SEBA Class 10 Elective Hindi Model Paper – 3 | দশম শ্ৰেণীৰ হিন্দী প্ৰশ্নকাকত

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SEBA Class 10 Elective Hindi Simple Paper and Question Answer

SEBA Class 10 Elective Hindi Model Paper

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हिंदी प्रश्नपत्र

PART – III

ELECTIVE HINDI

MODEL QUESTION ANSWER

Group – A

1. प्रश्नों के नीचे दिए गए उत्तरों में से एक एक उत्तर सही हैं। सही उत्तरों का चयन करो : 

(क) तुम्हारी भी रिटायर होने की उम्र आ गइ।’ – यह किसका कथन है ?

(अ) नारद का 

(आ) धर्मराज का

(इ) चित्रगुप्त का

(ई) भोलाराम का

उत्तर : (आ) धर्मराज का।

(ख) ‘मैं बोल नहीं सकती, पर अन्धे की तरह सब कुछ महसुस कर सकती हूँ।’ – यहाँ ‘मैं’ किसके लिए प्रयुक्त है ?

(अ) अजगर के लिए

(आ) प्रतिमा के लिए

(इ) लड़की के लिए 

(ई) सड़क के लिए

उत्तर : (ई) सड़क के लिए। 

(ग) कस्तुरी मृग वन-वन में क्या खोजता फिरता है ?

(अ) कोमल घास

(आ) शीतल जल

(इ) निर्मल हवा

(ई) कस्तुरी नामक सुगन्धित पदार्थ ।

उत्तर : (ई) कस्तुरी नामक सुगन्धित पदार्थ।

(घ) ‘ताहि के संग में भीजै’- यही ‘ताहि’ शाब्द का अर्थ है। 

(अ) गिरिधर (गिरधर) नागर 

(आ) भोजराज

(इ) महादेव

(ई) नारद

उत्तर : (अ) गिरिधर (गिरधर) नागर।

(ङ) रामधारी सिंह ‘दिनकर’ बिरचित पठित का नाम क्या है ?

(अ) कायर मत बन

(आ) मृत्तिका

(इ) जो बीत गड़

(ई) कलम और तलवार

उत्तर : (ई) कलम और तलवार।

(च) मनुष्य के पुरुषार्थ के बदलते रूपों के अनुरूप मिट्टी किन रूपों में ढल सकती है ?

(अ) मा-बाप-प्रजा और चिन्मयी 

(आ) माँ-प्रिया-प्रजा और चिन्मयी

(इ) बहन-प्रिया-माँ-प्रजा

(ई) प्रिया-माँ-बाप-प्रजा

उत्तर : (आ) माँ-प्रिया-प्रजा और चिन्मयी । 

(छ) कुंभ-कलश बहकर मिट्टी क्या बन जाती है ?

(अ) बहरूपा

(आ) मातृरूपा

(इ) प्रियारूपा

(ई) प्रजारूपा

उत्तर : (इ) प्रियारूपा।

2. सप्रसंग व्याख्या करो :

जा घट प्रेम न संचरै, सो घट जान मसान।

जैसे खाल लोहार की, साँस लेत बिनु प्रान।।

अथवा

पोथी पढ़ि जग मुआ पंडित भया न कोय। 

ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।।

उत्तर : प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी पाठ्यपुस्तक आलोक, भाग २ के कबीरदासस द्वारा रचित ‘साखी’ शीर्षक कविता से ली गई है।

कवि ने प्रस्तुत पंक्ति द्वारा प्रेम के महत्व पर प्रकाश डाला है। इस दोहे के जरिए कवीरदास यह कहना चाहते है कि जिस मनुष्य के हृदय में प्रेम नही होता है वह व्यक्ति श्मशान के समान सुना और मृतप्रायः होता है। ऐसा मनुष्य प्रान रहते हुए भी मृत होता है। ऐसे आदमी केवल जीवित होने का प्रमाण है। उसी प्रकार भाव शुन्य हृदय के व्यक्ति मृत जानवरों के खाल से बनी लोहार की धौंकनी के समान होता है जो बिना प्राण के सास लेता है। कवि के अनुसार प्रेम ही जीवन है। प्रेम के बिना जीवन अधुरा होता है।

अथवा

प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी पाठ्यपुस्तक आलोक, भाग २ के कबीरदासस द्वारा रचित ‘साखी’ शीर्षक कविता से ली गई है।

प्रस्तुक पंक्ति के द्वारा कबीरदास जी ने पोथी पढ़ने के संदर्भ में कहा है कि कोरा पुस्तकीय ज्ञान निरर्थक है। इससे कोई ज्ञानी नहीं बन सकता। सच्चा ज्ञानी वही कहलाता है जो प्रेम के वास्तविक अर्थ को समझता है। जग में प्रेम के ढाई आखर समझनेवाला व्यक्ति ही पंटित कहलाता है। 

3. संक्षेप में उत्तर दो :

(क) ‘क्यों जी. तुमने इसमें क्या देखा ?’ – छोटे जादुगर ने इसका उत्तर किस प्रकार दिया था ? 

उत्तर : कानिवल के मैदान में विजली जगमग रही थो। हमी और विनोद का शरवत पीने वालों को देख रहा था। उसके गले में फटे कुते के ऊपर एक मोटी सी सुत को रस्सी पड़ी थी और जेब में कुछ ताश के पत्ते थे। उसके मुँह पर गम्भीर विवाद के साथ धैर्य की रेखा थी। कहानीकार के प्रश्न के उत्तर ठोटे जादुगर ने इस तरह दिन मैंने सब देखा। यहा चुडी ऐकते हैं। खिलौने पर निशाना लगाते है। तीर से नम्बर छेदते है। यह उसको अच्छा लगा था।

(ख) श्रीमान ने छोटे जादुगर को क्यों आश्चर्य से देखा था ? 

उत्तर : जब श्रीमान और ठोटे जादुगर की बात-तीत हो रही थी तब छोटे जादुगर के मुँह पर तिरस्कार की हँसी फुंट पड़ी थी। उसने कहा था- ‘तमाशा देखने नही दिखाना निकला हुँ। कुछ पैसे ले जाउँगा, तो माँ को पथ्य दूँगा। मुझे शरबत न पिलाकर आपने मेरा खेल देखकर कुछ दे दिया होता तो मुझे अधिक प्रसन्नता होती।’ इस तेरह दे – चौदह वर्ष के लड़के का यह बात सुनकर कहानीकार ने आश्चर्य से देखा था। 

(ग) साहब ने नारद को पेंशन के वजन के सम्बन्ध में क्या कहा है ?

उत्तर : साहब ने नारद को पेंशन के बजन के सम्बन्ध में कहा ता कि यह भी एक मंदिर है। यहाँ भी दान पुणअय करना पड़ता है, भेंट चढ़ानी पड़ती है। भोलाराम की दरख्वास्ते उड़ रही है, इन पर वजन रखिए जिसका मतलब था रिश्वत रखना अर्थात दरखास्त के उपर रिश्वत देंगे ता काम जलदी हो जाएगा।

(घ) ‘मैं किसी का भी लक्ष्य नही हुँ’- इसमें व्यंजित भाव को रेखांकित करो। 

उत्तर : सड़क ने ऐसा इसलिए कहा कि क्योंकि कोई सड़क तक पहुँचने का लक्ष्य नहीं रखता, सड़क के सहारे अपने लक्ष्य तक पहुँचता है। सड़क उसके लक्ष्य तक ले जाती है। लक्ष्य तक पहुँचने का उपाय बनती है।

(ङ) मीराँबाइ संसार के लोगों को क्या सलाह देती है ? (पद संख्या तीन के आधार पर उत्तर दो) 

उत्तर : कवि मीराबाइ मनुष्य मात्र से राम (कृष्ण) नाम का रस पीने का आस्थान करते हुए कहती है कि सभी मनुष्य कुसंग छोड़े और सत्संग में बैठकर कृष्ण का कीर्तन सुने, वे काम, क्रोधादि छ: रिपुओं को चित्त से निकाल दें और कृष्ण प्रेम-रंग-रस से सरोबर हो उठे।

(च) संसार में कलम और तलवार में से किसकी शक्ति असीम है ? 

उत्तर : कलम और तलवार में से कलम की शक्ति अधिक है। कलम तलवार से छोटी होते हुए भी उसमें बहुत ज्यादा शक्ति होती है। कलम के द्वारा मनुष्य ज्ञान दीप जला सकता है तथा विचारों की शक्ति के द्वारा समा में नई चेतना पैदा कर सकता है। कलम के द्वारा बिना किसी कालहू बहाए हम किसी भी व्यक्ति को अपने वश मे कर सकते है। कलम के द्वारा हम जन जन तक अपने विचार पहुँचा सकते हैं पर तलवार का प्रयोग कर किसी को हमारी बात मानने के लिए मजबूर किया जा सकता है पर वह दिल से उसे नहीं मानता। तलवार किसी एक को प्रभावित कर सकता है, मगर कलम से सैकड़ों को प्रभावित किया जा सकता है।

4. ‘ईसाई धर्म उन्ही के पूण्य प्रताप से फल फुल रहा है’ स्पष्ट करो : 

उत्तर : ईसाई धर्म उन्हीं के पुण्य प्रताप से फल-फूल रहाहै इसका आशय यह है कि ईसा की शहादत ने ईसा मसीह को अमर बना दिया। लेखक के अनुसार ईसाई धर्म को अमर उन लोगों ने बनाया, जिन्होंने उस धर्म के प्रचार में बिना नाम किए स्वर्य को बलिदान कर दिया। उनमें से कितने सुली पर चढ़ाए गए और अनेक लोग भुख ष्यास के शिकार होकर मर गएइ। ईसाई धर्म उन्ही के पुष्ण प्रताप से फल फुल रहा है। इन लोगों ने भारी कष्ट झेलकर तथा बलिदान देकर धर्म को अमर बना दिया है।

अथवा

‘नीव की इंट’ के सन्देश को अपने शब्दों में लिखो।

उत्तर : ‘नींव की ईट’ शीर्षक निबंध का संदेश यह है कि आज ऐसे नवयुवकों की जरूरत है, जो भारत के नवनिर्माण में नींव की ईंट बनकर खुद को खपा दें। लेकिन आज विडंबना यह है कि आज कंगूरे की ईट बनने की होड़ा-होड़ी मची है। नींव की ईट बनने की कामना लुप्त हो गई है।

5. (क) निम्नलिखित में से किन्ही दो मुहावरों से वाक्य बनाओ : 

अपने पाँव पर कुल्हाड़ी मारना, आँखे बदल जाना, घड़ी समीप होना, श्रीगणेश होना।

उत्तर : अपने पाँव पर कुलहाड़ी मारना (अपना नुकसान स्वयं करना) : सुरेश सिगरेट पीकर तुम अपने पाँव पर कुलहाड़ी मार रहे हो। 

आँखें बदल जाना : (पहले से उलट व्यवहार कना) बाप के मरते हो रिश्तेदारों की बेटे के प्रति आँखे बदल गयी। 

घड़ी समीप होना : मृत्य का समय पास आना) बिमार माँ ने पल्लव को पास बुलाकर कहा मेरी घड़ी सभीप आ गया है।

श्रीगणेश होना : (कोई नया काम आरंभ होना) उसकी मिठाई की दुकान का श्रीगणेश आज ही हुआ।

(ख) निम्नलिखित में से किन्हीं चार के स्त्रीलिंग रूप लिखो : 

धोबी, ठाकुर, अभिनेता, नर्तक, चमार, नर कौआ, विदवान

उत्तर : धोबी             धोबिन             ठाकुर            ठाकुराइन

          अभिनेता        अभिनेत्री          नर्तक            नर्तकी

          चमार             चमारिन          र कौआ         मादा खौआ

          विदवान          बिदुषी ।

(ग) निम्नलिखित में से किन्हीं दो की सन्धि करो :

अति+अधिक, न+इन्द, सदा+एब, परि ॠ आवरण

उत्तर : अति + अधिक – अत्याधिक       नर+इन्द्र – नरेन्द्र

          सदा+एव – सदेव                       परि+आवरण – पर्यावरण

(घ) निन्मलिखित में से किन्हीं चार के विलोम शब्द लिखो :

पतन, उदय, वीरता, प्रेम, अतीत, सात्विक, सवर्ग, रोगी

उत्तर : पतन          उत्थान            उदय             अस्त

           वीरता         कायरता          प्रेम               घृणा

           सात्विक      नास्तिक         अतीत            वर्तमान

           स्वर्ग           नर्क               रोगी               निरोगी

(ङ) निम्नलिखित में से किन्ही चार के पर्यायवाची शब्द लिखो : 

आग, कृषक, गाय, तलवार, पवन, बन्दर, मछली, लहु

उत्तर : आग              अनल, अग्नि

           कृषक             किसान, खेतियक

           गाय               गो         

           तलवार           कृपाणा, करवाल

           पवन              वायु, समीर

           बन्दर             कपि

           मछली            मच्छ

           लहु                 खुन, रक्त

(च) निम्नलिखित में से किन्हीं तीन वाक्यों को शुद्ध करो : 

(i) बालक छत में खेल रहे हैं। 

(ii) मैंने आज वहाँ जाना है।

(iii) आप मेरी आवाज सुनो।

(iv) लड़का ने पत्र लिखा।

उत्तर : (i) बालक छत पर खेल रहा है।

(ii) मुझे आज वहा जाना है।

(iii) आप मेरी आवाज सुनिए। 

(iv) लड़के ने पत्र लिखा।

(छ) निम्नलिखित में से किन्हीं दो के एक एक शब्द लिखो :

(i) गो का पालन करने वाला। 

(ii) तीन नदियों का संगम स्थल।

(iii) जिसमें दया नही है।

(iv) मुँह में दूध है जिसका।

उत्तर : (i) गो का पालन करने वाला- गोवाल 

(ii) तीन नदियों का संगम स्थल- त्रिबेनी संगम 

(iii) जिसमें दया नही है- निर्दयी 

(iv) मुँह में दूध है जिसका दुध मुहँ

Group – B

6. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो :

(क)’ नीलकंठ’ किस विधा की रचना है ?

उत्तर : ‘नीलकंठ’ एक रेखाचित्र है।

(ख) नीलकंठ की राधा कौन है ? 

उत्तर : ‘नीलकंठ’ की राधा मोरनी थी। मोरनी के साथ वो छाया की तरह हमेशा रहती थी। जैसे राधा कृष्ण के साथ रहती थी।

(ग) गाँवो या गरीब बस्तियों में चिट्ठी या मनीआर्डर लेकर पहुँचने वाला डाकिया किस रूप में देखा जाता है ? 

उत्तर : गाँवो या गरीब बस्तियों में चिट्ठी या मनीआर्डर लेकर पहुँचने वाला डाकिया देवदूत के रूप में देखा जाता है। 

(घ) उर्दु में पत्र को क्या कहा जाता है ?

उत्तर : उर्दू में पत्र को खत कहा जाता है।

(ङ) ‘जो बीत गइ’ शीर्षक कविता के कवि कौन है ? 

उत्तर : ‘जो बीत गइ’ शीर्षक कविता के कवि ‘हरिवंश राय बच्चन’ जी है।

(च) कवि ने सर्वस्ब अर्पण किसे करने को कहा है ? 

उत्तर : कवि ने सर्वस्व मानवता पर न्योछावर करने को कहा है।

7. निम्नलिखित प्रश्नो के उत्तर संक्षेप में दो : 

(क) दोनों नवागन्तुकों ने पहले से रहनेवालों में कैसा कुतुहल जगाया था, स्पष्ट करो।

उत्तर : दोनों नवागन्तुकों ने पहले से रहनेवालों में बेसा ही कुतुहल जगाया जैसा नववधु के आगमन पर परिवार में होता है। लक्का कबुतर नचाना छोड़कर दौड़ पड़े और उनके चारों ओर घुम-घुमकर गुटरगँ को रागिनी आलापने लगे। बड़े खरगोश सभ्य सभासदों के समान क्रम से बेठकर गंभीर भाव से उनका निरीक्षण करने लगे। ऊन की गेंद जैसे छोटे खरगोश उनके चारो ओ उछल कुद मचाने लगे। नवागंतुको के आगमन से मानी चिड़ियाघर में भुंजाल आ गया था। 

(ख) चिट्ठीयों की अनुठी दुनिया’ शीर्षक पाठ के आधार पर स्पष्ट करो कि दुनिया का तमाम साहित्य पत्रों पर केन्द्रित है। 

उत्तर : दुनिया का तमाम साहित्य पत्रों पर केंद्रित है अर्थात पत्र जो काम कर सकते हैं वह संसार का आधुनिकतम साधन नही कर सकता है। पत्रों का काम आजकल संसार साधन फोन या एस एस एस महीं कर सकते हैं। आज दुनिया का ढेर सारा साहित्य पत्रों पर टिका है। मानव सभ्यता के विकास में पत्रों के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। अलग अलग भाषाओं में पत्रों को अलग अलग नामों से जाना जाता है।

(ग) ‘जो बीत गइ’ शीर्षक कविता से हमें क्या शिक्षा मिलती है ?

उत्तर : इस कविता से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें बीती हुई दुखद घटनाओं को भुलाकर आगे की सुध लेनी चाहिए। गत दुखों को भुलाकर आगामी सुखों का आह्वान करना चाहिए।

(घ) ‘कायर मत बन’ शीर्षक कविता में ले-देकर जीने को क्यों जीना नहीं कहा है ?

उत्तर : कवि कहता है की ले-देकर अर्थात परिस्थितियों का जीवन जीना भी कोइ जीना है। मानवता ने युगो युगो से परिश्रम करके अपना खुन पसीना बहाकर तुझे सींचा है। अर्थात मानवजाति ने परिश्रमपूर्वक तेरा विकास किया है। तुझे अपना जीवन सुखमय बनाने के लिए प्रयल करने पड़ेगें बेकार में गिड़गिड़ाने। 

8. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो :

(क )नीलकंठ के स्वभाव की विशेषताओं का वर्णन अपने शब्दों में करो। 

उत्तर : नीलकंठ के स्वभाव की विशेषताएँ ते थी ही उसका मानवीकरण भी होने लगा था। वह कलात्मक डंग से लय-ताल के साथ नाचता था। वह बहुत वीर भी था। साँपों पर बड़ी भयंकरता से प्रहार करता था। छोटा पशु-पक्षियों के प्रति वह सहदचय था। साँप से छुड़ाकर वह खरगोश के घायल छोटे बच्चे को रात भर अपने पंखों की गरमी देता रहा था। फलों के बदले उसे पल्लवित और पुषिपत वृक्ष अधिक अच्छे लगते थे। घटा देखकर वह अपने पंखों का गोल घेरा बनाकर नाचता था। अपनी नुकीली चाँच से वह लेखिका की हथेली पर रखे भूने चने बड़ी कोमलता से और हौले-हौले उठाकर खाता था।

अथवा

नीलकंठ के मरने के बाद साथी सक्षियों में हुए परिवर्तन को रेखांकित करो। 

उत्तर : नीलकंठ के मरने के बाद कई दिन तक कोने में बैठी रही। उसके भाव से ऐसा लग रहा था जैसे वह नीलकंठ का इंतजार कर रही है। पर कुब्जा ने कोलाहल के साथ खोज ढूँढ आरम्भ की खोज के क्रम में वह प्राय: जाली का दरबाजा खुलते ही बाहर निकल आती थी और आम, अशोक, कचनार आदि की शाखाओं में नीलकंठ को ढूँढती रहती थी। स्वभाव के अनुसार उसने कजली पर चोंच से प्रहार किया था। परिणामतः कुब्जा की मोत हो गई। राधा अब प्रतीक्षा में है। आषाढ़ में जब आकाश मेवाच्छन्न हो जाता है तब कभी ऊँचे झूले पर और कभी अशोक की डाली पर अपनी केका को तीहतर करके नीलकंठ को बुलाती रहती है। 

(ख)हिंसा-अहिंसा के सम्बंध में ‘कायर मत बन’ कविता के कवि के कथ्य को स्पष्ट करो।

उत्तर : कोई दुष्ट और नीच व्यक्ति सामने आ जाए तो मनुष्य को चाहिए कि या तो प्यार के बल पर उसे जीत ले, नही तो उसकी हिंसा का जबाब प्रतिहिंसा से दे। किसी भी स्थिति में अहिंसा की दुहाई देते हुए पीठ फेरकर वह न भागे। कवि ने माना है कि हिंसा के बदले में की जाने वाली हिंसा मनुष्य की कमजोरो को दर्शाता है। परन्तु कायरता उससे अधिक अपवित्र है। कवि ने कहा है कि मानवता अमुल्य है, परन्तु कायरता उससे अधिक अपवित्र है।

अथवा

कवि के अनुसार ‘सत्य का सही लोल’ क्या है ? 

उत्तर : कवि ने कहा है कि मानवता अमुल्य है और इसकी रक्षा हर हाल में होनी चाहिए। बनना-मिटना तो जीवन का सत्य है। सत्य यह भी है की व्यक्ति के आत्म-बलिदान से पानवता अमर बनती है। युगों से संचित मानवता व्यक्ति को खुन पसीने से सींचती है। अत: मनुष्य के लिए उचित यही है कि वह कभी जीवन में कायर न बने और अपना सब कुछठ मानवता पर न्योचाबर कर दे। 

9. निम्नलिखित किसी एक विषय पर निबन्ध लिखो :

(क) श्रम का महत्व

(ख) काजीरंगा

(ग) अपने प्रिय साहित्यकार

(घ) हिन्दी दिवस समारोह

उत्तर :

(ख) काजिरंगा

प्रकृतिप्रेमी लोग प्राकृतिक सौन्दर्य तथा प्राकृतिक सम्पदा देखने के लिए उत्सुक हाँ उठते है। प्रकृति के साथ मनुष्य का घनिष्ठ सम्बन्ध जुड़ा हुआ है।

भारत के उत्तर पूर्वचल से असम राज्य के गोलाघाट जिला में १६० वर्ग मील हैं। ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिण तट पर काजिरंगा बनांचल विस्तृत है। इस बनांचल के दक्षिण में एक राष्ट्रीय सड़क है। यहा ‘बुढ़ा पहाड़’ नामक एक पहाड़ है। यह पहाड़ घने जंगलो से परिपूर्ण है। जगह जगह कई टिला भी है। नदी, झरने, झील, तालाब आदि यहा की प्राकृतिक देन है। मांसाहारी जानबरो के लिए छोटे-छोटे प्राणी, तृणभोजीयो के लिए पेड़ पौढे, सरीसृप के लिए मठली, कीड़े-मकोड़े और चिड़ियों के लिए पर्याप्त खाद्य संभार प्रकृति से मिलते है।

यह बनांचल विभिन्न जंगली जानवर, चिड़ियाँ और सरीसूप प्राणीयो का आश्रयस्थल और लीलाभुमि है। अतीत में यह बनांचल शिकारीयो के लिए स्वर्गराज्य था। इसलिए अंग्रेज सरकार ने उस समय, सन १९१६ ई से काजिरंगा बनांचल को संरक्षित बनांचल घोषित किया और प्राणी हत्या पर प्रतिबंध लगाया था। आजादी के बाद अभयारण्य और सन १९७४ में इसको ‘काजिरंगा राष्ट्रीय उद्यान’ घोषित किया। असम सरकार ने पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पर्यटक निवास बनाया है, जिससे जन लोगों को कोइ कष्ट उठाना न पड़े। आजकल देश देश-विदेश से बहुत पर्यटक राष्ट्रीय उद्यान देखने और बिचित्र प्राकृतिक सौन्दर्य को उपभीग करने यहा आते है।

काजिरंगा उद्यान में गैंडा, भाघ, हाथी, भैस, सुँअर, हिरण, सियार, बन्दर आदि जानबर, मोर, धनेश, सारस, तोता, मैना, हंस, चील, पपीहा, कोयल कौवा आदि तरह तरह के चिड़िया भी है। पानी में रहनेवाले मठली, मैदक, घरियाल, कछुआ, साप आदि है। जंगलो में तरह के मुल्यवान पेड़ पौधे-नल, इकरा, आदि मिलता है। काजिरंगा राष्ट्रीय उद्यान एक सिंघवाले गैंडे के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहा कुल ७०० गेंडे हैं और इन में से ४०० गेंडे मुक्त बनांचल में रहते है।

असम प्राकृतिक सम्पदाओं से धनी है। इन प्राकृतिक सम्पदाओं का जिस प्रकार संरक्षण होना चाहिए था उस तरह से नहीं हो रहा है। लालची और स्वार्थी लोगो से इन सम्पदाओ का रक्षा करना अति आवश्यक है। असम सरकार की तरफ से बनज सम्पद के लिए वन विभाग और पर्यटन विभाग की स्थापना की गई है। जंगली जानवर तथा प्राकृतिक सौन्दर्य को देखने के लिए हाथी तथा जीप गाड़ी की व्यवस्था की गई है। अत: काज़िरंगा राष्ट्रीय उद्यान तथा अन्य उद्यानो के पशु-पक्षीओं तथा पेड़ पौधों की जिस प्रकार सरकार रक्षा कर रहे है उसी प्रकार प्रत्येक नागरिक को इसमे सरकार को सहयोग देना अति आवश्यक है।

(ग) प्रिय साहित्यकार लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ

असमीया साहित्य में बेजबरुआ की देन उल्लेखनीय है। साहित्य कला की चारों दिशाओं में उनका हाथ था नाटक, उपन्यास, निबंध, कहानी, हास्य-व्यंग्य और कविता वे लिखते थे। इसीलिए उनके हाथ में असमीया साहित्य भण्डार पुरा हुआ और इसे देखकर समालोचकों ने उन्हें असमीया साहित्य के ‘सब्यसाली’ लेखक कहा!

लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ के पिता का नाम दीननाथ बेजबरुआ था। दीननाथ डेपुटि कलेटार की पदवी तक आगे बढ़े। सरकारी काम के लिए दीननाथ बेजबरुआ को नगाँव से बरपेटा आना पड़ा। रेल मोटर की असुबिधा थी, इसी कारण नौका से ही आना पड़ा। नौका के द्वारा आते समय आहतगुरि में लक्ष्मी पूर्णिमा में बेजबरुआ का जन्म हुआ था. लक्ष्मी पुर्णिमा के दिन जन्म होने के कारण उनका नाम ‘लक्ष्मीनाथ’ पड़ा।

शिवसागर सरकारी स्कूल में उन्होंने हाइ स्कुल की परीक्षा पास की। इसके बाद कोलकाता के सी. टी. कॉलेज में दाखिल हुए और वही से बी. ए. की उपाधि प्राप्त की। उसके बाद एम. ए और आइन पढ़ने लगे। पर पढ़ाइ पुरी होने से पहले ही वे व्यवसाय में लग गए। कुछ दिनों के बाद लक्ष्मीनाथ ने अकेले ही लकड़ियों की व्यवसाय करने लगे। पर बेजबरुआ का मन व्यवसाय से हट गया और असम तथा असमीया बाा की उन्नति के लिए लगे। कलकत्ता में रहकर ही भाषा साहित्य की उन्नति की। ठाकुर परिवार की कन्या प्रज्ञासुन्दरी के साथ उनका बिबाह हुआ।

कलकत्ते में रहते समय उन्होनें जोनाकी मुखपत्र और अ. भा. उ. सा. सभा की ज्यादा उन्नति की। 

बेजबरुआ की रचनाए अनेक है। नाटक, ‘लिटिकाइ’, ‘नोमल’, ‘पाचनि’, ‘जयमती’, ‘चक्रध्वज’ आदि।

इसके बाद गम्भीर ग्रंथ भी उन्होंने लिखा। संकलित तत्वकथा असमीया साहित्य के लिए एक महान देन है। देशवासी को जगना ही उनका उद्देश्य था। असम का जातीय संगीत उन्होंने लिखा- ‘ओ मोर आपोनार देश’। इससे उनका जीवन दर्शन प्रकाशित होता है। ‘बेजबरुआ ग्रंथावली’ भी असमीया साहित्य सभा की तरफ से निकाला गया।

सन १९३८ इ में उनका देहाबसान हुआ था। लोग उनकी कृतियो से रस पाते थे इसलिए उन्हें ‘रसराज’ बेरबरुआ भी कहा गया था। वे बास्तव में ‘साहित्यरथी’ थे। 

10. वार्षिक परीक्षा में प्रतम स्थान सहित उत्तीर्ण होने वाले सहपाठी को बधाइ देते हुए एक पत्र लिखो। 

उत्तर :  प्रिय सखी प्रिया

           २४-३ लोधी रोड 

दिल्ली ८-३-२०१५

सस्नेह नरस्कार

           अभी अभी तुम्हारा पत्र मिला कि तुम बार्षिक परीक्षा में उत्तीर्ण हो गयी हो, उत्तीर्ण ही नही प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हइ हो और विद्यालय में प्रथम आइ हो। इस शानदार खबर से मे बहुत आनन्दित हुइ हूँ. मेरी तरफ से तुम्हे हार्दिक बधाइ। मेरी इच्छा हो रही है कि में तुम्हे पेट भर मिठाइ खिलाऊँ। पर यह तो तभी हो सकता है जब तुम गोबाहाटी अआओ। में तुम्हारी लौटने की प्रतीक्षा कर रही हूँ। मेरा हृदय कहता है कि तुम उँची शिक्षा प्राप्त करोगी। तुम्हारा भविष्य बहुत उज्वल है।

एक बार फिर मेरी बधाइ स्वीकार करो।

तुम्हारी प्रिय सखी

स्नेहा

अथवा

अपने जन्मदिन पर अपने मित्र को निमन्त्रित करते हुए एक पत्र लिखो।

उत्तर : प्रिय मित्र पल्लव

            जोरहाट

दिनांक: २०-०४-२०१५

सप्रेम नमस्ते,

         में यहा पुरी तरह से स्वस्थ एवं आनन्दपूर्वक हुँ। आशा ही नहीं अपितु पूर्ण बिश्वास हा कि तुम सपरिबार प्रसन्न एवं स्वस्थ होगे। हमारा ग्रीष्मवकाश २ जुलाइ से शुरु होगा। मेरा जन्मदिन ५ जुलाई को है। इस बार में अपना जन्मदिन धुम-धाम से मनाउँगा। आशा करता हूँ तुमलोग परिवार सहित मेरे जन्मदिन पर जरूर आओगे। अगर तुमलेग नहीं आओगे तो मुझे बहुत खराब लगेगा। 

माताजी एवं पीताजी को सादर प्रणाम एवं ठोटों को ढेर सारा प्यार देना। आशा है, पधारकर मुझे कृतार्थ करोगे।

तुम्हारा मित्र

कनक 

11. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर दो :

‘मीठे वचनों से मित्रों की संख्या में बद्धि होती हैं तथा स्पष्ट और मिठे बचनों का सब ओर से स्वागत होता है। अनेक के साथ सनेहपूर्ण व्यवहार करो, किन्तु सलाह के लिए हजारों में से एक को अपना सलाहकार चुनो। यदि मित्र बनाना हो, तो पहले उसकी परीक्षा लो और उसका विश्वास करने में शीघ्रता न को, क्योंकि कोइ व्यक्ति अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए ही मित्रता करता है। वह संकट के दिनों में साथ नहीं देता। एक सच्चा मित्र तो जीवन की औषधि है. वह संकटकाल में शक्तिशाली रक्षक रहोता है।’ 

प्रश्नावली :

(क) मीठे वचनों का क्या प्रभाव पड़ता है ?

उत्तर : मीठे बचननों से मित्रों की संख्या वृद्धि कर देता है। स्पष्ट और मीठे वचनों का सब ओर से स्वागत होता है।

(ख) किसी को मित्र बनाने के लिए क्या करना अपेक्षित है ?

उत्तर : किसी को मित्र बनाने के लिए पहले उसकी परीक्षा लेनी चाहिए। उसको शीघ्र विशवास करना नहीं चाहिए।

(ग) दुष्ट मित्र कैसा होता है ?

उत्तर : दुष्ट मित्र अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए मित्रता करता है। वह संकट के दिनों में साथ नहीं निभाता है। 

(घ) सच्चे मित्र के क्या क्या लक्षण होते है ?

उत्तर : एक सच्चा मित्र जीवन की औपधि है। वह संकटकाल में शक्तिशाली रक्षक की भुमिका निभाता है।

12. निम्नलिखित में से किन्ही पाँच वाक्यों का हिन्दी में अनवाद करो :

(a) তাৰ উপস্থিত বুদ্ধি শলাগীবলগীয়া।

(b) কেঁচুৱাটি কেনে মমলগা !

(c) তুমি কি ভাবি আছা ? 

(d) সি অকল সাধুৱেই নহয়, বুধিয়কো।

(e) বস্তুৰ দাম বাঢ়িছে, খৰচ কমাবলৈ যত্ন কৰক। 

(f) কোনেও এইটো নুই কৰিব নোৱাৰে।

उत्तर : (a) उसकी उपस्थित बुद्धि प्रशंसनीय है।

(b) बच्छा कितना प्यारा है! 

(c) तुम क्या सोच रही हो ?

(d) वह सिर्फ अच्छा ही नही ज्ञानी भी है।

(e) महंगाई बढ़ रही है, खर्च कम करने की कोशिश करो।

(f) कोइ भी इसको मना नहीं कर सकता है।

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