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NCERT Class 8 Social Science Chapter 5 सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार और भारत की निर्वाचन प्रणाली
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सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार और भारत की निर्वाचन प्रणाली
Chapter: 5
| Part – 1: Samaj Ka Aadhyan: Bharat or Uske Aage |
महत्त्वपूर्ण प्रश्न:
1. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार क्या है?
उत्तर: सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का अर्थ है कि प्रत्येक वयस्क नागरिक को एक मत देने का अधिकार है और सभी मतों का समान मूल्य है। जाति, मत, नस्ल, धर्म, लिंग, शिक्षा, आय आदि का भेदभाव किए बिना 18 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक भारतीय नागरिक को मत देने का अधिकार है।
2. निर्वाचन प्रणाली क्या है?
उत्तर: निर्वाचन प्रणाली परस्पर जुड़े या परस्पर निर्भर तत्वों का एक ऐसा समूह है जो चुनाव संचालित करने और एक सामान्य उद्देश्य (नागरिकों को मत देने में सक्षम बनाना) को पूरा करने के लिए एक साथ कार्य करते हैं।
3. भारत की निर्वाचन प्रणाली कैसे कार्य करती है?
उत्तर: भारत में चुनाव का प्रबंधन एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय ‘भारत निर्वाचन आयोग’ (ECI) द्वारा किया जाता है। यह चुनाव का संचालन, मतदाता सूची का प्रबंधन और आदर्श आचार संहिता लागू करने का कार्य करता है। भारत में विभिन्न स्तरों पर चुनाव के लिए ‘जो सबसे आगे, वह जीता’ (First Past the Post) और ‘एकल संक्रमणीय मत प्रणाली’ (Single Transferable Vote) का उपयोग किया जाता है।
आइए पता लगाएँ:
1. भारत ने 1988 में मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी। चर्चा कीजिए कि क्या यह एक अच्छा निर्णय था।
उत्तर: हाँ, यह एक अच्छा निर्णय था क्योंकि इससे देश के युवाओं को चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिला। यह सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की भावना को और अधिक मजबूत करता है जहाँ 18 वर्ष से अधिक का हर नागरिक राष्ट्र के भविष्य निर्धारण में भाग ले सकता है।
आइए विचार करें:
1. आम जनता राष्ट्रपति के निर्वाचन में क्यों सम्मिलित नहीं होती है?
उत्तर: ऐसा इसलिए है क्योंकि इससे यह सुनिश्चित होता है कि केवल प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित प्रतिनिधि (विधायक और सांसद) ही राष्ट्रपति के निर्वाचन में मतदान करें। राष्ट्रपति पूरे देश का प्रतिनिधित्व करता है, और चुने गए प्रतिनिधियों द्वारा उनका चुनाव होने से यह सुनिश्चित होता है कि राष्ट्रपति जनता की इच्छा का ‘अप्रत्यक्ष किंतु सार्थक रूप से’ प्रतिनिधित्व करते हैं।
प्रश्न और क्रियाकलाप’:
1. एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार क्यों महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर: यह महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि देश में प्रत्येक व्यक्ति समान है और प्रत्येक व्यक्ति के विचार महत्त्वपूर्ण हैं। यह नागरिकों को अपना भविष्य निर्धारित करने की शक्ति देता है, नागरिक सहभागिता में वृद्धि करता है, और यह सुनिश्चित करता है कि निर्वाचित प्रतिनिधि हमेशा निर्वाचकों (जनता) के प्रति उत्तरदायी रहें।
2. ‘गुप्त मतदान’ का क्या अर्थ है? यह लोकतंत्र में क्यों महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर: ‘गुप्त मतदान’ का अर्थ है मतदान की एक ऐसी प्रक्रिया जिसमें कोई यह न जान पाए कि किसने अपना मत किसे दिया है। यह लोकतंत्र में इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इससे चुनाव प्रक्रिया गोपनीय और निष्पक्ष बनी रहती है, और मतदाता बिना किसी दबाव के स्वतंत्र रूप से वोट दे सकते हैं।
3. प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष चुनावों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर: प्रत्यक्ष चुनाव (Direct Election): लोकसभा, राज्य विधान सभाओं और स्थानीय निकायों (पंचायत/शहरी निकाय) के चुनाव, जहाँ मतदाता सीधे अपना प्रतिनिधि चुनते हैं।
अप्रत्यक्ष चुनाव (Indirect Election): राज्यसभा के सदस्यों, भारत के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनाव, जहाँ जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि (विधायक या सांसद) आगे मतदान करके इनका चुनाव करते हैं।
4. लोकसभा के सदस्यों का चुनाव, राज्यसभा के सदस्यों के चुनाव से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर: लोकसभा चुनाव: लोकसभा के सदस्यों (सांसदों) को नागरिकों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से ‘जो सबसे आगे, वह जीता’ प्रणाली का उपयोग करके चुना जाता है।
राज्यसभा चुनाव: राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है। राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित विधायक ‘एकल संक्रमणीय मत प्रणाली’ का उपयोग करके इन्हें चुनते हैं।
5. आपके विचार से मतपत्रों की तुलना में ई.वी.एम. (EVM) के क्या-क्या लाभ हैं?
उत्तर: ई.वी.एम. से मतदान प्रक्रिया आधुनिक, तीव्र और पारदर्शी हो जाती है। इसके साथ वी.वी.पी.ए.टी. (VVPAT) प्रणाली का उपयोग होता है जिससे मतदाता को एक पर्ची दिखती है और वह जान लेता है कि उसका वोट सही से दर्ज हो गया है। विवाद या त्रुटि की स्थिति में यह पर्ची सत्यापन और पुनः गणना के लिए एक बैकअप प्रमाण के रूप में कार्य करती है।
6. भारत के कुछ नगरीय क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत में कमी आ रही है। इस प्रवृत्ति के क्या कारण हो सकते हैं और अधिक लोगों को मतदान हेतु प्रोत्साहित करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
उत्तर: मतदान में कमी का मुख्य कारण मतदाताओं की उदासीनता है (विशेषकर शहरी क्षेत्रों में)। लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए शिक्षा, मीडिया और जागरूकता अभियानों के माध्यम से मतदाताओं (विशेषकर युवाओं) को यह समझाना आवश्यक है कि सोच-समझकर मतदान करना क्यों महत्त्वपूर्ण है।
7. आपके विचार में लोकसभा की कुछ सीटें अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित क्यों होती हैं? एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: लोकसभा में 84 सीटें अनुसूचित जाति (SC) और 47 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित की गई हैं। स्रोत में सीधे तौर पर कारण नहीं लिखा है, लेकिन इसका उद्देश्य लोकतंत्र में समाज के हर वर्ग (विशेषकर पिछड़े और जनजातीय समुदायों) को संसद में उचित प्रतिनिधित्व देना है ताकि शासन प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
8. सोशल मीडिया हमारे चुनावी अनुभव के तरीके को बदल रहा है — आकर्षक प्रचार रीलों और लाइव भाषणों से लेकर इंस्टाग्राम और ट्विटर पर राजनीतिक वाद-विवाद तक। क्या यह लोकतंत्र को सशक्त बना रहा है या इसे उलझा रहा है?
उत्तर: सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव लोकतंत्र के लिए एक चुनौती भी है और एक अवसर भी। आगे बढ़ने का मार्ग मतदाताओं को सही जानकारी से सशक्त करने में निहित है। मीडिया और जागरूकता अभियानों के माध्यम से यदि मतदाताओं को सही जानकारी मिले, तो यह लोकतंत्र को सशक्त बनाएगा, क्योंकि एक जागरूक और सतर्क मतदाता ही लोकतांत्रिक प्रणाली की सबसे शक्तिशाली सुरक्षा है।
9. वेबसाइट https://www.indiavotes.com पर जाएँ और किसी भी वर्ष के एक निर्वाचन संसदीय चुनाव क्षेत्र के परिणामों का अध्ययन करें। अपने राज्य के किसी विधान सभा चुनाव का भी इसी प्रकार अध्ययन करें।
उत्तर: विद्यार्थी स्वयं करें।
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