्ण सूचना छिपाने से यदि कंपनी को हानि होती है, तो वह प्रवर्तकों से क्षतिपूर्ति का दावा कर सकती है।

2. कंपनी के प्रवर्तन के लिए, प्रवर्तक क्या कदम उठाते हैं उनको समझाइए। 

उत्तर: प्रवर्तक कंपनी के प्रवर्तन के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण कदम उठाते हैं:

(i) व्यवसाय के अवसर की पहचान करना: सबसे पहले किसी नए उत्पाद या सेवा के उत्पादन या नए अवसर की खोज की जाती है।

(ii) संभाव्यता का अध्ययन: पहचाने गए अवसर की तकनीकी, वित्तीय और आर्थिक संभाव्यता की गहराई से जाँच की जाती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि परियोजना व्यावहारिक है या नहीं।

(iii) नाम का अनुमोदन: कंपनी के लिए एक नाम चुना जाता है और जिस राज्य में कंपनी स्थापित होनी है, वहां के कंपनी रजिस्ट्रार के पास नाम के अनुमोदन के लिए आवेदन किया जाता है।

(iv) संस्थापन प्रलेख के हस्ताक्षरकर्ताओं को निश्चित करना: उन सदस्यों का निर्णय लिया जाता है जो कंपनी के उद्देश्य पत्र पर हस्ताक्षर करेंगे और कंपनी के प्रथम निदेशक बनेंगे।

(v) पेशेवर लोगों की नियुक्ति: आवश्यक कानूनी प्रलेख तैयार करने के लिए मर्केंटाइल बैंकर्स, ऑडिटर्स आदि पेशेवरों की नियुक्ति की जाती है।

(vi) आवश्यक प्रलेखों को तैयार करना: अंत में, कंपनी के पंजीकरण के लिए संस्थापन प्रलेख, अंतर्नियम आदि वैधानिक प्रलेख तैयार किए जाते हैं।

3. कंपनी के सीमा नियम क्या हैं? इसकी धाराओं को संक्षेप में समझाइए। 

उत्तर: संस्थापन प्रलेख (सीमा नियम) कंपनी का सबसे प्रमुख प्रलेख होता है क्योंकि यह कंपनी के उद्देश्यों को परिभाषित करता है और कंपनी इससे हटकर कोई कार्य नहीं कर सकती। 

इसकी प्रमुख धाराएँ (खंड) निम्नलिखित हैं:

(i) नाम खंड: इसमें कंपनी का वह नाम दिया जाता है जिसे रजिस्ट्रार ने अनुमोदित किया है।

(ii) पंजीकृत कार्यालय खंड: इसमें उस राज्य का नाम होता है जहाँ कंपनी का प्रस्तावित पंजीकृत कार्यालय स्थित होगा।

(iii) उद्देश्य खंड: यह सबसे महत्वपूर्ण धारा है, जो मुख्य उद्देश्यों और अन्य उद्देश्यों में विभाजित होती है; कंपनी इन उद्देश्यों से बाहर कोई कार्य नहीं कर सकती।

(iv) दायित्व खंड: यह सदस्यों की देयता (लायबिलिटी) को उनके स्वामित्व के अंशों पर अदत्त (बकाया) राशि तक सीमित करती है।

(v) पूँजी खंड: इसमें उस अधिकतम (अधिकृत) पूँजी का वर्णन होता है जिसे अंशों के निर्गमन द्वारा जुटाने के लिए कंपनी अधिकृत होती है।

4. सीमा नियम एवं अंतर्नियम में अंतर कीजिए। 

उत्तर: सीमा नियम और अंतर्नियम में प्रमुख अंतर निम्नलिखित हैं:

(i) उद्देश्य: सीमा नियम कंपनी स्थापना के उद्देश्यों को परिभाषित करते हैं, जबकि अंतर्नियम कंपनी के आंतरिक प्रबंध के नियम होते हैं।

(ii) स्थिति: सीमा नियम कंपनी का मुख्य प्रलेख है जो कंपनी अधिनियम के अधीन होता है। अंतर्नियम सहायक प्रलेख है जो सीमा नियम और कंपनी अधिनियम दोनों के अधीन होता है।

(iii) संबंध: सीमा नियम कंपनी का बाहरी दुनिया से संबंध निश्चित करता है, जबकि अंतर्नियम कंपनी तथा उसके सदस्यों के बीच आंतरिक संबंधों को परिभाषित करता है।

(iv) बाध्यता: सीमा नियम के क्षेत्र के बाहर किए गए कार्य अमान्य होते हैं, जबकि अंतर्नियम के बाहर के कार्यों को अंशधारी (सदस्य) अनुमोदित कर सकते हैं।

(v) आवश्यकता: प्रत्येक कंपनी के लिए सीमा नियम जमा कराना अनिवार्य है, परंतु अंतर्नियम जमा कराना अनिवार्य नहीं है; कंपनी अधिनियम की ‘सारणी एफ़’ को इसके स्थान पर अपनाया जा सकता है।

5. क्या एक सार्वजनिक कंपनी के लिए अपने शेयरों का किसी स्कंध विनिमय/स्टॉक एक्सचेंज में सूचियन आवश्यक है? एक सार्वजनिक कंपनी जो सार्वजनिक निर्गमन करने जा रही है यदि प्रतिभूतियों में व्यापार की अनुमति के लिए स्टॉक एक्सचेंज में आवेदन नहीं कर पाती है अथवा उसे इसकी अनुमति नहीं मिलती है तो इसके क्या परिणाम होंगे। 

उत्तर: हाँ, जनता से धन जुटाने वाली सार्वजनिक कंपनी को प्रतिभूतियों में व्यापार की अनुमति के लिए कम से कम एक ‘शेयर बाज़ार’ (स्टॉक एक्सचेंज) में आवेदन करना अनिवार्य होता है। परिणाम: यदि अभिदान सूची के बंद होने की तिथि से निर्धारित सप्ताह पूरे होने तक शेयर बाजार से अनुमति नहीं मिलती है, तो आवंटन अमान्य हो जाएगा। इसके बाद आठ दिन के अंदर आवेदकों से प्राप्त की गई संपूर्ण आवेदन राशि उन्हें वापस लौटानी होगी।

सत्य/असत्य उत्तरीय प्रश्न

1. चाहे कंपनी निजी हो अथवा सार्वजनिक प्रत्येक का समामेलन कराना अनिवार्य है।

उत्तर: सत्य।

2. स्थानापन्न प्रविवरण पत्र को सार्वजनिक निर्गमन करने वाली सार्वजनिक कंपनी जमा कर सकती है।

उत्तर: असत्य।

3. एक निजी कंपनी समामेलन के उपरांत व्यापार प्रारंभ कर सकती है।

उत्तर: सत्य।

4. एक कंपनी के प्रवर्तन में प्रवर्तकों की सहायता करने वाले विशेषज्ञों को भी प्रवर्तक कहते हैं।

उत्तर: असत्य।

5. एक निजी कंपनी समामेलन के उपरांत प्रारंभिक अनुबंधों का अनुमोदन कर सकती है।

उत्तर: असत्य।

6. यदि कंपनी का इच्छम नाम से रजिपत्र कराया जाता है तो इसका समामेलन अमान्य होगा।

उत्तर: असत्य।

7. कंपनी के अंतरिमय इसका प्रमुख दस्तावेज होता है।

उत्तर: असत्य।

8. प्रत्येक कंपनी के लिए अंतरिनियम जमा कराना अनिवार्य है।

उत्तर: असत्य।

9. कंपनी के समामेलन से पूर्व अल्पकालिक अनुबंध पर प्रवर्तकों के हस्ताक्षर होते हैं।

उत्तर: सत्य।

10. यदि कंपनी को भारी हानि उठानी पड़ी है तथा इसकी परिसंपत्तियाँ इसकी देयताओं को चुकाने के लिए पर्याप्त नहीं है तो शेष को इसके सदस्यों की निजी संपत्ति से वसूला जा सकता है।

उत्तर: असत्य।

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