Assam Jatiya Bidyalay Class 7 Hindi Chapter 5 मत बाँटों इन्सान को

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मत बाँटों इन्सान को

Chapter – 5

অসম জাতীয় বিদ্যালয়

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1. निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दो : (তলত দিয়া প্ৰশ্নবোবৰ সংক্ষিপ্ত উত্তৰ দিয়া) 

(i) कवि के अनुसार भगवान को किसने बाँटा है? (কবিৰ মতে ভগৱানক কোনে ভগাই দিছে?) 

उत्तर: कवि के अनुसार भगवान को मंदिर, मस्जिद और गिरजा घर में बाँटा है। 

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(ii) किसके बिना यह जग सूना है? (কাৰ অবিহনে এই বিশ্ব খালী যেন লাগে?) 

उत्तर: प्यार के बिना यह जग सूना है।

(iii) प्यासी चट्टान को हमें क्या देना है? (পিপাসিত বহল শিলক আমি কি দিব লাগে?) 

उत्तर: हमें प्यासी चट्टान को प्यार का जल देना है।

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(iv) किसकी मुस्कान को कोई रौंद न पाएगा? (কাৰ হাঁহিক কোনেও ভৰিৰে মোহাৰি পেলাব নোৱাৰিব?) 

उत्तर: मौसम की मुस्कान को कोई रौंद न पाएगा।

2. निम्नलिखित प्रश्नों का विस्तार से उत्तर लिखो (নিম্নলিখিত প্রশ্নৰ উত্তৰ লিখা) 

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(i) मंदिर, मस्जिद और गिरजाघर नें भगवान को किस प्रकार बाँटा है? (মন্দিৰ, মছজিদ, গীর্জাঘৰে ভগৱানক কেনেকৈ ভগাইছে?)। 

उत्तर: इस दुनिया में अनेक धर्म और जाति के लोग रहते है और वह अपने अपने धर्म के रीति अनुसार भगवान की पूजा करते हैं। भगवान एक है और भगवान की पूजा हेतु उन्होंने अलग-अलग स्थलों का चुनाव कर लिया है। इसी प्रकार लोगों के बनाए मन्दिर मस्जिद और गिरजाघर ने भगवान को बाँटा दिया है।

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(ii) ‘उजियाली महलों में बन्दी हर दीपक मजबूर है।’- इसमें कवि का अभिप्राय बताओ — ইয়াত কবিয়ে কি বুজাব খুজিছে?

उत्तर: इस उक्ति से कवि हमें यह कहना चाहते हैं कि जो दीपक महलों में जलकर उस महल को उजाला करता है वह हर दीपक मजबूर है। उसी प्रकार जो भारत का भविष्य है उन्होंने ही अपने आप को जाति धर्म के नाम पर खुद को बाँट रखा है।

(iii) ‘धरती वाँटी सागर बाँटा मत बाँटों इन्सान को।’- इससे कवि का आशय स्पष्ट करों — ইয়াতে কবিয়ে কি ক’ব খুজিছে? 

उत्तर: इस उक्ति से कवि हमें यह कहना चाहते है कि जिस प्रकार इन्सान ने अपने रहने के लिए धरती का बँटवारा और सागर का बँटवारा कर लिया है उसी प्रकार इन्सान को अपने आप को जाति-धर्म के नाम पर नहीं बाँटना चाहिए।

3. इस कविता का सारांश लिखो (এই কবিতাটোৰ সাৰাংশ লিখা) 

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उत्तर: आगे देखिए।

4. पर्यायवाची शब्द लिखो : (পর্যায়বাচী শব্দ লিখা)

राष्ट्र, इन्सान, सूरज, जग, मुस्कान, प्यार, एकता

उत्तर : राष्ट्र – देश।

जग – दुनिया।

एकता – अखंडता।

इन्सान – मानव।

मुस्कान – हँसी।

सूरज – रवि।

प्यार – प्रेम।

Inside Questions 

1. ‘मत बाँटो इन्सान को’ के कवि कौन है? (‘মত বাটো ইন্সান কো’ কবিতাটোৰ কবি কোন?)

उत्तर: ‘मत बाँटो इन्सान को के कवि विनय महाजन है।

2. यह कविता का मूल अर्थ क्या है? (এই কবিতাটোৰ মূল অর্থ কি?)

उत्तर: कवि कहते है कि मंजिल पाने के लिए हमें एकजुट होकर हर परेशानियो का सामना करना चाहिए न की अपने आप को जाति- पात के दीवार से बाँटनी चाहिए।

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