NCERT Class 11 Business Studies Chapter 1 व्यवसाय व्यापार और वाणिज्य

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NCERT Class 11 Business Studies Chapter 1 व्यवसाय व्यापार और वाणिज्य

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Chapter: 1

भाग – 1: व्यवसाय के आधार

स्वयं करके देखें:

बताएँ कि निम्नलिखित में से प्रत्येक एक आर्थिक गतिविधि है या नहीं। अपने उत्तर के लिए कारण दें:

1. स्वास्थ्य-कर्मी द्वारा अपने मरीज का इलाज करना। 

उत्तर: यह एक आर्थिक गतिविधि है क्योंकि यह जीवन यापन के लिए धन कमाने (पेशे) के उद्देश्य से की जा रही है।

2. स्टोर का मालिक एक ज़रूरतमंद बुज़ुर्ग व्यक्ति के साथ सहानुभूति दिखाते हुए उसे उसकी बीमारी के लिए दवाइयाँ देता है।

उत्तर: यह एक अनार्थिक गतिविधि है क्योंकि यह सहानुभूति के कारण की गई है, लाभ कमाने के उद्देश्य से नहीं।

3. फ़ुटबॉल प्रशिक्षण द्वारा आगामी मैच के लिए अपनी बेटी को फ़ुटबॉल का प्रशिक्षण देना।

उत्तर: यह एक अनार्थिक गतिविधि है क्योंकि यह प्रेम और अपनत्व के कारण की जा रही है।

4. गृहिणी का घर पर घर के काम-काज करके सेवाएँ देना।

उत्तर: यह एक अनार्थिक गतिविधि है क्योंकि यह प्रेम या सहानुभूतिवश की जाती है, धन कमाने के लिए नहीं।

5. कोविड–19 महामारी के दौरान समाज के वंचित लोगों और प्रवासी श्रमिकों को भोजन, दवाइयाँ प्रदान करने के लिए एक गैर-सरकारी संगठन द्वारा चलाए जा रहे सामुदायिक रसोईघर के लिए एक व्यापारिक घराने की ओर से दान देना।

उत्तर: यह एक अनार्थिक गतिविधि है।

कारण: स्रोतों के अनुसार, अनार्थिक क्रियाएँ वे होती हैं जो प्रेम, सहानुभूति, भावुकता या देशभक्ति आदि के कारण की जाती हैं, न कि धन कमाने या जीवन यापन के उद्देश्य से।

चूँकि एक व्यापारिक घराने द्वारा कोविड-19 महामारी के दौरान वंचित लोगों और प्रवासी श्रमिकों की मदद (भोजन और दवाइयाँ प्रदान करने) के लिए दान दिया जा रहा है, यह कार्य सहानुभूति और समाज सेवा की भावना से प्रेरित है। इसका उद्देश्य कोई आर्थिक लाभ या धन कमाना नहीं है, इसलिए इसे आर्थिक गतिविधि नहीं बल्कि एक अनार्थिक गतिविधि माना जाएगा।

अभ्यास

लघु उत्तरीय प्रश्न:

1. व्यवसाय को आर्थिक गतिविधि क्यों माना जाता है? 

उत्तर: व्यवसाय को एक आर्थिक क्रिया इसलिए माना जाता है क्योंकि इसका मुख्य उद्देश्य वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन या क्रय-विक्रय करके लाभ कमाना और जीवन यापन करना होता है। यह प्रेम, सहानुभूति या किसी अन्य भावुकता के कारण नहीं किया जाता।

2. व्यवसाय किसी देश के आर्थिक विकास में कैसे योगदान देता है? 

उत्तर: व्यवसाय और व्यापारिक गतिविधियों से धन का निवेश होता है और वस्तुओं/सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित होती है। प्राचीन काल से ही व्यापारिक गतिविधियों ने स्वदेशी बैंकिंग प्रणाली (जैसे हुंडी) को बढ़ावा दिया, जिससे धन का सुरक्षित हस्तांतरण संभव हुआ। इससे कृषि, कुटीर उद्योगों और कारखानों को बल मिला, रोजगार के अवसर पैदा हुए और अंततः देश की आर्थिक समृद्धि में वृद्धि हुई।

3. विभिन्न प्रकार की आर्थिक गतिविधियों का वर्णन करें। 

उत्तर: विभिन्न प्रकार की आर्थिक गतिविधिया है:

(i) व्यवसाय: लाभ कमाने के उद्देश्य से वस्तुओं का उत्पादन, क्रय-विक्रय या सेवाओं की आपूर्ति करना।

(ii) पेशा: इसमें विशेष ज्ञान और प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है, जैसे डॉक्टर या वकील।

(iii) रोज़गार: इसमें लोग नियमित रूप से दूसरों के लिए कार्य करते हैं और बदले में वेतन या मज़दूरी प्राप्त करते हैं।

4. व्यवसाय का अर्थ बताइए। 

उत्तर: व्यवसाय शब्द की उत्पत्ति ‘व्यस्त रहने’ से हुई है, जिसका अर्थ है किसी भी धंधे में व्यस्त रहना। विशेष संदर्भ में, व्यवसाय का अर्थ ऐसे कार्यों से है जिसमें व्यक्ति लाभ अर्जित करने के लिए नियमित रूप से वस्तुओं के उत्पादन, क्रय-विक्रय या सेवाओं की आपूर्ति में लगे रहते हैं।

5. आप व्यावसायिक गतिविधियों को कैसे वर्गीकृत करेंगे? 

उत्तर: व्यावसायिक गतिविधियों को दो विस्तृत वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है: उद्योग और वाणिज्य। उद्योग का संबंध संसाधनों को उपयोगी वस्तुओं में परिवर्तित करने या उत्पादन से है, जबकि वाणिज्य का संबंध वस्तुओं के आदान-प्रदान, वितरण और व्यापार की सहायक क्रियाओं से है।

6. विभिन्न प्रकार के उद्योग कौन से हैं? 

उत्तर: उद्योगों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा गया है:

(i) प्राथमिक उद्योग: ये प्राकृतिक संसाधनों के निष्कर्षण (जैसे खनन) और जननिक कार्यों (जैसे मुर्गी पालन, पौधे उगाना) से जुड़े हैं।

(ii) द्वितीयक (माध्यमिक) उद्योग: ये प्राथमिक उद्योगों से प्राप्त कच्चे माल को पक्के माल में बदलते हैं (जैसे चीनी उद्योग, सीमेंट उद्योग, भवन निर्माण)।

(iii) तृतीयक या सेवा उद्योग: ये प्राथमिक और द्वितीयक उद्योगों को सहायक सेवाएँ प्रदान करते हैं (जैसे बैंकिंग, परिवहन, बीमा)।

7. किन्हीं भी दो व्यावसायिक गतिविधियों को समझाइए, जो व्यापार के लिए सहायक हैं। 

उत्तर: व्यापार में सहायक दो प्रमुख व्यावसायिक गतिविधियाँ हैं:

(i) परिवहन: यह ‘स्थान संबंधी बाधा’ को दूर करता है। परिवहन के माध्यम से कच्चे माल को कारखानों (उत्पादन स्थल) तक और तैयार माल को बाज़ारों व उपभोक्ताओं तक आसानी से पहुँचाया जाता है।

(ii) बैंकिंग एवं वित्त: व्यवसाय को सुचारू रूप से चलाने और संपत्ति खरीदने के लिए धन की आवश्यकता होती है। बैंक व्यापारियों को ऋण और अग्रिम देकर ‘वित्त की बाधा’ को दूर करते हैं तथा धन के सुरक्षित लेन-देन में मदद करते हैं।

8. व्यवसाय में लाभ की क्या भूमिका है? 

उत्तर: व्यवसाय में लाभ केवल आय का स्रोत नहीं है, बल्कि यह व्यवसाय के विस्तार के लिए आवश्यक वित्त का स्रोत भी है। यह व्यवसाय की कार्यकुशलता को दर्शाता है, समाज के लिए उपयोगी होने की स्वीकारोक्ति है, और व्यावसायिक इकाई की प्रतिष्ठा में वृद्धि करता है।

9. व्यावसायिक जोखिम से क्या अभिप्राय है? 

उत्तर: व्यावसायिक जोखिम का अर्थ अपर्याप्त लाभ या हानि होने की उस संभावना से है, जो उन अनिश्चितताओं या आकस्मिक घटनाओं के कारण होती है जिन पर व्यवसायी का कोई नियंत्रण नहीं होता। जैसे फैशन में बदलाव, प्राकृतिक आपदा या प्रतिस्पर्धियों का आ जाना।

10. व्यवसाय में शामिल जोखिमों के कारण बताएं। 

उत्तर: व्यवसाय में शामिल जोखिमों के चार मुख्य कारण हैं:

(i) प्राकृतिक कारण: बाढ़, भूकंप, अकाल जैसी आपदाएँ।

(ii) मानवीय कारण: कर्मचारियों की लापरवाही, बेईमानी या हड़ताल।

(iii) आर्थिक कारण: मूल्य में परिवर्तन, माँग में अनिश्चितता, करों में वृद्धि।

(iv) अन्य कारण: राजनीतिक उथल-पुथल या मशीनों/बॉयलर का फट जाना।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न:

1. भारतीय उपमहाद्वीप में स्वदेशी बैंकिंग प्रणाली के विकास पर चर्चा करें। 

उत्तर: प्राचीन भारत में आर्थिक जीवन कृषि, पशुपालन, और हस्तशिल्प पर आधारित था। व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार ने स्वदेशी बैंकिंग प्रणाली को जन्म दिया। धातु के सिक्कों के भारी होने और यात्रा में चोरी के डर से ‘हुंडी’ और ‘चिट्ठी’ का विकास हुआ, जो पैसे के सुरक्षित हस्तांतरण के लिए इस्तेमाल होते थे। ऋण और अग्रिम-राशियों की उपलब्धता ने वाणिज्यिक कार्यों को बढ़ावा दिया। भारतीय उपमहाद्वीप में अनुकूल व्यापार संतुलन था, जहाँ निर्यात आयात से अधिक था। बाद में, वाणिज्यिक और औद्योगिक बैंकों के साथ-साथ किसानों को ऋण देने के लिए कृषि बैंक भी विकसित हुए।

2. व्यवसाय को परिभाषित करें। इसकी महत्वपूर्ण विशेषताओं का वर्णन करें। 

उत्तर: व्यवसाय एक आर्थिक क्रिया है, जिसमें मनुष्य लाभ कमाने के उद्देश्य से वस्तुओं का उत्पादन, क्रय-विक्रय तथा सेवाओं की आपूर्ति में नियमित रूप से लगे रहते हैं। 

इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

(i) आर्थिक क्रिया: यह लाभ कमाने के लिए की जाती है, सहानुभूति के लिए नहीं। वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन या प्राप्ति: उपभोक्ताओं को सामान उपलब्ध कराने से पहले फर्म उसका उत्पादन करती है या खरीदती है।

(ii) विनिमय: मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वस्तुओं/सेवाओं का आदान-प्रदान होना चाहिए। खुद के उपयोग के लिए पकाया गया भोजन व्यवसाय नहीं है।

(iii) नियमितता: एक बार का लेन-देन व्यवसाय नहीं कहलाता; इसमें निरंतरता होनी चाहिए।

(iv) लाभ अर्जन: व्यवसाय का मुख्य उद्देश्य निवेश पर लाभ कमाना है।

(v) अनिश्चितता और जोखिम: भविष्य अनिश्चित होता है, इसलिए हर व्यवसाय में नुकसान की संभावना (जोखिम) बनी रहती है।

3. व्यवसाय की तुलना पेशे और रोज़गार से करें। 

उत्तर: व्यवसाय, पेशा तथा रोजगार में तुलना:

क्र.सं.आधारव्यवसायपेशारोजगार
1.स्थापना की विधिउद्यम का निर्णय तथा अन्य कानूनी औपचारिकताएँ, यदि आवश्यक हों तोकिसी व्यावसायिक संस्था की सदस्यता तथा व्यावहारिक योग्यता का प्रमाण-पत्रनियुक्ति-पत्र तथा सेवा समझौता
2.कार्य की प्रकृतिजनता की वस्तुओं तथा सेवाओं की सुलभताव्यक्तिगत विशेष सेवाएँ प्रदान करनासेवा समझौता या सेवा के नियमों के अनुसार कार्य करना
3.योग्यताकिसी न्यूनतम योग्यता की आवश्यकता नहींविशेष क्षेत्र में प्रशिक्षण तथा विशेष योग्यता (निपुणता) अति आवश्यकनियोजक द्वारा निर्धारित योग्यता एवं प्रशिक्षण
4.प्रतिफलअर्जित लाभफीसवेतन या मजदूरी
5.पूँजी निवेशव्यवसाय की प्रकृति एवं आकार के अनुसार पूँजी निवेश आवश्यकस्थापना के लिए सीमित पूँजी आवश्यकपूँजी की आवश्यकता नहीं
6.जोखिमलाभ अनिश्चित तथा अनियमित जोखिम सदैवफीस नियमित एवं निश्चित, कुछ जोखिम भीनिश्चित एवं नियमित वेतन, कोई जोखिम नहीं
7.हित-हस्तांतरणकुछ औपचारिकताओं के साथ हित-हस्तांतरण संभवसंभव नहींसंभव नहीं
8.आचार संहिताकोई आचार संहिता निर्धारित नहींपेशेवर आचार संहिता का पालन आवश्यकव्यवहार के लिए नियोजक द्वारा निर्धारित नियमों का पालन आवश्यक

4. उद्योग को परिभाषित करें। उदाहरण देते हुए विभिन्न प्रकार के उद्योगों की व्याख्या कीजिए। 

उत्तर: उद्योग से तात्पर्य उन आर्थिक क्रियाओं से है जो संसाधनों को उपयोगी वस्तुओं में परिवर्तित करती हैं, जिसमें यांत्रिक उपकरण और तकनीकी कौशल का प्रयोग होता है।

(i) प्राथमिक उद्योग: प्रकृति से संसाधन निकालना या पशु/वनस्पति का विकास करना। उदाहरण: खनन (निष्कर्षण) और मुर्गी पालन/नर्सरी (जननिक)।

(ii) द्वितीयक उद्योग: प्राथमिक उद्योग के कच्चे माल को पक्के माल में बदलना। उदाहरण: लौह अयस्क (कच्चा माल) से स्टील बनाना (विनिर्माण उद्योग), या सीमेंट और स्टील से पुल बनाना (निर्माण उद्योग)।

(iii) तृतीयक (सेवा) उद्योग: ये प्राथमिक और द्वितीयक उद्योगों को सेवाएँ देते हैं। उदाहरण: यातायात, बैंकिंग, गोदाम और विज्ञापन।

5. वाणिज्य से संबंधित गतिविधियों का वर्णन करें। 

उत्तर: वाणिज्य उत्पादक और उपभोक्ता के बीच की कड़ी है। इसका कार्य उन बाधाओं को दूर करना है जो विनिमय में आती हैं।

व्यापार: यह व्यक्ति संबंधी बाधा दूर करता है। इसमें आंतरिक (थोक व फुटकर) और बाह्य (आयात, निर्यात) व्यापार शामिल है।

व्यापार की सहायक क्रियाएँ:

(i) परिवहन: स्थान की बाधा दूर करता है।

(ii) गोदाम (भंडारण): समय की बाधा दूर कर माल को सुरक्षित रखता है।

(iii) बीमा: माल के खोने या चोरी होने के जोखिम से सुरक्षा देता है।

(iv) बैंकिंग: वित्त की बाधा दूर कर ऋण उपलब्ध कराता है।

(v) विज्ञापन: सूचना की कमी दूर कर ग्राहकों को उत्पाद की जानकारी देता है।

6. व्यवसाय के किन्हीं भी पाँच उद्देश्यों को समझाइए। 

उत्तर: व्यवसाय के किन्हीं भी पाँच उद्देश्य है-

(i) बाज़ार स्थिति: प्रतिस्पर्धियों के बीच बाज़ार में अपनी विशिष्ट पहचान और मजबूत आधार बनाना।

(ii) नवाचार: नए उत्पादों, नए डिज़ाइनों या काम करने के नए तरीकों (तकनीक) की खोज करना, जो व्यवसाय के विस्तार के लिए आवश्यक है।

(iii) उत्पादकता: उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम और कुशल उपयोग करके इनपुट के मुकाबले आउटपुट (उत्पादन) को बढ़ाना।

(iv) लाभ कमाना: लगाई गई पूँजी पर उचित रिटर्न प्राप्त करना, जो व्यवसाय को जीवित रखने और विकास के लिए आवश्यक है।

(v) सामाजिक उत्तरदायित्व: समाज का अंग होने के नाते सामाजिक समस्याओं को हल करने में संसाधनों का योगदान देना और ज़िम्मेदारी से काम करना।

7. व्यावसायिक जोखिम की अवधारणा और उसके कारणों की व्याख्या करें। 

उत्तर: व्यावसायिक जोखिम की अवधारणा और उसके कारण निम्नलिखित है:

(i) प्राकृतिक कारण: प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, भूकंप (भूचाल), अकाल, भारी वर्षा या बिजली गिरने पर मनुष्य का कोई नियंत्रण नहीं होता है। इन प्राकृतिक कारणों के अचानक घटित होने से व्यवसाय की संपत्ति और आय की भारी हानि हो सकती है।

(ii) मानवीय कारण: व्यवसाय मनुष्यों द्वारा चलाया जाता है, इसलिए उनसे जुड़ी गलतियाँ भी जोखिम लाती हैं। इसमें कर्मचारियों की बेईमानी, काम में लापरवाही या अज्ञानता शामिल है। इसके अलावा, कामगारों द्वारा हड़ताल कर देना, प्रबंधकों की अकुशलता या मानवीय गलती से बिजली फेल हो जाना भी व्यवसाय को नुकसान पहुँचाते हैं।

(iii) आर्थिक कारण: इन कारणों का संबंध मुख्य रूप से बाजार और वित्त से होता है। माल की माँग में अनिश्चितता, नई प्रतिस्पर्धा का आना, मूल्य में बदलाव या उत्पादन की तकनीक में परिवर्तन इसके मुख्य उदाहरण हैं। इसके अतिरिक्त, बैंक ऋण पर ब्याज दर में वृद्धि या सरकार द्वारा करों (taxes) की भारी उगाही से भी व्यवसाय की संचालन लागत बढ़ जाती है, जिससे मुनाफे का जोखिम पैदा होता है।

(iv) अन्य कारण: इस श्रेणी में वे सभी अदृश्य या अप्रत्याशित घटनाएँ आती हैं जिन पर पहले से ध्यान नहीं जाता। जैसे— देश में कोई राजनीतिक उथल-पुथल होना, कारखाने में मशीनों में खराबी आ जाना या बॉयलर का फट जाना। विदेशी व्यापार में मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव आना भी जोखिम की संभावनाओं को बढ़ा देता है।

8. किसी व्यवसाय को शुरू करते समय किन कारकों पर विचार किया जाना चाहिए? समझाइए। 

उत्तर: एक नया व्यवसाय शुरू करने (उद्यमिता) के लिए निम्नलिखित कारकों पर सावधानीपूर्वक विचार करना चाहिए:

(i) व्यवसाय के स्वरूप का चयन: यह तय करना कि किस उत्पाद या सेवा में व्यापार करना है, जहाँ बाज़ार की माँग और लाभ अधिक हो।

(ii) फर्म का आकार: पूँजी और बाज़ार की अनिश्चितता के आधार पर तय करना कि व्यवसाय छोटे पैमाने पर शुरू होगा या बड़े पैमाने पर।

(iii) स्वामित्व का स्वरूप: व्यवसाय एकाकी (अकेला व्यक्ति), साझेदारी, या कंपनी के रूप में चलाया जाएगा।

(iv) उद्यम का स्थान: ऐसी जगह जहाँ कच्चा माल, श्रम, बिजली, परिवहन और बैंकिंग की अच्छी सुविधा हो।

(v) वित्त व्यवस्था: स्थिर संपत्तियों (मशीन/जमीन) और चालू खर्चों के लिए पूँजी कहाँ से आएगी, इसकी योजना बनाना।

(vi) संयंत्र विन्यास: मशीनरी और भौतिक सुविधाओं का सही तरीके से नक्शा/स्थान तय करना।

(vii) सक्षम कामगार बल: योग्य और प्रशिक्षित कर्मचारियों/प्रबंधकों का चुनाव करना।

(viii) कर योजना: देश के कर कानूनों को समझना ताकि भविष्य में कानूनी दिक्कतें न आएं।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें:

खूबसूरत असम राज्य में कामरूप जिला बसा है। कामरूप में सुआलकुची नामक एक छोटा, प्रगाढ़ संबंधों से युक्त समुदाय वाला गाँव है। सुआलकुची अपने रेशम बुनकरों और रेशम बुनाई की जटिल कला के लिए जाना जाता है। रेशम की बुनाई का एक हिस्सा होता है जिसे बाना डालना या बूटा बुनाई कहा जाता है। इसके लिए पूरे ध्यान, समर्पण और बारीकी की आवश्यकता है। यह धीमी प्रक्रिया मानसिक और शारीरिक रूप से थकाने वाली होती है। यह उत्पादकता को धीमा करती है और इस कारण श्रमिक अतिरिक्त काम नहीं कर पाते हैं। शांत श्रमिकों के इस समुदाय में दीपक भराली रहते थे। एक साधारण परिवार में जन्मा, वह जानता था कि बुनाई व्यवसाय उसकी आजीविका होने जा रहा है। यह साधन-संपन्न युवक सफल होना चाहता था और कुछ बड़ा हासिल करना चाहता था। उसने रेशम बुनाई एक करघा खरीदा और इसके साथ एक व्यवसाय शुरू किया। यह साहसिक कार्य आगे बढ़ रहा था और आय काफी अच्छी थी। फिर भी, किसी बात ने दीपक को परेशान कर दिया। रेशम बुनाई के कारोबार का विस्तार करने के लिए, और करघे खरीदते रहने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था। उसने निवेश और प्रगति के अन्य साधनों को खोजने की कोशिश की। सरल समझ वाले ग्रामीणों ने उन्हें करघे की संख्या बढ़ाने के लिए कहा। दीपक उनके जवाबों से निराश हो गया और खुद को इससे हटकर कुछ सोचने के लिए प्रेरित किया। उसने सोचा कि वह एक ऐसी मशीन बना सकता है, जो बाना डालने या बूटा बुनने की प्रक्रिया को स्वचालित कर देगी।

एक अच्छे दिन, दीपक और उसका भाई अपने बचपन को याद कर रहे थे। उनके बचपन का एक बड़ा हिस्सा साधारण वस्तुओं और विचारों से मजेदार खेल बनाने में बीता था। उसने अपने भाई को कुछ तारों और कीलों का उपयोग करके विद्युत-चुंबक बनाने की कोशिश करने की याद दिलाई। एक अन्य खेल में कागज़ पर एक सेफ़्टी पिन या कील रखना और कागज़ के नीचे चुंबक का उपयोग कर सेफ्टी पिन या कील को चलाना शामिल था। किसी के दिमाग में चल रही कहावत के रोशनी के बल्ब की तरह, इस याद से दीपक का मस्तिष्क प्रेरित हो उठा।

वह जानता था कि उसकी दुविधा का हल निकालने के लिए इस प्रेरणा की आवश्यकता थी। अब जब उनके पास विचार था, तो उसे उपकरण बनाना था। एक उद्यमी वह होता है जो कई बार असफल होने के बावजूद सफल होता है। दिमाग को झकझोरने वाली 80 कोशिशों के बाद, उन्होंने आदर्श उपकरण ‘चनेकी’ विकसित किया। ‘चनेकी’ पुनरूचक्रण योग्य सामग्री से बना है, जो न केवल एक उपयोगी बल्कि एक पर्यावरण-हितैषी आविष्कार है। पहले के हाथ से बाना डालने की तुलना में उपकरण को 40 गुना तेज़ चलाने के लिए मशीन बनाई गई है। कई बुनकरों ने अब चनेकी में दक्षता प्राप्त कर ली है और उत्पादन को काफी बढ़ाया है। इस अंतर ने मालिकों और बुनकरों को प्रसन्न करते हुए उत्पादकता और गुणवत्ता को बढ़ने दिया।

सबके बताए रास्ते पर चलना हमेशा आसान होता है। जो अपने स्वयं के मार्ग को बनाते हैं और अज्ञात क्षेत्रों में झंडे गाड़ते हैं, वे वास्तविक में जोखिम लेने वाले और उद्यमी हैं। दीपक भारली अपनी उपलब्धियों के लिए प्रशंसा योग्य हैं। बड़े पैकेजों में छोटी चीजें आती हैं और कभी-कभी जीवन के सबसे बड़े प्रश्नों का उत्तर सबसे सरल तरीकों से दिया जाता है।

1. उपरोक्त मामले में व्यापार के किस उद्देश्य पर चर्चा की गई है? 

उत्तर: इस मामले में व्यापार के नवाचार उद्देश्य पर गहराई से चर्चा की गई है। दीपक ने पुरानी और धीमी बुनाई प्रक्रिया (बाना डालना) को स्वचालित करने के लिए अपने बचपन के चुंबक वाले खेल से प्रेरणा लेकर ‘चनेकी’ नामक उपकरण का आविष्कार किया।

2. व्यवसाय के लिए पहचाने गए उद्देश्य ने व्यावसायिक इकाई के विकास में कैसे योगदान दिया है? कारण बताएं। 

उत्तर: नवाचार (चनेकी उपकरण) ने बुनाई की गति को हाथ से बाना डालने की तुलना में 40 गुना अधिक तेज़ कर दिया। यह एक पर्यावरण-हितैषी मशीन थी, जिसने धीमी प्रक्रिया को तेज़ कर दिया। इसके कारण उत्पादकता और गुणवत्ता में जबरदस्त वृद्धि हुई। जब काम तेज़ हुआ, तो मालिकों और बुनकरों दोनों को फायदा हुआ और व्यवसाय की लाभ कमाने की क्षमता काफी बढ़ गई।

3. व्यापार को अपने टिकाऊ विकास के लिए कई उद्देश्यों की आवश्यकता क्यों होती है?

उत्तर: केवल ‘लाभ कमाना’ किसी व्यवसाय का एकमात्र उद्देश्य नहीं हो सकता। एक टिकाऊ और सफल व्यवसाय के लिए नवाचार, उत्पादकता, संसाधन प्रबंधन जैसे बहुमुखी उद्देश्यों की आवश्यकता होती है। यदि दीपक केवल लाभ पर ध्यान देता, तो वह केवल कुछ और करघे खरीद लेता, लेकिन इससे उसकी उत्पादकता सीमित ही रहती। नवाचार के उद्देश्य को अपनाने से उसने एक नई मशीन बनाई, जिसने पूरी प्रक्रिया को बदल दिया। इससे सिद्ध होता है कि लंबे समय तक बाज़ार में टिकने और प्रगति करने के लिए विभिन्न उद्देश्यों के बीच संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है।

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