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NCERT Class 11 Business Studies Important Chapter 11 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
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अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
Chapter: 11
| भाग – 2: व्यावसायिक संगठन, वित्त एवं व्यापारर |
| IMPORTANT QUESTION ANSWER |
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में ‘अदृश्य व्यापार’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: जब दो देशों के बीच पर्यटन, परिवहन, बैंकिंग, बीमा और संचार जैसी सेवाओं का आयात-निर्यात होता है, तो इसे अदृश्य व्यापार कहते हैं क्योंकि ये सेवाएँ अमूर्त (जिन्हें छुआ नहीं जा सकता) होती हैं।
2. ठेका उत्पादन को अन्य किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर: ठेका उत्पादन को बाह्यस्रोतीकरण के नाम से भी जाना जाता है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय कंपनी स्थानीय उत्पादकों से अपने उत्पादों या घटकों का निर्माण करवाती है।
3. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) क्या है?
उत्तर: जब कोई कंपनी किसी विदेशी देश में वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन और विपणन के लिए संयंत्र एवं मशीनों जैसी परिसंपत्तियों में सीधे पूंजी निवेश करती है और संचालन पर पूरा नियंत्रण रखती है, तो उसे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश कहते हैं।
4. पोर्टफोलियो निवेश से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: यह एक कंपनी द्वारा दूसरी कंपनी के शेयर, बांड, बिल या नोट खरीदकर या ऋण के रूप में किया गया निवेश है। इसमें निवेशक का विदेशी व्यवसाय के उत्पादन एवं विपणन संचालन पर कोई नियंत्रण नहीं होता।
5. लाइसेंसिंग और फ्रेंचाइज़िंग में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर: लाइसेंसिंग का प्रयोग मुख्यतः वस्तुओं के उत्पादन एवं विक्रय (जैसे ट्रेडमार्क या पेटेंट) के लिए किया जाता है, जबकि फ्रेंचाइज़िंग का प्रयोग सेवाओं (जैसे फास्ट फूड रेस्टोरेंट) के संदर्भ में किया जाता है।
6. संयुक्त उपक्रम किसे कहते हैं?
उत्तर: जब दो या दो से अधिक स्वतंत्र व्यावसायिक इकाइयां मिलकर एक लंबी अवधि के लिए साझे स्वामित्व में किसी कंपनी की स्थापना करती हैं, तो उसे संयुक्त उपक्रम कहते हैं।
7. अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय में ‘हरित क्षेत्र उपक्रम’ क्या है?
उत्तर: जब कोई जनक कंपनी विदेशों में अपना परिचालन प्रारंभ करने के लिए एक बिल्कुल ही नई पूर्ण-स्वामित्व वाली (100% निवेश) सहायक कंपनी स्थापित करती है, तो उसे ‘हरित क्षेत्र उपक्रम’ कहा जाता है।
8. आयात-निर्यात कोड (IEC) संख्या कौन जारी करता है?
उत्तर: आयात-निर्यात कोड (IEC) संख्या विदेश व्यापार महानिदेशक (DGFT) या क्षेत्रीय आयात-निर्यात लाइसेंसिंग प्राधिकारी द्वारा जारी की जाती है, जो कि निर्यातकों के लिए आवश्यक होती है।
9. उद्गम प्रमाण-पत्र (Certificate of Origin) क्या प्रमाणित करता है?
उत्तर: यह प्रमाण-पत्र प्रमाणित करता है कि निर्यात की जा रही वस्तुओं का उत्पादन वास्तव में उसी देश में हुआ है जहाँ से उन्हें निर्यात किया जा रहा है। इसके आधार पर आयातक को सीमा शुल्क में छूट मिल सकती है।
10. मेट्स रसीद कौन जारी करता है?
उत्तर: जहाज पर माल लदने के पश्चात् जहाज का कप्तान या अधिकारी (Mate) निर्यातक को मेट्स रसीद जारी करता है, जिसमें माल की स्थिति और पैकेजों का विवरण होता है।
11. विनिमय विपत्र कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में प्रलेखीय विनिमय विपत्र मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं: दर्शन विपत्र (Sight draft) और मुद्दती विपत्र।
12. जहाजी बिल्टी (Bill of Lading) क्या है?
उत्तर: यह जहाजी कंपनी द्वारा जारी की गई एक रसीद है जो यह प्रमाणित करती है कि कंपनी ने माल को गंतव्य बंदरगाह तक ले जाने के लिए स्वीकार कर लिया है। यह माल पर मालिकाना हक का प्रलेख भी है।
13. ई.सी.जी.सी. का पूरा नाम क्या है और इसका कार्य क्या है?
उत्तर: इसका पूरा नाम ‘निर्यात साख एवं गारंटी निगम’ है, जो निर्यातकों को विदेशी खरीदारों से भुगतान न मिलने के कारण होने वाले वाणिज्यिक और राजनीतिक जोखिमों के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करता है।
14. डॉक चालान क्या होता है?
उत्तर: बंदरगाह पर आयातित माल को छुड़ाने के लिए जब आयातक या उसका एजेंट डॉक व्यय (गोदी शुल्क) का भुगतान करते समय जो फॉर्म भरता है, उसे डॉक चालान कहते हैं।
15. प्रलेखीय विनिमय विपत्र क्या है?
उत्तर: जब विनिमय विपत्र के साथ माल से संबंधित अन्य आवश्यक प्रलेख (जैसे वाणिज्यिक बीजक, जहाजी बिल्टी, पैकिंग सूची आदि) संलग्न करके बैंक के माध्यम से भेजे जाते हैं, तो उसे प्रलेखीय विनिमय विपत्र कहते हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय के अंतर्गत ‘लाइसेंसिंग’ और ‘फ्रेंचाइज़िंग’ के लाभों और सीमाओं की विवेचना कीजिए?
उत्तर: लाभ: यह विदेशी व्यापार में प्रवेश का एक सरल माध्यम है जिसमें न अधिक जोखिम है और न ही अधिक निवेश की आवश्यकता। अनुज्ञप्तिदाता को अपनी पूंजी नहीं लगानी पड़ती और उसे रॉयल्टी के रूप में आय होती रहती है। विदेशी बाजार का प्रबंधन स्थानीय व्यक्ति (लाइसेंसधारक) करता है, जिससे बाज़ार की अच्छी समझ मिलती है और सरकारी अधिग्रहण का जोखिम कम होता है।
सीमाएं: लाइसेंसधारक भविष्य में व्यापार के तरीके सीखकर समान उत्पाद बनाकर प्रतियोगी बन सकता है। व्यापारिक रहस्य उजागर होने का खतरा रहता है। इसके अलावा, रॉयल्टी के भुगतान और उत्पाद की गुणवत्ता मानकों को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हो सकता है।
2. संयुक्त उपक्रम स्थापित करने के क्या-क्या तरीके हैं और इसके प्रमुख लाभ क्या हैं?
उत्तर: संयुक्त उपक्रम तीन तरह से स्थापित हो सकता है:
(i) विदेशी निवेशक द्वारा स्थानीय कंपनी में हिस्सेदारी खरीदना।
(ii) स्थानीय फर्म द्वारा किसी स्थापित विदेशी कंपनी में हिस्सा प्राप्त करना।
(iii) विदेशी और स्थानीय उद्यमी दोनों मिलकर एक नए उद्यम की स्थापना करें।
प्रमुख लाभ: संयुक्त उपक्रम में विदेशी और स्थानीय दोनों साझेदार अपनी पूँजी लगाते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय फर्म पर वित्तीय भार कम पड़ता है। विदेशी कंपनी को स्थानीय भागीदार के माध्यम से वहाँ की संस्कृति, भाषा, राजनीतिक प्रणाली और बाज़ार की जानकारी मिल जाती है। इसके माध्यम से जोखिम और लागत दोनों का बँटवारा हो जाता है।
3. निर्यात व्यापार में भुगतान सुरक्षित करने और जोखिम कम करने के लिए कौन-कौन से मुख्य प्रलेख और उपाय अपनाए जाते हैं?
उत्तर: निर्यात व्यापार में भुगतान सुनिश्चित करने और जोखिम को कम करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जाते हैं:
(i) साख पत्र (Letter of Credit): निर्यातक, आयातक से साख पत्र की मांग करता है। यह आयातक के बैंक द्वारा जारी गारंटी है जो सुनिश्चित करती है कि निर्यात बिलों का भुगतान अवश्य किया जाएगा।
(ii) ई.सी.जी.सी. (ECGC) में पंजीकरण: निर्यातक भुगतान न मिलने के वाणिज्यिक और राजनीतिक जोखिमों से सुरक्षा के लिए निर्यात साख एवं गारंटी निगम के पास पंजीकरण कराता है।
(iii) समुद्री बीमा पॉलिसी: माल को समुद्री रास्ते में होने वाले नुकसान, टूट-फूट या खो जाने के जोखिम से बचाने के लिए निर्यातक बीमा कंपनी से माल का बीमा करवाता है।
(iv) विनिमय विपत्र: भुगतान प्राप्त करने के लिए विनिमय विपत्र (दर्शन या मुद्दती) भेजा जाता है, जिसे स्वीकार करने पर ही आयातक को माल छुड़ाने के प्रलेख सौंपे जाते हैं।
4. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में वस्तुओं के आयात के लिए विदेशी मुद्रा का प्रबंध और साख पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया समझाइए?
उत्तर: (i) विदेशी मुद्रा का प्रबंध: भारत में विदेशी मुद्रा के सभी लेन-देन भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा नियंत्रित होते हैं। आयात के लिए भुगतान विदेशी मुद्रा में करना होता है। इसके लिए आयातक को RBI द्वारा अधिकृत बैंक में आयात लाइसेंस के साथ आवेदन करना होता है। बैंक विनिमय नियंत्रण नियमों की जांच करने के बाद आयात सौदे के लिए आवश्यक विदेशी मुद्रा जारी करने का अनुमोदन कर देता है।
(ii) साख पत्र प्राप्त करना: विदेशी मुद्रा की व्यवस्था हो जाने के बाद, भुगतान की शर्तों के अनुसार आयातक अपने बैंक से एक साख पत्र जारी करवाता है। यह साख पत्र निर्यातक के बैंक को भेजा जाता है, जो निर्यातक को आश्वस्त करता है कि उसके माल का भुगतान सुरक्षित है और समय पर कर दिया जाएगा।
5. निर्यातकों को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार द्वारा ‘उत्पादन शुल्क की निकासी’ और ‘शुल्क वापसी की क्या व्यवस्था है?
उत्तर: केन्द्रीय उत्पादन शुल्क अधिनियम के तहत निर्यात की जाने वाली वस्तुओं के निर्माण में प्रयुक्त माल पर उत्पादन शुल्क लगता है। इसके लिए निर्यातक को क्षेत्रीय उत्पादन शुल्क कमिश्नर को आवेदन करना होता है। यदि कमिश्नर संतुष्ट हो जाता है, तो वह उत्पादन शुल्क में छूट का प्रमाण-पत्र दे देता है।
इसके अतिरिक्त, यदि माल का उत्पादन विशेष रूप से निर्यात के लिए ही किया गया है, तो सरकार ऐसे उत्पादों को विश्व बाजार में अधिक प्रतियोगी बनाने के लिए उत्पादन शुल्क से पूरी तरह छूट दे देती है या भुगतान किए गए शुल्क को लौटा देती है। लौटाई गई इस राशि को ही ‘शुल्क वापसी (Duty Drawback)’ कहा जाता है। इसका प्रशासन वित्त मंत्रालय के अधीन काम करने वाला शुल्क वापसी निदेशालय करता है।


